State of U.P. and Others vs Party(s) Counsel for Applicant(s)
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Counsel for Applicant(s) Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Piyush Shrivastava, Shishir Pradhan, Suchita Singh, Veer Bahadur Yadav : Sheo Prakash Singh Court No. - 29 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. यह आवेदन प्ऴ आवेिदका सं० 1/पीिड़ता एवं आवेदक सं० 2/अिभयु्व की ओर से संयु्व रूप से ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदकगण की ओर से धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत यह आवेदन प्ऴ, मु०अ०सं० 255 वषर् 2019 अन्तगर्त धारा 363, 366, 376, 506 भारतीय दण्ड संिहता व धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट, थाना लालगंज, िजला रायबरेली में ्ऺेिषत आरोप प्ऴ, िदनांिकत 18.11.2020 से उ्य ूत वाद सं० 173 वषर् 2021 में िवशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, रायबरेली ्षारा पािरत ्ऺसं्ञान/तलबी आदेश िदनांक 26.02.2021 एवं इसके फलस्वरूप अि्षम कायर्वाही के िवरू्ध योिजत िकया गया है।
3. सं्षेप में अिभयोजन कथानक यह है िक अिभयोगी ्षारा संबंिधत थाने पर इस आशय का सूचना दी गयी िक ्ऺािथनी की लडकी को फु सला बहला कर रवीशंकर S/O रमाकान्त ि्षवेदी (पाठक) कल िदन में 3 बजे के लगभग भगा ले गया है, मेरी लड़की मोनी पाल को भगवाने में रेखा पत्नी गु्डू ि्षवेदी का हाथ है। मोनी मेरे बक्शे में रखे 20 हजार रूपये, पायल एक जोड़ी, माला एक जोड़ी, झुमका एक जोड़ी साथ में ले गयी है । ्शीमान जी से िनवेदन है िक मेरी िरपोटर् दजर् की जाय।
4. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा, िवप्षी सं० 2/सूचनाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी िशिशर ्ऺधान एवं अपर शासकीय अिधव्वा ्शी अशोक कु मार ्शीवास्तव को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
5. (क) आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेिदका सं०-1 व आवेदक सं० 2 के मध्य ्ऺेम संबंध था तथा िदनांक 14.05.2019 को िववाह के उ्देश्य से अपनी स्वेच्छा से घर से िनकल गई तथा जाते समय अपने घर से आभूषण, नकदी आिद भी साथ ले गई तथा िदनांक 27.05.2019 को दोनों आवेदकगण ने मंिदर में िववाह िकया और एक-दूसरे को पित-पत्नी के रूप में स्वीकार भी कर िलया। इस संदभर् में उन्होंने वैवािहक करार/अनुबंध भी िकया तथा पित-पत्नी के रूप में साथ रहना ्ऺारम्भ कर िदया। उ्व िववाह अनुबंध की ्ऺित इस शपथप्ऴ के साथ अनुच्छेद संख्या-5 के रूप में संलग्न है। आगे यह भी कहा गया िक सहमित से िववाह कराने का आ्षासन िदए जाने पर 2 A482 No. 3870 of 2021 िदनांक 07.06.2019 को आवेदक संख्या-2 ने, आवेदक संख्या-1 की माता के अनुरोध पर, आवेदक संख्या-1 को वादी के घर छोड़ िदया। वादी ने अपने पिरजनों के दबाव एवं धमकी के कारण आवेिदका संख्या-1 को पुिलस के सुपुदर् कर िदया तथा पुिलस ने उसी िदन अथार्त िदनांक 07.06.2019 को तहसील लालगंज, जनपद रायबरेली के िनकट वादी की उपिस्थित में किथत रूप से उसकी बरामदगी दशार् दी तथा बरामदगी के बाद उसी िदन अथार्त िदनांक 07.06.2019 को मिहला कांस्टेबल ्षारा आवेिदका संख्या-1 का धारा 161 दं.्ऺ.सं. के अंतगर्त बयान दजर् िकया गया, िजसमें उसने कहा िक उसकी आयु लगभग 18 वषर् है तथा उसके माता-िपता उसकी इच्छा के िवरु्ध उसका िववाह करना चाहते थे, इस कारण वह नाराज़ होकर िदनांक 14.05.2019 को अपनी बुआ के घर स्वयं चली गई थी और अब वह अपने माता-िपता के साथ जाना चाहती है। उसी िदन िदनांक 07.06.2019 को उसका िचिकत्सीय परी्षण सामुदाियक स्वास्थ्य कें ्श, लालगंज, िजला रायबरेली में िकया गया, िजसमें उसने घटना के संबंध में यह कथन भी िकया: “मैं अपनी मजर् से अपनी बुआ के यहाँ चली गयी थी। मेरे माता-िपता जबरदस्ती मेरी शादी करना चाहते थे इसिलए मैंने ऐसा िकया।” (ख) किथत पीिड़ता के िचिकत्सीय परी्षण में िकसी ्ऺकार की चोट या कोई असामान्यता नहीं पाई गई तथा एक्स-रे िरपोटर् के अनुसार सभी हि्डयों के एिपफ़ाइसीज़ संयु्व (fused) पाए गए, िजससे यह स्प्ि होता है िक परी्षा के समय पीिड़ता बािलग थी। िकतु "िदनांक 18.06.2019 को माता-िपता एवं पुिलस के दबाव तथा भय के अंतगर्त पीिड़ता का धारा 164 दं.्ऺ.सं. के अंतगर्त बयान मिजस््िेट के सम्ष दजर् िकया गया, िजसमें उसने कहा िक वह रिव शंकर (याची संख्या-2) के साथ बस ्षारा सूरत गई, जहाँ वह िकराए के घर में रहती थी, तथा िदनांक 07.06.2019 को रिव शंकर उसे थाना लालगंज, िजला रायबरेली छोड़ गया और यह आ्षासन िदया िक वह अगले िदन उसे साथ ले जाएगा, परंतु वह वापस नहीं आया" का कथन िकया गया, िजसके कारण धारा 164 दं.्ऺ.सं. के बयान के प्ाात िववेचक ्षारा धारा 376, 506 भा.दं.सं. तथा धारा 5/6 पॉक्सो अिधिनयम की धाराएँ बढ़ा दी ँिक आवेिदका संख्या-1 माता-िपता एवं पुिलस के ्ऺभाव में थी, इसिलए उसने अपने तथा अपने गईं। चू पित के जीवन की सुर्षा हेतु दबाव में बयान िदया। तदोपरांत आवेिदका संख्या-1 अपन घर से िनकलकर आवेदक संख्या-2/अिभयु्व से िमली तथा दोनों ने पुनः अपना वैवािहक जीवन ्ऺारम्भ िकया। दोनों आवेदकगण अहमदाबाद, गुजरात चले गए, जहाँ उनके वैवािहक संबंध से िदनांक 03.05.2020 को एक पु्ऴ का जन्म हुआ। उ्व बच्चे का जन्म ्ऺमाण-प्ऴ नगर िनगम अहमदाबाद ्षारा िनगर्त, अनुच्छेद संख्या-9 के रूप में संलग्न है। पुिलस ्षारा आवेदक संख्या-2 को िववाह के उपरांत भी िगरफ्तार करने का ्ऺयास िकए जाने पर याची संख्या-1 एवं 2 ने संयु्व रूप से माननीय उच्च न्यायालय में संर्षण हेतु िरट यािचका संख्या 13097 वषर् 2020 दायर की, िजसमें मा० न्ययाालय ्षारा िदनांक 27.08.2020 को आदेश पािरत िकया िक यािचयों को धारा 173(2) दं.्ऺ.सं. की िरपोटर् दािखल होने तक िगरफ्तार न िकया जाए। िदनांक 08.04.2021 को दोनों याचीगण पुनः आयर् समाज मंिदर गए और िववाह संपन्न कर िववाह ्ऺमाण-प्ऴ ्ऺाप्त िकया, िजसकी ्ऺित अनुच्छेद संख्या-11 के रूप में संलग्न है। हाई-स्कू ल माकर् शीट के अनुसार घटना के समय उसकी आयु लगभग 17 वषर् थी, िकन्तु पिरवार रिजस्टर में उसकी जन्म-ितिथ वषर् 2001 अंिकत है, िजसके अनुसार वह घटना के समय 18 वषर् से अिधक आयु की थी। िचिकत्सीय िरपोटर् से भी स्प्ि है िक सभी एिपफ़ाइसीज़ संयु्व पाए गए, िजससे वह बािलग ्ऺतीत होती है। हाई-स्कू ल माकर् शीट एवं पिरवार रिजस्टर की ्ऺितयाँ अनुच्छेद संख्या-12 के रूप में संलग्न हैं। यह संधायर् है िक बािलग युगल को अपनी पसंद से िववाह करने का मौिलक अिधकार ्ऺाप्त है। यह भी ्ऺासंिगक है िक आवेदकगण का मामला 3 A482 No. 3870 of 2021 इस माननीय न्यायालय ्षारा शाहीन परवीन एवं अन्य बनाम राज्य उ्तर ्ऺदेश (िरट यािचका संख्या 3519/2015) में पािरत िनणर्य से भी पूणर्तया आच्छािदत है, िजसमें पैरा-18 में यह अवलोिकत िकया गया है िक जब पीिड़ता स्वयं अिभयोजन का समथर्न न करने की घोषणा कर चुकी है, परी्षण का कोई उ्देश्य िस्ध नहीं होगा और न्यायालय, अिभयोजन एवं बचाव प्ष का अमूल्य समय ्िथर् जाएगा। पैरा-21 में भी यह कहा गया है िक अिभयोजन चलने से पीिड़ता का वैवािहक जीवन बािधत होगा तथा नवजात िशशु की देखभाल पर ्ऺितकू ल ्ऺभाव पड़ेगा। अतः वतर्मान वाद पूणर्तः वैवािहक/ पािरवािरक ्ऺकृ ित का है तथा आवेिदका संख्या-1 अपने पित आवेदक संख्या-2 के साथ रह रही है और अिभयोजन की सफलता की कोई संभावना नहीं है। अतः परी्षण चलाने से न्यायालय का मूल्यवान समय ्िथर् होगा। इसिलए, अिभलेखीय साम्षी से ्ऺथम दृ्िया याची संख्या-2 के िवरु्ध कोई अपराध िस्ध नहीं होता रहा है। अतः आपरािधक कायर्वाही जारी रखना आवेदकगण के भावी भिवष्य व न्याियक संकल्पना में न्योयोिचत नहीं है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश खिण्डत िकए जाने योग्य है। उनके ्षारा अपने तकर् के समथर्न में धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत आवेदन प्ऴ सं० 41580, वषर् 2022 (Fakre Alam @ Shozil Vs. Stae of U.P. and 3 others) में मा० उच्च न्यायालय ्षारा पािरत िविध-्िवस्था की ओर से न्यायालय का ध्यान आकृ ्ि िकया।
6. पिरवादी के िव्षान अिधव्वा ्षारा आवेदक के िव्षान अिधव्वा के उपयु र््व कथनों पर सहमित ्ऺकट की गयी तथा उनके ्षारा स्वीकार िकया िक वतर्मान में आवेिदका सं०-1/पीिड़ता, आवेदक संख्या-2/अिभयु्व की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं एवं उनके ्षारा उपरो्व उल्लेिखत उच्च न्यायालय के ्ऺश्नगत आदेश पर भरोसा भी िकया तथा यह वाद खिण्डत िकये जाने पर उन्हें कोई आपि्त नहीं है। र््व तथ्यों का िवरोध िकया गया, िकतु यह स्वीकार 7. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा उपयु िकया गया िक वतर्मान में आवेिदका सं०-1/पीिड़ता, आवेदक संख्या-2/अिभयु्व की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं।
8. न्यायालय ्षारा उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को सुना गया तथा तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध साष्य एवं ्ऺश्नगत आदेश का पिरशीलन िकया गया।
9. यहां ्ऺासंिगक है िक, माननीय उच्चतम न्यायालय ने State of Madhya Pradesh vs. Laxmi Narayan (AIR 2019 SC 1296); State of Madhya Pradesh vs. Dhruv Gurjar (AIR 2019 SC 1106); तथा Parbatbhai Aahir vs. State of Gujarat (AIR 2017 SC 4842) के मामलों में यह कहा है िक समाज के िवरु्ध िकए गए अपराध के वल समझौते या कमजोर साष्य के आधार पर समाप्त नहीं िकए जाने चािहए।
10. हालाँिक, Ramawatar vs. State of Madhya Pradesh (2021 SCC Online SC 966) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा िक िवशेष अिधिनयमों, जैसे SC/ST Act के अंतगर्त आने वाले अपराध य्यिप ये समाज के िवरु्ध अपराध हैं-कु छ पिरिस्थितयों में समझौते के आधार पर धारा 482 Cr.P.C. के तहत समाप्त िकए जा सकते हैं, परंतु यह शि्व के वल मुकदमें या अपील के लंिबत रहने के दौरान ही ्ऺयोग की जानी चािहए, उसके बाद नहीं। उपरो्व िनणर्य का पैरा 10 इस ्ऺकार उ्ध ृत िकया जाता है: "10. ्ऺथम ्ऺश्न के संदभर् में, यह उिचत होगा िक हाल ही में इस न्यायालय ्षारा िदए 4 A482 No. 3870 of 2021 गए Romgopal & Anr. vs. State of Madhya Pradesh के िनणर्य का उल्लेख िकया जाए, िजसमें इसी ्ऺकार का ्ऺश्न उठा था। इसका उ्तर सकारात्मक देते हुए स्प्ि िकया गया िक धारा 320 Cr.P.C. की सीमाएँ इस न्यायालय के अनुच्छेद 142 के अंतगर्त िनिहत शि्व पर, या उच्च न्यायालयों के धारा 482 Cr.P.C. के शि्व पर रोक के रूप में नहीं देखी जानी चािहए। आगे यह भी कहा गया िक अनुच्छेद 142 या धारा 482 Cr.P.C. के तहत असाधारण शि्व का ्ऺयोग 'पूणर् न्याय' करने के उ्देश्य से िकया जाना चािहए। अतः न्यायालय, अपराध की ्ऺकृ ित तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए िक पीिड़त/िशकायतकतार् ने स्वेच्छा से समझौता िकया है, अपने संवैधािनक/ िनिहत शि्व का ्ऺयोग कर कायर्वाही को समाप्त कर सकता है।"
11. यह भी ्ऺासंिगक है िक य्यिप, दण्ड ्ऺिकया की धारा 320 में उिल्लिखत अपराधों के अितिर्व िकसी अन्य अपराध के समझौते का ्ऺावधान नहीं है, िफर भी कु छ मामलों में पीिड़ता, भले ही अपराध असंयोजनीय (non-compoundable) हो, आरोिपत के आचरण को ्षमा करने के िलए तैयार हो सकता है। ऐसे मामलों में न्यायालय धारा 482 Cr.P.C. के अंतगर्त अपनी िनिहत शि्व का ्ऺयोग कर सकता है, भले ही अपराध धारा 320 Cr.P.C. के अंतगर्त संयोजनीय न हो।
12. हालाँिक, उच्च न्यायालय को सामान्यतः मिहलाओं और बच्चों के िवरु्ध यौन अपराधों में के वल समझौते के आधार पर हस्त्षेप नहीं करना चािहए, परन्तु धारा 482 Cr.P.C. की असाधारण शि्व का ्ऺयोग पूरी तरह से विजत नहीं है। ऐसे मामलों में न्यायालय को सम्ष दृि्िकोण (holistic approach) अपनानी चािहए और िनम्निलिखत बातों पर िवचार करना चािहए- (i) समाज की चेतना पर अपराध का ्ऺभाव; (ii) चोट की गंभीरता, यिद कोई हो; (iii) आरोपी तथा पीिड़ता के बीच समझौते की स्वैिच्छक ्ऺकृ ित; (iv) आरोपी का घटना से पूवर् और घटना के प्ाात ्िवहार तथा अन्य ्ऺासंिगक बातें।
13. यहां उल्लेखनीय है िक Ankit Jatav vs. State of Rajasthan, S.B. Criminal Misc. Petition No. 3075/2023 में राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने POCSO Act के अंतगर्त कायर्वाही इसिलए समाप्त कर दी थी, क्योंिक पीिड़ता ने अपने धारा 164 दण्ड ्ऺि्वया संिहता बयान में कहा था िक आरोपी ने उस पर कोई अपराध नहीं िकया और वह स्वयं अपनी इच्छा से िववाह करने हेतु घर से गई थी।
14. वतर्मान मामले में, अिभलेख के अवलोकन करने पर यह स्प्ि होता है िक आवेिदका संख्या-1/ पीिड़ता ्षारा आवेदक संख्या-2/अिभयु्व के साथ िववाह कर िलया तथा तब से वह आवेदक सं० 2/ अिभयु्व की पत्नी के रूप में उसके साथ दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रही है। उनके दांपत्य जीवन से िदनांक 03.05.2020 को एक संतान का जन्म हो चुका है तथा नवजात संतान का िनगर्त जन्म ्ऺमाण प्ऴ की ्ऺित अनुलग्नक संख्या-9 के रूप में संलग्न भी है तथा आवेदकगण के िववाह ्ऺमाणप्ऴ अनुलग्नक 11 पर संलग्न है। साथ ही, आवेिदका संख्या-1/पीिड़ता ्षारा अपने धारा 164 दं०्ऺ०सं० के बयान में आवेदक के साथ स्वेच्छा से जाने का अिभकथन िकया गया है। तद्नुसार, यह पिरलि्षत है िक आवेिदका संख्या-1/पीिड़ता, आवेदक संख्या-2/अिभयु्व की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं। 5 A482 No. 3870 of 2021
15. तद्नुसार, यह आवेदन स्वीकार िकया जाता है।
16. अतः इस मामलें में प्ऴावली पर उपलब्ध साष्यों तथा आवेिदका संख्या-1/पीिड़ता ्षारा आवेदक संख्या-2/अिभयु्व के साथ िववाह कर लेने तथा उनके संसगर् से एक संतान के जन्म होने के तथ्य को सम्ष रूप से ध्यान में रखते हुए तथा उच्च न्यायालय के Fakre Alam @ Shozil Vs. Stae of U.P. and 3 others में ्ऺितपािदत िविधक िस्थित को देखते हुए उपरो्व मामलें की समस्त कायर्वाही अिभखिण्डत (quashed) की जाती है।
17. ्ऺश्नगत ्ऺकरण में यिद कोई अंतिरम आदेश हो तो उसे समाप्त समझा जाय। December 12, 2025 CP.sahani/S.Ali (Dr. Gautam Chowdhary,J.) CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench
Counsel for Applicant(s) Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Piyush Shrivastava, Shishir Pradhan, Suchita Singh, Veer Bahadur Yadav : Sheo Prakash Singh Court No. - 29 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. यह आवेदन प्ऴ आवेिदका सं० 1/पीिड़ता एवं आवेदक सं० 2/अिभयु्व की ओर से संयु्व रूप से ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदकगण की ओर से धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत यह आवेदन प्ऴ, मु०अ०सं० 255 वषर् 2019 अन्तगर्त धारा 363, 366, 376, 506 भारतीय दण्ड संिहता व धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट, थाना लालगंज, िजला रायबरेली में ्ऺेिषत आरोप प्ऴ, िदनांिकत 18.11.2020 से उ्य ूत वाद सं० 173 वषर् 2021 में िवशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, रायबरेली ्षारा पािरत ्ऺसं्ञान/तलबी आदेश िदनांक 26.02.2021 एवं इसके फलस्वरूप अि्षम कायर्वाही के िवरू्ध योिजत िकया गया है।
3. सं्षेप में अिभयोजन कथानक यह है िक अिभयोगी ्षारा संबंिधत थाने पर इस आशय का सूचना दी गयी िक ्ऺािथनी की लडकी को फु सला बहला कर रवीशंकर S/O रमाकान्त ि्षवेदी (पाठक) कल िदन में 3 बजे के लगभग भगा ले गया है, मेरी लड़की मोनी पाल को भगवाने में रेखा पत्नी गु्डू ि्षवेदी का हाथ है। मोनी मेरे बक्शे में रखे 20 हजार रूपये, पायल एक जोड़ी, माला एक जोड़ी, झुमका एक जोड़ी साथ में ले गयी है । ्शीमान जी से िनवेदन है िक मेरी िरपोटर् दजर् की जाय।
4. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा, िवप्षी सं० 2/सूचनाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी िशिशर ्ऺधान एवं अपर शासकीय अिधव्वा ्शी अशोक कु मार ्शीवास्तव को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
5. (क) आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेिदका सं०-1 व आवेदक सं० 2 के मध्य ्ऺेम संबंध था तथा िदनांक 14.05.2019 को िववाह के उ्देश्य से अपनी स्वेच्छा से घर से िनकल गई तथा जाते समय अपने घर से आभूषण, नकदी आिद भी साथ ले गई तथा िदनांक 27.05.2019 को दोनों आवेदकगण ने मंिदर में िववाह िकया और एक-दूसरे को पित-पत्नी के रूप में स्वीकार भी कर िलया। इस संदभर् में उन्होंने वैवािहक करार/अनुबंध भी िकया तथा पित-पत्नी के रूप में साथ रहना ्ऺारम्भ कर िदया। उ्व िववाह अनुबंध की ्ऺित इस शपथप्ऴ के साथ अनुच्छेद संख्या-5 के रूप में संलग्न है। आगे यह भी कहा गया िक सहमित से िववाह कराने का आ्षासन िदए जाने पर 2 A482 No. 3870 of 2021 िदनांक 07.06.2019 को आवेदक संख्या-2 ने, आवेदक संख्या-1 की माता के अनुरोध पर, आवेदक संख्या-1 को वादी के घर छोड़ िदया। वादी ने अपने पिरजनों के दबाव एवं धमकी के कारण आवेिदका संख्या-1 को पुिलस के सुपुदर् कर िदया तथा पुिलस ने उसी िदन अथार्त िदनांक 07.06.2019 को तहसील लालगंज, जनपद रायबरेली के िनकट वादी की उपिस्थित में किथत रूप से उसकी बरामदगी दशार् दी तथा बरामदगी के बाद उसी िदन अथार्त िदनांक 07.06.2019 को मिहला कांस्टेबल ्षारा आवेिदका संख्या-1 का धारा 161 दं.्ऺ.सं. के अंतगर्त बयान दजर् िकया गया, िजसमें उसने कहा िक उसकी आयु लगभग 18 वषर् है तथा उसके माता-िपता उसकी इच्छा के िवरु्ध उसका िववाह करना चाहते थे, इस कारण वह नाराज़ होकर िदनांक 14.05.2019 को अपनी बुआ के घर स्वयं चली गई थी और अब वह अपने माता-िपता के साथ जाना चाहती है। उसी िदन िदनांक 07.06.2019 को उसका िचिकत्सीय परी्षण सामुदाियक स्वास्थ्य कें ्श, लालगंज, िजला रायबरेली में िकया गया, िजसमें उसने घटना के संबंध में यह कथन भी िकया: “मैं अपनी मजर् से अपनी बुआ के यहाँ चली गयी थी। मेरे माता-िपता जबरदस्ती मेरी शादी करना चाहते थे इसिलए मैंने ऐसा िकया।” (ख) किथत पीिड़ता के िचिकत्सीय परी्षण में िकसी ्ऺकार की चोट या कोई असामान्यता नहीं पाई गई तथा एक्स-रे िरपोटर् के अनुसार सभी हि्डयों के एिपफ़ाइसीज़ संयु्व (fused) पाए गए, िजससे यह स्प्ि होता है िक परी्षा के समय पीिड़ता बािलग थी। िकतु "िदनांक 18.06.2019 को माता-िपता एवं पुिलस के दबाव तथा भय के अंतगर्त पीिड़ता का धारा 164 दं.्ऺ.सं. के अंतगर्त बयान मिजस््िेट के सम्ष दजर् िकया गया, िजसमें उसने कहा िक वह रिव शंकर (याची संख्या-2) के साथ बस ्षारा सूरत गई, जहाँ वह िकराए के घर में रहती थी, तथा िदनांक 07.06.2019 को रिव शंकर उसे थाना लालगंज, िजला रायबरेली छोड़ गया और यह आ्षासन िदया िक वह अगले िदन उसे साथ ले जाएगा, परंतु वह वापस नहीं आया" का कथन िकया गया, िजसके कारण धारा 164 दं.्ऺ.सं. के बयान के प्ाात िववेचक ्षारा धारा 376, 506 भा.दं.सं. तथा धारा 5/6 पॉक्सो अिधिनयम की धाराएँ बढ़ा दी ँिक आवेिदका संख्या-1 माता-िपता एवं पुिलस के ्ऺभाव में थी, इसिलए उसने अपने तथा अपने गईं। चू पित के जीवन की सुर्षा हेतु दबाव में बयान िदया। तदोपरांत आवेिदका संख्या-1 अपन घर से िनकलकर आवेदक संख्या-2/अिभयु्व से िमली तथा दोनों ने पुनः अपना वैवािहक जीवन ्ऺारम्भ िकया। दोनों आवेदकगण अहमदाबाद, गुजरात चले गए, जहाँ उनके वैवािहक संबंध से िदनांक 03.05.2020 को एक पु्ऴ का जन्म हुआ। उ्व बच्चे का जन्म ्ऺमाण-प्ऴ नगर िनगम अहमदाबाद ्षारा िनगर्त, अनुच्छेद संख्या-9 के रूप में संलग्न है। पुिलस ्षारा आवेदक संख्या-2 को िववाह के उपरांत भी िगरफ्तार करने का ्ऺयास िकए जाने पर याची संख्या-1 एवं 2 ने संयु्व रूप से माननीय उच्च न्यायालय में संर्षण हेतु िरट यािचका संख्या 13097 वषर् 2020 दायर की, िजसमें मा० न्ययाालय ्षारा िदनांक 27.08.2020 को आदेश पािरत िकया िक यािचयों को धारा 173(2) दं.्ऺ.सं. की िरपोटर् दािखल होने तक िगरफ्तार न िकया जाए। िदनांक 08.04.2021 को दोनों याचीगण पुनः आयर् समाज मंिदर गए और िववाह संपन्न कर िववाह ्ऺमाण-प्ऴ ्ऺाप्त िकया, िजसकी ्ऺित अनुच्छेद संख्या-11 के रूप में संलग्न है। हाई-स्कू ल माकर् शीट के अनुसार घटना के समय उसकी आयु लगभग 17 वषर् थी, िकन्तु पिरवार रिजस्टर में उसकी जन्म-ितिथ वषर् 2001 अंिकत है, िजसके अनुसार वह घटना के समय 18 वषर् से अिधक आयु की थी। िचिकत्सीय िरपोटर् से भी स्प्ि है िक सभी एिपफ़ाइसीज़ संयु्व पाए गए, िजससे वह बािलग ्ऺतीत होती है। हाई-स्कू ल माकर् शीट एवं पिरवार रिजस्टर की ्ऺितयाँ अनुच्छेद संख्या-12 के रूप में संलग्न हैं। यह संधायर् है िक बािलग युगल को अपनी पसंद से िववाह करने का मौिलक अिधकार ्ऺाप्त है। यह भी ्ऺासंिगक है िक आवेदकगण का मामला 3 A482 No. 3870 of 2021 इस माननीय न्यायालय ्षारा शाहीन परवीन एवं अन्य बनाम राज्य उ्तर ्ऺदेश (िरट यािचका संख्या 3519/2015) में पािरत िनणर्य से भी पूणर्तया आच्छािदत है, िजसमें पैरा-18 में यह अवलोिकत िकया गया है िक जब पीिड़ता स्वयं अिभयोजन का समथर्न न करने की घोषणा कर चुकी है, परी्षण का कोई उ्देश्य िस्ध नहीं होगा और न्यायालय, अिभयोजन एवं बचाव प्ष का अमूल्य समय ्िथर् जाएगा। पैरा-21 में भी यह कहा गया है िक अिभयोजन चलने से पीिड़ता का वैवािहक जीवन बािधत होगा तथा नवजात िशशु की देखभाल पर ्ऺितकू ल ्ऺभाव पड़ेगा। अतः वतर्मान वाद पूणर्तः वैवािहक/ पािरवािरक ्ऺकृ ित का है तथा आवेिदका संख्या-1 अपने पित आवेदक संख्या-2 के साथ रह रही है और अिभयोजन की सफलता की कोई संभावना नहीं है। अतः परी्षण चलाने से न्यायालय का मूल्यवान समय ्िथर् होगा। इसिलए, अिभलेखीय साम्षी से ्ऺथम दृ्िया याची संख्या-2 के िवरु्ध कोई अपराध िस्ध नहीं होता रहा है। अतः आपरािधक कायर्वाही जारी रखना आवेदकगण के भावी भिवष्य व न्याियक संकल्पना में न्योयोिचत नहीं है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश खिण्डत िकए जाने योग्य है। उनके ्षारा अपने तकर् के समथर्न में धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत आवेदन प्ऴ सं० 41580, वषर् 2022 (Fakre Alam @ Shozil Vs. Stae of U.P. and 3 others) में मा० उच्च न्यायालय ्षारा पािरत िविध-्िवस्था की ओर से न्यायालय का ध्यान आकृ ्ि िकया।
6. पिरवादी के िव्षान अिधव्वा ्षारा आवेदक के िव्षान अिधव्वा के उपयु र््व कथनों पर सहमित ्ऺकट की गयी तथा उनके ्षारा स्वीकार िकया िक वतर्मान में आवेिदका सं०-1/पीिड़ता, आवेदक संख्या-2/अिभयु्व की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं एवं उनके ्षारा उपरो्व उल्लेिखत उच्च न्यायालय के ्ऺश्नगत आदेश पर भरोसा भी िकया तथा यह वाद खिण्डत िकये जाने पर उन्हें कोई आपि्त नहीं है। र््व तथ्यों का िवरोध िकया गया, िकतु यह स्वीकार 7. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा उपयु िकया गया िक वतर्मान में आवेिदका सं०-1/पीिड़ता, आवेदक संख्या-2/अिभयु्व की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं।
8. न्यायालय ्षारा उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को सुना गया तथा तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध साष्य एवं ्ऺश्नगत आदेश का पिरशीलन िकया गया।
9. यहां ्ऺासंिगक है िक, माननीय उच्चतम न्यायालय ने State of Madhya Pradesh vs. Laxmi Narayan (AIR 2019 SC 1296); State of Madhya Pradesh vs. Dhruv Gurjar (AIR 2019 SC 1106); तथा Parbatbhai Aahir vs. State of Gujarat (AIR 2017 SC 4842) के मामलों में यह कहा है िक समाज के िवरु्ध िकए गए अपराध के वल समझौते या कमजोर साष्य के आधार पर समाप्त नहीं िकए जाने चािहए।
10. हालाँिक, Ramawatar vs. State of Madhya Pradesh (2021 SCC Online SC 966) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा िक िवशेष अिधिनयमों, जैसे SC/ST Act के अंतगर्त आने वाले अपराध य्यिप ये समाज के िवरु्ध अपराध हैं-कु छ पिरिस्थितयों में समझौते के आधार पर धारा 482 Cr.P.C. के तहत समाप्त िकए जा सकते हैं, परंतु यह शि्व के वल मुकदमें या अपील के लंिबत रहने के दौरान ही ्ऺयोग की जानी चािहए, उसके बाद नहीं। उपरो्व िनणर्य का पैरा 10 इस ्ऺकार उ्ध ृत िकया जाता है: "10. ्ऺथम ्ऺश्न के संदभर् में, यह उिचत होगा िक हाल ही में इस न्यायालय ्षारा िदए 4 A482 No. 3870 of 2021 गए Romgopal & Anr. vs. State of Madhya Pradesh के िनणर्य का उल्लेख िकया जाए, िजसमें इसी ्ऺकार का ्ऺश्न उठा था। इसका उ्तर सकारात्मक देते हुए स्प्ि िकया गया िक धारा 320 Cr.P.C. की सीमाएँ इस न्यायालय के अनुच्छेद 142 के अंतगर्त िनिहत शि्व पर, या उच्च न्यायालयों के धारा 482 Cr.P.C. के शि्व पर रोक के रूप में नहीं देखी जानी चािहए। आगे यह भी कहा गया िक अनुच्छेद 142 या धारा 482 Cr.P.C. के तहत असाधारण शि्व का ्ऺयोग 'पूणर् न्याय' करने के उ्देश्य से िकया जाना चािहए। अतः न्यायालय, अपराध की ्ऺकृ ित तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए िक पीिड़त/िशकायतकतार् ने स्वेच्छा से समझौता िकया है, अपने संवैधािनक/ िनिहत शि्व का ्ऺयोग कर कायर्वाही को समाप्त कर सकता है।"
11. यह भी ्ऺासंिगक है िक य्यिप, दण्ड ्ऺिकया की धारा 320 में उिल्लिखत अपराधों के अितिर्व िकसी अन्य अपराध के समझौते का ्ऺावधान नहीं है, िफर भी कु छ मामलों में पीिड़ता, भले ही अपराध असंयोजनीय (non-compoundable) हो, आरोिपत के आचरण को ्षमा करने के िलए तैयार हो सकता है। ऐसे मामलों में न्यायालय धारा 482 Cr.P.C. के अंतगर्त अपनी िनिहत शि्व का ्ऺयोग कर सकता है, भले ही अपराध धारा 320 Cr.P.C. के अंतगर्त संयोजनीय न हो।
12. हालाँिक, उच्च न्यायालय को सामान्यतः मिहलाओं और बच्चों के िवरु्ध यौन अपराधों में के वल समझौते के आधार पर हस्त्षेप नहीं करना चािहए, परन्तु धारा 482 Cr.P.C. की असाधारण शि्व का ्ऺयोग पूरी तरह से विजत नहीं है। ऐसे मामलों में न्यायालय को सम्ष दृि्िकोण (holistic approach) अपनानी चािहए और िनम्निलिखत बातों पर िवचार करना चािहए- (i) समाज की चेतना पर अपराध का ्ऺभाव; (ii) चोट की गंभीरता, यिद कोई हो; (iii) आरोपी तथा पीिड़ता के बीच समझौते की स्वैिच्छक ्ऺकृ ित; (iv) आरोपी का घटना से पूवर् और घटना के प्ाात ्िवहार तथा अन्य ्ऺासंिगक बातें।
13. यहां उल्लेखनीय है िक Ankit Jatav vs. State of Rajasthan, S.B. Criminal Misc. Petition No. 3075/2023 में राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने POCSO Act के अंतगर्त कायर्वाही इसिलए समाप्त कर दी थी, क्योंिक पीिड़ता ने अपने धारा 164 दण्ड ्ऺि्वया संिहता बयान में कहा था िक आरोपी ने उस पर कोई अपराध नहीं िकया और वह स्वयं अपनी इच्छा से िववाह करने हेतु घर से गई थी।
14. वतर्मान मामले में, अिभलेख के अवलोकन करने पर यह स्प्ि होता है िक आवेिदका संख्या-1/ पीिड़ता ्षारा आवेदक संख्या-2/अिभयु्व के साथ िववाह कर िलया तथा तब से वह आवेदक सं० 2/ अिभयु्व की पत्नी के रूप में उसके साथ दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रही है। उनके दांपत्य जीवन से िदनांक 03.05.2020 को एक संतान का जन्म हो चुका है तथा नवजात संतान का िनगर्त जन्म ्ऺमाण प्ऴ की ्ऺित अनुलग्नक संख्या-9 के रूप में संलग्न भी है तथा आवेदकगण के िववाह ्ऺमाणप्ऴ अनुलग्नक 11 पर संलग्न है। साथ ही, आवेिदका संख्या-1/पीिड़ता ्षारा अपने धारा 164 दं०्ऺ०सं० के बयान में आवेदक के साथ स्वेच्छा से जाने का अिभकथन िकया गया है। तद्नुसार, यह पिरलि्षत है िक आवेिदका संख्या-1/पीिड़ता, आवेदक संख्या-2/अिभयु्व की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं। 5 A482 No. 3870 of 2021
15. तद्नुसार, यह आवेदन स्वीकार िकया जाता है।
16. अतः इस मामलें में प्ऴावली पर उपलब्ध साष्यों तथा आवेिदका संख्या-1/पीिड़ता ्षारा आवेदक संख्या-2/अिभयु्व के साथ िववाह कर लेने तथा उनके संसगर् से एक संतान के जन्म होने के तथ्य को सम्ष रूप से ध्यान में रखते हुए तथा उच्च न्यायालय के Fakre Alam @ Shozil Vs. Stae of U.P. and 3 others में ्ऺितपािदत िविधक िस्थित को देखते हुए उपरो्व मामलें की समस्त कायर्वाही अिभखिण्डत (quashed) की जाती है।
17. ्ऺश्नगत ्ऺकरण में यिद कोई अंतिरम आदेश हो तो उसे समाप्त समझा जाय। December 12, 2025 CP.sahani/S.Ali (Dr. Gautam Chowdhary,J.) CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench