✦ High Court of India · 09 Sep 2025

Vijay Shankar Pandey v. State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Deptt. Of Home Lko And

Case Details High Court of India · 09 Sep 2025

3. Relevant brief facts of the case, as pointed out by the learned counsel for the parties and born out from the record, are as under:- (i) An order was passed by the revenue Court in the proceedings related to the demarcation with regard to Gata No. 652, area 5 Bigha 2 Biswan and 3 Biswansi, situated at Village-Murtaza Nagar, District-Unnao (in short 'property in issue'). This order was favorable to the private opposite parties. (ii) The order of the revenue Court was assailed in terms of Section 219 of the UP Land Revenue Act, 1901 (in short, "Act of 1901"), which was registered as Revision No. 2014100001538 of 2014 (Vijay Shankar Pandey vs. Smt. Thakurdei and others). (iii) It is relevant to indicate that the revision aforesaid was filed impleading 2 CRLR No. 993 of 2025 Smt. Thakurdei W/o Late Harishankar, Smt. Surajmukhi W/o Ram Kishore, Chandramukhi W/o Naval Kishore and Smt. Neelam W/o Santosh Kumar, as respondents. (iv) By an order dated 03.09.2014 passed in the said revision, the parties were directed to maintain status quo. (v) After passing the order dated 03.09.2014 directing the parties to maintain status quo, Revenue Officials, including Rakesh Kumar Verma-Revenue Inspector, Sohanlal-Lekhpal, Murtazanagar, R.K.Srivastava-Sub-Inspector. P.S.-Ajgain and Avdhesh Kumar, Constable, P.S.-Ajgain, visited the property in issue on 15.09.2014, the date of incident indicated in the complaint filed by the revisionist, in compliance of order of SDM, Sadar, Unnao dated 05.08.2014 as there was no occasion for the above-named opposite parties to be present at the alleged place of occurrence. (vi) After the aforesaid, a complaint case was filed making allegations against the opposite parties therein, including the official respondents named above, to attract the offense under Sections 323, 395, 427, 504, 506, 120-B IPC. (vii) Before proceeding further in the matter, it would be apt to take note of some other facts, which are as under:- (a) The revisionist before the Revenue Authorities claimed his rights over the property in issue on the basis of a 'Will' of the recorded tenure holder. (b) The said claim of the revisionist was rejected by the SDM concerned. (c) The name of the revisionist, in view of aforesaid, was not entered in the revenue records related to property n issue including the Khsara, which is the proof of possession, based upon which it can be inferred that the revisionist was in possession of the property in issue on 15.09.2014, the alleged date of incident. (d) The observations aforesaid in the impugned order dated 24.06.2025 have not been impeached by placing on record the relevant evidence. (e) Aforesaid indicates that the revisionist was not in possession of property in issue. (f) According to complaint, the revisionist was in possession of the property 3 CRLR No. 993 of 2025 in issue on 15.09.2014, which from the aforesaid is not correct rather false.

4. Taking note of the allegations levelled in the complaint and the statement(s) recorded under Section 200 and 202 CrPC, the Magistrate by an order dated 17.11.2015 summoned the opposite parties namely Vivek Kumar Gupta, Rakesh Kumar Verma, Sohanlal Gupta, R.K.Srivastava, Avadhesh Kumar Chauhan, Dinesh, Vishambhar and Arvind to face trial for the offense under Sections 323, 379, 427, 504, 506 IPC.

5. The order dated 17.11.2025 was challenged before this Court by means of an Application U/S 482/378/407 No. 526 of 2016 (Vivek Kumar Gupta vs. State of UP and Another) and Sri Gulam Mustafa, Advocate, who appeared in the present revision, was heard and vide order dated 18.01.2017, the said application was allowed and the matter was remanded back to the Magistrate.

6. The Magistrate again vide order dated 28.07.2022 summoned the accused namely Vivek Kumar Gupta, Rakesh Kumar Verma, Sohanlal Gupta, R.K.Srivastava, Avadhesh Kumar Chauhan, Dinesh, Vishambhar and Arvind to face trial for the offense under Sections 323, 395, 427, 504, 506, 120-B IPC.

7. The order of the Magistrate dated 28.07.2022 was challenged by means of Criminal Revision No. 116 of 2022 before the District and Sessions Court at Unnao (in short "Revisional Court"). The Revisional Court allowed the said revision vide order dated 25.07.2023 and set aside the order dated

28.07.2022 passed by the Magistrate and again remanded the matter back to the Magistrate.

8. The Magistrate in compliance of the order of the Revisional Court dated

25.07.2023 passed the impugned order dated 24.06.2025, whereby the Magistrate rejected the complaint case in exercise of power under Section 203 CrPC. The relevant portion of the order dated 24.06.2025 is excerpted here under:- "7. सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया।

8. माननीय स्ऴ न्यायाधीश महोदय के आदेश िदनांिकत 25.07.2023 का ससम्मान अवलोकन िकया गया।

