Ashok Mishra v. State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Civil Sectt. Lko. And Another
Case Details
Acts & Sections
Learned counsel for the applicant submits that the applicant is innocent and 2 NABAIL No. 1437 of 2025 has been falsely implicated. It is stated that he is suffering from multiple ailments, including a heart condition. The alleged amount of Rs. 24,00,000/- was not received from the informant but from one Harikesh, and hence, the applicant has been wrongly accused. Per contra, learned A.G.A. opposes the bail application, submitting that during investigation, Section 338 BNSS (corresponding to Section 467 IPC) has been added on the basis of forged appointment letters allegedly given by the applicant to the victims. It is further contended that a money trail has been established showing that lakhs of rupees were credited to the applicant’s account, for which he has failed to provide any satisfactory explanation. The prosecution asserts that custodial interrogation is necessary as the applicant is a habitual offender with a criminal history of twelve cases, some of a similar nature. Perused the record. Upon perusal of the record, it appears from the order dated 19.09.2025 that the learned Sessions Judge, while rejecting the bail application, has taken into account the complainant’s statement under Section 180 BNSS, WhatsApp chats, forged appointment letters provided to the victims, and the money received in the applicant’s account. The operative part of the order reads as follows: "-प्ऴावली पर उपलब्ध ्ऺप्ऴों के अवलोकन से स्प्ि है िक वाद मुकदमा रंजीत यादव ्षारा अिभयु्व अशोक िम्शा के िवरु्ध ्ऺथम सूचना िरपोटर् पंजीकृ त करायी गयी है। वादी मुकदमा ्षारा अिभयु्व उपयु र््व पर नौकरी िदलवाने के नाम पर फजर् आरोप प्ऴ एवं रूपये हड़पने का आरोप लगाया गया है। प्ऴावली के अवलोकन से यह पाया गया िक िववेचक ्षारा के स-डायरी के पचार् संख्या 4 पर वादी मुकदमा रंजीत यादव का बयान अन्तगर्त धारा 180 बी०एन०एस०एस० लेखब्ध िकया गया, िजसमें उसके ्षारा कथन िकया गया िक "... मेरा कु ल िमलाकर 08 लाख रुपया नौकरी िदलाने के नाम पर अशोक िम्शा ने िलया है। पुिलस भतर् का कटआफ िदनांक 11 िसतंबर से 15 िसतम्बर तक जारी हुआ तथा िरजल्ट 21 नवंबर को आया, जब हम लोगों का पुिलस में नाम नहीं आया, तो पूछने पर बताया िक अभी सेके ण्ड िलस्ट आयेगी, उसमें आप लोगों का नाम होगा। उसके बाद 19 माचर् 2025 को शंकरगढ़ बाजार में हम पाँचों को बुलवाया और कहा िक आकर अपना-अपना िनयु्व लेटर ले जाओ। .... मैंने व अिमत सरोज ने राजसरोज, अिभषेक िसह व अमर बहादुर को शंकरगढ़ बाजार बुलाया, जहाँ पर अशोक िम्शा कार से आये और कहे िक मुझे जल्दी में कहीं जाना है, अपना-अपना ज्वाईिनग लेटर ले लो, जाकर ज्वाईन करो। हम पाँचों को ज्वाईिनग लेटर देकर चले गये। िफर िलफाफा खोलकर अपना-अपना ज्वाईिनग लेटर देखा, तो उसमें िनयुि्व प्ऴ िलखा हुआ था, पुिलस का मोनो्षाम तथा हम लोगों का अनु्वमांक सब िलखा हुआ था, उसके बाद ही हम लोगों को पता चला िक अभी िकसी का मेिडकल नहीं हुआ नहीं, िनयुि्व प्ऴ कै से आ गया। िफर हम लोग अपना-अपना पैसा मांगने िदनांक 20.03.2025 को उसके घर गये, तो हम लोगों को गाली-गुप्ता देते हुए घर से भगा िदया..." उपयु र््वानुसार प्ऴावली पर 3 NABAIL No. 1437 of 2025 उपलब्ध व्हाट्स एप चैट, फजर् कू टरिचत किथत पुिलस िवभाग ्षारा जारी िनयुि्व-प्ऴ व िविभन्न ितिथयों पर वादी मुकदमा के प्ष ्षारा अिभयु्व के खाते में भेजे गये रुपयों के बैंक स्टेटमेंट के अवलोकन से उ्व गंभीर ्ऺकरण में अिभयु्व उपयु र््व की संिलप्तता एवं भूिमक स्प्ि पिरलि्षत होती है, क्योंिक पैसों का लेन-देन मुख्यतः अिभयु्व उपयु र््व के खाते से हुआ है तथा उ्व लेन-देन िकसी एक ितिथ का नहीं है, बिल्क िविभन्न ितिथयों के है, िजससे यह नहीं कहा जा सकता है िक उ्व बड़े-बड़े ्िान्सजेक्शन अिभयु्व उपयु र््व की जानकारी के बगैर हुए है। अिभयोजन ्षारा अिभयु्व उपयु र््व के संबंध में 06 आपरािधक इितहास दिशत िकये गये है, िजससे ्ऺथमदृष््िा अिभयु्व एक अभ्यस्त अपराधी ्ऺतीत होता है। ्ऺकरण में िववेचना ्ऺचिलत है। ईदू बनाम उ्तर ्ऺदेश राज्य, 2024: AHC- LKO:31814 (Criminal Misc. Bail Application No. 3179 of 2024) में माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ्षारा यह िस्धान्त ्ऺितपािदत िकया गया है िक अि्षम जमानत का उ्देश्य िकसी िनदरॏष ्िि्व को जेल जाने से बचाना है, न िक उस ्िि्व को जेल जाने से बचाना है िजसके िवरु्ध कोई साष्य िव्यमान हो। ्ऺाथर्/अिभयु्व के िवरु्ध उ्व साष्य िव्षसनीय साष्य है अथवा नहीं, इसका िनधार्रण जमानत के स्तर पर नहीं िकया जा सकता है बिल्क िवचारण के बाद ही िकया जा सकता है। इसी ्ऺकार माननीय उच्चतम न्यायालय की सम्मािनत िविध-्िवस्था सुशीला अ्षवाल बनाम राज्य एन०सी०टी० (िदल्ली) एवं अन्य (2020) (एस) एस०सी०सी० (संवैधािनक पीठ) में माननीय न्यायालय ्षारा यह िविन्षयन िकया गया िक "धारा 438 दं०्ऺ०सं० के अन्तगर्त अि्षम जमानत का उपयोग यदा-कदा मा्ऴ िवशेष पिरिस्थितयों में ही िकया जाना चािहए। अि्षम जमानत का उपयोग न्यायालय ्षारा यांि्ऴक रूप से नहीं करना चािहए। अि्षम जमानत एक ऐसा ्ऺावधान है, जो िक एक सीिमत पिरिध में होती है। न्यायालय को इस शि्व का ्ऺयोग मा्ऴ उन्हीं पिरिस्थितयों में करना चािहये, जबिक अिभयोजन ्ऺप्ऴों से यह तथ्य ्ऺकट होता हो, िक अिभयु्व के िवरू्ध कोई भी ्ऺथमदृ्िया के स घिटत न हो रहा हो।" अतएव प्ऴावली पर इस स्तर पर ऐसा कोई साष्य उपलब्ध नहीं है, िजससे यह िनष्कषर् आधािरत िकया जा सके िक ्ऺाथर्/अिभयु्व को मा्ऴ अपमािनत करने या ्षित पहुंचाने के उ्देश्य से उ्व ्ऺकरण में िगरफ्तार िकया जा सकता है। अतः ्ऺकरण की ्ऺकृ ित व गम्भीरता को दृि्िगत रखते हुए अिभयु्व का अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ स्वीकार िकये जाने हेतु पयार्प्त आधार नहीं है। तदनुसार ्ऺाथर्/अिभयु्व का अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ खािरज िकये जाने योग्य है। आदेश अिभयु्व, अशोक िम्शा, की ओर से ्ऺस्तुत अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ िनरस्त िकया जाता है।" Considering the material available on record, it cannot, at this stage, be said that the case is one of false implication. There is sufficient material collected by the investigating officer, and the investigation is still in progress. Since the offence under Section 338 BNSS is punishable with imprisonment for life and custodial interrogation may be necessary, and no case for granting anticipatory bail is made out. Accordingly, the anticipatory bail application is rejected. October 13, 2025 R.C. (Karunesh Singh Pawar,J.) RAM CHANDER YADAV High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench
Learned counsel for the applicant submits that the applicant is innocent and 2 NABAIL No. 1437 of 2025 has been falsely implicated. It is stated that he is suffering from multiple ailments, including a heart condition. The alleged amount of Rs. 24,00,000/- was not received from the informant but from one Harikesh, and hence, the applicant has been wrongly accused. Per contra, learned A.G.A. opposes the bail application, submitting that during investigation, Section 338 BNSS (corresponding to Section 467 IPC) has been added on the basis of forged appointment letters allegedly given by the applicant to the victims. It is further contended that a money trail has been established showing that lakhs of rupees were credited to the applicant’s account, for which he has failed to provide any satisfactory explanation. The prosecution asserts that custodial interrogation is necessary as the applicant is a habitual offender with a criminal history of twelve cases, some of a similar nature. Perused the record. Upon perusal of the record, it appears from the order dated 19.09.2025 that the learned Sessions Judge, while rejecting the bail application, has taken into account the complainant’s statement under Section 180 BNSS, WhatsApp chats, forged appointment letters provided to the victims, and the money received in the applicant’s account. The operative part of the order reads as follows: "-प्ऴावली पर उपलब्ध ्ऺप्ऴों के अवलोकन से स्प्ि है िक वाद मुकदमा रंजीत यादव ्षारा अिभयु्व अशोक िम्शा के िवरु्ध ्ऺथम सूचना िरपोटर् पंजीकृ त करायी गयी है। वादी मुकदमा ्षारा अिभयु्व उपयु र््व पर नौकरी िदलवाने के नाम पर फजर् आरोप प्ऴ एवं रूपये हड़पने का आरोप लगाया गया है। प्ऴावली के अवलोकन से यह पाया गया िक िववेचक ्षारा के स-डायरी के पचार् संख्या 4 पर वादी मुकदमा रंजीत यादव का बयान अन्तगर्त धारा 180 बी०एन०एस०एस० लेखब्ध िकया गया, िजसमें उसके ्षारा कथन िकया गया िक "... मेरा कु ल िमलाकर 08 लाख रुपया नौकरी िदलाने के नाम पर अशोक िम्शा ने िलया है। पुिलस भतर् का कटआफ िदनांक 11 िसतंबर से 15 िसतम्बर तक जारी हुआ तथा िरजल्ट 21 नवंबर को आया, जब हम लोगों का पुिलस में नाम नहीं आया, तो पूछने पर बताया िक अभी सेके ण्ड िलस्ट आयेगी, उसमें आप लोगों का नाम होगा। उसके बाद 19 माचर् 2025 को शंकरगढ़ बाजार में हम पाँचों को बुलवाया और कहा िक आकर अपना-अपना िनयु्व लेटर ले जाओ। .... मैंने व अिमत सरोज ने राजसरोज, अिभषेक िसह व अमर बहादुर को शंकरगढ़ बाजार बुलाया, जहाँ पर अशोक िम्शा कार से आये और कहे िक मुझे जल्दी में कहीं जाना है, अपना-अपना ज्वाईिनग लेटर ले लो, जाकर ज्वाईन करो। हम पाँचों को ज्वाईिनग लेटर देकर चले गये। िफर िलफाफा खोलकर अपना-अपना ज्वाईिनग लेटर देखा, तो उसमें िनयुि्व प्ऴ िलखा हुआ था, पुिलस का मोनो्षाम तथा हम लोगों का अनु्वमांक सब िलखा हुआ था, उसके बाद ही हम लोगों को पता चला िक अभी िकसी का मेिडकल नहीं हुआ नहीं, िनयुि्व प्ऴ कै से आ गया। िफर हम लोग अपना-अपना पैसा मांगने िदनांक 20.03.2025 को उसके घर गये, तो हम लोगों को गाली-गुप्ता देते हुए घर से भगा िदया..." उपयु र््वानुसार प्ऴावली पर 3 NABAIL No. 1437 of 2025 उपलब्ध व्हाट्स एप चैट, फजर् कू टरिचत किथत पुिलस िवभाग ्षारा जारी िनयुि्व-प्ऴ व िविभन्न ितिथयों पर वादी मुकदमा के प्ष ्षारा अिभयु्व के खाते में भेजे गये रुपयों के बैंक स्टेटमेंट के अवलोकन से उ्व गंभीर ्ऺकरण में अिभयु्व उपयु र््व की संिलप्तता एवं भूिमक स्प्ि पिरलि्षत होती है, क्योंिक पैसों का लेन-देन मुख्यतः अिभयु्व उपयु र््व के खाते से हुआ है तथा उ्व लेन-देन िकसी एक ितिथ का नहीं है, बिल्क िविभन्न ितिथयों के है, िजससे यह नहीं कहा जा सकता है िक उ्व बड़े-बड़े ्िान्सजेक्शन अिभयु्व उपयु र््व की जानकारी के बगैर हुए है। अिभयोजन ्षारा अिभयु्व उपयु र््व के संबंध में 06 आपरािधक इितहास दिशत िकये गये है, िजससे ्ऺथमदृष््िा अिभयु्व एक अभ्यस्त अपराधी ्ऺतीत होता है। ्ऺकरण में िववेचना ्ऺचिलत है। ईदू बनाम उ्तर ्ऺदेश राज्य, 2024: AHC- LKO:31814 (Criminal Misc. Bail Application No. 3179 of 2024) में माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ्षारा यह िस्धान्त ्ऺितपािदत िकया गया है िक अि्षम जमानत का उ्देश्य िकसी िनदरॏष ्िि्व को जेल जाने से बचाना है, न िक उस ्िि्व को जेल जाने से बचाना है िजसके िवरु्ध कोई साष्य िव्यमान हो। ्ऺाथर्/अिभयु्व के िवरु्ध उ्व साष्य िव्षसनीय साष्य है अथवा नहीं, इसका िनधार्रण जमानत के स्तर पर नहीं िकया जा सकता है बिल्क िवचारण के बाद ही िकया जा सकता है। इसी ्ऺकार माननीय उच्चतम न्यायालय की सम्मािनत िविध-्िवस्था सुशीला अ्षवाल बनाम राज्य एन०सी०टी० (िदल्ली) एवं अन्य (2020) (एस) एस०सी०सी० (संवैधािनक पीठ) में माननीय न्यायालय ्षारा यह िविन्षयन िकया गया िक "धारा 438 दं०्ऺ०सं० के अन्तगर्त अि्षम जमानत का उपयोग यदा-कदा मा्ऴ िवशेष पिरिस्थितयों में ही िकया जाना चािहए। अि्षम जमानत का उपयोग न्यायालय ्षारा यांि्ऴक रूप से नहीं करना चािहए। अि्षम जमानत एक ऐसा ्ऺावधान है, जो िक एक सीिमत पिरिध में होती है। न्यायालय को इस शि्व का ्ऺयोग मा्ऴ उन्हीं पिरिस्थितयों में करना चािहये, जबिक अिभयोजन ्ऺप्ऴों से यह तथ्य ्ऺकट होता हो, िक अिभयु्व के िवरू्ध कोई भी ्ऺथमदृ्िया के स घिटत न हो रहा हो।" अतएव प्ऴावली पर इस स्तर पर ऐसा कोई साष्य उपलब्ध नहीं है, िजससे यह िनष्कषर् आधािरत िकया जा सके िक ्ऺाथर्/अिभयु्व को मा्ऴ अपमािनत करने या ्षित पहुंचाने के उ्देश्य से उ्व ्ऺकरण में िगरफ्तार िकया जा सकता है। अतः ्ऺकरण की ्ऺकृ ित व गम्भीरता को दृि्िगत रखते हुए अिभयु्व का अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ स्वीकार िकये जाने हेतु पयार्प्त आधार नहीं है। तदनुसार ्ऺाथर्/अिभयु्व का अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ खािरज िकये जाने योग्य है। आदेश अिभयु्व, अशोक िम्शा, की ओर से ्ऺस्तुत अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ िनरस्त िकया जाता है।" Considering the material available on record, it cannot, at this stage, be said that the case is one of false implication. There is sufficient material collected by the investigating officer, and the investigation is still in progress. Since the offence under Section 338 BNSS is punishable with imprisonment for life and custodial interrogation may be necessary, and no case for granting anticipatory bail is made out. Accordingly, the anticipatory bail application is rejected. October 13, 2025 R.C. (Karunesh Singh Pawar,J.) RAM CHANDER YADAV High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench