✦ High Court of India · 29 Aug 2025

State of UP v. Sheshmani Pandey and others) arising out of Case Crime No

Case Details High Court of India · 29 Aug 2025
Court
High Court of India
Decided
29 Aug 2025
Length
1,154 words

Cited in this judgment

1. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State and perused the record.

2. The present revision under Section 397/401 Cr.P.C. read with Section 438 of BNSS, 2023 has been filed for setting aside the impugned order dated 17.06.2025, passed by the Chief Judicial Magistrate, Lucknow (in short "Magistrate") in Criminal Case No.111296 of 2023 (State of UP Vs. Sheshmani Pandey and others) arising out of Case Crime No.0790/2022 , Under Sections 419, 420, 467, 468, 471 and 120-B IPC, Police Station - Gomti Nagar, District - Lucknow.

3. Vide impugned order dated 17.06.2025, the Magistrate rejected the application moved by the revisionist under Section 239 Cr.P.C. seeking discharge. The relevant portion of the order dated 17.06.2025 reads as under :- "प्ऴावली वास्ते आदेश पेश हुई। ्ऺाथर्गण / अिभयु्वगण के िव्षान अिधव्वा को उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ पर सुना गया। िनस्तारण उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ अंतगर्त धारा 239 दं०प०सं० ्ऺाथर् / अिभयु्व रामानन्द राम की ओर से उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ फौजदारीवाद संख्या 111296/2023 मुकदमा अपराध संख्या 790/2022 अन्तगर्त धारा-419, 420, 467, 468, 471, 120-बी भा०दं०सं० थाना-गोमतीनगर लखनऊ के ्ऺकरण में ्ऺस्तुत कर कथन िकया गया है िक तथाकिथत घटना की ्ऺथम सूचना िरपोटर् घटना के 22 माह के प्ाात पंजीकृ त की गयी िववेचक ्षारा िववेचनोपरान्त ्ऺाथर्/अिभयु्व के िवरू्ध अन्तगर्त धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-भा०दं०सं० में आरोप प्ऴ ्ऺेिषत िकया। ्ऺाथर् के िवरू्ध अन्तगर्त धारा 415, 463 भा०दं०सं० के तहत कोई भी आरोप नहीं बनता है। अिभयु्व को माननीय न्यायालय ्षारा पािरत आदेश िदनांिकत 01.08.2023 के तहत िनयिमत जमानत स्वीकृ त हुई थी। ्ऺश्नगत सम्पि्त की कािस्टंग धनरािश जमा करवाने सेलडीड के िनष्पादन िव्वय अनुबंध के पंजीयन का कायर् एल०डी०ए० के अन्य कमर्चािरयों ्षारा िकया गया था। ्ऺाथर् / अिभयु्व ्षारा के वल अपनी इम्लाई आई०डी० से ्ऺश्नगत सम्पि्त का पंजीयन िकया गया था। जबिक 2 CRLR No. 937 of 2025 उ्व सम्पि्त का एलाटमेन्ट धीरज ्शीवास्तव ्षारा िकया गया था, िजसके प्ाात अजय ्ऺताप वमार् की इम्लाई आई०डी० से सम्पि्त की रिजस््िी हुई थी। सम्पि्त के िववरण को भरने के िलए एल०डी०ए० ्षारा िडजीटेक ्ऺाइवेट िलिमटेड को कायर् सौंपा गया है, िजसके िवरू्ध फजर् कायर् के सम्बंध में एल०डी०ए० ्षारा वषर् 2021 में एफ०आई०आर० भी पंजीकृ त करायी गयी है। एल०डी०ए० की वैबसाईट पूणर्तया सुरि्षत नहीं है, िसके हैक होने की भी सम्भावना रही है। एलाटमेन्ट चेन्ज माडीिफके शन और रिजस््िेशन का कायर् स्षम ्ऺािधकारी की स्वीकृ ित िमलने के प्ाात ही मैनुवली सम्पािदत िकया जाता है और कम्प्यूटर आपरेटर के वल उसे कम्प्यूटर पर फीड करता है। ्ऺाथर् विर्ष नागिरक है एं व हृदय रोग से पीिड़त है ्ऺाथर् को झूटा फं साया गया है। ्ऺाथर् / अिभयु्व का उपरो्व धाराओं के अपराध से उन्मोचन िकये जाने की याचना की गयी है। िव्षान अिभयेजन अिधकारी ्षारा उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ पर इन आशय की आख्या अंिकत की गयी है िक प्ऴावली पर सम्यक िववेचना के प्ाात उपलब्ध साष्यों के आधार पर आरोप प्ऴ मा० न्यायालय ्ऺेिषत िकया गया है िजसपर न्याियक मािस्तष्क का ्ऺयोग करके मा.न्यायालय ्षारा सं्ञान िलया गया है। ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना प्ऴ बलहीन व िनराधार है तथा मा. न्यायालय का समय ्िथर् करने के िलये िदया गया है। अतः मा० न्यायालय से ्ऺाथर्ना प्ऴ िनरस्त करके आरोप िवरिचत िकये जाने की ्ऺाथर्ना की गयी है। आरोप िवरिचत करके िवचारण िकया जाना न्यायिहत में आवश्यक है। उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा की बहस सुनी गयी एं व मेरे ्षारा प्ऴावली पर उपलब्ध समस्त दस्तावेजों का अवलोकन िकया गया। माननीय सवरॏच्च न्यायालय ्षारा कान्ती भ्शा शाह एं व अन्य बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल 2000 िकिमनल एल० जे०पेज 746 (एच०सी०) में यह िविध ्ऺितपािदत की गयी है िक आरोप िवरिचत िकये जाने के आदेश में ऐसा करने का कारण दशार्ने की आवश्य्वा नहीं है। अिभयु्व को उन्मोचन िकये जाने के आदेश में कारण दिशत करने की आवश्यकता है एं व सुपरीटेन्डेन्ट एण्ड िरमेम़््ेन्सर ऑफ लीगल एफे नसर् वैस्ट बंगाल बनाम अनील कु मार भुन्जा एं व अन्य ए०आई०आर० 1980 सु्ऺीम कोटर् पेज 52 में माननीय सवरॏच्च न्यायालय ने यह िविध ्ऺितपािदत की है िक मिजस््िेट के सामने ्ऺस्तुत साम्षी से अिभयु्वगण के िवरू्ध गम्भीर संदेह उत्पन्न होने पर उसके िवरू्ध आरोप िवरिचत िकया जा सकता है। इस आदेश में माननीय सवरॏच्च न्यायालय ्षारा ्ऺितपािदत िविध का अनुपालन िकया जा रहा है। उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ के िनस्तारण के ्ऺ्वम में िमनी ्िायल नहीं िकया जा सकता। उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ में अिभयु्व ्षारा उठाये गये अन्य िबन्दुओं की वैधता सम्यक साष्योपरान्त िनधार्िरत की जा सकी है। उपरो्व िव्शेषण की सम्षता को दृि्िगत रखते हुए न्यायालय का यह िनष्कषर् है िक ्ऺाथर्/अिभयु्व रामानन्द राम ्षारा ्ऺस्तुत उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ अंतगर्त धारा 239 दण्ड ्ऺि्वया संिहता िदनॉिकत 15.06.2024 स्वीकार िकये जाने योग्य नहीं है। आदेश ्ऺाथर्/अिभयु्व रामानन्द राम की ओर से ्ऺस्तुत उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ िदनॉिकत 15.06.2024 उपरो्व िनष्कषार्नुसार िनरस्त िकया जाता है।? प्ऴावली वास्ते सृिजत िकये जाने आरोप िदनॉक 16.07.2025 को पेश हो।"

4. Considered the arguments advanced by learned counsel for the revisionist which in nutshell is to the effect that revisionist has not committed any offence as registration of the property was done by one Dheeraj Srivastava and other formalities viz. costing, depositing of consideration amount, execution of sale deed etc. were carried out by 3 CRLR No. 937 of 2025 other employees, as also the submissions of learned A.G.A. who stated that registration of the property in issue was made by the 'Employee I.D. of revisionist' as such at this stage it cannot be said that the revisionist is innocent and the documents available on record and also the law as laid down by the Hon'ble Apex Court in the case of Amit Kapoor v. Ramesh Chander, (2012) 9 SCC 460; Tarun Jit Tejpal Vs. State of Goa and Another, 2019 SCC OnLine SC 1053; State of Gujarat vs. Dilipsinh Kishorsinh Rao reported in 2023 SCC OnLine SC 1294; Vishnu Kumar Shukla v. State of U.P., 2023 SCC OnLine SC 1582; Hazrat Deen vs. State of Uttar Pradesh and Another; reported in 2022 SCC OnLine SC 1781, wherein the Hon'ble Apex Court has settled the principles with regard to dealing with an application seeking discharge.

5. Upon due consideration of aforesaid, particularly the fact that the 'Employee I.D.' of the revisionist was used for registration of the property in issue and this aspect of the case has not been impeached, this Court is of the view that at this stage it cannot be said that revisionist has committed no offence and therefore this Court is not inclined to interfere in the present case.

6. Present criminal revision is accordingly dismissed. Cost made easy. August 29, 2025 ML/- (Saurabh Lavania,J.) MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

1. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State and perused the record.

2. The present revision under Section 397/401 Cr.P.C. read with Section 438 of BNSS, 2023 has been filed for setting aside the impugned order dated 17.06.2025, passed by the Chief Judicial Magistrate, Lucknow (in short "Magistrate") in Criminal Case No.111296 of 2023 (State of UP Vs. Sheshmani Pandey and others) arising out of Case Crime No.0790/2022 , Under Sections 419, 420, 467, 468, 471 and 120-B IPC, Police Station - Gomti Nagar, District - Lucknow.

3. Vide impugned order dated 17.06.2025, the Magistrate rejected the application moved by the revisionist under Section 239 Cr.P.C. seeking discharge. The relevant portion of the order dated 17.06.2025 reads as under :- "प्ऴावली वास्ते आदेश पेश हुई। ्ऺाथर्गण / अिभयु्वगण के िव्षान अिधव्वा को उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ पर सुना गया। िनस्तारण उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ अंतगर्त धारा 239 दं०प०सं० ्ऺाथर् / अिभयु्व रामानन्द राम की ओर से उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ फौजदारीवाद संख्या 111296/2023 मुकदमा अपराध संख्या 790/2022 अन्तगर्त धारा-419, 420, 467, 468, 471, 120-बी भा०दं०सं० थाना-गोमतीनगर लखनऊ के ्ऺकरण में ्ऺस्तुत कर कथन िकया गया है िक तथाकिथत घटना की ्ऺथम सूचना िरपोटर् घटना के 22 माह के प्ाात पंजीकृ त की गयी िववेचक ्षारा िववेचनोपरान्त ्ऺाथर्/अिभयु्व के िवरू्ध अन्तगर्त धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-भा०दं०सं० में आरोप प्ऴ ्ऺेिषत िकया। ्ऺाथर् के िवरू्ध अन्तगर्त धारा 415, 463 भा०दं०सं० के तहत कोई भी आरोप नहीं बनता है। अिभयु्व को माननीय न्यायालय ्षारा पािरत आदेश िदनांिकत 01.08.2023 के तहत िनयिमत जमानत स्वीकृ त हुई थी। ्ऺश्नगत सम्पि्त की कािस्टंग धनरािश जमा करवाने सेलडीड के िनष्पादन िव्वय अनुबंध के पंजीयन का कायर् एल०डी०ए० के अन्य कमर्चािरयों ्षारा िकया गया था। ्ऺाथर् / अिभयु्व ्षारा के वल अपनी इम्लाई आई०डी० से ्ऺश्नगत सम्पि्त का पंजीयन िकया गया था। जबिक 2 CRLR No. 937 of 2025 उ्व सम्पि्त का एलाटमेन्ट धीरज ्शीवास्तव ्षारा िकया गया था, िजसके प्ाात अजय ्ऺताप वमार् की इम्लाई आई०डी० से सम्पि्त की रिजस््िी हुई थी। सम्पि्त के िववरण को भरने के िलए एल०डी०ए० ्षारा िडजीटेक ्ऺाइवेट िलिमटेड को कायर् सौंपा गया है, िजसके िवरू्ध फजर् कायर् के सम्बंध में एल०डी०ए० ्षारा वषर् 2021 में एफ०आई०आर० भी पंजीकृ त करायी गयी है। एल०डी०ए० की वैबसाईट पूणर्तया सुरि्षत नहीं है, िसके हैक होने की भी सम्भावना रही है। एलाटमेन्ट चेन्ज माडीिफके शन और रिजस््िेशन का कायर् स्षम ्ऺािधकारी की स्वीकृ ित िमलने के प्ाात ही मैनुवली सम्पािदत िकया जाता है और कम्प्यूटर आपरेटर के वल उसे कम्प्यूटर पर फीड करता है। ्ऺाथर् विर्ष नागिरक है एं व हृदय रोग से पीिड़त है ्ऺाथर् को झूटा फं साया गया है। ्ऺाथर् / अिभयु्व का उपरो्व धाराओं के अपराध से उन्मोचन िकये जाने की याचना की गयी है। िव्षान अिभयेजन अिधकारी ्षारा उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ पर इन आशय की आख्या अंिकत की गयी है िक प्ऴावली पर सम्यक िववेचना के प्ाात उपलब्ध साष्यों के आधार पर आरोप प्ऴ मा० न्यायालय ्ऺेिषत िकया गया है िजसपर न्याियक मािस्तष्क का ्ऺयोग करके मा.न्यायालय ्षारा सं्ञान िलया गया है। ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना प्ऴ बलहीन व िनराधार है तथा मा. न्यायालय का समय ्िथर् करने के िलये िदया गया है। अतः मा० न्यायालय से ्ऺाथर्ना प्ऴ िनरस्त करके आरोप िवरिचत िकये जाने की ्ऺाथर्ना की गयी है। आरोप िवरिचत करके िवचारण िकया जाना न्यायिहत में आवश्यक है। उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा की बहस सुनी गयी एं व मेरे ्षारा प्ऴावली पर उपलब्ध समस्त दस्तावेजों का अवलोकन िकया गया। माननीय सवरॏच्च न्यायालय ्षारा कान्ती भ्शा शाह एं व अन्य बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल 2000 िकिमनल एल० जे०पेज 746 (एच०सी०) में यह िविध ्ऺितपािदत की गयी है िक आरोप िवरिचत िकये जाने के आदेश में ऐसा करने का कारण दशार्ने की आवश्य्वा नहीं है। अिभयु्व को उन्मोचन िकये जाने के आदेश में कारण दिशत करने की आवश्यकता है एं व सुपरीटेन्डेन्ट एण्ड िरमेम़््ेन्सर ऑफ लीगल एफे नसर् वैस्ट बंगाल बनाम अनील कु मार भुन्जा एं व अन्य ए०आई०आर० 1980 सु्ऺीम कोटर् पेज 52 में माननीय सवरॏच्च न्यायालय ने यह िविध ्ऺितपािदत की है िक मिजस््िेट के सामने ्ऺस्तुत साम्षी से अिभयु्वगण के िवरू्ध गम्भीर संदेह उत्पन्न होने पर उसके िवरू्ध आरोप िवरिचत िकया जा सकता है। इस आदेश में माननीय सवरॏच्च न्यायालय ्षारा ्ऺितपािदत िविध का अनुपालन िकया जा रहा है। उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ के िनस्तारण के ्ऺ्वम में िमनी ्िायल नहीं िकया जा सकता। उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ में अिभयु्व ्षारा उठाये गये अन्य िबन्दुओं की वैधता सम्यक साष्योपरान्त िनधार्िरत की जा सकी है। उपरो्व िव्शेषण की सम्षता को दृि्िगत रखते हुए न्यायालय का यह िनष्कषर् है िक ्ऺाथर्/अिभयु्व रामानन्द राम ्षारा ्ऺस्तुत उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ अंतगर्त धारा 239 दण्ड ्ऺि्वया संिहता िदनॉिकत 15.06.2024 स्वीकार िकये जाने योग्य नहीं है। आदेश ्ऺाथर्/अिभयु्व रामानन्द राम की ओर से ्ऺस्तुत उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ िदनॉिकत 15.06.2024 उपरो्व िनष्कषार्नुसार िनरस्त िकया जाता है।? प्ऴावली वास्ते सृिजत िकये जाने आरोप िदनॉक 16.07.2025 को पेश हो।"

4. Considered the arguments advanced by learned counsel for the revisionist which in nutshell is to the effect that revisionist has not committed any offence as registration of the property was done by one Dheeraj Srivastava and other formalities viz. costing, depositing of consideration amount, execution of sale deed etc. were carried out by 3 CRLR No. 937 of 2025 other employees, as also the submissions of learned A.G.A. who stated that registration of the property in issue was made by the 'Employee I.D. of revisionist' as such at this stage it cannot be said that the revisionist is innocent and the documents available on record and also the law as laid down by the Hon'ble Apex Court in the case of Amit Kapoor v. Ramesh Chander, (2012) 9 SCC 460; Tarun Jit Tejpal Vs. State of Goa and Another, 2019 SCC OnLine SC 1053; State of Gujarat vs. Dilipsinh Kishorsinh Rao reported in 2023 SCC OnLine SC 1294; Vishnu Kumar Shukla v. State of U.P., 2023 SCC OnLine SC 1582; Hazrat Deen vs. State of Uttar Pradesh and Another; reported in 2022 SCC OnLine SC 1781, wherein the Hon'ble Apex Court has settled the principles with regard to dealing with an application seeking discharge.

5. Upon due consideration of aforesaid, particularly the fact that the 'Employee I.D.' of the revisionist was used for registration of the property in issue and this aspect of the case has not been impeached, this Court is of the view that at this stage it cannot be said that revisionist has committed no offence and therefore this Court is not inclined to interfere in the present case.

6. Present criminal revision is accordingly dismissed. Cost made easy. August 29, 2025 ML/- (Saurabh Lavania,J.) MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

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