9. प्ऴावली के अवलोकन से िविदत होता है िक पूवर् में न्यायालय ्षारा िदनांक 28.07.2022 को पिरवादी के पिरवाद को अंतगर्त धारा- 323, 395, 427, 504, 506,120 बी भा.दं.सं. के तहत अिभयु्वगण को तलब िकया गया था। िजससे ्षुब्ध होकर अिभयु्वगण ्षारा िनगरानी न्यायालय माननीय अपर स्ऴ न्यायाधीश महोदय के सम्ष दायर की 4 CRLR No. 993 of 2025 गयी। माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा अपने आदेश िदनांिकत 25.07.2023 को अवर न्यायालय के आदेश िदनांक 28.07.2022 को अपास्त िकया गया िजस पर माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा आदेश िदनांिकत 25.07.2023 पािरत कर अवर न्यायालय को िनम्न िबन्दुओं के संदभर् पर िनष्कषर् िदये जाने हेतु िनदरॏिशत िकया गया- क. क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश के अनुपालन में पुनरी्षणकतार्गण मौके पर गये थे? ख. क्या लोकसेवक भी उप किम्शर के न्यायालय में प्षकार थे? ग. क्या धारा- 197 भा.दं.सं. की स्वीकृ ित की आवश्यकता है? माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा आदेश िदनांिकत 25.07.2023 पािरत कर अवर न्यायालय को उपरो्व विणत िबन्दुओं के संदभर् में उभय प्षों के िव्षान अिधव्वा को सुना गया। उभयप्षों ्षारा िलिखत बहस प्ऴावली पर दािखल की गयी है। माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा पािरत आदेश के अनु्वम में िदये गये िबन्दुओं पर िनष्कषर् िनम्नवत है:- क. क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश के अनुपालन में पुनरी्षणकतार्गण मौके पर गये थे? इस संबंध में िवप्षीगण ्षारा मा्ऴ यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण सं.-2,3,4,5 सरकारी कमर्चारी है तथा उपिजलािधकारी के आदेश िदनांक 05.08.2014 के अनुपालन में भूिम की पैमाइश व िनशादेही करने गये थे। वादी ्षारा उपरो्व िबन्दु के संबंध से यह कथन िकया गया है िक अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल लखनऊ के न्यायालय में भूिम सं. 652 का िवचाराधीन था और मुकदमें में मौके पर यथािस्थित बनाये रखने का आदेश िदनांक 03.09.2014 को स्षम न्यायालय ्षारा पािरत कराया था। आदेश की सत्य्ऺितिलिप नकल ्ऺस्तुत पिरवाद की प्ऴावली पर दािखल है। िवप्षीगण ्षारा यह भी कथन िकया गया है िक उन्होंने उपिजलािधकारी के आदेश िदनांक 05.08.2014 के अनुपालन में भूिम की पैमाइश व िनशादेही करने उपरो्व भूिम सं.-652 गये थे। िवप्षीगण ्षारा उपरो्व कथन के समथर्न में िलिखत आदेश िदनांिकत 05.08.2014 को की छाया्ऺित प्ऴावली पर ्ऺस्तुत की है िजसके अवलोकन से िविदत होता है िक उपिजलािधकारी ्षारा तहसीलदार को िनयमानुसार पुिलस बल के साथ िनशानदेही करने का आदेश िदया गया। िवप्षीगण ्षारा यह तकर् ्ऺस्तुत िकया है िक उपरो्व आदेश िदनांिकत 05.08.2014 के अनुपालन में उनके ्षारा भूिम पैमाइश का कायर् िकया गया है। िवप्षीगण ्षारा अपने कथन में यह भी रेखांिकत िकया गया है िक उपिजलािधकारी के आदेश िदनांक 05.08.2014 के अनुपालन में भूिम सं. 652 की पैमाइश व िनशादेही का कायर् िदया था। िवप्षीगण ्षारा ्शीमान् अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल लखनऊ ्षारा पािरत आदेश 03.09.2014 ्षारा िजसमें यथािस्थित बनाये रखने का आदेश पािरत िकया गया था िजसके संबंध में िकसी ्ऺकार का खंडन नहीं िकया गया है। वादी ्षारा अपने िलिखत कथन में यह तथ्य को स्वीकार िकया है िक वतर्मान मुकदमें में िवप्षीगण जो ्वमशः है िवप्षी सं.- 01 ्शीमती ठाकु रदेई पत्नी स्व. हरीशंकर व िवप्षी सं.- 02 ्शीमती सूरजमुखी पत्नी राम िकशोर व िवप्षी सं.-3 चन््शमुखी पत्नी नवल िकशोर व िवप्षी सं. 4 ्शीमती नीलम पत्नी संतोष कु मार है। पुनरी्षणकतार् उ्व बाद में प्षकार मुकदमा नहीं थे। अतः वादी के कथन के स्वीकृ ित के आधार पर यह स्प्ि है िक िवप्षीगण ्शीमान अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल के सम्ष प्षकार नहीं बनाये गये थे। वादी को यह िस्ध करना है िक क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश के अनुपालन में पुनरी्षणकतार्गण मौके पर गये थे? उपरो्व तथ्य और पिरिस्थितयों के िव्शेषण से वादी यह िस्ध करने में असफल रहे हैं िक अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल लखनऊ ्षारा पािरत आदेश 03.09.2014 के अनुपालन में पुनरी्षकतार् मौके पर गये थे। ख. क्या लोकसेवक भी उप किमश्नर के न्यायालय में प्षकार थे? उपरो्व के संबंध में वादी ्षारा यह कथन को स्वीकार िकया गया है िक उपरो्व लोक सेवक एवं िवप्षीगण ्शीमान् अपर आयु्व लखनऊ मण्डल में योिजत वाद में प्षकार नहीं बनाये गये थे। िवप्षीगण ्षारा यह कथन िकया गया है िक उपरो्व मुकदमे में वादी मुकदमा ्षारा न ही उन्हें कोई नोिटस ्ऺदान की गयी न ही वे उपरो्व मुकदमें में प्षकार था वादी मुकदमा ्षारा दािखल ्शीमान अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल के आदेश में िवप्षीगण को प्षकार बनाये जाने के संबंध में कोई साष्य प्ऴावली से ्ऺाप्त नहीं कराये गये हैं। न्यायालय ्षारा उपरो्व िबन्दु के संबंध में उपिजलािधकारी सदर उन्नाव से आख्या आहूत की गयी िजसके संबंध में उपिजलािधकारी सदर उन्नाव ्षारा ्ऺकरण १० वषर् से अिधक पुराना होने के कारण कायार्लय में जो अिभलेख उपलब्ध हैं उसके आधार पर ्ऺाप्त होना नहीं पाया जाता है। न्यायालय ्षारा उपिजलािधकारी सदर उन्नाव से उपरो्व ्ऺकरण में िनम्न िबन्दुओं पर आख्या मांगी थी िजनका उ्तर तािलका के रूप में अंिकत िकया गया है:- न्यायालय ्षारा मांगे गये आख्या िदनांिकत 31-05- 2025 उपिजलािधकारी ्षारा ्ऺाप्त आख्या िदनांिकत 09-06- 2025 5 CRLR No. 993 of 2025 (क) अपर आयु्व ्षारा पािरत आदेश िदनांिकत 03.09.2014 की छाया्ऺित आपके कायार्लय में ्ऺाप्त हुई है या नहीं। यिद हाँ तो िकस िदनांक को हुई है? (क) ्ऺकरण 10 वषर् से अिधक पुराना होने के कारण कायार्लय में जो अिभलेख उपलब्ध है, उसके आधार पर ्ऺाप्त होना नहीं पाया जाता है। (ख) क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश (ख) प्ऴावली उपलब्ध न होने के कारण िकसी ्ऺकार के अनुपालन में राजस्व िनरी्षक राके श वमार् व सोहन की िटप्पणी िकया जान उिचत नहीं है। लाल गुप्ता लेखपाल प्षकार थे और उन्हे उ्व आदेश की पूवर् सूचना थी या नहीं ? (ग) ्ऺाथर्ना प्ऴ िदनांिकत 04.08.2014 पर तहसीलदार (ग) प्ऴ के साथ संलग्न ्ऺाथर्ना प्ऴ के सदर व उप िजलािधकारी सदर ्षारा भूिम की िनशानदेही करवाये जाने हेतु संबंिधत को िनदरॏिशत करते हुए िदनांक 05.08.2014 को आदेश पािरत िकया गया िजसकी अवलोकनोपरान्त ्ऺाथर्ना प्ऴ पर अिकत आदेश तत्कालीन उप िजलािधकारी ्षारा िदया जाना स्प्ि है, परन्तु ्ऺाथर्ना प्ऴ पर कायार्लय पंिजका कमांक अंकन न छाया्ऺित राजस्व िनरी्षक राके श वमार् व सोहन लाल होने के कारण सत्यापन िकया जाना सम्भव नहीं है। गुप्ता लेखपाल ्षारा अपने बचाव में प्ऴावली पर दािखल उपरो्व उपिजलािधकारी सदर ्षारा ्ऺाप्त आख्या तथा की गयी है। माननीय अपर आयु्व लखनऊ मण्डल के आदेश की छाया्ऺित के अवलोकन से वादी यह िस्ध करने में असमथर् रहे हैं िक िवप्षीगण उपकिम्शर लखनऊ मण्डल के आदेश में प्षकार बनाये गये थे? उपरो्व तथ्यों पिरिस्थतयों यह स्प्ि होता है िक लोक सेवक उपकिमश्नर के न्यायालय में प्षकार नहीं थे। ग. क्या धारा- 197 द०्ऺ०सं० की स्वीकृ ित की आवश्यकता है? उपरो्व िबन्दु के संदभर् में धारा 197 द०्ऺ०सं० का उल्लेख िकया जाना समीिचन है। जो िनम्नवत् हैः- धारा 197 द०्ऺ०सं० न्यायाधीशों और लोक सेवकों का अिभयोजन। जब कोई ्िि्व, जो न्यायाधीश या मिजस््िेट या लोक सेवक है या था, िजसे सरकार की मंजूरी के िबना उसके पद से हटाया नहीं जा सकता, िकसी ऐसे अपराध का अिभयु्व है जो उसके ्षारा अपने पदीय कतर््ि के िनवर्हन में कायर् करते समय या कायर् करने का तात्पयर् रखते समय िकया गया अिभकथिनत है, तब कोई न्यायालय ऐसे अपराध का सं्ञान पूवर् मंजूरी के िबना नहीं लेगा। वादी ्षारा यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण िबना िकसी उच्चािधकारी के आदेश के अनु्वम में मौके पर यथािस्थित कायम होने के उपरान्त भी उनके ्षारा मार पीट िकये जाने, गाली गलौज करते हुए फसल न्ि करने का कायर् कराया गया जो िक आफीिसयल ्यूटी के अधीन नहीं होना ्ऺतीत होता है। इसी ्वम में वादी प्ष ्षारा माननीय सवरॏच्च न्यायालय ्षारा राजीब रंजन आिद बनाम िवजय कु मार 2015 CLJ 267 (Supreme Court) की नजीर अपने समथर्न में दािखल की है। मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा उपरो्व मुकदमें में यह िविधमत ्ऺितपािदत िकया गया है िक "Criminal P.C (2 of 1974), S. 197-Sanction for prosecution- discharging official duties- Public servant entering into criminal conspiracy or indulging in criminal misconduct. Such misdemeanour on his part is not to be treated as act in discharge of his official duties.- Therefore, provisions of S 197 would not be attracted". वादी ्षारा िवप्षीगण पर आरोप लगाया गया है िक वादीगण ्षारा उपरो्व अपराध आिफिसयल ्यूटी की ्शेणी में नहीं आता है। िवप्षीगण ्षारा अपने बचाव में यह कथन िकया गया है िक उनके ्षारा कोई अपराध नहीं िकया गया है। िवप्षीगण ्षारा अपने उच्चािधकािरयों ्षारा िदये गये आदेशों के अनुपालन में मौके पर िदये गये पैमाइस का कायर् िकया जा रहा था अपने कथनों के समथर्न में उनके ्षारा उपिजलािधकारी ्षारा आदेश 05-08- 2014 की छाया्ऺित दािखल की गयी और उ्व आदेश की सत्या्ता के संबंध में उपिजलािधकारी सदर ्षारा 09-06- 2025 को आख्या ्ऺस्तुत की गयी। उपरो्व उभयप्षों के तकों के आधार पर न्यायालय को िबन्दु (ग) क्या धारा 6 CRLR No. 993 of 2025 197 द०्ऺ०सं० की स्वीकृ ित की आवश्यकता है, को िनस्तािरत करने का िनदरॏश ्ऺाप्त हुआ है। इसी ्वम में मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा जी.सी. नाथ एवं अन्य बनाम सीताराम आपरािधक अपील सं० 1759/2025 का उल्लेख िकया जाना समीिचन ्ऺतीत होता है। मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा जी.सी. मंजूनाथ एवं अन्य बनाम सीताराम आपरािधक अपील सं० 1759/2025 में िविधमत पािरत िकया गया िक "धारा 197 CrPC और पुिलस अिधिनयम की धारा 170 के तहत आवश्यक स्वीकृ ित की सुर्षा के वल इस कारण समाप्त नहीं हो सकती िक कायर् अिधकार की सीमाओं से बाहर था।" तथा यह भी अिभमत ्ऺितपािदत िकया गया है िक "कोई भी कायर् जो एक सरकारी अिधकारी ्षारा िकया गया हो, भले ही वह उनके अिधकृ त दायरे से बाहर हो या उनके सरकारी कतर््िों की सीमाओं को पार करता हो, तब भी वैधािनक सुर्षा ्ऺदान की जाएगी, यिद उस कायर् और अिधकारी के सरकारी कतर््िों के बीच एक युि्वसंगत संबंध मौजूद हो।" मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा पािरत िविध ्िवस्था के ्ऺकाश में यह स्प्ि है िक यिद सरकारी कमर्चारी ्षारा कायर् िकया गया हो भले ही वह अिधकार से बाहर हो, और उस सरकारी कायर् का तािकक रूप से जुड़ा होना िस्ध होता हो तो उन सरकारी कमर्चािरयों को वैधािनक सुर्षा ्ऺाप्त होगी। िवप्षीगण ्षारा अपने बचाव में उपिजलािधकारी के आदेश िदनांिकत 05-08-2014 के अनु्वम में घटनास्थल पर पैमाइश का कायर् िकये जाने का कथन िकया गया है तथा उस कथानक के समथर्न में उनके ्षारा आदेश की छाया्ऺित न्यायालय में ्ऺस्तुत की। आदेश िदनांिकत 05-08-2014 की सत्यता के संबंध में उपिजलािधकारी ्षार आख्या िदनांिकत 09-06-2025 प्ऴावली में ्ऺाप्त है। अतः वादी यह िस्ध करने असफल रहे हैं िक िवप्षीगण ्षारा उपरो्व कृ त्य िबना िकसी अनािधकािरक रूप में तथा ऑिफिसयल ्यूटी के अधीन कािरत िकया गया है।

10. मा० स्ऴ न्यायाधीश महोदय के आदेश िदनांिकत 25-07-2023 में उिल्लिखत 03 िबन्दुओं पर िनष्कषर् िनकालने हेतु आदेिशत िकया गया था िजसके अनुपालन में उभयप्षों के िव्षान अिधव्वा महोदय को सुना गया। उपरो्व तथ्यों एवं िव्शेशण के आधार पर न्यायालय का यह मत है िक िवप्षीगण घटना स्थल पर आदेश िदनांक 05-08- 2014 के अनुपालन में पैमाइश हेतु जाना िविदत होता है। उपरो्व कृ त्य उनके उच्चािधकािरयों ्षारा आदेश के अनुपालन में िकया गया था। अतः पिब्लक सरवेन्ट ्षारा अपने आिफिसयल ्यूटी के िनवार्हन में िकये गये कायॏल के संबंध में धारा 197 द०्ऺ०सं० के तहत पूवर् अनुमित िलया जाना आवश्यक ्ऺतीत होता है। ्ऺस्तुत ्ऺकरण में वादी प्ऴ ्षारा धारा 197 द०्ऺ०सं० के तहत अनुपालन के संबंध में कोई साष्य या कथन नहीं िकया गया है।

11. ्ऺस्तुत ्ऺकरण में वादी मुकदमा के ्षारा मा० स्ऴ न्यायालय ्षारा उिल्लिखत िबन्दुओं को अपने प्ष में िस्ध करने में असफल रहे हैं तथा धारा 197 द०्ऺ०सं० का अनुपालन पिरवादी ्षारा नहीं िकया गया है। पिरवादी ्षारा अपने पिरवाद में िवप्षीगण ्षारा पु्ऴ के साथ गाली-गलौज करने मार-पीट तथा जेब से दो हजार रूपये िनकाल लेने का कथन िकया है। मार-पीट व चोटों के संबंध में वादी ्षारा कोई िचिकत्सकीय उपचार प्ऴ प्ऴावली में दािखल नहीं िकये हैं। अतः उपरो्व िनष्कषर् के आधार पर अिभयु्वगण को तलब िकया जाना समीिचन ्ऺतीत नहीं होता है। आदेश उपरो्व िनष्कषर् के साथ ्ऺस्तुत पिरवाद संख्या - 2919/2014 िवजय शंकर बनाम िववेक कु मार आिद, अंतगर्त थाना - अजगैन, िजला उन्नाव, अन्तगर्त धारा- 203 दं.्ऺ.सं में िनरस्त िकया जाता है। प्ऴावली िनयमानुसार दािखल दफ्तर िकया जाए।"

9. In view of the aforesaid background of the case, the present revision has been filed.

10. Upon due consideration of the aforesaid as also the submissions advanced by the learned counsel for the parties and a perusal of the record from where the aforesaid facts have been referred, this Court finds no force in the present revision. It is for the following reason:- (i) To a purely civil dispute, a criminal color has been given by the revisionist by making allegations, including that he was in possession of the property in issue and that he had harvested the said land. In this regard, facts have been mentioned in para 3(vii) of the order. (ii) To establish the facts aforesaid, the Khasra or Khatauni has not been 7 CRLR No. 993 of 2025 placed on record. (iii) In view of aforesaid, this Court is of the opinion that complaint of the revisionist is completely frivolous and an abuse of the process of law.

11. For the reasons aforesaid, this Court finds that the revision is liable to be dismissed with costs. Accordingly, the revision is dismissed with the cost of Rs. 10,000, which shall be deposited before this Court concerned within one month, failing which, the same shall be recovered as arrears of land revenue. This amount shall be utilized by this Court for providing Legal Aid. September 9, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

3. Relevant brief facts of the case, as pointed out by the learned counsel for the parties and born out from the record, are as under:- (i) An order was passed by the revenue Court in the proceedings related to the demarcation with regard to Gata No. 652, area 5 Bigha 2 Biswan and 3 Biswansi, situated at Village-Murtaza Nagar, District-Unnao (in short 'property in issue'). This order was favorable to the private opposite parties. (ii) The order of the revenue Court was assailed in terms of Section 219 of the UP Land Revenue Act, 1901 (in short, "Act of 1901"), which was registered as Revision No. 2014100001538 of 2014 (Vijay Shankar Pandey vs. Smt. Thakurdei and others). (iii) It is relevant to indicate that the revision aforesaid was filed impleading 2 CRLR No. 993 of 2025 Smt. Thakurdei W/o Late Harishankar, Smt. Surajmukhi W/o Ram Kishore, Chandramukhi W/o Naval Kishore and Smt. Neelam W/o Santosh Kumar, as respondents. (iv) By an order dated 03.09.2014 passed in the said revision, the parties were directed to maintain status quo. (v) After passing the order dated 03.09.2014 directing the parties to maintain status quo, Revenue Officials, including Rakesh Kumar Verma-Revenue Inspector, Sohanlal-Lekhpal, Murtazanagar, R.K.Srivastava-Sub-Inspector. P.S.-Ajgain and Avdhesh Kumar, Constable, P.S.-Ajgain, visited the property in issue on 15.09.2014, the date of incident indicated in the complaint filed by the revisionist, in compliance of order of SDM, Sadar, Unnao dated 05.08.2014 as there was no occasion for the above-named opposite parties to be present at the alleged place of occurrence. (vi) After the aforesaid, a complaint case was filed making allegations against the opposite parties therein, including the official respondents named above, to attract the offense under Sections 323, 395, 427, 504, 506, 120-B IPC. (vii) Before proceeding further in the matter, it would be apt to take note of some other facts, which are as under:- (a) The revisionist before the Revenue Authorities claimed his rights over the property in issue on the basis of a 'Will' of the recorded tenure holder. (b) The said claim of the revisionist was rejected by the SDM concerned. (c) The name of the revisionist, in view of aforesaid, was not entered in the revenue records related to property n issue including the Khsara, which is the proof of possession, based upon which it can be inferred that the revisionist was in possession of the property in issue on 15.09.2014, the alleged date of incident. (d) The observations aforesaid in the impugned order dated 24.06.2025 have not been impeached by placing on record the relevant evidence. (e) Aforesaid indicates that the revisionist was not in possession of property in issue. (f) According to complaint, the revisionist was in possession of the property 3 CRLR No. 993 of 2025 in issue on 15.09.2014, which from the aforesaid is not correct rather false.

4. Taking note of the allegations levelled in the complaint and the statement(s) recorded under Section 200 and 202 CrPC, the Magistrate by an order dated 17.11.2015 summoned the opposite parties namely Vivek Kumar Gupta, Rakesh Kumar Verma, Sohanlal Gupta, R.K.Srivastava, Avadhesh Kumar Chauhan, Dinesh, Vishambhar and Arvind to face trial for the offense under Sections 323, 379, 427, 504, 506 IPC.

5. The order dated 17.11.2025 was challenged before this Court by means of an Application U/S 482/378/407 No. 526 of 2016 (Vivek Kumar Gupta vs. State of UP and Another) and Sri Gulam Mustafa, Advocate, who appeared in the present revision, was heard and vide order dated 18.01.2017, the said application was allowed and the matter was remanded back to the Magistrate.

6. The Magistrate again vide order dated 28.07.2022 summoned the accused namely Vivek Kumar Gupta, Rakesh Kumar Verma, Sohanlal Gupta, R.K.Srivastava, Avadhesh Kumar Chauhan, Dinesh, Vishambhar and Arvind to face trial for the offense under Sections 323, 395, 427, 504, 506, 120-B IPC.

7. The order of the Magistrate dated 28.07.2022 was challenged by means of Criminal Revision No. 116 of 2022 before the District and Sessions Court at Unnao (in short "Revisional Court"). The Revisional Court allowed the said revision vide order dated 25.07.2023 and set aside the order dated

28.07.2022 passed by the Magistrate and again remanded the matter back to the Magistrate.

8. The Magistrate in compliance of the order of the Revisional Court dated

25.07.2023 passed the impugned order dated 24.06.2025, whereby the Magistrate rejected the complaint case in exercise of power under Section 203 CrPC. The relevant portion of the order dated 24.06.2025 is excerpted here under:- "7. सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया।

8. माननीय स्ऴ न्यायाधीश महोदय के आदेश िदनांिकत 25.07.2023 का ससम्मान अवलोकन िकया गया।

9. प्ऴावली के अवलोकन से िविदत होता है िक पूवर् में न्यायालय ्षारा िदनांक 28.07.2022 को पिरवादी के पिरवाद को अंतगर्त धारा- 323, 395, 427, 504, 506,120 बी भा.दं.सं. के तहत अिभयु्वगण को तलब िकया गया था। िजससे ्षुब्ध होकर अिभयु्वगण ्षारा िनगरानी न्यायालय माननीय अपर स्ऴ न्यायाधीश महोदय के सम्ष दायर की 4 CRLR No. 993 of 2025 गयी। माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा अपने आदेश िदनांिकत 25.07.2023 को अवर न्यायालय के आदेश िदनांक 28.07.2022 को अपास्त िकया गया िजस पर माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा आदेश िदनांिकत 25.07.2023 पािरत कर अवर न्यायालय को िनम्न िबन्दुओं के संदभर् पर िनष्कषर् िदये जाने हेतु िनदरॏिशत िकया गया- क. क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश के अनुपालन में पुनरी्षणकतार्गण मौके पर गये थे? ख. क्या लोकसेवक भी उप किम्शर के न्यायालय में प्षकार थे? ग. क्या धारा- 197 भा.दं.सं. की स्वीकृ ित की आवश्यकता है? माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा आदेश िदनांिकत 25.07.2023 पािरत कर अवर न्यायालय को उपरो्व विणत िबन्दुओं के संदभर् में उभय प्षों के िव्षान अिधव्वा को सुना गया। उभयप्षों ्षारा िलिखत बहस प्ऴावली पर दािखल की गयी है। माननीय स्ऴ न्यायालय ्षारा पािरत आदेश के अनु्वम में िदये गये िबन्दुओं पर िनष्कषर् िनम्नवत है:- क. क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश के अनुपालन में पुनरी्षणकतार्गण मौके पर गये थे? इस संबंध में िवप्षीगण ्षारा मा्ऴ यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण सं.-2,3,4,5 सरकारी कमर्चारी है तथा उपिजलािधकारी के आदेश िदनांक 05.08.2014 के अनुपालन में भूिम की पैमाइश व िनशादेही करने गये थे। वादी ्षारा उपरो्व िबन्दु के संबंध से यह कथन िकया गया है िक अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल लखनऊ के न्यायालय में भूिम सं. 652 का िवचाराधीन था और मुकदमें में मौके पर यथािस्थित बनाये रखने का आदेश िदनांक 03.09.2014 को स्षम न्यायालय ्षारा पािरत कराया था। आदेश की सत्य्ऺितिलिप नकल ्ऺस्तुत पिरवाद की प्ऴावली पर दािखल है। िवप्षीगण ्षारा यह भी कथन िकया गया है िक उन्होंने उपिजलािधकारी के आदेश िदनांक 05.08.2014 के अनुपालन में भूिम की पैमाइश व िनशादेही करने उपरो्व भूिम सं.-652 गये थे। िवप्षीगण ्षारा उपरो्व कथन के समथर्न में िलिखत आदेश िदनांिकत 05.08.2014 को की छाया्ऺित प्ऴावली पर ्ऺस्तुत की है िजसके अवलोकन से िविदत होता है िक उपिजलािधकारी ्षारा तहसीलदार को िनयमानुसार पुिलस बल के साथ िनशानदेही करने का आदेश िदया गया। िवप्षीगण ्षारा यह तकर् ्ऺस्तुत िकया है िक उपरो्व आदेश िदनांिकत 05.08.2014 के अनुपालन में उनके ्षारा भूिम पैमाइश का कायर् िकया गया है। िवप्षीगण ्षारा अपने कथन में यह भी रेखांिकत िकया गया है िक उपिजलािधकारी के आदेश िदनांक 05.08.2014 के अनुपालन में भूिम सं. 652 की पैमाइश व िनशादेही का कायर् िदया था। िवप्षीगण ्षारा ्शीमान् अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल लखनऊ ्षारा पािरत आदेश 03.09.2014 ्षारा िजसमें यथािस्थित बनाये रखने का आदेश पािरत िकया गया था िजसके संबंध में िकसी ्ऺकार का खंडन नहीं िकया गया है। वादी ्षारा अपने िलिखत कथन में यह तथ्य को स्वीकार िकया है िक वतर्मान मुकदमें में िवप्षीगण जो ्वमशः है िवप्षी सं.- 01 ्शीमती ठाकु रदेई पत्नी स्व. हरीशंकर व िवप्षी सं.- 02 ्शीमती सूरजमुखी पत्नी राम िकशोर व िवप्षी सं.-3 चन््शमुखी पत्नी नवल िकशोर व िवप्षी सं. 4 ्शीमती नीलम पत्नी संतोष कु मार है। पुनरी्षणकतार् उ्व बाद में प्षकार मुकदमा नहीं थे। अतः वादी के कथन के स्वीकृ ित के आधार पर यह स्प्ि है िक िवप्षीगण ्शीमान अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल के सम्ष प्षकार नहीं बनाये गये थे। वादी को यह िस्ध करना है िक क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश के अनुपालन में पुनरी्षणकतार्गण मौके पर गये थे? उपरो्व तथ्य और पिरिस्थितयों के िव्शेषण से वादी यह िस्ध करने में असफल रहे हैं िक अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल लखनऊ ्षारा पािरत आदेश 03.09.2014 के अनुपालन में पुनरी्षकतार् मौके पर गये थे। ख. क्या लोकसेवक भी उप किमश्नर के न्यायालय में प्षकार थे? उपरो्व के संबंध में वादी ्षारा यह कथन को स्वीकार िकया गया है िक उपरो्व लोक सेवक एवं िवप्षीगण ्शीमान् अपर आयु्व लखनऊ मण्डल में योिजत वाद में प्षकार नहीं बनाये गये थे। िवप्षीगण ्षारा यह कथन िकया गया है िक उपरो्व मुकदमे में वादी मुकदमा ्षारा न ही उन्हें कोई नोिटस ्ऺदान की गयी न ही वे उपरो्व मुकदमें में प्षकार था वादी मुकदमा ्षारा दािखल ्शीमान अपर आयु्व ्ऺशासन लखनऊ मण्डल के आदेश में िवप्षीगण को प्षकार बनाये जाने के संबंध में कोई साष्य प्ऴावली से ्ऺाप्त नहीं कराये गये हैं। न्यायालय ्षारा उपरो्व िबन्दु के संबंध में उपिजलािधकारी सदर उन्नाव से आख्या आहूत की गयी िजसके संबंध में उपिजलािधकारी सदर उन्नाव ्षारा ्ऺकरण १० वषर् से अिधक पुराना होने के कारण कायार्लय में जो अिभलेख उपलब्ध हैं उसके आधार पर ्ऺाप्त होना नहीं पाया जाता है। न्यायालय ्षारा उपिजलािधकारी सदर उन्नाव से उपरो्व ्ऺकरण में िनम्न िबन्दुओं पर आख्या मांगी थी िजनका उ्तर तािलका के रूप में अंिकत िकया गया है:- न्यायालय ्षारा मांगे गये आख्या िदनांिकत 31-05- 2025 उपिजलािधकारी ्षारा ्ऺाप्त आख्या िदनांिकत 09-06- 2025 5 CRLR No. 993 of 2025 (क) अपर आयु्व ्षारा पािरत आदेश िदनांिकत 03.09.2014 की छाया्ऺित आपके कायार्लय में ्ऺाप्त हुई है या नहीं। यिद हाँ तो िकस िदनांक को हुई है? (क) ्ऺकरण 10 वषर् से अिधक पुराना होने के कारण कायार्लय में जो अिभलेख उपलब्ध है, उसके आधार पर ्ऺाप्त होना नहीं पाया जाता है। (ख) क्या अपर आयु्व के ्षारा पािरत यथािस्थित आदेश (ख) प्ऴावली उपलब्ध न होने के कारण िकसी ्ऺकार के अनुपालन में राजस्व िनरी्षक राके श वमार् व सोहन की िटप्पणी िकया जान उिचत नहीं है। लाल गुप्ता लेखपाल प्षकार थे और उन्हे उ्व आदेश की पूवर् सूचना थी या नहीं ? (ग) ्ऺाथर्ना प्ऴ िदनांिकत 04.08.2014 पर तहसीलदार (ग) प्ऴ के साथ संलग्न ्ऺाथर्ना प्ऴ के सदर व उप िजलािधकारी सदर ्षारा भूिम की िनशानदेही करवाये जाने हेतु संबंिधत को िनदरॏिशत करते हुए िदनांक 05.08.2014 को आदेश पािरत िकया गया िजसकी अवलोकनोपरान्त ्ऺाथर्ना प्ऴ पर अिकत आदेश तत्कालीन उप िजलािधकारी ्षारा िदया जाना स्प्ि है, परन्तु ्ऺाथर्ना प्ऴ पर कायार्लय पंिजका कमांक अंकन न छाया्ऺित राजस्व िनरी्षक राके श वमार् व सोहन लाल होने के कारण सत्यापन िकया जाना सम्भव नहीं है। गुप्ता लेखपाल ्षारा अपने बचाव में प्ऴावली पर दािखल उपरो्व उपिजलािधकारी सदर ्षारा ्ऺाप्त आख्या तथा की गयी है। माननीय अपर आयु्व लखनऊ मण्डल के आदेश की छाया्ऺित के अवलोकन से वादी यह िस्ध करने में असमथर् रहे हैं िक िवप्षीगण उपकिम्शर लखनऊ मण्डल के आदेश में प्षकार बनाये गये थे? उपरो्व तथ्यों पिरिस्थतयों यह स्प्ि होता है िक लोक सेवक उपकिमश्नर के न्यायालय में प्षकार नहीं थे। ग. क्या धारा- 197 द०्ऺ०सं० की स्वीकृ ित की आवश्यकता है? उपरो्व िबन्दु के संदभर् में धारा 197 द०्ऺ०सं० का उल्लेख िकया जाना समीिचन है। जो िनम्नवत् हैः- धारा 197 द०्ऺ०सं० न्यायाधीशों और लोक सेवकों का अिभयोजन। जब कोई ्िि्व, जो न्यायाधीश या मिजस््िेट या लोक सेवक है या था, िजसे सरकार की मंजूरी के िबना उसके पद से हटाया नहीं जा सकता, िकसी ऐसे अपराध का अिभयु्व है जो उसके ्षारा अपने पदीय कतर््ि के िनवर्हन में कायर् करते समय या कायर् करने का तात्पयर् रखते समय िकया गया अिभकथिनत है, तब कोई न्यायालय ऐसे अपराध का सं्ञान पूवर् मंजूरी के िबना नहीं लेगा। वादी ्षारा यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण िबना िकसी उच्चािधकारी के आदेश के अनु्वम में मौके पर यथािस्थित कायम होने के उपरान्त भी उनके ्षारा मार पीट िकये जाने, गाली गलौज करते हुए फसल न्ि करने का कायर् कराया गया जो िक आफीिसयल ्यूटी के अधीन नहीं होना ्ऺतीत होता है। इसी ्वम में वादी प्ष ्षारा माननीय सवरॏच्च न्यायालय ्षारा राजीब रंजन आिद बनाम िवजय कु मार 2015 CLJ 267 (Supreme Court) की नजीर अपने समथर्न में दािखल की है। मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा उपरो्व मुकदमें में यह िविधमत ्ऺितपािदत िकया गया है िक "Criminal P.C (2 of 1974), S. 197-Sanction for prosecution- discharging official duties- Public servant entering into criminal conspiracy or indulging in criminal misconduct. Such misdemeanour on his part is not to be treated as act in discharge of his official duties.- Therefore, provisions of S 197 would not be attracted". वादी ्षारा िवप्षीगण पर आरोप लगाया गया है िक वादीगण ्षारा उपरो्व अपराध आिफिसयल ्यूटी की ्शेणी में नहीं आता है। िवप्षीगण ्षारा अपने बचाव में यह कथन िकया गया है िक उनके ्षारा कोई अपराध नहीं िकया गया है। िवप्षीगण ्षारा अपने उच्चािधकािरयों ्षारा िदये गये आदेशों के अनुपालन में मौके पर िदये गये पैमाइस का कायर् िकया जा रहा था अपने कथनों के समथर्न में उनके ्षारा उपिजलािधकारी ्षारा आदेश 05-08- 2014 की छाया्ऺित दािखल की गयी और उ्व आदेश की सत्या्ता के संबंध में उपिजलािधकारी सदर ्षारा 09-06- 2025 को आख्या ्ऺस्तुत की गयी। उपरो्व उभयप्षों के तकों के आधार पर न्यायालय को िबन्दु (ग) क्या धारा 6 CRLR No. 993 of 2025 197 द०्ऺ०सं० की स्वीकृ ित की आवश्यकता है, को िनस्तािरत करने का िनदरॏश ्ऺाप्त हुआ है। इसी ्वम में मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा जी.सी. नाथ एवं अन्य बनाम सीताराम आपरािधक अपील सं० 1759/2025 का उल्लेख िकया जाना समीिचन ्ऺतीत होता है। मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा जी.सी. मंजूनाथ एवं अन्य बनाम सीताराम आपरािधक अपील सं० 1759/2025 में िविधमत पािरत िकया गया िक "धारा 197 CrPC और पुिलस अिधिनयम की धारा 170 के तहत आवश्यक स्वीकृ ित की सुर्षा के वल इस कारण समाप्त नहीं हो सकती िक कायर् अिधकार की सीमाओं से बाहर था।" तथा यह भी अिभमत ्ऺितपािदत िकया गया है िक "कोई भी कायर् जो एक सरकारी अिधकारी ्षारा िकया गया हो, भले ही वह उनके अिधकृ त दायरे से बाहर हो या उनके सरकारी कतर््िों की सीमाओं को पार करता हो, तब भी वैधािनक सुर्षा ्ऺदान की जाएगी, यिद उस कायर् और अिधकारी के सरकारी कतर््िों के बीच एक युि्वसंगत संबंध मौजूद हो।" मा० सवरॏच्च न्यायालय ्षारा पािरत िविध ्िवस्था के ्ऺकाश में यह स्प्ि है िक यिद सरकारी कमर्चारी ्षारा कायर् िकया गया हो भले ही वह अिधकार से बाहर हो, और उस सरकारी कायर् का तािकक रूप से जुड़ा होना िस्ध होता हो तो उन सरकारी कमर्चािरयों को वैधािनक सुर्षा ्ऺाप्त होगी। िवप्षीगण ्षारा अपने बचाव में उपिजलािधकारी के आदेश िदनांिकत 05-08-2014 के अनु्वम में घटनास्थल पर पैमाइश का कायर् िकये जाने का कथन िकया गया है तथा उस कथानक के समथर्न में उनके ्षारा आदेश की छाया्ऺित न्यायालय में ्ऺस्तुत की। आदेश िदनांिकत 05-08-2014 की सत्यता के संबंध में उपिजलािधकारी ्षार आख्या िदनांिकत 09-06-2025 प्ऴावली में ्ऺाप्त है। अतः वादी यह िस्ध करने असफल रहे हैं िक िवप्षीगण ्षारा उपरो्व कृ त्य िबना िकसी अनािधकािरक रूप में तथा ऑिफिसयल ्यूटी के अधीन कािरत िकया गया है।

10. मा० स्ऴ न्यायाधीश महोदय के आदेश िदनांिकत 25-07-2023 में उिल्लिखत 03 िबन्दुओं पर िनष्कषर् िनकालने हेतु आदेिशत िकया गया था िजसके अनुपालन में उभयप्षों के िव्षान अिधव्वा महोदय को सुना गया। उपरो्व तथ्यों एवं िव्शेशण के आधार पर न्यायालय का यह मत है िक िवप्षीगण घटना स्थल पर आदेश िदनांक 05-08- 2014 के अनुपालन में पैमाइश हेतु जाना िविदत होता है। उपरो्व कृ त्य उनके उच्चािधकािरयों ्षारा आदेश के अनुपालन में िकया गया था। अतः पिब्लक सरवेन्ट ्षारा अपने आिफिसयल ्यूटी के िनवार्हन में िकये गये कायॏल के संबंध में धारा 197 द०्ऺ०सं० के तहत पूवर् अनुमित िलया जाना आवश्यक ्ऺतीत होता है। ्ऺस्तुत ्ऺकरण में वादी प्ऴ ्षारा धारा 197 द०्ऺ०सं० के तहत अनुपालन के संबंध में कोई साष्य या कथन नहीं िकया गया है।

11. ्ऺस्तुत ्ऺकरण में वादी मुकदमा के ्षारा मा० स्ऴ न्यायालय ्षारा उिल्लिखत िबन्दुओं को अपने प्ष में िस्ध करने में असफल रहे हैं तथा धारा 197 द०्ऺ०सं० का अनुपालन पिरवादी ्षारा नहीं िकया गया है। पिरवादी ्षारा अपने पिरवाद में िवप्षीगण ्षारा पु्ऴ के साथ गाली-गलौज करने मार-पीट तथा जेब से दो हजार रूपये िनकाल लेने का कथन िकया है। मार-पीट व चोटों के संबंध में वादी ्षारा कोई िचिकत्सकीय उपचार प्ऴ प्ऴावली में दािखल नहीं िकये हैं। अतः उपरो्व िनष्कषर् के आधार पर अिभयु्वगण को तलब िकया जाना समीिचन ्ऺतीत नहीं होता है। आदेश उपरो्व िनष्कषर् के साथ ्ऺस्तुत पिरवाद संख्या - 2919/2014 िवजय शंकर बनाम िववेक कु मार आिद, अंतगर्त थाना - अजगैन, िजला उन्नाव, अन्तगर्त धारा- 203 दं.्ऺ.सं में िनरस्त िकया जाता है। प्ऴावली िनयमानुसार दािखल दफ्तर िकया जाए।"

9. In view of the aforesaid background of the case, the present revision has been filed.

10. Upon due consideration of the aforesaid as also the submissions advanced by the learned counsel for the parties and a perusal of the record from where the aforesaid facts have been referred, this Court finds no force in the present revision. It is for the following reason:- (i) To a purely civil dispute, a criminal color has been given by the revisionist by making allegations, including that he was in possession of the property in issue and that he had harvested the said land. In this regard, facts have been mentioned in para 3(vii) of the order. (ii) To establish the facts aforesaid, the Khasra or Khatauni has not been 7 CRLR No. 993 of 2025 placed on record. (iii) In view of aforesaid, this Court is of the opinion that complaint of the revisionist is completely frivolous and an abuse of the process of law.

11. For the reasons aforesaid, this Court finds that the revision is liable to be dismissed with costs. Accordingly, the revision is dismissed with the cost of Rs. 10,000, which shall be deposited before this Court concerned within one month, failing which, the same shall be recovered as arrears of land revenue. This amount shall be utilized by this Court for providing Legal Aid. September 9, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

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