Ram Dularey v. State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And
Case Details
1. Heard Sri Rajeev Kumar Mishra Rudra, learned counsel for the revisionist and Sri Badrul Hasan, learned AGA for the State and perused the record.
2. Present revision has been filed by the revisionist challenging the order dated 16.07.2025 passed by the learned Additional District and Sessions Judge/Special Judge, POCSO Act, Gonda in Complaint Case No. 56 of 2024 (Ram Dularey vs. Sanjay Verma and Others).
3. Vide impugned order dated 16.07.2025, the trial Court dismissed complaint case instituted by the revisionist-Ram Dularey and proceeded in terms of Section 22 of the Prevention of Children from Sexual Offences Act, 2012 (in short "Act of 2012") against the complainant.
4. The case set up in the complaint in nutshell is to the effect that on
08.05.2024 at about 08:00 PM, the opposite party No.-Sanjay Verma and opposite party No.3-Rajesh Verma, both real brothers, committed rape in open area i.e. agricultural field with the victim No.1, who is elder daughter of the complainant-revisionist and opposite party No.4-Deepak Verma and opposite party No.5-Vikky @ Adarsh Verma, both sons of opposite party No.2-Sanjay Verma, on the same date and time i.e. 08.05.2024 at about 08:00 PM and same place i.e. agricultural field, committed rape with younger daughter, who is victim No.2, of the complainant-revisionist.
5. It is to be noted that an application levelling allegations aforesaid was preferred by the complainant-revisionist under Section 156(3) CrPC and the 2 CRLR No. 978 of 2025 trial Court treated the same as complaint case vide order dated 21.06.2024. Relevant portion of the order dated 21.06.2024 is extracted hereinunder:- "्ऺाथर्ना प्ऴ पर आवेदक के िव्षान अिधव्वा को सुना एवं प्ऴावली का अवलोकन िकया। न्यायालय ्षारा थाने से आख्या आहूत की गयी। थाना कनरॏलगंज, िजला गोण्डा की आख्या में स्प्ि कथन िकया गया है िक आवेदक व िवप्षीगण संजय कु मार वमार् आिद के मध्य िदनांक 15-04-2024 को खेत रेहन को छु ड़ाने को लेकर आपस में मारपीट गाली गलौच िकये थे, िजसमें दोनों प्षों की तरफ से एक दूसरे के िवरू्ध मुकदमा अपराध संख्या-163/2024, धारा-323, 504, 506 भारतीय दण्ड संिहता बनाम संजय कु मार वमार् आिद उपरो्व तथा मुकदमा अपराध संख्या 169/2024 बनाम रामदूलारे आिद के िवरू्ध पंजीकृ त िकया गया तमामी िववेचना से ्ऺाप्त साष्य के आधार पर उपरो्व मुकदमे में आरोप प्ऴ ्ऺेिषत िकया गया है। अब आवेदक रामदुलारे उपरो्व िवप्षी सजय कु मार वमार् के िवरू्ध अन्य गंभीर अपराध कािरत कराने हेतु मनगढंत कहानी बनाकर सत्यता से परे अिभयोग पंजीकृ त कराना चाहता है। इस सम्बन्ध में थाना स्थानीय पर अिभयोग पंजीकृ त नहीं है। माननीय उच्चतम् न्यायालय के अ्यतन िनणर्य मोना पवार ्ऺित माननीय इलाहाबाद उच न्यायालय ्षारा रिजस््िार 2011 (2) ए० सी० जे० पेज 1691 िनणर्य में िदये गये िविध िस्धान्त के आलोक में एवं सम्बिधत थाने की आख्या एवं ्ऺाथी के ्ऺाथर्ना प्ऴ में विणत तथ्यों एवं अन्तर वस्तुओं के आलोक में मेरी राय में इस ्ऺकरण के सभी साष्य (घटना का िदनांक, समय व स्थान) आवेदक के सं्ञान एवं िनयं्ऴण में हैं, िजन्हे आवेदक स्वयं ्ऺस्तुत करके अपने के स को सािबत कर सकता है, इसिलए िववेचना कराये जाने का कोई पयार्प्त आधार नहीं है। अतः मामले के तथ्य एवं पिरिस्थितयों को दृि्िगत रखते हुए आवेदक का ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा-156 (3) दं०्ऺ०सं० पिरवाद के रूप में दजर् िकये जाने योग्य है। आदेश आवेदक रामदुलारे ्षारा ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना-प्ऴ अन्तगर्त धारा-156(3) दण्ड ्ऺि्वया संिहता पिरवाद के रूप दजर् हो। वास्ते बयान पिरवादी अन्तगर्त धारा-200 दण्ड ्ऺि्वया संिहता प्ऴावली िदनांक-04-7-2024 को पेश हो।"
6. After the aforesaid order dated 21.06.2024, referred above, the statement(s) of complainant-revisionist and victim Nos.1 and 2 as also Dr. Chetna Parashar were recorded in terms of Section 200 and 202 CrPC, respectively.
