✦ High Court of India · 20 Nov 2025

Ambar Lal v. Rambaran), under Section

Case Details High Court of India · 20 Nov 2025
Court
High Court of India
Decided
20 Nov 2025
Length
4,265 words

Cited in this judgment

3. Petitioner has also challenged the order dated 25.07.2025 passed by the learned Additional District and Sessions Judge, Court NO. 1, Barabanki (in short 'Revisional Court') passed in Criminal Revision No. 07 of 2024 under Sections 397/399 CrPC. Relevant portion of the order dated 25.07.2025 reads as under:- "6. िव(cid:497)ान अवर (cid:281)यायालय उपिजला मिज(cid:293)(cid:342)ेट रामसनेहीघाट, बाराबंकी (cid:497)ारा िनण(cid:259)य म(cid:517) िदये गये आधारो पर अपना िनण(cid:259)य इस (cid:352)कार िन(cid:292)किषत िकया गया है िक- "प(cid:347)ावली पर प(cid:87)(cid:523) (cid:497)ारा अिभिलिखत कराये गये बयान मा० (cid:352)वर (cid:281)यायालय(cid:523) (cid:497)ारा पािरत िनण(cid:259)यादेश(cid:523) की छाया (cid:352)ित थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 520.02.1994 व 22.02.1995 व नायब तहसीलदार (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.2018 सिहत स(cid:286)पूण(cid:259) प(cid:347)ावली का भली भांित अनुशीलन िकया गया। (cid:352)थम प(cid:87) (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत सा(cid:296)य व िदये गये शपथपूव(cid:259)क बयान म(cid:517) िववािदत भूिम व उस पर लगे नीम के पे(cid:237) को उनके पूव(cid:259)जो का होना तथा पूव(cid:259)ज(cid:523) की मृ(cid:277)यु प(cid:499)ात अपना क(cid:284)जा व दखल होना कहा गया है। वह(cid:514) ि(cid:497)तीय प(cid:87) की ओर से पूव(cid:259) म(cid:517) अिभिलिखत कराये गये अपने शपथ पूव(cid:259)क बयान म(cid:517) (cid:352)(cid:291)नगत भूिम व नीम के पे(cid:237) को अपने पािरवािरक भूिम होना कहा गया है िजस पर मेरी चरही नांदे बनी है तथा छ(cid:282)पर रखा जाता है। िववािदत भूिम पर लगे नीम के पे(cid:237) के स(cid:286)ब(cid:281)ध म(cid:517) कहा गया है िक वह मेरे दरवाजे पर लगा है। थाना(cid:280)य दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 20.02.1994 म(cid:517) इस बात का उ(cid:289)लेख िकया गया है िक िववािदत जमीन िवप(cid:87)ी के मकान व सहन के दि(cid:87)ण है िजस पर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा होना पाया गया है। िववािदत जमीन पर एक नीम का पे(cid:237), चरही, म(cid:237)हा जानवरो का बना है। िजसपर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा बताया गया है। आवेदक का कहना गलत है िक िववािदत जमीन पर िवप(cid:87)ी का क(cid:284)जा नह(cid:514) है जबिक स(cid:277)य यह है िक िवप(cid:87)ी पहले से ही उस जमीन पर कािबज है। पुन(cid:499) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.1995 म(cid:517) यह उ(cid:289)लेख है िक िववािदत जमीन िजसका िववाद अ(cid:286)बर लाल व रामबरन के म(cid:280)य चल रहा है। 3 A227 No. 6742 of 2025 िजसकी मौके जांच बाद पाया गया िक िववािदत भूिम पर 02 नांदे जो (cid:352)चिलत है वह रामबरन की बनी (cid:631)ई है इसके अितिर(cid:472) क(cid:281)डे का ढेर भी रामबरन का लगा (cid:631)आ है। एक पे(cid:237) भी नीम का मौजूद है िजसका िववाद उभय प(cid:87)(cid:523) के म(cid:280)य चल रहा है िजसको लेकर उभय प(cid:87)ो के म(cid:280)य िदनांक 02.10.1994 को मारपीट हो चुकी है। िजसका थाना (cid:293)थानीय पर उभय प(cid:87)ो के िव(cid:628)(cid:490) धारा 323, 504 का अिभयोग पंजीकृ त होकर आरोप प(cid:347) (cid:281)यायालय पर (cid:352)ेिषत िकया गया है। वह(cid:514) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत उ(cid:472) आ(cid:263)या के िव(cid:627)(cid:490) (cid:352)थम प(cid:87) (cid:497)ारा आपि(cid:485) (cid:352)(cid:293)तुत करके यह कथन िदया गया है पुिलस (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या मनग(cid:238)(cid:281)त सािजश व िवप(cid:87)ी को िववािदत भूिम व उस पर लगे नीम के पे(cid:237) पर क(cid:284)जा कराने के िलए (cid:352)(cid:293)तुत की गई है। थाना दिरयाबाद की पुिलस व िवप(cid:87)ीगण की िमली भगत है। नायब तहसीलदार (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.2018 म(cid:517) उ(cid:289)लेख है िक (cid:352)करण (cid:361)ेणी 6(2) के पुरानी आबादी के अ(cid:281)दर का है। िवप(cid:87)ीगण (cid:497)ारा िदनांक 10 फरवरी 2018 को दीवार का िनमा(cid:259)ण कर टीन सेट रख िलया गया है। (cid:293)थानीय पुिलस (cid:497)ारा दोन(cid:523) प(cid:87)ो के म(cid:280)य आपसी समझौता कराया गया िक िववािदत (cid:293)थल पर िबना िकसी स(cid:87)म (cid:281)यायालय के आदेश के कोई नया िनमा(cid:259)ण न िकया जाय। उपरो(cid:472) त(cid:278)य(cid:523) के आधार पर यह (cid:293)प(cid:504) है िक िववािदत भूिम व उस पर लगा नीम का पे(cid:237) आबादी के अ(cid:281)दर ि(cid:293)थत है। िजसके (cid:293)वािम(cid:277)व को लेकर उभय प(cid:87)(cid:523) के म(cid:280)य िववाद है। (cid:281)यायालय पर दं०(cid:352)०सं० धारा-145 के तहत (cid:352)चिलत काय(cid:259)वाही के तहत आबादी की भूिम व उस पर लगे नीम का पेड का (cid:293)वािम(cid:277)व का िनधा(cid:259)रण िकया जाना िविधक नह(cid:514) (cid:352)तीत होता है। उभय प(cid:87) (cid:293)वािम(cid:277)व का िनधा(cid:259)रण स(cid:87)म (cid:281)यायालय म(cid:517) वाद योिजत कर करा सकते ह(cid:520), चू ंिक यह (cid:352)करण अ(cid:277)यिधक समय से लि(cid:286)बत है अब अ(cid:334)ेतर काय(cid:259)वाही का औिच(cid:277)य नह(cid:514) (cid:352)तीत होता है। अतः धारा-145 दं०(cid:352)०सं० के तहत (cid:352)चिलत काय(cid:259)वाही समा(cid:282)त िकये जाने यो(cid:264)य है। आदेश (cid:281)यायालय पर (cid:352)चिलत वाद अ(cid:281)तग(cid:259)त धारा-145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही समा(cid:282)त की जाती है। आदेश की (cid:352)ित (cid:352)भारी िनरी(cid:87)क दिरयाबाद को इस िनद(cid:518)श के साथ (cid:352)ेिषत की जाती है िक िववािदत (cid:293)थल पर शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था बनाये रखने हेतु िनरंतर सतक(cid:259) (cid:623)ि(cid:504) बनाये रख(cid:517)। बाद आव(cid:291)यक काय(cid:259)वाही दािखल द(cid:283)तर की जाय। उपिजला मिज(cid:293)(cid:342)ेट रामसनेहीघाट, बाराबंकी। "

7. उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य िदनांिकत 17.10.2023 के अवलोकन से यह (cid:293)प(cid:504) है िक उ(cid:472) िनण(cid:259)य िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बरलाल वमा(cid:259) के (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) िदनांिकत 18.10.1993 एवं उसपर िवप(cid:87)ी की ओर से (cid:352)(cid:293)तुत आपि(cid:485) िदनांक 04.07.1994 पर पािरत िकया गया है। इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) है िक आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य एवं आदेश (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) (cid:352)(cid:293)तुत िकये जाने के लगभग 30 वष(cid:259) प(cid:499)ात पािरत िकया गया है एवं उ(cid:472) आदेश के जिरये अवर (cid:281)यायालय पर (cid:352)चिलत वाद अ(cid:281)तग(cid:259)त धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही समा(cid:282)त की गयी है। इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) है िक उ(cid:472) (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) पर पािरत आदेश के जिरये लगभग 30 वष(cid:259) तक शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था भंग होने की आशंका बनी रही। इस संदभ(cid:259) म(cid:517) िनण(cid:259)य के अवलोकन से ही (cid:293)प(cid:504) है िक उभय प(cid:87) के म(cid:280)य िववािदत पे(cid:237) व भूिम से संबंिधत मुकदमे आपरािधक (cid:281)यायालय एवं चकबंदी (cid:281)यायालय, साथ ही साथ उ(cid:472) पे(cid:237) को लेकर दीवानी (cid:281)यायालय म(cid:517) भी अ(cid:286)बरलाल (cid:497)ारा वाद दायर करना कहा गया है।

8. (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) यह उ(cid:289)लेखनीय है, जैसा िक िवप(cid:87)ी के िव(cid:497)ान अिधव(cid:472)ा (cid:497)ारा तक(cid:259) भी (cid:352)(cid:293)तुत करते (cid:631)ये कहा गया है, िक (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) ही िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बर लाल (cid:497)ारा एक िनगरानी िदनांक 21.10.1996 को एवं (cid:622)सरी िनगरानी िदनांक 23.02.1999 को दािखल की गयी थी, िजसे िक संबंिधत स(cid:347) (cid:281)यायालय (cid:497)ारा िदनांक 20.03.2013 व 13.11.2003 को िनर(cid:293)त िकया गया। अवर (cid:281)यायालय की प(cid:347)ावली के अवलोकन से सबंिधत स(cid:347) (cid:281)यायालय (cid:497)ारा, आपरािधक िनगरानी सं(cid:263)या 105/2003, अ(cid:286)बर लाल वमा(cid:259) बनाम रामबरन आिद के मामले म(cid:517) वाद सं(cid:263)या 01/1999 धारा 145 दं०(cid:352)०सं० म(cid:517) पािरत आदेश िदनांिकत 20.02.2003 के संदभ(cid:259) म(cid:517), िनगरानीकता(cid:259) अ(cid:286)बरलाल वमा(cid:259) (cid:497)ारा योिजत िनगरानी िदनांक 13.11.2003 को िनर(cid:293)त की गयी। उ(cid:472) िनगरानी म(cid:517) भी नीम के पे(cid:237) व जानवरो के चारा के िलये लगी नांद से संबंिधत भूिम का ही िववाद था। इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) है िक ह(cid:293)तगत िनगरानी से संबंिधत वाद एवं दो अ(cid:281)य िनगरािनय(cid:523) से संबंिधत वाद के आधार पर (cid:352)ाथ(cid:515) शाि(cid:281)त भंग होने की संभावना के आधार पर लगातार िविभ(cid:281)न वाद अ(cid:281)तग(cid:259)त धारा 145 द०(cid:352)०सं०, 30 वष(cid:525) के दौरान (cid:352)(cid:293)तुत करता रहा, जबिक वादी (cid:497)ारा अपने (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) म(cid:517) (cid:352)(cid:291)नगत नीम का पे(cid:237) एवं संबंिधत भूिम को (cid:293)वयं के पुरखो (cid:497)ारा (cid:352)ा(cid:282)त िकया जाना कहा गया है। अतः उ(cid:472) 30 वष(cid:525) की अविध के दौरान िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बरलाल वमा(cid:259) को यह (cid:352)(cid:277)येक अवसर (cid:352)ा(cid:282)त था िक वह (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485)य(cid:523) के स(cid:281)दभ(cid:259) म(cid:517) अपने (cid:293)व(cid:277)व व अिधकार को सािबत करने अथवा उसकी उ(cid:488)ोषणा के संदभ(cid:259) म(cid:517) िविध अनुसार 'िसिवल सूट' िसिवल (cid:281)यायालय म(cid:517) (cid:352)(cid:293)तुत करके (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) म(cid:517) किथत अपने (cid:293)व(cid:277)व व क(cid:284)जे को िनण(cid:515)त करा लेवे, िक(cid:281)तु िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) (cid:497)ारा इस िनगरानी (cid:281)यायालय के सम(cid:87) ऐसे िकसी िसिवल वाद के जिरये (cid:293)व(cid:277)व व क(cid:284)जे के बाबत अंितम अनुतोष (cid:352)ा(cid:282)त करने के संबंध म(cid:517), सं(cid:88)ान म(cid:517) नह(cid:514) लाया गया है। हालांिक िव(cid:497)ान िवचारण (cid:281)यायालय (cid:497)ारा अपने िनण(cid:259)य म(cid:517) इस बात का उ(cid:289)लेख अव(cid:291)य िकया गया है िक, (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बर लाल (cid:497)ारा एक दीवानी वाद भी दािखल िकया गया था। 4 A227 No. 6742 of 2025 अतः दीवानी (cid:281)यायालय ही वह (cid:281)यायालय है जो िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बरलाल (cid:497)ारा किथत (cid:352)(cid:291)नगत नीम के पे(cid:237) व उ(cid:472) भूिम के बाबत उसके (cid:293)व(cid:277)व व क(cid:284)जे को िनण(cid:515)त कर इस िववाद को अंितम (cid:628)प दे सके ।

9.1 इस (cid:352)कार उ(cid:472) सम(cid:293)त सा(cid:296)य(cid:523) से यह (cid:293)प(cid:504) होता है िक िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बर लाल धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की िविभ(cid:281)न (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347)(cid:523) के जिरये (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) शाि(cid:281)त भग की आशंका के आधार पर धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के िविभ(cid:281)न (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) (cid:352)(cid:293)तुत करके मामले के मूल िववाद को अनाव(cid:291)यक (cid:628)प से लंिबत रखना चाहता है, जबिक उसके पास 30 वष(cid:525) की ल(cid:286)बी अविध म(cid:517) यह (cid:352)(cid:277)येक अवसर (cid:352)ा(cid:282)त था िक वह (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) अपने (cid:293)वािम(cid:277)व व क(cid:284)जे को िसिवल वाद के जिरये िनण(cid:515)त करा सके ।

9.2 यहां यह उ(cid:289)लेख िकया जाना भी समीचीन होगा िक, धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के तहत की जाने वाली काय(cid:259)वाही एक 'िनवारक उपचार' है ना िक िसिवल वाद के िनण(cid:259)य की भांित 'िनणा(cid:259)यक उपचार' धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त काय(cid:259)वाही एक फौरी तौर पर िनवारा(cid:277)मक काय(cid:259)वाही है, िजससे िकसी स(cid:286)पि(cid:485) के िववाद को लेकर शाि(cid:281)त भग की आशंका को िनवािरत िकया जा सके । (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) लगातार 30 वष(cid:525) तक शाि(cid:281)त भंग की आशंका (cid:293)वयं म(cid:517) एक ऐसी पिरि(cid:293)थित है, जो उभय प(cid:87) के म(cid:280)य अनवरत शाि(cid:281)तभंग को िव(cid:495)मान रखेगी, यह ना तो धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के िविधक उपबंधो की मंशा है और ना ही िवधाियका की मंशा है िक धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की लगातार काय(cid:259)वािहय(cid:523) के जिरये एक प(cid:87) (cid:622)सरे प(cid:87) को शाि(cid:281)त भंग के िलए (cid:352)कोिपत करता रहे; जबिक (cid:352)थम प(cid:87) (cid:497)ारा (cid:293)वयं को (cid:352)(cid:291)नगत भूिम का (cid:293)वामी एवं क(cid:284)जाधारी 30 वष(cid:525) से कहा जा रहा हो एवं इस संदभ(cid:259) म(cid:517) उसके (cid:497)ारा अंितम उपचारा(cid:277)मक अनुतोष, जोिक िसिवल (cid:281)यायालय से (cid:352)ा(cid:282)त िकया जा सकता है, वह ना (cid:352)ा(cid:282)त िकया जा रहा हो।

9.3 अतः ऐसी ि(cid:293)थित म(cid:517) (cid:352)ाथ(cid:515) (cid:497)ारा (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) जोिक आबादी के अ(cid:281)दर ि(cid:293)थत नीम का पे(cid:237) एवं आबादी की भूिम है, िजसके िक संदभ(cid:259) म(cid:517) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा यह आ(cid:263)या िदनांिकत 20.02.1994 को (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है िक "िववािदत जमीन िवप(cid:87)ी के मकान व सहन के दि(cid:87)ण है िजसपर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा होना पाया गया। िववािदत जमीन पर एक नीम का पे(cid:237), चरही, म(cid:237)हा, जानवर(cid:523) का बना है िजसपर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा बताया गया है। आवेदक का कहना गलत है िक िववािदत जमीन पर िवप(cid:87)ी का क(cid:284)जा नह(cid:514) है जबिक स(cid:277)य यह है िक िवप(cid:87)ी पहले से ही उस जमीन पर कािबज है।" पुन(cid:499) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.1995 म(cid:517) यह उ(cid:289)लेख है िक, "िववािदत जमीन िजसका िववाद अ(cid:286)बर लाल व रामबरन के म(cid:280)य चल रहा है, िजसकी मौके पर जांच बाद पाया गया िक िववािदत भूिम पर 02 नांदे जो (cid:352)चिलत है वह रामबरन की बनी (cid:631)ई है इसके अितिर(cid:472) क(cid:281)डे का ढेर भी रामबरन का लगा (cid:631)आ है। एक पे(cid:237) भी नीम का मौजूद है िजसका िववाद उभय प(cid:87)(cid:523) के म(cid:280)य चल रहा है िजसको लेकर उभय प(cid:87)ो के म(cid:280)य िदनांक 02.10.1994 को मारपीट हो चुकी है। िजसका थाना (cid:293)थानीय पर उभय प(cid:87)ो के िव(cid:628)(cid:490) धारा 323, 504 का अिभयोग पंजीकृ त होकर आरोप प(cid:347) (cid:281)यायालय पर (cid:352)ेिषत िकया गया है।"

9.4 (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) (cid:352)थम प(cid:87) अ(cid:286)बर लाल ने िवचारण (cid:281)यायालय के सम(cid:87) अपने सशपथ बयान म(cid:517) यह भी कहा गया है िक "जो दीवानी (cid:281)यायालय का मुकदमा चल रहे है, वह उसम(cid:517) (cid:352)थम प(cid:87) है।"

10.1 (cid:352)(cid:293)तुत िनगरानी के संदभ(cid:259) म(cid:517) अमरेश ितवारी बनाम लालता (cid:352)साद (cid:622)बे (2000) 4 एससीसी 440 के मामले म(cid:517) माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय की 3 (cid:281)यायमूत(cid:515)गण की पीठ (cid:497)ारा पािरत िविध (cid:498)व(cid:293)था को (cid:623)ि(cid:504)गत रखना होगा,िजसम(cid:517) Ram Sumer Puri Mahant V. State of U.P. and others (1985) 1 SCC 427 के मामले म(cid:517) माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय (cid:497)ारा पूव(cid:259) म(cid:517) दी गयी िविध (cid:498)व(cid:293)था का हवाला देते (cid:631)ये यह (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक, 'जहां स(cid:87)म दीवानी (cid:281)यायालय म(cid:517) वाद(cid:334)(cid:293)त स(cid:286)पि(cid:485) के क(cid:284)जे अथवा उसके (cid:293)व(cid:277)व की उ(cid:488)ोषणा के संदभ(cid:259) म(cid:517) वाद दायर िकया जा चुका हो, तो ऐसी ि(cid:293)थित म(cid:517) धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त काय(cid:259)वाही अ(cid:334)सािरत नह(cid:514) होना चािहये,' िक(cid:281)तु िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय (cid:497)ारा, (cid:352)काशच(cid:281)(cid:349) सचदेव बनाम (cid:293)टेट आिद एआईआर 1994 सु(cid:352)ीमकोट(cid:259) 1436 के मामले म(cid:517) दी गयी िविध (cid:498)व(cid:293)था (cid:352)(cid:293)तुत की गयी, िजसम(cid:517) माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय (cid:497)ारा यह भी (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक 'जहां िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा िदये गये यथाि(cid:293)थित का आदेश उभय प(cid:87) के म(cid:280)य शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था बनाये रखने हेतु पया(cid:259)(cid:282)त नह(cid:514) है, अथवा जहां िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा क(cid:284)जे के िब(cid:281)(cid:621) को समुिचत (cid:628)प से (cid:498)व(cid:633)त नह(cid:514) िकया गया है, वहां धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त संबंिधत मिज(cid:293)(cid:342)ेट को काय(cid:259)वाही करने का अिधकार (cid:352)ा(cid:282)त है।' इसी िब(cid:281)(cid:621) पर िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय इलाहाबाद की अ(cid:495)तन (cid:498)व(cid:293)था IRFAN ALI V. STATE OF U.P. and others [2024(127)ACC596] का भी हवाला िदया गया है, िजसम(cid:517) यह (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक, 'जहां िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा कोई अंतिरम आदेश पािरत नह(cid:514) िकया गया हो अथवा के वल यथाि(cid:293)थित बनाये रखने का आदेश पािरत िकया गया हो, वहां धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त काय(cid:259)वाही अ(cid:334)सािरत की जा सकती है।'

10.2 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय, इलाहाबाद की एक अ(cid:281)य (cid:498)व(cid:293)था, Bharwal Prasad Vs. IlAddl.District and Session Judge Sihdharthnagar, RR 1985 Page 55 (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है। उ(cid:472) िनण(cid:259)य म(cid:517) माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय (cid:497)ारा यह (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक 'धारा 145 (1) दं०(cid:352)०सं० के मामले म(cid:517) पुिलस िरपोट(cid:259) का उ(cid:489)े(cid:291)य यह है िक (cid:262)या (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) शाि(cid:281)त भंग होने की संभावना िव(cid:495)मान है। यह पुिलस िरपोट(cid:259) िकसी (cid:498)ि(cid:472) के क(cid:284)जे की जांच के संदभ(cid:259) म(cid:517) नह(cid:514) होती (cid:262)य(cid:523)िक इस हेतु प(cid:87)कार को अपने सा(cid:296)य के जिरये अपने क(cid:284)जे को सािबत करना होता है। मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया। 5 A227 No. 6742 of 2025

10.3 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ की (cid:498)व(cid:293)था, SATYA NARAIN V. STATE OF U.P.(ALLAHABAD HIGHCOURT) 1997 (35) इस िब(cid:281)(cid:621) पर (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है िक 'यिद संबंिधत अधीन(cid:293)थ (cid:281)यायालय (cid:497)ारा धारा 145 (6) दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त िदया गया अिभमत िवसंगित एवं मूल (cid:259)(cid:289)यांिकत कर सकती है।' (cid:628)प से (cid:347)ुिटपूण(cid:259) या िकसी िविधक नु(cid:262)स से (cid:334)िसत हो, तो िनगरानी (cid:281)यायालय सा(cid:296)य को पुनमू मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया।

10.4 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय इलाहाबाद (लखनऊ खंडपीठ) की एक अ(cid:281)य (cid:498)व(cid:293)था, RAJENDRA PRATAP SINGH V. DISTRICT AND SESSIONS JUDGE GONDA AND OTHERS 1994 Page 398 इस िब(cid:281)(cid:621) पर (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है िक, 'धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही एक तरफा पुिलस िरपोट(cid:259) पर िक, 'शाि(cid:281)त भंग की आशंका नह(cid:514) है, के आधार पर समा(cid:282)त नह(cid:514) की जा सकती। मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया।

10.5 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय उ(cid:237)ीसा की (cid:498)व(cid:293)था, Sanat Kumar Patnaik V. Binoy Kumar Nayak and another, 1999 CRI.L.J.351 इस िब(cid:281)(cid:621) पर (cid:352)(cid:293)तुत की गयी िक, 'यिद एक बार िनगरानी (cid:334)ा(cid:509) हो जाती है तब वह गुण दोष पर ही िनण(cid:515)त होगी, बल ना िदये जाने के आधार पर िनण(cid:515)त नह(cid:514) हो सकती। मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया गया।

11.1 (cid:352)(cid:291)नगत आ(cid:87)ेिपत आदेश मु(cid:263)य (cid:628)प से दो िब(cid:281)(cid:621)(cid:603) पर पािरत िकया गया है, (cid:352)थम यह िक, िवचारण (cid:281)यायालय (cid:497)ारा (cid:352)(cid:291)नगत भूिम पर (cid:352)थम (cid:623)(cid:504)या िवप(cid:87)ी का क(cid:284)जा पाया गया है, ि(cid:497)तीय यह िक, (cid:352)(cid:291)नगत भूिम आबादी की होने एवं भूिम तथा उसम(cid:517) लगे पे(cid:237) के (cid:293)वािम(cid:277)व का मूल िववाद होने के कारण धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त उ(cid:472) भूिम व नीम के पे(cid:237) पर उभय प(cid:87) के (cid:293)वािम(cid:277)व का िनधा(cid:259)रण स(cid:87)म िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा ही िकया जा सकने, के आधार पर धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही को समा(cid:282)त की गयी है।

11.2 उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य से यह (cid:293)प(cid:504) है िक उभय प(cid:87) के म(cid:280)य लगभग 30 वष(cid:525) से अिधक समय से चकबंदी (cid:281)यायालय एवं आपरािधक (cid:281)यायालय तथा िसिवल (cid:281)यायालय म(cid:517) िविभ(cid:281)न वाद चल रहे ह(cid:520)। यिद िनगरानीकता(cid:259) का (cid:352)(cid:291)नगत भूिम एवं नीम के पे(cid:237) पर (cid:293)वािम(cid:277)व एवं क(cid:284)जा था, तो उसके पास वह (cid:352)(cid:277)येक अवसर था, िक वह इस 30 वष(cid:259) के दौरान िसिवल (cid:281)यायालय से (cid:352)(cid:291)नगत भूिम पर अपने (cid:293)वािम(cid:277)व एवं क(cid:284)जे की उ(cid:488)ोषणा के संदभ(cid:259) म(cid:517) अनुतोष (cid:352)ा(cid:282)त कर िववाद को सदैव के िलये समा(cid:282)त करा लेवे, िक(cid:281)तु वह लगातार धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही लगभग 30 वष(cid:525) से अ(cid:334)सािरत िकये (cid:631)ये है, िजसम(cid:517) िक, उसके (cid:497)ारा पूव(cid:259) म(cid:517) 145 दं०(cid:352)०सं० के दो (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347), िजनका िक ऊपर उ(cid:289)लेख िकया गया है, वह इसी स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) थे, िनर(cid:293)त िकये जा चुके ह(cid:520) एवं उनकी िनगरानी भी स(cid:347) (cid:281)यायालय (cid:497)ारा िनर(cid:293)त िकया जाना बताया गया है। अतः इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) होता है िक िनगरानीकता(cid:259)/(cid:352)ाथ(cid:515) धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त दी गयी िविधक (cid:352)ि(cid:332)या का (cid:621)(cid:628)पयोग करते (cid:631)ये एवं (cid:352)(cid:291)नगत भूिम के (cid:293)व(cid:277)व एवं क(cid:284)जे के (cid:352)(cid:291)न को अनु(cid:485)िरत रखे जाने के आशय से, (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था भंग होने के आधार पर धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही कर उ(cid:472) िववाद को अिनि(cid:499)तकाल के िलये लंिबत रखना चाहता है, जोिक ना तो धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की मंशा है और ना ही यह (cid:281)याय की मंशा है िक वह िकसी (cid:498)ि(cid:472) को यह छू ट (cid:352)दान कर(cid:517) िक वह समुिचत िविधक (cid:352)ि(cid:332)या को ना अपनाते (cid:631)ये िकसी अ(cid:281)य िविधक (cid:352)ि(cid:332)या का (cid:621)(cid:628)पयोग कर, ना के वल िकसी स(cid:286)पि(cid:485) के िववाद को अिनि(cid:499)तकाल तक लंिबत रखे वरन अपने उ(cid:472) आचरण के (cid:497)ारा वह (cid:622)सरे प(cid:87) को शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था भंग करने के िलये (cid:352)कोिपत करे। अ(cid:293)तु उ(cid:472) त(cid:278)य(cid:523) एवं पिरि(cid:293)थितय(cid:523) म(cid:517) िनगरानीकता(cid:259) अपने (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय एवं उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था(cid:603) का लाभ अपने प(cid:87) म(cid:517) पाने का अिधकारी नह(cid:514) है।

11.3 अ(cid:293)तु उ(cid:472) त(cid:278)य(cid:523) एवं पिरि(cid:293)थितय(cid:523) एवं सा(cid:296)य(cid:523) के िववेचन के प(cid:499)ात् माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय एवं उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था(cid:603) के आलोक म(cid:517) यह (cid:281)यायालय इस िन(cid:292)कष(cid:259) की है िक, िव(cid:497)ान िवचारण (cid:281)यायालय (cid:497)ारा उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत आदेश पािरत करने म(cid:517) कोई िविधक (cid:347)ुिट या कोई अिनयिमतता नह(cid:514) की गयी है, िजससे िक िनगरानी म(cid:517) िदये गये िकसी भी आधार पर आलो(cid:267)य आदेश म(cid:517) ह(cid:293)त(cid:87)ेप करने का कोई औिच(cid:277)य हो, पिरणामतः िव(cid:497)ान अवर (cid:281)यायालय (cid:497)ारा पािरत आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य व आदेश िदनांिकत 17.10.2023 पु(cid:504) िकये जाने यो(cid:264)य है। फल(cid:293)व(cid:628)प िनगरानीकता(cid:259) की (cid:352)(cid:293)तुत िनगरानी बलहीन होने के कारण िनर(cid:293)त िकये जाने यो(cid:264)य है। आदेश तदनुसार िनगरानीकता(cid:259) की (cid:352)(cid:293)तुत िनगरानी सं(cid:263)या 07/2024 िनर(cid:293)त की जाती है। पिरणाम(cid:293)व(cid:627)प अवर (cid:281)यायालय के (cid:497)ारा पािरत उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य एवं आदेश िदनॉिकत 17.10.2023 पु(cid:504) िकया जाता है। िनण(cid:259)य की एक (cid:352)ित मय अवर (cid:281)यायालय की प(cid:347)ावली अिवल(cid:286)ब (cid:352)ेिषत की जाये। बाद आव(cid:291)यक काय(cid:259)वाही प(cid:347)ावली अिभलेखागार सं(cid:334)िहत हो। िलिपक िनयमानुसार आव(cid:291)यक काय(cid:259)वाही सुिनि(cid:499)त कर(cid:517)।"

4. Considered the aforesaid as also the submissions advanced by the learned counsel for the parties, material available on record and also the report(s) 6 A227 No. 6742 of 2025 dated 20.02.1994 submitted by the SHO, Dariyabad, Barabanki and 22.02.1995 submitted by Nayab Tehsildar, Dariyabad, Barabanki and also various pronouncements on the issue related to Section 125 CrPC.

5. Upon due consideration of aforesaid, this Court is of the view that no interference is required in the matter. It is for the following reason(s):- (i) The report dated 20.02.1994 on record indicates that on the disputed land side opposite was in possession. (ii) Subsequent report dated 22.02.1995 also indicates that side opposite was in possession. (iii) The report of the Nayab Tehsildar, Dariyabad, Barabanki dated

22.02.2018 indicates that the dispute between the parties relates to a peace of land and there is apprehension of breach of peace. (iv) The private opposite parties are blood relatives of the petitioner who initiated the proceedings in terms of Section 125 CrPC. (v) The aforesaid indicates that at the time of initiation of proceedings under Section 125 CrPC the private opposite parties were in possession of the property in issue. (vi) It is not the case of the petitioner that he was wrongfully dispossessed within two months next before the date of initiation of proceedings under Section 145 CrPC.

6. For the reasons aforesaid, the petition is liable to be dismissed. It is accordingly dismissed. November 20, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Lucknow Bench

3. Petitioner has also challenged the order dated 25.07.2025 passed by the learned Additional District and Sessions Judge, Court NO. 1, Barabanki (in short 'Revisional Court') passed in Criminal Revision No. 07 of 2024 under Sections 397/399 CrPC. Relevant portion of the order dated 25.07.2025 reads as under:- "6. िव(cid:497)ान अवर (cid:281)यायालय उपिजला मिज(cid:293)(cid:342)ेट रामसनेहीघाट, बाराबंकी (cid:497)ारा िनण(cid:259)य म(cid:517) िदये गये आधारो पर अपना िनण(cid:259)य इस (cid:352)कार िन(cid:292)किषत िकया गया है िक- "प(cid:347)ावली पर प(cid:87)(cid:523) (cid:497)ारा अिभिलिखत कराये गये बयान मा० (cid:352)वर (cid:281)यायालय(cid:523) (cid:497)ारा पािरत िनण(cid:259)यादेश(cid:523) की छाया (cid:352)ित थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 520.02.1994 व 22.02.1995 व नायब तहसीलदार (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.2018 सिहत स(cid:286)पूण(cid:259) प(cid:347)ावली का भली भांित अनुशीलन िकया गया। (cid:352)थम प(cid:87) (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत सा(cid:296)य व िदये गये शपथपूव(cid:259)क बयान म(cid:517) िववािदत भूिम व उस पर लगे नीम के पे(cid:237) को उनके पूव(cid:259)जो का होना तथा पूव(cid:259)ज(cid:523) की मृ(cid:277)यु प(cid:499)ात अपना क(cid:284)जा व दखल होना कहा गया है। वह(cid:514) ि(cid:497)तीय प(cid:87) की ओर से पूव(cid:259) म(cid:517) अिभिलिखत कराये गये अपने शपथ पूव(cid:259)क बयान म(cid:517) (cid:352)(cid:291)नगत भूिम व नीम के पे(cid:237) को अपने पािरवािरक भूिम होना कहा गया है िजस पर मेरी चरही नांदे बनी है तथा छ(cid:282)पर रखा जाता है। िववािदत भूिम पर लगे नीम के पे(cid:237) के स(cid:286)ब(cid:281)ध म(cid:517) कहा गया है िक वह मेरे दरवाजे पर लगा है। थाना(cid:280)य दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 20.02.1994 म(cid:517) इस बात का उ(cid:289)लेख िकया गया है िक िववािदत जमीन िवप(cid:87)ी के मकान व सहन के दि(cid:87)ण है िजस पर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा होना पाया गया है। िववािदत जमीन पर एक नीम का पे(cid:237), चरही, म(cid:237)हा जानवरो का बना है। िजसपर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा बताया गया है। आवेदक का कहना गलत है िक िववािदत जमीन पर िवप(cid:87)ी का क(cid:284)जा नह(cid:514) है जबिक स(cid:277)य यह है िक िवप(cid:87)ी पहले से ही उस जमीन पर कािबज है। पुन(cid:499) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.1995 म(cid:517) यह उ(cid:289)लेख है िक िववािदत जमीन िजसका िववाद अ(cid:286)बर लाल व रामबरन के म(cid:280)य चल रहा है। 3 A227 No. 6742 of 2025 िजसकी मौके जांच बाद पाया गया िक िववािदत भूिम पर 02 नांदे जो (cid:352)चिलत है वह रामबरन की बनी (cid:631)ई है इसके अितिर(cid:472) क(cid:281)डे का ढेर भी रामबरन का लगा (cid:631)आ है। एक पे(cid:237) भी नीम का मौजूद है िजसका िववाद उभय प(cid:87)(cid:523) के म(cid:280)य चल रहा है िजसको लेकर उभय प(cid:87)ो के म(cid:280)य िदनांक 02.10.1994 को मारपीट हो चुकी है। िजसका थाना (cid:293)थानीय पर उभय प(cid:87)ो के िव(cid:628)(cid:490) धारा 323, 504 का अिभयोग पंजीकृ त होकर आरोप प(cid:347) (cid:281)यायालय पर (cid:352)ेिषत िकया गया है। वह(cid:514) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत उ(cid:472) आ(cid:263)या के िव(cid:627)(cid:490) (cid:352)थम प(cid:87) (cid:497)ारा आपि(cid:485) (cid:352)(cid:293)तुत करके यह कथन िदया गया है पुिलस (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या मनग(cid:238)(cid:281)त सािजश व िवप(cid:87)ी को िववािदत भूिम व उस पर लगे नीम के पे(cid:237) पर क(cid:284)जा कराने के िलए (cid:352)(cid:293)तुत की गई है। थाना दिरयाबाद की पुिलस व िवप(cid:87)ीगण की िमली भगत है। नायब तहसीलदार (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.2018 म(cid:517) उ(cid:289)लेख है िक (cid:352)करण (cid:361)ेणी 6(2) के पुरानी आबादी के अ(cid:281)दर का है। िवप(cid:87)ीगण (cid:497)ारा िदनांक 10 फरवरी 2018 को दीवार का िनमा(cid:259)ण कर टीन सेट रख िलया गया है। (cid:293)थानीय पुिलस (cid:497)ारा दोन(cid:523) प(cid:87)ो के म(cid:280)य आपसी समझौता कराया गया िक िववािदत (cid:293)थल पर िबना िकसी स(cid:87)म (cid:281)यायालय के आदेश के कोई नया िनमा(cid:259)ण न िकया जाय। उपरो(cid:472) त(cid:278)य(cid:523) के आधार पर यह (cid:293)प(cid:504) है िक िववािदत भूिम व उस पर लगा नीम का पे(cid:237) आबादी के अ(cid:281)दर ि(cid:293)थत है। िजसके (cid:293)वािम(cid:277)व को लेकर उभय प(cid:87)(cid:523) के म(cid:280)य िववाद है। (cid:281)यायालय पर दं०(cid:352)०सं० धारा-145 के तहत (cid:352)चिलत काय(cid:259)वाही के तहत आबादी की भूिम व उस पर लगे नीम का पेड का (cid:293)वािम(cid:277)व का िनधा(cid:259)रण िकया जाना िविधक नह(cid:514) (cid:352)तीत होता है। उभय प(cid:87) (cid:293)वािम(cid:277)व का िनधा(cid:259)रण स(cid:87)म (cid:281)यायालय म(cid:517) वाद योिजत कर करा सकते ह(cid:520), चू ंिक यह (cid:352)करण अ(cid:277)यिधक समय से लि(cid:286)बत है अब अ(cid:334)ेतर काय(cid:259)वाही का औिच(cid:277)य नह(cid:514) (cid:352)तीत होता है। अतः धारा-145 दं०(cid:352)०सं० के तहत (cid:352)चिलत काय(cid:259)वाही समा(cid:282)त िकये जाने यो(cid:264)य है। आदेश (cid:281)यायालय पर (cid:352)चिलत वाद अ(cid:281)तग(cid:259)त धारा-145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही समा(cid:282)त की जाती है। आदेश की (cid:352)ित (cid:352)भारी िनरी(cid:87)क दिरयाबाद को इस िनद(cid:518)श के साथ (cid:352)ेिषत की जाती है िक िववािदत (cid:293)थल पर शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था बनाये रखने हेतु िनरंतर सतक(cid:259) (cid:623)ि(cid:504) बनाये रख(cid:517)। बाद आव(cid:291)यक काय(cid:259)वाही दािखल द(cid:283)तर की जाय। उपिजला मिज(cid:293)(cid:342)ेट रामसनेहीघाट, बाराबंकी। "

7. उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य िदनांिकत 17.10.2023 के अवलोकन से यह (cid:293)प(cid:504) है िक उ(cid:472) िनण(cid:259)य िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बरलाल वमा(cid:259) के (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) िदनांिकत 18.10.1993 एवं उसपर िवप(cid:87)ी की ओर से (cid:352)(cid:293)तुत आपि(cid:485) िदनांक 04.07.1994 पर पािरत िकया गया है। इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) है िक आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य एवं आदेश (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) (cid:352)(cid:293)तुत िकये जाने के लगभग 30 वष(cid:259) प(cid:499)ात पािरत िकया गया है एवं उ(cid:472) आदेश के जिरये अवर (cid:281)यायालय पर (cid:352)चिलत वाद अ(cid:281)तग(cid:259)त धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही समा(cid:282)त की गयी है। इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) है िक उ(cid:472) (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) पर पािरत आदेश के जिरये लगभग 30 वष(cid:259) तक शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था भंग होने की आशंका बनी रही। इस संदभ(cid:259) म(cid:517) िनण(cid:259)य के अवलोकन से ही (cid:293)प(cid:504) है िक उभय प(cid:87) के म(cid:280)य िववािदत पे(cid:237) व भूिम से संबंिधत मुकदमे आपरािधक (cid:281)यायालय एवं चकबंदी (cid:281)यायालय, साथ ही साथ उ(cid:472) पे(cid:237) को लेकर दीवानी (cid:281)यायालय म(cid:517) भी अ(cid:286)बरलाल (cid:497)ारा वाद दायर करना कहा गया है।

8. (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) यह उ(cid:289)लेखनीय है, जैसा िक िवप(cid:87)ी के िव(cid:497)ान अिधव(cid:472)ा (cid:497)ारा तक(cid:259) भी (cid:352)(cid:293)तुत करते (cid:631)ये कहा गया है, िक (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) ही िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बर लाल (cid:497)ारा एक िनगरानी िदनांक 21.10.1996 को एवं (cid:622)सरी िनगरानी िदनांक 23.02.1999 को दािखल की गयी थी, िजसे िक संबंिधत स(cid:347) (cid:281)यायालय (cid:497)ारा िदनांक 20.03.2013 व 13.11.2003 को िनर(cid:293)त िकया गया। अवर (cid:281)यायालय की प(cid:347)ावली के अवलोकन से सबंिधत स(cid:347) (cid:281)यायालय (cid:497)ारा, आपरािधक िनगरानी सं(cid:263)या 105/2003, अ(cid:286)बर लाल वमा(cid:259) बनाम रामबरन आिद के मामले म(cid:517) वाद सं(cid:263)या 01/1999 धारा 145 दं०(cid:352)०सं० म(cid:517) पािरत आदेश िदनांिकत 20.02.2003 के संदभ(cid:259) म(cid:517), िनगरानीकता(cid:259) अ(cid:286)बरलाल वमा(cid:259) (cid:497)ारा योिजत िनगरानी िदनांक 13.11.2003 को िनर(cid:293)त की गयी। उ(cid:472) िनगरानी म(cid:517) भी नीम के पे(cid:237) व जानवरो के चारा के िलये लगी नांद से संबंिधत भूिम का ही िववाद था। इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) है िक ह(cid:293)तगत िनगरानी से संबंिधत वाद एवं दो अ(cid:281)य िनगरािनय(cid:523) से संबंिधत वाद के आधार पर (cid:352)ाथ(cid:515) शाि(cid:281)त भंग होने की संभावना के आधार पर लगातार िविभ(cid:281)न वाद अ(cid:281)तग(cid:259)त धारा 145 द०(cid:352)०सं०, 30 वष(cid:525) के दौरान (cid:352)(cid:293)तुत करता रहा, जबिक वादी (cid:497)ारा अपने (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) म(cid:517) (cid:352)(cid:291)नगत नीम का पे(cid:237) एवं संबंिधत भूिम को (cid:293)वयं के पुरखो (cid:497)ारा (cid:352)ा(cid:282)त िकया जाना कहा गया है। अतः उ(cid:472) 30 वष(cid:525) की अविध के दौरान िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बरलाल वमा(cid:259) को यह (cid:352)(cid:277)येक अवसर (cid:352)ा(cid:282)त था िक वह (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485)य(cid:523) के स(cid:281)दभ(cid:259) म(cid:517) अपने (cid:293)व(cid:277)व व अिधकार को सािबत करने अथवा उसकी उ(cid:488)ोषणा के संदभ(cid:259) म(cid:517) िविध अनुसार 'िसिवल सूट' िसिवल (cid:281)यायालय म(cid:517) (cid:352)(cid:293)तुत करके (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) म(cid:517) किथत अपने (cid:293)व(cid:277)व व क(cid:284)जे को िनण(cid:515)त करा लेवे, िक(cid:281)तु िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) (cid:497)ारा इस िनगरानी (cid:281)यायालय के सम(cid:87) ऐसे िकसी िसिवल वाद के जिरये (cid:293)व(cid:277)व व क(cid:284)जे के बाबत अंितम अनुतोष (cid:352)ा(cid:282)त करने के संबंध म(cid:517), सं(cid:88)ान म(cid:517) नह(cid:514) लाया गया है। हालांिक िव(cid:497)ान िवचारण (cid:281)यायालय (cid:497)ारा अपने िनण(cid:259)य म(cid:517) इस बात का उ(cid:289)लेख अव(cid:291)य िकया गया है िक, (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बर लाल (cid:497)ारा एक दीवानी वाद भी दािखल िकया गया था। 4 A227 No. 6742 of 2025 अतः दीवानी (cid:281)यायालय ही वह (cid:281)यायालय है जो िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बरलाल (cid:497)ारा किथत (cid:352)(cid:291)नगत नीम के पे(cid:237) व उ(cid:472) भूिम के बाबत उसके (cid:293)व(cid:277)व व क(cid:284)जे को िनण(cid:515)त कर इस िववाद को अंितम (cid:628)प दे सके ।

9.1 इस (cid:352)कार उ(cid:472) सम(cid:293)त सा(cid:296)य(cid:523) से यह (cid:293)प(cid:504) होता है िक िनगरानीकता(cid:259) / (cid:352)ाथ(cid:515) अ(cid:286)बर लाल धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की िविभ(cid:281)न (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347)(cid:523) के जिरये (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) शाि(cid:281)त भग की आशंका के आधार पर धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के िविभ(cid:281)न (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347) (cid:352)(cid:293)तुत करके मामले के मूल िववाद को अनाव(cid:291)यक (cid:628)प से लंिबत रखना चाहता है, जबिक उसके पास 30 वष(cid:525) की ल(cid:286)बी अविध म(cid:517) यह (cid:352)(cid:277)येक अवसर (cid:352)ा(cid:282)त था िक वह (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) अपने (cid:293)वािम(cid:277)व व क(cid:284)जे को िसिवल वाद के जिरये िनण(cid:515)त करा सके ।

9.2 यहां यह उ(cid:289)लेख िकया जाना भी समीचीन होगा िक, धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के तहत की जाने वाली काय(cid:259)वाही एक 'िनवारक उपचार' है ना िक िसिवल वाद के िनण(cid:259)य की भांित 'िनणा(cid:259)यक उपचार' धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त काय(cid:259)वाही एक फौरी तौर पर िनवारा(cid:277)मक काय(cid:259)वाही है, िजससे िकसी स(cid:286)पि(cid:485) के िववाद को लेकर शाि(cid:281)त भग की आशंका को िनवािरत िकया जा सके । (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) लगातार 30 वष(cid:525) तक शाि(cid:281)त भंग की आशंका (cid:293)वयं म(cid:517) एक ऐसी पिरि(cid:293)थित है, जो उभय प(cid:87) के म(cid:280)य अनवरत शाि(cid:281)तभंग को िव(cid:495)मान रखेगी, यह ना तो धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के िविधक उपबंधो की मंशा है और ना ही िवधाियका की मंशा है िक धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की लगातार काय(cid:259)वािहय(cid:523) के जिरये एक प(cid:87) (cid:622)सरे प(cid:87) को शाि(cid:281)त भंग के िलए (cid:352)कोिपत करता रहे; जबिक (cid:352)थम प(cid:87) (cid:497)ारा (cid:293)वयं को (cid:352)(cid:291)नगत भूिम का (cid:293)वामी एवं क(cid:284)जाधारी 30 वष(cid:525) से कहा जा रहा हो एवं इस संदभ(cid:259) म(cid:517) उसके (cid:497)ारा अंितम उपचारा(cid:277)मक अनुतोष, जोिक िसिवल (cid:281)यायालय से (cid:352)ा(cid:282)त िकया जा सकता है, वह ना (cid:352)ा(cid:282)त िकया जा रहा हो।

9.3 अतः ऐसी ि(cid:293)थित म(cid:517) (cid:352)ाथ(cid:515) (cid:497)ारा (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) जोिक आबादी के अ(cid:281)दर ि(cid:293)थत नीम का पे(cid:237) एवं आबादी की भूिम है, िजसके िक संदभ(cid:259) म(cid:517) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा यह आ(cid:263)या िदनांिकत 20.02.1994 को (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है िक "िववािदत जमीन िवप(cid:87)ी के मकान व सहन के दि(cid:87)ण है िजसपर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा होना पाया गया। िववािदत जमीन पर एक नीम का पे(cid:237), चरही, म(cid:237)हा, जानवर(cid:523) का बना है िजसपर िवप(cid:87)ी का ही क(cid:284)जा बताया गया है। आवेदक का कहना गलत है िक िववािदत जमीन पर िवप(cid:87)ी का क(cid:284)जा नह(cid:514) है जबिक स(cid:277)य यह है िक िवप(cid:87)ी पहले से ही उस जमीन पर कािबज है।" पुन(cid:499) थाना(cid:280)य(cid:87) दिरयाबाद (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत आ(cid:263)या िदनांक 22.02.1995 म(cid:517) यह उ(cid:289)लेख है िक, "िववािदत जमीन िजसका िववाद अ(cid:286)बर लाल व रामबरन के म(cid:280)य चल रहा है, िजसकी मौके पर जांच बाद पाया गया िक िववािदत भूिम पर 02 नांदे जो (cid:352)चिलत है वह रामबरन की बनी (cid:631)ई है इसके अितिर(cid:472) क(cid:281)डे का ढेर भी रामबरन का लगा (cid:631)आ है। एक पे(cid:237) भी नीम का मौजूद है िजसका िववाद उभय प(cid:87)(cid:523) के म(cid:280)य चल रहा है िजसको लेकर उभय प(cid:87)ो के म(cid:280)य िदनांक 02.10.1994 को मारपीट हो चुकी है। िजसका थाना (cid:293)थानीय पर उभय प(cid:87)ो के िव(cid:628)(cid:490) धारा 323, 504 का अिभयोग पंजीकृ त होकर आरोप प(cid:347) (cid:281)यायालय पर (cid:352)ेिषत िकया गया है।"

9.4 (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) (cid:352)थम प(cid:87) अ(cid:286)बर लाल ने िवचारण (cid:281)यायालय के सम(cid:87) अपने सशपथ बयान म(cid:517) यह भी कहा गया है िक "जो दीवानी (cid:281)यायालय का मुकदमा चल रहे है, वह उसम(cid:517) (cid:352)थम प(cid:87) है।"

10.1 (cid:352)(cid:293)तुत िनगरानी के संदभ(cid:259) म(cid:517) अमरेश ितवारी बनाम लालता (cid:352)साद (cid:622)बे (2000) 4 एससीसी 440 के मामले म(cid:517) माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय की 3 (cid:281)यायमूत(cid:515)गण की पीठ (cid:497)ारा पािरत िविध (cid:498)व(cid:293)था को (cid:623)ि(cid:504)गत रखना होगा,िजसम(cid:517) Ram Sumer Puri Mahant V. State of U.P. and others (1985) 1 SCC 427 के मामले म(cid:517) माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय (cid:497)ारा पूव(cid:259) म(cid:517) दी गयी िविध (cid:498)व(cid:293)था का हवाला देते (cid:631)ये यह (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक, 'जहां स(cid:87)म दीवानी (cid:281)यायालय म(cid:517) वाद(cid:334)(cid:293)त स(cid:286)पि(cid:485) के क(cid:284)जे अथवा उसके (cid:293)व(cid:277)व की उ(cid:488)ोषणा के संदभ(cid:259) म(cid:517) वाद दायर िकया जा चुका हो, तो ऐसी ि(cid:293)थित म(cid:517) धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त काय(cid:259)वाही अ(cid:334)सािरत नह(cid:514) होना चािहये,' िक(cid:281)तु िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय (cid:497)ारा, (cid:352)काशच(cid:281)(cid:349) सचदेव बनाम (cid:293)टेट आिद एआईआर 1994 सु(cid:352)ीमकोट(cid:259) 1436 के मामले म(cid:517) दी गयी िविध (cid:498)व(cid:293)था (cid:352)(cid:293)तुत की गयी, िजसम(cid:517) माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय (cid:497)ारा यह भी (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक 'जहां िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा िदये गये यथाि(cid:293)थित का आदेश उभय प(cid:87) के म(cid:280)य शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था बनाये रखने हेतु पया(cid:259)(cid:282)त नह(cid:514) है, अथवा जहां िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा क(cid:284)जे के िब(cid:281)(cid:621) को समुिचत (cid:628)प से (cid:498)व(cid:633)त नह(cid:514) िकया गया है, वहां धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त संबंिधत मिज(cid:293)(cid:342)ेट को काय(cid:259)वाही करने का अिधकार (cid:352)ा(cid:282)त है।' इसी िब(cid:281)(cid:621) पर िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय इलाहाबाद की अ(cid:495)तन (cid:498)व(cid:293)था IRFAN ALI V. STATE OF U.P. and others [2024(127)ACC596] का भी हवाला िदया गया है, िजसम(cid:517) यह (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक, 'जहां िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा कोई अंतिरम आदेश पािरत नह(cid:514) िकया गया हो अथवा के वल यथाि(cid:293)थित बनाये रखने का आदेश पािरत िकया गया हो, वहां धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त काय(cid:259)वाही अ(cid:334)सािरत की जा सकती है।'

10.2 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय, इलाहाबाद की एक अ(cid:281)य (cid:498)व(cid:293)था, Bharwal Prasad Vs. IlAddl.District and Session Judge Sihdharthnagar, RR 1985 Page 55 (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है। उ(cid:472) िनण(cid:259)य म(cid:517) माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय (cid:497)ारा यह (cid:498)व(cid:293)था दी गयी है िक 'धारा 145 (1) दं०(cid:352)०सं० के मामले म(cid:517) पुिलस िरपोट(cid:259) का उ(cid:489)े(cid:291)य यह है िक (cid:262)या (cid:352)(cid:293)तुत मामले म(cid:517) शाि(cid:281)त भंग होने की संभावना िव(cid:495)मान है। यह पुिलस िरपोट(cid:259) िकसी (cid:498)ि(cid:472) के क(cid:284)जे की जांच के संदभ(cid:259) म(cid:517) नह(cid:514) होती (cid:262)य(cid:523)िक इस हेतु प(cid:87)कार को अपने सा(cid:296)य के जिरये अपने क(cid:284)जे को सािबत करना होता है। मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया। 5 A227 No. 6742 of 2025

10.3 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ की (cid:498)व(cid:293)था, SATYA NARAIN V. STATE OF U.P.(ALLAHABAD HIGHCOURT) 1997 (35) इस िब(cid:281)(cid:621) पर (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है िक 'यिद संबंिधत अधीन(cid:293)थ (cid:281)यायालय (cid:497)ारा धारा 145 (6) दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त िदया गया अिभमत िवसंगित एवं मूल (cid:259)(cid:289)यांिकत कर सकती है।' (cid:628)प से (cid:347)ुिटपूण(cid:259) या िकसी िविधक नु(cid:262)स से (cid:334)िसत हो, तो िनगरानी (cid:281)यायालय सा(cid:296)य को पुनमू मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया।

10.4 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय इलाहाबाद (लखनऊ खंडपीठ) की एक अ(cid:281)य (cid:498)व(cid:293)था, RAJENDRA PRATAP SINGH V. DISTRICT AND SESSIONS JUDGE GONDA AND OTHERS 1994 Page 398 इस िब(cid:281)(cid:621) पर (cid:352)(cid:293)तुत की गयी है िक, 'धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही एक तरफा पुिलस िरपोट(cid:259) पर िक, 'शाि(cid:281)त भंग की आशंका नह(cid:514) है, के आधार पर समा(cid:282)त नह(cid:514) की जा सकती। मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया।

10.5 िनगरानीकता(cid:259) की ओर से माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय उ(cid:237)ीसा की (cid:498)व(cid:293)था, Sanat Kumar Patnaik V. Binoy Kumar Nayak and another, 1999 CRI.L.J.351 इस िब(cid:281)(cid:621) पर (cid:352)(cid:293)तुत की गयी िक, 'यिद एक बार िनगरानी (cid:334)ा(cid:509) हो जाती है तब वह गुण दोष पर ही िनण(cid:515)त होगी, बल ना िदये जाने के आधार पर िनण(cid:515)त नह(cid:514) हो सकती। मेरे (cid:497)ारा माननीय उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था का भी स(cid:286)मानपूव(cid:259)क अवलोकन िकया गया।

11.1 (cid:352)(cid:291)नगत आ(cid:87)ेिपत आदेश मु(cid:263)य (cid:628)प से दो िब(cid:281)(cid:621)(cid:603) पर पािरत िकया गया है, (cid:352)थम यह िक, िवचारण (cid:281)यायालय (cid:497)ारा (cid:352)(cid:291)नगत भूिम पर (cid:352)थम (cid:623)(cid:504)या िवप(cid:87)ी का क(cid:284)जा पाया गया है, ि(cid:497)तीय यह िक, (cid:352)(cid:291)नगत भूिम आबादी की होने एवं भूिम तथा उसम(cid:517) लगे पे(cid:237) के (cid:293)वािम(cid:277)व का मूल िववाद होने के कारण धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त उ(cid:472) भूिम व नीम के पे(cid:237) पर उभय प(cid:87) के (cid:293)वािम(cid:277)व का िनधा(cid:259)रण स(cid:87)म िसिवल (cid:281)यायालय (cid:497)ारा ही िकया जा सकने, के आधार पर धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही को समा(cid:282)त की गयी है।

11.2 उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य से यह (cid:293)प(cid:504) है िक उभय प(cid:87) के म(cid:280)य लगभग 30 वष(cid:525) से अिधक समय से चकबंदी (cid:281)यायालय एवं आपरािधक (cid:281)यायालय तथा िसिवल (cid:281)यायालय म(cid:517) िविभ(cid:281)न वाद चल रहे ह(cid:520)। यिद िनगरानीकता(cid:259) का (cid:352)(cid:291)नगत भूिम एवं नीम के पे(cid:237) पर (cid:293)वािम(cid:277)व एवं क(cid:284)जा था, तो उसके पास वह (cid:352)(cid:277)येक अवसर था, िक वह इस 30 वष(cid:259) के दौरान िसिवल (cid:281)यायालय से (cid:352)(cid:291)नगत भूिम पर अपने (cid:293)वािम(cid:277)व एवं क(cid:284)जे की उ(cid:488)ोषणा के संदभ(cid:259) म(cid:517) अनुतोष (cid:352)ा(cid:282)त कर िववाद को सदैव के िलये समा(cid:282)त करा लेवे, िक(cid:281)तु वह लगातार धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही लगभग 30 वष(cid:525) से अ(cid:334)सािरत िकये (cid:631)ये है, िजसम(cid:517) िक, उसके (cid:497)ारा पूव(cid:259) म(cid:517) 145 दं०(cid:352)०सं० के दो (cid:352)ाथ(cid:259)नाप(cid:347), िजनका िक ऊपर उ(cid:289)लेख िकया गया है, वह इसी स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) थे, िनर(cid:293)त िकये जा चुके ह(cid:520) एवं उनकी िनगरानी भी स(cid:347) (cid:281)यायालय (cid:497)ारा िनर(cid:293)त िकया जाना बताया गया है। अतः इस (cid:352)कार (cid:293)प(cid:504) होता है िक िनगरानीकता(cid:259)/(cid:352)ाथ(cid:515) धारा 145 दं०(cid:352)०सं० के अ(cid:281)तग(cid:259)त दी गयी िविधक (cid:352)ि(cid:332)या का (cid:621)(cid:628)पयोग करते (cid:631)ये एवं (cid:352)(cid:291)नगत भूिम के (cid:293)व(cid:277)व एवं क(cid:284)जे के (cid:352)(cid:291)न को अनु(cid:485)िरत रखे जाने के आशय से, (cid:352)(cid:291)नगत स(cid:286)पि(cid:485) के संदभ(cid:259) म(cid:517) शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था भंग होने के आधार पर धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की काय(cid:259)वाही कर उ(cid:472) िववाद को अिनि(cid:499)तकाल के िलये लंिबत रखना चाहता है, जोिक ना तो धारा 145 दं०(cid:352)०सं० की मंशा है और ना ही यह (cid:281)याय की मंशा है िक वह िकसी (cid:498)ि(cid:472) को यह छू ट (cid:352)दान कर(cid:517) िक वह समुिचत िविधक (cid:352)ि(cid:332)या को ना अपनाते (cid:631)ये िकसी अ(cid:281)य िविधक (cid:352)ि(cid:332)या का (cid:621)(cid:628)पयोग कर, ना के वल िकसी स(cid:286)पि(cid:485) के िववाद को अिनि(cid:499)तकाल तक लंिबत रखे वरन अपने उ(cid:472) आचरण के (cid:497)ारा वह (cid:622)सरे प(cid:87) को शाि(cid:281)त (cid:498)व(cid:293)था भंग करने के िलये (cid:352)कोिपत करे। अ(cid:293)तु उ(cid:472) त(cid:278)य(cid:523) एवं पिरि(cid:293)थितय(cid:523) म(cid:517) िनगरानीकता(cid:259) अपने (cid:497)ारा (cid:352)(cid:293)तुत माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय एवं उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था(cid:603) का लाभ अपने प(cid:87) म(cid:517) पाने का अिधकारी नह(cid:514) है।

11.3 अ(cid:293)तु उ(cid:472) त(cid:278)य(cid:523) एवं पिरि(cid:293)थितय(cid:523) एवं सा(cid:296)य(cid:523) के िववेचन के प(cid:499)ात् माननीय उ(cid:267)चतम (cid:281)यायालय एवं उ(cid:267)च (cid:281)यायालय की उ(cid:472) िविध (cid:498)व(cid:293)था(cid:603) के आलोक म(cid:517) यह (cid:281)यायालय इस िन(cid:292)कष(cid:259) की है िक, िव(cid:497)ान िवचारण (cid:281)यायालय (cid:497)ारा उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत आदेश पािरत करने म(cid:517) कोई िविधक (cid:347)ुिट या कोई अिनयिमतता नह(cid:514) की गयी है, िजससे िक िनगरानी म(cid:517) िदये गये िकसी भी आधार पर आलो(cid:267)य आदेश म(cid:517) ह(cid:293)त(cid:87)ेप करने का कोई औिच(cid:277)य हो, पिरणामतः िव(cid:497)ान अवर (cid:281)यायालय (cid:497)ारा पािरत आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य व आदेश िदनांिकत 17.10.2023 पु(cid:504) िकये जाने यो(cid:264)य है। फल(cid:293)व(cid:628)प िनगरानीकता(cid:259) की (cid:352)(cid:293)तुत िनगरानी बलहीन होने के कारण िनर(cid:293)त िकये जाने यो(cid:264)य है। आदेश तदनुसार िनगरानीकता(cid:259) की (cid:352)(cid:293)तुत िनगरानी सं(cid:263)या 07/2024 िनर(cid:293)त की जाती है। पिरणाम(cid:293)व(cid:627)प अवर (cid:281)यायालय के (cid:497)ारा पािरत उ(cid:472) आ(cid:87)ेिपत िनण(cid:259)य एवं आदेश िदनॉिकत 17.10.2023 पु(cid:504) िकया जाता है। िनण(cid:259)य की एक (cid:352)ित मय अवर (cid:281)यायालय की प(cid:347)ावली अिवल(cid:286)ब (cid:352)ेिषत की जाये। बाद आव(cid:291)यक काय(cid:259)वाही प(cid:347)ावली अिभलेखागार सं(cid:334)िहत हो। िलिपक िनयमानुसार आव(cid:291)यक काय(cid:259)वाही सुिनि(cid:499)त कर(cid:517)।"

4. Considered the aforesaid as also the submissions advanced by the learned counsel for the parties, material available on record and also the report(s) 6 A227 No. 6742 of 2025 dated 20.02.1994 submitted by the SHO, Dariyabad, Barabanki and 22.02.1995 submitted by Nayab Tehsildar, Dariyabad, Barabanki and also various pronouncements on the issue related to Section 125 CrPC.

5. Upon due consideration of aforesaid, this Court is of the view that no interference is required in the matter. It is for the following reason(s):- (i) The report dated 20.02.1994 on record indicates that on the disputed land side opposite was in possession. (ii) Subsequent report dated 22.02.1995 also indicates that side opposite was in possession. (iii) The report of the Nayab Tehsildar, Dariyabad, Barabanki dated

22.02.2018 indicates that the dispute between the parties relates to a peace of land and there is apprehension of breach of peace. (iv) The private opposite parties are blood relatives of the petitioner who initiated the proceedings in terms of Section 125 CrPC. (v) The aforesaid indicates that at the time of initiation of proceedings under Section 125 CrPC the private opposite parties were in possession of the property in issue. (vi) It is not the case of the petitioner that he was wrongfully dispossessed within two months next before the date of initiation of proceedings under Section 145 CrPC.

6. For the reasons aforesaid, the petition is liable to be dismissed. It is accordingly dismissed. November 20, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Lucknow Bench

This is the original judgment text as indexed from the source corpus. Always verify against the official court record before relying on it in a filing — you can do so on eCourts or the Supreme Court of India website. ← Search more judgments