7. The trial Court, after treating the application preferred under Section 156(3) CrPC as complaint case and the statements recorded before it as also Medico Legal Examination Report of victim No.1, according to which, the victim No.1 sustained injuries i.e. (i). Red contused abrasion on left Shoulder measuring 6x1 cm; (ii). Linear abrasion @ 5cmx1cm on left forearm dorsum located 4cm below Left elbow joint; (iii) Linear abrasion @ 4cmx1cm on Right forearm dorsum located just below right elbow joint; and (iv) Complain of pain in abdomen with an abrasion measuring 7x1cm located 7cm above waist on left side abdomen, rejected/dismissed the complaint case vide order dated 16.07.2025. Relevant portion of the same is extracted hereinunder:- "तलबी के स्तर पर पिरवादी के . िव्षान अिधव्वा को सुना एवं प्ऴावली का सम्यक् अवलोकन िकया। पिरवादी के िव्षान अिधव्वा को सुनने तथा प्ऴावली के सम्यक पिरशीलन के प्ाात स्प्ि होता है िक पिरवादी ्षारा ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा-158(3) द०्ऺ०सं० संजय वमार्, राजेश वमार्, दो सगे भाईयों तथा दीपक वमार् व िवक्की वमार् दो सगे भाईयों तथा दीपक वमार् व िवक्की वमार् तथा संजय वमार् के आपस में िपता-पु्ऴ एवं दीपक वमार् व 3 CRLR No. 978 of 2025 िवक्की तथा राजेश वमार् सगे चाचा-भतीजे के िवरु्ध यह कहते हुए ्ऺस्तुत िकया गया है िक इनके ्षारा पिरवादी की दो पीिडता पुि्ऴयों के साथ सामूिहक बलात्कार िकया गया जो िक भारतीय समाज के पािरवािरक एवं सामािजक पिरवेश के िवपरीत िबल्कु ल ही अस्वाभािवक है, क्योंिक भारतीय ्षामीण पिरवेश के िकसी भी ्िि्व ्षारा अपने सगे भाई के साथ व पु्ऴ तथा भतीजे के सम्ष अथवा पु्ऴ एवं भतीजे ्षारा अपने िपता व चाचा के सम्ष िकसी भी बािलका के साथ बलात्कार कािरत नहीं िकया जा सकता है। यिद ऐसा आरोप िकसी भी ्िि्व ्षारा लगाया जा रहा है तो यह िबल्कु ल ही अस्वाभािवक है तथा िव्षास के योग्य नहीं है। उ्व के सन्दभर्में पिरवादी के बयान अन्तगर्त धारा-200 दं०्ऺ०सं० का अवलोकन िकया गया, िजसमें पिरवादी ्षारा यह कथन िकया गया है िक "पीिड़तायें मेरी बेिटयां है। ्ऺथम पीिडता लगभग साढ़े स्ऴह साल की व ि्षतीय पीिडता लगभग 14 वषर् की उ्ा की है। इनकी जन्मितिथ मुझे याद नहीं है। िवप्षीगण से मेरी कोई भी जमीन की रंिजश या अन्य कोई रंिजश नहीं है। घटना िदनांक 08.05.2024 लगभग रात 08:00 बजे की है। मैं उस समय घर से दो िक०मी० दूर कथा के िलये बाजार में गया था। मैं वहां से ्ऺथम पीिड़ता के घटना के बारे में बताने पर (फोन करके ) तुरन्त साढ़े आठ बजे तक लौट आया। मेरी दोनों बेिटयां घर आ गयी थी। घटना मेरे सामने नहीं घटी है। घर पर आने पर मुझे बच्चों ने बताया। मुझे मेरी दोनों बेिटयों ने बताया था िक संजय व राजेश ने हम दोनों लोगों को पकड़कर झाड़ी में ले जाकर मेरे साथ गलत काम िकया।" इस ्ऺकार यह सा्षी/पीिड़ताओं का िपता घटना का च्षुदशर् सा्षी नहीं है तथा पीिड़ताओं के बताने पर इस सा्षी को घटना के बावत् जानकारी हुई तथा इस सा्षी ्षारा अपने बयान में यह भी कथन िकया गया है िक िवप्षीगण से उसकी कोई जमीनी या अन्य कोई रंिजश नहीं है। इस सा्षी के उपरो्व बयान को दृि्िगत रखते हुए पीिड़ताओं के बयान का सम्यक् अवलोकन िकया गया, िजसमें ्ऺथम पीिडता/सा्षी पी०डब्लू०- 01 ्षारा अपने बयान अन्तगर्त धारा-202 दं०्ऺ०सं० में यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण की मेरे िपता से कोई रंिजश नहीं चल रही है। घटना िदनांक 08.05.2024, रात 08:00 बजे की है। मैं व मेरी सगी बहन ि्षतीय पीिड़ता शौच के िलये खेत में गयी थी। वहां खेत में पीछे संजय, राजेश, दीपक व िवक्की झाड़ी के पीछे िछपे हुए थे। मुझे संजय और राजेश उठाकर ले गये, मेरी बहन ि्षतीय पीिडता को दीपक और िवक्की उठाकर ले गये। राजेश और संजय ने मेरे साथ बारी-बारी से बलात्कार िकया। जबिक ि्षतीय पीिडता/सा्षी पी०डब्लू०-2 ्षारा अपने बयान अन्तगर्त धारा-202 दं०्ऺ०सं० में यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण से मेरे िपता की कोई रंिजश नहीं है। घटना िदनांक 08.05.2024, रात 08:00 बजे की है। मैं व मेरी सगी बहन ्ऺथम पीिड़ता शौच के िलये खेत में गयी थी। जब हम दोनों शौच के िलये बैठ गये थे, उसी समय िवक्की और दीपक मेरे पीछे से मेरे पास आ गये और दोनों लोग मुझे जबरदस्ती पकड़कर दूसरे खेत की झाडी के पास ले गये। इसके बाद िवक्की और दीपक ने मेरे साथ बारी-बारी से गलत काम िकया। इस ्ऺकार पीिड़ताओं के उपरो्व बयानों में सारवान िवरोधाभास पिरलि्षत हो रहा है तथा पिरवादी व पिरवादी की लड़िकयों पीिड़ताओं ्षारा अपने-अपने बयान में िवप्षीगण उपरो्व से कोई जमीनी व अन्य रंिजश न होने का कथन िकया गया है। यहां पर यह भी उल्लेख करना समीचीन होगा िक न्यायालय ्षारा ्ऺस्तुत ्ऺकरण में सम्बिन्धत थाने से आख्या आहूत की गयी थी, जो प्ऴावली में संलग्न है। थाना-करनैलगंज, िजला गोण्डा की आख्या के अनुसार आवेदक व िवप्षीगण संजय कु मार वमार् आिद के मध्य िदनांक 15 04.2024 को खेत रेहन को छु ड़ाने को लेकर आपस में मारपीट, गाली- गलौज िकये थे, िजसमें दोनों प्षों की तरफ से एक-दूसरे के िवरु्ध मु०अ०सं०-163/24, धारा-323, 504, 506 भा०दं०सं० बनाम संजय कु मार वमार् आिद तथ्था मु0अ0सं0-169/2024. संजय कु मार वमार् बनाम राम दुलारे आिद के िवरू्ध पंजीकृ त िकया गया। आवेदक राम दुलारे िवप्षी संजय कु मार वमार् के िवरु्ध अन्य गम्भीर अपराध कािरत कराने हेतु मनगढंत कहानी बनाकर सत्यता से परे अिभयोग पंजीकृ त कराना चाहता है। जबिक उ्व पुिलस आख्या व संलग्न ्ऺथम सूचना िरपोटॏल की छाया्ऺित के पिरशीलन से स्प्ि हो रहा है िक पिरवादी राम दुलारे व िवप्षीगण के मध्य जमीनी रंिजश के कारण एक-दूसरे के िवरु्ध आपरािधक वाद लंिबत है। इस ्ऺकार स्वयं पिरवादी प पीिड़ताओं ्षारा अपने बयान अन्तगर्त धारा 200 दं०्ऺ०सं० एवं 202 दं०्ऺ०सं० में थाने की आख्या के िवपरीत यह कथन िकया गया है िक पिरवादी की िवप्षीगण से न तो कोई जमीनी रंिजश है और न ही िकसी ्ऺकार की अन्य रंिजश है। इस ्ऺकार प्ऴावली पर उपलब्ध थाने की आख्या व पिरवादी एवं पीिड़ताओं के कथन में इस सन्दभर् में सारवान िवरोधाभास पिरलि्षत हो रहा है और पिरवादी ्षारा तथ्यों को िछपाते हुए पिरवाद ्ऺस्तुत िकया गया है। अतः मामले के तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को दृि्िगत रखते हुए पिरवाद ्षारा तथ्यों को िछपाते हुए िवप्षीगण के िवरू्ध उनके सगे भाईयों, पु्ऴ एवं भतीजों को दिशत करते हुए अपनी दो बेिटयों के साथ उनके ्षारा सामूिहक बलात्कार िकये जाने का अस्वाभािवक तथ्य ्ऺाथर्ना प्ऴ/पिरवाद में िकया गया है। अतः उ्व आधार पर िवप्षीगण को तलब िकये जाने का ्ऺथम दृ्िया आधार पयार्प्त नहीं है तथा पिरवादी का पिरवाद िनरस्त िकये जाने योग्य है एवं पिरवादी राम दुलारे के िवरू्ध तथ्यों को िछपाते हुए िमथ्या पिरवाद ्ऺस्तुत करने हेतु धारा-22 पॉक्सो एक्ट के अन्तगर्त दािण्डक ्ऺकीणर् वाद दजर् कराया जाना न्यायोिचत होगा।"
8. Upon due consideration of the aforesaid as also the arguments advanced by the learned counsel for the revisionist and learned AGA for the State, this Court finds that no interference is required in the matter and the present revision is liable to be dismissed with costs. It is for the following reasons:- 4 CRLR No. 978 of 2025 (i) Revisionist instituted the proceedings in issue against two real brothers namely Sanjay Verma and Rajesh Verma and also two sons of Sanjay Verma, making allegations against these persons of committing rape with his two daughters on same date, time and place i.e. 08.05.2024, 08:00 PM and agricultural field, just to settle the civil dispute in relation to which an altercation took place between the parties on 15.04.2024 and therefore both the parties lodged the FIRs, registered as Case Crime No. 163 of 2024 and Case Crime No. 169 of 2024. (ii) The story set up against the above named persons is an improbable story. (iii) Injury report of victim No.1 on record also does not support the story set up in the complaint.
9. Accordingly, the revision is dismissed with cost of Rs. 5,000/- and the same shall be deposited before the Court concerned within one month, failing which, the same shall be recovered as per law and paid to the opposite parties. September 3, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench
1. Heard Sri Rajeev Kumar Mishra Rudra, learned counsel for the revisionist and Sri Badrul Hasan, learned AGA for the State and perused the record.
2. Present revision has been filed by the revisionist challenging the order dated 16.07.2025 passed by the learned Additional District and Sessions Judge/Special Judge, POCSO Act, Gonda in Complaint Case No. 56 of 2024 (Ram Dularey vs. Sanjay Verma and Others).
3. Vide impugned order dated 16.07.2025, the trial Court dismissed complaint case instituted by the revisionist-Ram Dularey and proceeded in terms of Section 22 of the Prevention of Children from Sexual Offences Act, 2012 (in short "Act of 2012") against the complainant.
4. The case set up in the complaint in nutshell is to the effect that on
08.05.2024 at about 08:00 PM, the opposite party No.-Sanjay Verma and opposite party No.3-Rajesh Verma, both real brothers, committed rape in open area i.e. agricultural field with the victim No.1, who is elder daughter of the complainant-revisionist and opposite party No.4-Deepak Verma and opposite party No.5-Vikky @ Adarsh Verma, both sons of opposite party No.2-Sanjay Verma, on the same date and time i.e. 08.05.2024 at about 08:00 PM and same place i.e. agricultural field, committed rape with younger daughter, who is victim No.2, of the complainant-revisionist.
5. It is to be noted that an application levelling allegations aforesaid was preferred by the complainant-revisionist under Section 156(3) CrPC and the 2 CRLR No. 978 of 2025 trial Court treated the same as complaint case vide order dated 21.06.2024. Relevant portion of the order dated 21.06.2024 is extracted hereinunder:- "्ऺाथर्ना प्ऴ पर आवेदक के िव्षान अिधव्वा को सुना एवं प्ऴावली का अवलोकन िकया। न्यायालय ्षारा थाने से आख्या आहूत की गयी। थाना कनरॏलगंज, िजला गोण्डा की आख्या में स्प्ि कथन िकया गया है िक आवेदक व िवप्षीगण संजय कु मार वमार् आिद के मध्य िदनांक 15-04-2024 को खेत रेहन को छु ड़ाने को लेकर आपस में मारपीट गाली गलौच िकये थे, िजसमें दोनों प्षों की तरफ से एक दूसरे के िवरू्ध मुकदमा अपराध संख्या-163/2024, धारा-323, 504, 506 भारतीय दण्ड संिहता बनाम संजय कु मार वमार् आिद उपरो्व तथा मुकदमा अपराध संख्या 169/2024 बनाम रामदूलारे आिद के िवरू्ध पंजीकृ त िकया गया तमामी िववेचना से ्ऺाप्त साष्य के आधार पर उपरो्व मुकदमे में आरोप प्ऴ ्ऺेिषत िकया गया है। अब आवेदक रामदुलारे उपरो्व िवप्षी सजय कु मार वमार् के िवरू्ध अन्य गंभीर अपराध कािरत कराने हेतु मनगढंत कहानी बनाकर सत्यता से परे अिभयोग पंजीकृ त कराना चाहता है। इस सम्बन्ध में थाना स्थानीय पर अिभयोग पंजीकृ त नहीं है। माननीय उच्चतम् न्यायालय के अ्यतन िनणर्य मोना पवार ्ऺित माननीय इलाहाबाद उच न्यायालय ्षारा रिजस््िार 2011 (2) ए० सी० जे० पेज 1691 िनणर्य में िदये गये िविध िस्धान्त के आलोक में एवं सम्बिधत थाने की आख्या एवं ्ऺाथी के ्ऺाथर्ना प्ऴ में विणत तथ्यों एवं अन्तर वस्तुओं के आलोक में मेरी राय में इस ्ऺकरण के सभी साष्य (घटना का िदनांक, समय व स्थान) आवेदक के सं्ञान एवं िनयं्ऴण में हैं, िजन्हे आवेदक स्वयं ्ऺस्तुत करके अपने के स को सािबत कर सकता है, इसिलए िववेचना कराये जाने का कोई पयार्प्त आधार नहीं है। अतः मामले के तथ्य एवं पिरिस्थितयों को दृि्िगत रखते हुए आवेदक का ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा-156 (3) दं०्ऺ०सं० पिरवाद के रूप में दजर् िकये जाने योग्य है। आदेश आवेदक रामदुलारे ्षारा ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना-प्ऴ अन्तगर्त धारा-156(3) दण्ड ्ऺि्वया संिहता पिरवाद के रूप दजर् हो। वास्ते बयान पिरवादी अन्तगर्त धारा-200 दण्ड ्ऺि्वया संिहता प्ऴावली िदनांक-04-7-2024 को पेश हो।"
6. After the aforesaid order dated 21.06.2024, referred above, the statement(s) of complainant-revisionist and victim Nos.1 and 2 as also Dr. Chetna Parashar were recorded in terms of Section 200 and 202 CrPC, respectively.
7. The trial Court, after treating the application preferred under Section 156(3) CrPC as complaint case and the statements recorded before it as also Medico Legal Examination Report of victim No.1, according to which, the victim No.1 sustained injuries i.e. (i). Red contused abrasion on left Shoulder measuring 6x1 cm; (ii). Linear abrasion @ 5cmx1cm on left forearm dorsum located 4cm below Left elbow joint; (iii) Linear abrasion @ 4cmx1cm on Right forearm dorsum located just below right elbow joint; and (iv) Complain of pain in abdomen with an abrasion measuring 7x1cm located 7cm above waist on left side abdomen, rejected/dismissed the complaint case vide order dated 16.07.2025. Relevant portion of the same is extracted hereinunder:- "तलबी के स्तर पर पिरवादी के . िव्षान अिधव्वा को सुना एवं प्ऴावली का सम्यक् अवलोकन िकया। पिरवादी के िव्षान अिधव्वा को सुनने तथा प्ऴावली के सम्यक पिरशीलन के प्ाात स्प्ि होता है िक पिरवादी ्षारा ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा-158(3) द०्ऺ०सं० संजय वमार्, राजेश वमार्, दो सगे भाईयों तथा दीपक वमार् व िवक्की वमार् दो सगे भाईयों तथा दीपक वमार् व िवक्की वमार् तथा संजय वमार् के आपस में िपता-पु्ऴ एवं दीपक वमार् व 3 CRLR No. 978 of 2025 िवक्की तथा राजेश वमार् सगे चाचा-भतीजे के िवरु्ध यह कहते हुए ्ऺस्तुत िकया गया है िक इनके ्षारा पिरवादी की दो पीिडता पुि्ऴयों के साथ सामूिहक बलात्कार िकया गया जो िक भारतीय समाज के पािरवािरक एवं सामािजक पिरवेश के िवपरीत िबल्कु ल ही अस्वाभािवक है, क्योंिक भारतीय ्षामीण पिरवेश के िकसी भी ्िि्व ्षारा अपने सगे भाई के साथ व पु्ऴ तथा भतीजे के सम्ष अथवा पु्ऴ एवं भतीजे ्षारा अपने िपता व चाचा के सम्ष िकसी भी बािलका के साथ बलात्कार कािरत नहीं िकया जा सकता है। यिद ऐसा आरोप िकसी भी ्िि्व ्षारा लगाया जा रहा है तो यह िबल्कु ल ही अस्वाभािवक है तथा िव्षास के योग्य नहीं है। उ्व के सन्दभर्में पिरवादी के बयान अन्तगर्त धारा-200 दं०्ऺ०सं० का अवलोकन िकया गया, िजसमें पिरवादी ्षारा यह कथन िकया गया है िक "पीिड़तायें मेरी बेिटयां है। ्ऺथम पीिडता लगभग साढ़े स्ऴह साल की व ि्षतीय पीिडता लगभग 14 वषर् की उ्ा की है। इनकी जन्मितिथ मुझे याद नहीं है। िवप्षीगण से मेरी कोई भी जमीन की रंिजश या अन्य कोई रंिजश नहीं है। घटना िदनांक 08.05.2024 लगभग रात 08:00 बजे की है। मैं उस समय घर से दो िक०मी० दूर कथा के िलये बाजार में गया था। मैं वहां से ्ऺथम पीिड़ता के घटना के बारे में बताने पर (फोन करके ) तुरन्त साढ़े आठ बजे तक लौट आया। मेरी दोनों बेिटयां घर आ गयी थी। घटना मेरे सामने नहीं घटी है। घर पर आने पर मुझे बच्चों ने बताया। मुझे मेरी दोनों बेिटयों ने बताया था िक संजय व राजेश ने हम दोनों लोगों को पकड़कर झाड़ी में ले जाकर मेरे साथ गलत काम िकया।" इस ्ऺकार यह सा्षी/पीिड़ताओं का िपता घटना का च्षुदशर् सा्षी नहीं है तथा पीिड़ताओं के बताने पर इस सा्षी को घटना के बावत् जानकारी हुई तथा इस सा्षी ्षारा अपने बयान में यह भी कथन िकया गया है िक िवप्षीगण से उसकी कोई जमीनी या अन्य कोई रंिजश नहीं है। इस सा्षी के उपरो्व बयान को दृि्िगत रखते हुए पीिड़ताओं के बयान का सम्यक् अवलोकन िकया गया, िजसमें ्ऺथम पीिडता/सा्षी पी०डब्लू०- 01 ्षारा अपने बयान अन्तगर्त धारा-202 दं०्ऺ०सं० में यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण की मेरे िपता से कोई रंिजश नहीं चल रही है। घटना िदनांक 08.05.2024, रात 08:00 बजे की है। मैं व मेरी सगी बहन ि्षतीय पीिड़ता शौच के िलये खेत में गयी थी। वहां खेत में पीछे संजय, राजेश, दीपक व िवक्की झाड़ी के पीछे िछपे हुए थे। मुझे संजय और राजेश उठाकर ले गये, मेरी बहन ि्षतीय पीिडता को दीपक और िवक्की उठाकर ले गये। राजेश और संजय ने मेरे साथ बारी-बारी से बलात्कार िकया। जबिक ि्षतीय पीिडता/सा्षी पी०डब्लू०-2 ्षारा अपने बयान अन्तगर्त धारा-202 दं०्ऺ०सं० में यह कथन िकया गया है िक िवप्षीगण से मेरे िपता की कोई रंिजश नहीं है। घटना िदनांक 08.05.2024, रात 08:00 बजे की है। मैं व मेरी सगी बहन ्ऺथम पीिड़ता शौच के िलये खेत में गयी थी। जब हम दोनों शौच के िलये बैठ गये थे, उसी समय िवक्की और दीपक मेरे पीछे से मेरे पास आ गये और दोनों लोग मुझे जबरदस्ती पकड़कर दूसरे खेत की झाडी के पास ले गये। इसके बाद िवक्की और दीपक ने मेरे साथ बारी-बारी से गलत काम िकया। इस ्ऺकार पीिड़ताओं के उपरो्व बयानों में सारवान िवरोधाभास पिरलि्षत हो रहा है तथा पिरवादी व पिरवादी की लड़िकयों पीिड़ताओं ्षारा अपने-अपने बयान में िवप्षीगण उपरो्व से कोई जमीनी व अन्य रंिजश न होने का कथन िकया गया है। यहां पर यह भी उल्लेख करना समीचीन होगा िक न्यायालय ्षारा ्ऺस्तुत ्ऺकरण में सम्बिन्धत थाने से आख्या आहूत की गयी थी, जो प्ऴावली में संलग्न है। थाना-करनैलगंज, िजला गोण्डा की आख्या के अनुसार आवेदक व िवप्षीगण संजय कु मार वमार् आिद के मध्य िदनांक 15 04.2024 को खेत रेहन को छु ड़ाने को लेकर आपस में मारपीट, गाली- गलौज िकये थे, िजसमें दोनों प्षों की तरफ से एक-दूसरे के िवरु्ध मु०अ०सं०-163/24, धारा-323, 504, 506 भा०दं०सं० बनाम संजय कु मार वमार् आिद तथ्था मु0अ0सं0-169/2024. संजय कु मार वमार् बनाम राम दुलारे आिद के िवरू्ध पंजीकृ त िकया गया। आवेदक राम दुलारे िवप्षी संजय कु मार वमार् के िवरु्ध अन्य गम्भीर अपराध कािरत कराने हेतु मनगढंत कहानी बनाकर सत्यता से परे अिभयोग पंजीकृ त कराना चाहता है। जबिक उ्व पुिलस आख्या व संलग्न ्ऺथम सूचना िरपोटॏल की छाया्ऺित के पिरशीलन से स्प्ि हो रहा है िक पिरवादी राम दुलारे व िवप्षीगण के मध्य जमीनी रंिजश के कारण एक-दूसरे के िवरु्ध आपरािधक वाद लंिबत है। इस ्ऺकार स्वयं पिरवादी प पीिड़ताओं ्षारा अपने बयान अन्तगर्त धारा 200 दं०्ऺ०सं० एवं 202 दं०्ऺ०सं० में थाने की आख्या के िवपरीत यह कथन िकया गया है िक पिरवादी की िवप्षीगण से न तो कोई जमीनी रंिजश है और न ही िकसी ्ऺकार की अन्य रंिजश है। इस ्ऺकार प्ऴावली पर उपलब्ध थाने की आख्या व पिरवादी एवं पीिड़ताओं के कथन में इस सन्दभर् में सारवान िवरोधाभास पिरलि्षत हो रहा है और पिरवादी ्षारा तथ्यों को िछपाते हुए पिरवाद ्ऺस्तुत िकया गया है। अतः मामले के तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को दृि्िगत रखते हुए पिरवाद ्षारा तथ्यों को िछपाते हुए िवप्षीगण के िवरू्ध उनके सगे भाईयों, पु्ऴ एवं भतीजों को दिशत करते हुए अपनी दो बेिटयों के साथ उनके ्षारा सामूिहक बलात्कार िकये जाने का अस्वाभािवक तथ्य ्ऺाथर्ना प्ऴ/पिरवाद में िकया गया है। अतः उ्व आधार पर िवप्षीगण को तलब िकये जाने का ्ऺथम दृ्िया आधार पयार्प्त नहीं है तथा पिरवादी का पिरवाद िनरस्त िकये जाने योग्य है एवं पिरवादी राम दुलारे के िवरू्ध तथ्यों को िछपाते हुए िमथ्या पिरवाद ्ऺस्तुत करने हेतु धारा-22 पॉक्सो एक्ट के अन्तगर्त दािण्डक ्ऺकीणर् वाद दजर् कराया जाना न्यायोिचत होगा।"
8. Upon due consideration of the aforesaid as also the arguments advanced by the learned counsel for the revisionist and learned AGA for the State, this Court finds that no interference is required in the matter and the present revision is liable to be dismissed with costs. It is for the following reasons:- 4 CRLR No. 978 of 2025 (i) Revisionist instituted the proceedings in issue against two real brothers namely Sanjay Verma and Rajesh Verma and also two sons of Sanjay Verma, making allegations against these persons of committing rape with his two daughters on same date, time and place i.e. 08.05.2024, 08:00 PM and agricultural field, just to settle the civil dispute in relation to which an altercation took place between the parties on 15.04.2024 and therefore both the parties lodged the FIRs, registered as Case Crime No. 163 of 2024 and Case Crime No. 169 of 2024. (ii) The story set up against the above named persons is an improbable story. (iii) Injury report of victim No.1 on record also does not support the story set up in the complaint.
9. Accordingly, the revision is dismissed with cost of Rs. 5,000/- and the same shall be deposited before the Court concerned within one month, failing which, the same shall be recovered as per law and paid to the opposite parties. September 3, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench