Smt. Saroj Singh v. Sajnay Singh) under Section
Case Details
Cited in this judgment
1. Vakalatnama filed on behalf of opposite party No.2 by Shri Prashant Srivastva, Advocate is taken on record.
2. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State as well as Shri Prashant Srivastava and perused the record.
3. This criminal revision under Section 19(4) of the Family Court Act, read with Section 438/442 of the BNSS has been filed against the judgment and order dated
09.05.2025, passed by the Principal Judge, Family Court, Hardoi (in short "Family Court") in Criminal Misc. Case No. 521 of 2019 (Smt. Saroj Singh Vs. Sajnay Singh) under Section 125 Cr.P.C., whereby the maintenance of Rs.2500/- per month has been awarded.
4. In compliance of this Court order dated 25.07.2025, revisionist - Sanjay Singh and opposite party No.2 - Smt. Saroj Singh are present before this court duly identified by their respective counsel namely Shri Pankaj Gupta and Shri Prashant Srivastva, Advocates. Opposite party No.2-Smt. Saroj Singh has been brought by S.I. Kallu Ram Gupta and lady head constable Neelam Singh of Police Station -Baghauli, District - Hardoi.
5. The opposite party No.2 is not ready to settle the dispute amicably by way of mediation. In this view of the matter, this court proceeded to decide the case on merits.
6. Brief facts of the case are as under :- (i) The marriage of the revisionist and opposite party no.2 was solemnized according to Hindu rites and rituals on 01.07.2002. 2 CRLR No. 803 of 2025 (ii) Out of the wedlock of the revisionist and opposite party No.2, three children were born namely daughter Naina aged about 18 years, daughter Krishna aged about 15 years and daughter Sunaina aged about 7 years. (iii) On 25.05.2019, opposite party no.2 had gone to to her sisters' house and since then she is living with her family without any reason, as stated by the revisionist. (iv) The revisionist has also stated that he made several efforts to bring the opposite party No.2 back to matrimonial home but due to unnecessary interruption of her sister and her husband she is not ready to live with revisionist. (v) On 27.7.2019, the opposite party no.2 filed a case under section 125 Cr.P.C. (vi) On 03.11.2022, the revisionist filed reply to the application of opposite party no.2 and denied the allegations made in application. (vii) The Principal Judge, Family Court, Hardoi vide judgment and order dated
09.05.2025, after considering the pleadings and evidence adduced by the parties, allowed the application under Section 125 Cr.P.C. Hence, the revisionist by means of this revision has challenged the order dated 09.05.2025.
7. Impeaching the order of the Family Court, the learned counsel for the revisionist has submitted that the findings of the Family Court on issue No. 4 are perverse. The findings/observations on this issue ought to have been given by the Family Court in favour of the revisionist on the basis of evidence adduced by the parties. If the findings/observations on the issue No.4 were in favour of the revisionist then, no amount would have been awarded to the applicant/opposite party No.2 by the Family Court in view of Section 125(4) of the Cr.P.C. Referred relevant portion of the order impugned dated 09.05.2025 is extracted herein under :- "िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 4 18- िवचारणीय िबन्दु सं० 4 इस आशय से िविनि्षत िकया गया है िक क्या ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना युि्व यु्व कारण के िवप्षी से अलग रह रही है? 19- उ्व के पिर्ऺेष्य में ्ऺािथनी का कथन है िक शादी के कु छ समय बाद िवप्षी व उसके पिरजन ्ऺािथनी से अितिर्व दहेज में मोटर साइिकल की मांग करने लगे तथा अितिर्व दहेज की मांग को लेकर ्ऺािथनी को मारने पीटने लगे। ्ऺािथनी जब मायके िवदा होकर आयी तब अपने िपता को अितिर्व दहेज मांगने वाली बात बतायी। ्ऺािथनी के िपता कु छ िरश्तेदारों को ले जाकर िवप्षी व उसके पिरजनो से खुशामद की और कहा िक हम गरीब आदमी है। हम दहेज की मांग कै से पूरी कर पायेंगे। तब िवप्षीगण िकसी ्ऺकार रखने को तैयार हुए और िवदा कराकर ले गये। ्ऺािथनी के िपता की मृत्यु हो जाने के प्ाात िवप्षी ्ऺािथनी को पुनः अितिर्व दहेज की खाितर शारीिरक व मानिसक रूप से ्ऺतािडत करने और खाना कपड़ा की तकलीफ देने लगा। िदनांक 25.5.2019 को िवप्षी ने ्ऺािथनी को मारा पीटा। बच्चों को छीनकर मा्ऴ पहने हुए कपड़ो में ्ऺािथनी की बहन आशा के यहां छोड़कर चले गये। तब से ्ऺिथनी अपनी बहन आशा के घर में रह रही है। िवप्षी ्षारा कोई खोज खबर नहीं ली गयी। अपने उ्व कथन के समथर्न ्ऺािथनी सरोज िसह सा्षी पी० डब्ल्यू 1 के रूप में परीि्षत हुई है। सा्षी पी०डब्ल्यू 1 ने अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में उ्व कथनों का समथर्न िकया है तथा ्ऺित परी्षा में िवप्षी ्षारा िदये गये सुझाव से इनकार करते हुए यह कहा िक यह कहना गलत है िक मैं अपनी इच्छा से अपने पित को छोड़कर बहनोई के साथ रह रही हूँ। बिल्क मेरे पित ने मुझे मारा 3 CRLR No. 803 of 2025 पीटा था। इस सुझाव से भी इनकार िकया िक ्ऺािथनी का अपने बहनोई में नाजायज सम्बन्ध है इसिलये वह बहनोई के साथ रह रही हो। बिल्क संजय ने मारपीट कर घर से िनकाल िदया। ्ऺािथनी की ओर से परीि्षत मा्षी पी०डब्ल्यू 2 ्ऺमोद कु मार िसह ने अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी से अितिर्व दहेज की मांग करने और अितिरक दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने का कथन िकया है, िकन्तु अपनी ्ऺित परी्षा में यह कहा है िक मेरे सामने सरोज व संजय के मध्य कभी िववाद नहीं हुआ और न ही मुझसे संजय िसह ने अितिर्व दहेज की मांग की। इस्ऺकार चू ंिक सा्षी पी०डबल्यू 2 के सम्ष ्ऺािथनी एवं िवप्षी के बीच कोई मारपीट नहीं हुयी, न ही उसके सामने कभी दहेज की मांग की गयी। अतः िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को ्ऺतािड़त करने एवं अितिर्व दहेज की मांग करने का तथ्य साष्य पी०डब्ल्यू 2 की ्िि्वगत जानकारी में नहीं है। अतः सा्षी पी०डब्ल्यू 2 ्षारा अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िकये गये इस कथन िक िवप्षी व उसके पिरजन ्ऺािथनी को अितिर्व दहेज के िलए ्ऺतािड़त करते थे, का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इसी ्ऺकार सा्षी पी०डब्ल्यू 3 बालकराम ने भी अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी से अितिर्व दहेज की मांग करने और अितिर्व दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने का कथन िकया है, िकन्तु अपनी ्ऺित परी्षा में यह कहा है िक मै संजय को पहचानता हूँ। संजय ने मेरे सामने ंिक कभी सरोज को नहीं मारा पीटा, न ही िकसी ्ऺकार के दहेज की मांग की। इस्ऺकार चू सा्षी पी०डब्ल्यू 3 के सम्ष ्ऺािथनी एवं िवप्षी के बीच कोई मारपीट नहीं हुयी, न ही उसके सामने कभी दहेज की मांग की गयी। अतः िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को ्ऺतािड़त करने एवं अितिर्व दहेज की मांग करने का तथ्य सा्षी पी०डब्ल्यू3 की ्िि्वगत जानकारी में नहीं है। अतः सा्षी पी०डब्ल्यू ्षारा अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िकये गये इस कथन िक िवप्षी व उसके पिरजन ्ऺािथनी को अितिर्व दहेज के िलए ्ऺतािड़त करते थे, का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इस ्ऺकार अितिर्व दहेज की मांग िवप्षी ्षारा िकया जाना तथा अितिर्व दहेज की मांग पूरी न होने पर ्ऺािथनी को मानिसक एवं शारीिरक रूप से ्ऺतािड़त करने के तथ्य के बावत एक मा्ऴ सा्षी पी०डब्ल्यू 1 ्शीमती सरोज का है। भले ही सा्षी पी०डब्ल्यू 2 व पी०डब्ल्यू3 के साष्य से िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने की पुि्ि नही होती है, िकन्तु सा्षी पी०डब्ल्यू 1 ने अपने साष्य से िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने की पुि्ि की है। 20- दूसरी ओर िवप्षी का कथन है िक ्ऺािथनी िववाह के उपरान्त िवप्षी तथा उसके पिरवार वालो के ्ऺित ्वू रता व अभ्शता करने की आदत बना ली तथा स्वयं की मजर् से मायके व अपनी बहन के यहां चली गयी। उ्व कथन के समथर्न में स्वयं िवप्षी संजय िसह डी०डब्ल्यू 1 के रूप में अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ दािखल िकया है। िवप्षी ने अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में यह कहा है िक िववाह के एक वषर् बाद ही ्ऺािथनी ने अपनी स्वेच्छा से अपने बहनोई अरुण कु मार िसह के यहां जाना ्ऺारम्भ कर िदया िजस पर िवप्षी ने ्ऺािथनी को िबना िकसी कारण या िबना बुलावे के अपने बहनोई के यहां जाने से रोका, परन्तु ्ऺािथनी नही मानी और अपने जीजा के घर आती जाती रही। यहां पर यह उल्लेखनीय है िक यह तथ्य िक ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना िकसी युि्व यु्व कारण के िवप्षी से ्ऺथक रह रही है, को सािबत करने का भार िवप्षी पर हैं। िवप्षी की ओर से एक मा्ऴ सा्षी स्वयं िवप्षी डी०डब्ल्यू1 के रूप में अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ दािखल िकया है और उसके प्षात न्यायालय आना बंद कर िदया, िजसके कारण साधी डी०डब्ल्यू1 से ्ऺािथनी की ओर से कोई ्ऺित परी्षा नहीं की जा सकी। ऐसी िस्थित में सा्षी डी०डब्ल्यू1 संजय िसह का अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में यह कहना िक ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना िकसी युि्व यु्व कारण के अपने मायके या अपने बहनोई के साथ रह रही है, सािबत नहीं माना जा सकता। िवप्षी की ओर से िकसी अन्य सा्षी को अपने उ्व कथनों की पुि्ि हेतु परीि्षत नहीं कराया गया है। जबिक दूसरी ओर ्ऺािथनी ने अपने इस कथन के समथर्न में िक िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को अितिर्व दहेज की मांग को ले करके ्ऺतािडत िकया गया और मारपीट कर घर से िनकाल िदया गया, की पुि्ि स्वयं ्ऺािथनी ने अपने साष्य के माध्यम से िकया है। 21- इसके अितिर्व यहां पर यह भी उल्लेखनीय है िक साि्षयों में यह आया है िक ्ऺािथनी के माता िपता की मृत्यु हो चुकी है। जब ्ऺािथनी के मायके में उसके माता िपता की मृत्यु हो जाती है, तो मायके में भी आ्शय िमल पाना मुिश्कल होता है। ऐसी िस्थित में जहां तक ्ऺािथनी का अपनी बहन के यहां रहने का ्ऺश्न है, यह सम्भव है िक इसी कारण से वह अपनी बहन के यहां आ्शय िलये हो। इस ्ऺकार िवप्षी की ओर से कोई भी ऐसा साष्य व ्ऺमाण दािखल नहीं िकया गया है िजससे यह पाया जाये िक ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना युि्व यु्व कारण के िवप्षी से ्ऺथक रह रही है। 22- इसके अितिर्व भारतीय समाज में वैवािहक िस्थित को बनाये रखना पुरुष की तुलना में मिहलाओं के िलये अिधक महत्वपूणर् होता है क्योंिक सामािजक व आिथक सुर्षा के िलये अिधकतर मिहलायें िववाह के पहले िपता पर और िववाह के प्ाात पित पर िनभर्र हो जाती है। 4 CRLR No. 803 of 2025 िववाह के प्ाात पत्नी अपने माता िपता का घर छोड़कर पित के घर रहने के िलये जाती है। इस ्ऺकार यह कहा जा सकता है िक पत्नी मानिसक रूप से इस बात की तैयारी करके ससुराल जाती है िक शेष जीवन उसे अपने पित के साथ ससुराल में ही ्ितीत करना है। यिद ससुराल में िकसी मिहला के रहने की पिरिस्थितयां कु छ ्ऺितकू ल भी हो, तब भी मिहला यथा सम्भव उन पिरिस्थितयों के अनुरूप स्वयं को ढालने का ्ऺयास करती है, क्योंिक उसके सामने दूसरा िवकल्प अथार्त मायके में रहने का, अिधक अच्छा िवकल्प नहीं होता। इन पिरिस्थितयों के आधार पर यह कहा जा सकता है िक सामान्य पिरिस्थितयों में कोई मिहला अकारण अपने पित को छोडकर अपने मायके में रहना पसन्द नहीं करेगी। स्प्ि है िक इस मामले में भी यह कहा जा सकता है िक ्ऺािथनी सरोज िसह के िलये उसकी ससुराल में रहने की पिरिस्थितयां सहज एवं स्वाभािवक नहीं थी, िजसके कारण उसे अपनी ससुराल को छोड़कर अपने मायके में रहना पड रहा है। यिद ्ऺािथनी अपने माता िपता का घर छोडकर िवप्षी के घर शेष जीवन ्ितीत करने के िलये गयी थी, तो यह कहा जा सकता है िक यह उ्तरदाियत्व िवप्षी का था िक वह ्ऺािथनी को इस ्ऺकार अपने घर में रखता िजससे ्ऺािथनी सामान्य रूप से अपना जीवन ्ितीत कर सकें । य्यिप यह सही है िक कु छ मिहलायें अपनी संकीणर् मानिसक सोच के कारण शादी के बाद से ही पित पर यह दबाव बनाने लगती हैं िक उसके पित उसकी इच्छाओं के अनुसार चले और वह अपनी कमाई का पूरा भाग या अिधकांश भाग उस पर और उसके बचों पर खचर् करे। इस ्ऺवृि्त की मिहलायें यह सहन नहीं कर पाती िक पित की कमाई का कोई भाग पित के माता िपता या भाई बहन के ऊपर खचर् हो। कभी कभी पत्नी की यही ्ऺवृि्त बड़े िववाद का रूप ले लेती है, िकन्तु इस मामले में यिद ऐसी कोई पिरिस्थित थी तो िवप्षी को यह बात न्यायालय के सम्ष ्ऺस्तुत करना चािहए था और अपने साष्यों से इसे सािबत करना चािहए था। यिद ्ऺािथनी के अपने ससुराल में रहने की पिरिस्थितयां सही नही थी और िवप्षी ्षारा भी ्ऺािथनी के अलग रहने का कोई तकर् संगत कारण स्प्ि नहीं िकया गया है तो इन पिरिस्थितयों में यह माना जा सकता है िक िवप्षी का ्िवहार ्ऺािथनी के ्ऺित उिचत नहीं था। स्प्ि है िक इन समस्त तथ्यों पिरिस्थितयों को देखते हुये यह कहा जा सकता है िक भले ही ्ऺािथनी के ्िवहार में कु छ ्ऴुिट या कमी रही हो, िकन्तु यिद ्ऺािथनी को अपने मायके में रहना पड़ रहा है तो िवप्षी उसके भरण पोषण के िलये उ्तरदायी है। तदनुसार िवचारणीय िबन्दु सं० 4 िनस्तािरत िकया जाता है। िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 5 23- वाद िबन्दु सं० 5 इस आशय से िविनि्ात िकया गया है िक क्या िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी का भरण-पोषण करने में उपे्षा की गयी है या इन्कार िकया गया है? 24- उ्व के पिर्ऺेष्य में ्ऺािथनी का कथन है िक िवप्षी ने जब से ्ऺािथनी को मारपीट कर घर िनकाला है तब से आजतक िवप्षी ने ्ऺािथनी की कोई खोज खबर नहीं ली है और न ही कोई खाना खचार् आिद िदया है। मजबूर होकर ्ऺािथनी अपनी बहन के यहां रह रही है। िवप्षी की ओर से ्ऺािथनी के भरण पोषण ्ऺाथर्ना प्ऴ के िवरू्ध 16 क अपना जवाब दावा दािखल िकया गया है िजसमे िवप्षी ने कही पर भी यह कथन नहीं िकया है िक जब से ्ऺािथनी अपनी बहन के यहां रह रही है तब से िवप्षी ने ्ऺािथनी को भरण पोषण की कोई धनरािश दी हो। उभय प्ष की ओर से रजनेश बनाम नेहा के अनुपालन में शपथ प्ऴ दािखल िकये गये हैं। शपथ प्ऴ में भी उभय प्षों ने यह उल्लेख िकया है िक पूवर् के िकसी मामले में ्ऺािथनी को भरण पोषण की धनरािश ्ऺाप्त नही हो रही है। इसके अितिर्व िवप्षी की ओर से कोई भी ऐसा साष्य प्ऴावली पर दािखल नहीं िकया गया है िजससे यह पाया जाये िक िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को उसके भरण पोषण हेतु कोई ्िवस्था की गयी हो। ्ऺािथनी िवप्षी की िववािहता पत्नी है। अतः िवप्षी का यह दाियत्व है िक अपनी पत्नी के भरण पोषण की ्िवस्था करें। इस ्ऺकार यह कहा जा सकता है िक िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी के भरण पोषण में उपे्षा बरती जा रही है एवं इनकार िकया जा रहा है। तदनुसार िवचारणीय िबन्दु सं० 5 िनस्तािरत िकया जाता है। िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 6 25- िवचारणीय िबन्दु सं० 6 इस तथ्य से सम्बिन्धत है िक क्या ्ऺािथनी कोई अनुतोष ्ऺाप्त करने की अिधकािरणी है? 26- वाद िबन्दु सं० 1, 2, 3, 4 एवं 5 के अवधारण के दौरान न्यायालय ्षारा यह अवधािरत िकया जा चुका है िक ्ऺािथनी सरोज िसह िवप्षी संजय िसह की िववािहता पत्नी है। ्ऺािथनी अपना भरण पोषण करने में असमथर् मिहला है जबिक िवप्षी संजय िसह पयार्प्त साधनों वाला ्िि्व है। अतः िवप्षी का वैधािनक दाियत्य है िक वह अपनी पत्नी का भरण पोषण अपने संसाधनों से करे। प्ऴावली पर ऐसा कोई साष्य उपलब्ध नहीं है िक िजससे यह पाया जाये िक ्ऺािथनी ने िवप्षी का पिरत्याग िकया हो या वह जारता की दशा में रह रही है। ्ऺािथनी की ओर 5 CRLR No. 803 of 2025 से ्ऺस्तुत रजनेश बनाम नेहा के िवस्तृत शपथ प्ऴ में यह भी उल्लेख िकया है िक उसे अन्य िकसी भी कायर्वाही में भरण पोषण का आदेश पािरत नहीं िकया गया है, न ही उसे कोई भरण पोषण ्ऺाप्त हो रहा है। ऐसी िस्थित में ्ऺािथनी के ्षारा िदनांक 27.7.2019 को ्ऺस्तुत भरण पोषण ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा 125 दं०्ऺ०सं० स्वीकार िकये जाने योग्य है एवं ्ऺािथनी सरोज िसह अपने पित संजय िसह से भरण पोषण ्ऺाप्त करने की अिधकािरणी है। 27- अब यहां पर यह देखा जाना है िक ्ऺािथनी को िवप्षी संजय िसह से िकतनी भरण पोषण की धनरािश िदलायी जाये? िवचारणीय िबन्दु सं० 3 के िनस्तारण के समय यह पाया जा चुका है िक िवप्षी के पास ढाई बीघा कच्चे भूिम है तथा उसके िपता के नाम लगभग 18-20 बीघा कच्चे कृ िष भूिम है। इस ्ऺकार स्वयं िवप्षी के ही कथनों से यह स्प्ि है िक िवप्षी के पास ढाई बीघा तथा उसके िपता के पास 18-20 बीघा खेती है। चू ंिक िवप्षी ने स्वयं स्वीकार िकया है िक उसके पास ढाई बीघा व उसके िपता के नाम 18-20 बीघा खेती है। अतः यह माना जा सकता है िक िवप्षी पयार्प्त साधनों वाला ्िि्व है और ्ऺािथनी का भरण पोषण करने में स्षम है। 28- ्ऺािथनी पी०डब्ल्यू 1 के रूप में अपनी िजरह में यह कहा है िक तीनो बच्चों की पढ़ाई िलखाई व भरण पोषण का खचार् मेरे पित संजय ही वहन कर रहे है। इस ्ऺकार यह स्प्ि है िक ्ऺािथनी एवं िवप्षी के संसगर् से उत्पन्न तीनों बचों का भरण पोषण, पढ़ाई िलखाई आिद िवप्षी ही कर रहे है। अतः िवप्षी की उपरो्व आमदनी तथा मामले के समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों पर िवचार करने के उपरान्त उभय प्ष के आिथक, शै्षिणक एवं सामािजक पिरिस्थित को दृि्िगत रखते हुये न्यायालय इस मत का है िक ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकये जाने की ितिथ 27.7.2019 से िवप्षी से ्ऺािथनी को ्ऺितमाह 2500/-रूपये भरण पोषण के रूप में िदलवाया जाना उिचत होगा। आदेश 29- ्ऺािथनी ्शीमती सरोज िसह का ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा 125 दं०्ऺ०सं० आंिशक रूप से स्वीकार िकया जाता है। िवप्षी संजय िसह को आदेश िदया जाता है िक वह धारा 125 दं०्ऺ०स० के अन्तगर्त भरण पोषण ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकए जाने की ितिथ 27.7.2019 से ्ऺािथनी सरोज िसह को ्ऺितमाह 2500/-रूपये की दर से भरण पोषण ्ऺद्त िकया जाना सुिनि्ात करे। 30- प्ऴावली के अवलोकन से यह स्प्ि है िक इसी मुकदमे में िदनांक 22.2.2024 को अन्तिरम भरण पोषण के रूप में ्ऺािथनी को अन्तिरम भरण पोषण के रूप में 2000/-रूपये का आदेश िदया गया है। यिद उ्व आदेश के अनुपालन में िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को अन्तिरम भरण पोषण की कोई धनरािश पूवर् में अदा की गयी है, तो पूवर् में अदा की गयी धनरािश इस भरण पोषण के आदेश में समायोिजत की जायेगी। 31- ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकये जाने की ितिथ से लेकर िनणर्य की ितिथ तक देय भरण-पोषण की धनरािश को िवप्षी 03 माह के भीतर ्ऺािथनी को ्ऺद्त कर सकता है। िनणर्य की ितिथ के बाद से देय भरण पोषण की धनरािश को हर महीने की 10 तारीख तक िवप्षी संजय िसह ्षारा ्ऺािथनी सरोज िसह को ्ऺद्त िकया जाये। दािण्डक ्ऺकीणर् वाद सं० 521/2019 ्शीमती सरोज िसह बनाम संजय िसह तद्नुसार िनस्तािरत की जाती है। प्ऴावली िनयमानुसार दािखल अिभलेखशाला हो।"
8. On the other hand, Shri Prashant Srivastva, who appeared on behalf of the opposite party No.2, submitted that the observations/findings of the Family Court on the issue No. 4 are perfectly justified. In continuation, he has also submitted that the opposite party No.2 was examined before the Family Court as PW-1 and she was also cross- examined by the revisionist and the opposite party No.2 (PW-1) supported her case as pleaded in the application under Section 125 Cr.P.C. and thereafter, Pramod Kumar Singh (PW-2) and Balak Ram (PW-3) were also examined before the Family Court, who failed to support the case of opposite party No.2, and in the instant case the Family Court on the basis of statement of opposite party No.2 (PW-1) passed the order dated 09.05.2025. 6 CRLR No. 803 of 2025
9. The statement of opposite party No.2 (PW-1) remained intact before the Family Court. According to the statement of opposite party No.2 (PW-1) she was ill treated by the revisionist and also on some occasions she was assaulted by the revisionist. Therefore, in compelling circumstances the opposite party No.2, who is the mother of three children left her matrimonial house.
10. According to Pramod Kumar Singh (PW-2) and Balak Ram (PW-3), the opposite party No.2 is legally wedded wife of revisionist and in their presence revisionist never assaulted the opposite party No.2. However, the fact remains that opposite party No.2 (PW-1), before the Family Court established/proved her case including the fact that under the compelling circumstances she left the matrimonial house.
11. It is also stated that the revisionist in the pleadings and in support thereof filed an affidavit of evidence wherein he leveled certain allegations according to which the opposite party No.2 was living with her 'Jija/brother-in-law' but the same were not proved/established and this aspect of the case proves that under the compelling circumstances, the opposite party No.2 left her matrimonial house.
12. At this stage, on being asked, after considering the meager amount awarded by the Family Court after recording the finding that under the compelling circumstances the opposite party No.2 left the matrimonial home, that if an opportunity is provided then in that eventuality can the amount awarded by the Family Court be reduced, which itself is meager, learned counsel for the revisionist has failed to reply.
13. Considered the aforesaid and also the judgments on the issue (See : Anju Garg and another vs. Deepak Kumar Garg, reported in 2022 SCC OnLine SC 1314; Sanjeev Kapoor vs. Chandana Kapoor and others, reported in (2020) 13 SCC 172; Chander Parkash Bodh Raj vs. Shila Rani Chander Prakash: 1968 SCC Online Del 52; Rajnesh vs. Neha, (2021) 2 SCC 324 : (2021) 2 SCC (Civ) 220 : 2020 SCC OnLine SC 903 347; Kulbhushan Kumar Vs. Raj Kumari, (1970) 3 SCC 129 ; Kalyan Dey Chaudhary Vs. Rita Dey Chaudhary Nee Nandy, (2017) 14 SCC 200.
14. Upon due consideration of the aforesaid including the judgments, referred above, and the meager amount awarded by the Principal Judge, Family Court, Hardoi vide order 09.05.2025, i.e. Rs.2500/- per month after recording finding based upon the statement of opposite party No.2 (PW-1), who could only prove/state the behaviour of revisionist with her and who in her cross-examination stated that it is incorrect/wrong to say that I am living with my brother-in-law on my own will and I am having illicit relation with my brother-in-law and also stated that revisionist assaulted and ill treated her on various occasions on account of non fulfillment of demand of dowry and that under compelling circumstances the opposite party No. 2 left her matrimonial home as well as the finding on financial status of the revisionist, this Court is of the view that no interference in the order impugned dated 09.05.2025 is required by this Court. 7 CRLR No. 803 of 2025
15. The instant revision is accordingly dismissed. No order as to costs.
16. The amount deposited by the revisionist before this Court, shall be released in favour of the opposite party No.2, which shall be adjusted in the amount of maintenance awarded by the Principal Judge, Family Court, Hardoi.
17. The copy of the order be sent to the Court concerned forthwith. September 17, 2025 ML/- (Saurabh Lavania,J.) MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench
1. Vakalatnama filed on behalf of opposite party No.2 by Shri Prashant Srivastva, Advocate is taken on record.
2. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State as well as Shri Prashant Srivastava and perused the record.
3. This criminal revision under Section 19(4) of the Family Court Act, read with Section 438/442 of the BNSS has been filed against the judgment and order dated
09.05.2025, passed by the Principal Judge, Family Court, Hardoi (in short "Family Court") in Criminal Misc. Case No. 521 of 2019 (Smt. Saroj Singh Vs. Sajnay Singh) under Section 125 Cr.P.C., whereby the maintenance of Rs.2500/- per month has been awarded.
4. In compliance of this Court order dated 25.07.2025, revisionist - Sanjay Singh and opposite party No.2 - Smt. Saroj Singh are present before this court duly identified by their respective counsel namely Shri Pankaj Gupta and Shri Prashant Srivastva, Advocates. Opposite party No.2-Smt. Saroj Singh has been brought by S.I. Kallu Ram Gupta and lady head constable Neelam Singh of Police Station -Baghauli, District - Hardoi.
5. The opposite party No.2 is not ready to settle the dispute amicably by way of mediation. In this view of the matter, this court proceeded to decide the case on merits.
6. Brief facts of the case are as under :- (i) The marriage of the revisionist and opposite party no.2 was solemnized according to Hindu rites and rituals on 01.07.2002. 2 CRLR No. 803 of 2025 (ii) Out of the wedlock of the revisionist and opposite party No.2, three children were born namely daughter Naina aged about 18 years, daughter Krishna aged about 15 years and daughter Sunaina aged about 7 years. (iii) On 25.05.2019, opposite party no.2 had gone to to her sisters' house and since then she is living with her family without any reason, as stated by the revisionist. (iv) The revisionist has also stated that he made several efforts to bring the opposite party No.2 back to matrimonial home but due to unnecessary interruption of her sister and her husband she is not ready to live with revisionist. (v) On 27.7.2019, the opposite party no.2 filed a case under section 125 Cr.P.C. (vi) On 03.11.2022, the revisionist filed reply to the application of opposite party no.2 and denied the allegations made in application. (vii) The Principal Judge, Family Court, Hardoi vide judgment and order dated
09.05.2025, after considering the pleadings and evidence adduced by the parties, allowed the application under Section 125 Cr.P.C. Hence, the revisionist by means of this revision has challenged the order dated 09.05.2025.
7. Impeaching the order of the Family Court, the learned counsel for the revisionist has submitted that the findings of the Family Court on issue No. 4 are perverse. The findings/observations on this issue ought to have been given by the Family Court in favour of the revisionist on the basis of evidence adduced by the parties. If the findings/observations on the issue No.4 were in favour of the revisionist then, no amount would have been awarded to the applicant/opposite party No.2 by the Family Court in view of Section 125(4) of the Cr.P.C. Referred relevant portion of the order impugned dated 09.05.2025 is extracted herein under :- "िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 4 18- िवचारणीय िबन्दु सं० 4 इस आशय से िविनि्षत िकया गया है िक क्या ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना युि्व यु्व कारण के िवप्षी से अलग रह रही है? 19- उ्व के पिर्ऺेष्य में ्ऺािथनी का कथन है िक शादी के कु छ समय बाद िवप्षी व उसके पिरजन ्ऺािथनी से अितिर्व दहेज में मोटर साइिकल की मांग करने लगे तथा अितिर्व दहेज की मांग को लेकर ्ऺािथनी को मारने पीटने लगे। ्ऺािथनी जब मायके िवदा होकर आयी तब अपने िपता को अितिर्व दहेज मांगने वाली बात बतायी। ्ऺािथनी के िपता कु छ िरश्तेदारों को ले जाकर िवप्षी व उसके पिरजनो से खुशामद की और कहा िक हम गरीब आदमी है। हम दहेज की मांग कै से पूरी कर पायेंगे। तब िवप्षीगण िकसी ्ऺकार रखने को तैयार हुए और िवदा कराकर ले गये। ्ऺािथनी के िपता की मृत्यु हो जाने के प्ाात िवप्षी ्ऺािथनी को पुनः अितिर्व दहेज की खाितर शारीिरक व मानिसक रूप से ्ऺतािडत करने और खाना कपड़ा की तकलीफ देने लगा। िदनांक 25.5.2019 को िवप्षी ने ्ऺािथनी को मारा पीटा। बच्चों को छीनकर मा्ऴ पहने हुए कपड़ो में ्ऺािथनी की बहन आशा के यहां छोड़कर चले गये। तब से ्ऺिथनी अपनी बहन आशा के घर में रह रही है। िवप्षी ्षारा कोई खोज खबर नहीं ली गयी। अपने उ्व कथन के समथर्न ्ऺािथनी सरोज िसह सा्षी पी० डब्ल्यू 1 के रूप में परीि्षत हुई है। सा्षी पी०डब्ल्यू 1 ने अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में उ्व कथनों का समथर्न िकया है तथा ्ऺित परी्षा में िवप्षी ्षारा िदये गये सुझाव से इनकार करते हुए यह कहा िक यह कहना गलत है िक मैं अपनी इच्छा से अपने पित को छोड़कर बहनोई के साथ रह रही हूँ। बिल्क मेरे पित ने मुझे मारा 3 CRLR No. 803 of 2025 पीटा था। इस सुझाव से भी इनकार िकया िक ्ऺािथनी का अपने बहनोई में नाजायज सम्बन्ध है इसिलये वह बहनोई के साथ रह रही हो। बिल्क संजय ने मारपीट कर घर से िनकाल िदया। ्ऺािथनी की ओर से परीि्षत मा्षी पी०डब्ल्यू 2 ्ऺमोद कु मार िसह ने अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी से अितिर्व दहेज की मांग करने और अितिरक दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने का कथन िकया है, िकन्तु अपनी ्ऺित परी्षा में यह कहा है िक मेरे सामने सरोज व संजय के मध्य कभी िववाद नहीं हुआ और न ही मुझसे संजय िसह ने अितिर्व दहेज की मांग की। इस्ऺकार चू ंिक सा्षी पी०डबल्यू 2 के सम्ष ्ऺािथनी एवं िवप्षी के बीच कोई मारपीट नहीं हुयी, न ही उसके सामने कभी दहेज की मांग की गयी। अतः िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को ्ऺतािड़त करने एवं अितिर्व दहेज की मांग करने का तथ्य साष्य पी०डब्ल्यू 2 की ्िि्वगत जानकारी में नहीं है। अतः सा्षी पी०डब्ल्यू 2 ्षारा अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िकये गये इस कथन िक िवप्षी व उसके पिरजन ्ऺािथनी को अितिर्व दहेज के िलए ्ऺतािड़त करते थे, का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इसी ्ऺकार सा्षी पी०डब्ल्यू 3 बालकराम ने भी अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी से अितिर्व दहेज की मांग करने और अितिर्व दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने का कथन िकया है, िकन्तु अपनी ्ऺित परी्षा में यह कहा है िक मै संजय को पहचानता हूँ। संजय ने मेरे सामने ंिक कभी सरोज को नहीं मारा पीटा, न ही िकसी ्ऺकार के दहेज की मांग की। इस्ऺकार चू सा्षी पी०डब्ल्यू 3 के सम्ष ्ऺािथनी एवं िवप्षी के बीच कोई मारपीट नहीं हुयी, न ही उसके सामने कभी दहेज की मांग की गयी। अतः िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को ्ऺतािड़त करने एवं अितिर्व दहेज की मांग करने का तथ्य सा्षी पी०डब्ल्यू3 की ्िि्वगत जानकारी में नहीं है। अतः सा्षी पी०डब्ल्यू ्षारा अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में िकये गये इस कथन िक िवप्षी व उसके पिरजन ्ऺािथनी को अितिर्व दहेज के िलए ्ऺतािड़त करते थे, का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इस ्ऺकार अितिर्व दहेज की मांग िवप्षी ्षारा िकया जाना तथा अितिर्व दहेज की मांग पूरी न होने पर ्ऺािथनी को मानिसक एवं शारीिरक रूप से ्ऺतािड़त करने के तथ्य के बावत एक मा्ऴ सा्षी पी०डब्ल्यू 1 ्शीमती सरोज का है। भले ही सा्षी पी०डब्ल्यू 2 व पी०डब्ल्यू3 के साष्य से िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने की पुि्ि नही होती है, िकन्तु सा्षी पी०डब्ल्यू 1 ने अपने साष्य से िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को दहेज की मांग को लेकर ्ऺतािड़त करने की पुि्ि की है। 20- दूसरी ओर िवप्षी का कथन है िक ्ऺािथनी िववाह के उपरान्त िवप्षी तथा उसके पिरवार वालो के ्ऺित ्वू रता व अभ्शता करने की आदत बना ली तथा स्वयं की मजर् से मायके व अपनी बहन के यहां चली गयी। उ्व कथन के समथर्न में स्वयं िवप्षी संजय िसह डी०डब्ल्यू 1 के रूप में अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ दािखल िकया है। िवप्षी ने अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में यह कहा है िक िववाह के एक वषर् बाद ही ्ऺािथनी ने अपनी स्वेच्छा से अपने बहनोई अरुण कु मार िसह के यहां जाना ्ऺारम्भ कर िदया िजस पर िवप्षी ने ्ऺािथनी को िबना िकसी कारण या िबना बुलावे के अपने बहनोई के यहां जाने से रोका, परन्तु ्ऺािथनी नही मानी और अपने जीजा के घर आती जाती रही। यहां पर यह उल्लेखनीय है िक यह तथ्य िक ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना िकसी युि्व यु्व कारण के िवप्षी से ्ऺथक रह रही है, को सािबत करने का भार िवप्षी पर हैं। िवप्षी की ओर से एक मा्ऴ सा्षी स्वयं िवप्षी डी०डब्ल्यू1 के रूप में अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ दािखल िकया है और उसके प्षात न्यायालय आना बंद कर िदया, िजसके कारण साधी डी०डब्ल्यू1 से ्ऺािथनी की ओर से कोई ्ऺित परी्षा नहीं की जा सकी। ऐसी िस्थित में सा्षी डी०डब्ल्यू1 संजय िसह का अपनी मुख्य परी्षा साष्य शपथ प्ऴ में यह कहना िक ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना िकसी युि्व यु्व कारण के अपने मायके या अपने बहनोई के साथ रह रही है, सािबत नहीं माना जा सकता। िवप्षी की ओर से िकसी अन्य सा्षी को अपने उ्व कथनों की पुि्ि हेतु परीि्षत नहीं कराया गया है। जबिक दूसरी ओर ्ऺािथनी ने अपने इस कथन के समथर्न में िक िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को अितिर्व दहेज की मांग को ले करके ्ऺतािडत िकया गया और मारपीट कर घर से िनकाल िदया गया, की पुि्ि स्वयं ्ऺािथनी ने अपने साष्य के माध्यम से िकया है। 21- इसके अितिर्व यहां पर यह भी उल्लेखनीय है िक साि्षयों में यह आया है िक ्ऺािथनी के माता िपता की मृत्यु हो चुकी है। जब ्ऺािथनी के मायके में उसके माता िपता की मृत्यु हो जाती है, तो मायके में भी आ्शय िमल पाना मुिश्कल होता है। ऐसी िस्थित में जहां तक ्ऺािथनी का अपनी बहन के यहां रहने का ्ऺश्न है, यह सम्भव है िक इसी कारण से वह अपनी बहन के यहां आ्शय िलये हो। इस ्ऺकार िवप्षी की ओर से कोई भी ऐसा साष्य व ्ऺमाण दािखल नहीं िकया गया है िजससे यह पाया जाये िक ्ऺािथनी स्वेच्छा से िबना युि्व यु्व कारण के िवप्षी से ्ऺथक रह रही है। 22- इसके अितिर्व भारतीय समाज में वैवािहक िस्थित को बनाये रखना पुरुष की तुलना में मिहलाओं के िलये अिधक महत्वपूणर् होता है क्योंिक सामािजक व आिथक सुर्षा के िलये अिधकतर मिहलायें िववाह के पहले िपता पर और िववाह के प्ाात पित पर िनभर्र हो जाती है। 4 CRLR No. 803 of 2025 िववाह के प्ाात पत्नी अपने माता िपता का घर छोड़कर पित के घर रहने के िलये जाती है। इस ्ऺकार यह कहा जा सकता है िक पत्नी मानिसक रूप से इस बात की तैयारी करके ससुराल जाती है िक शेष जीवन उसे अपने पित के साथ ससुराल में ही ्ितीत करना है। यिद ससुराल में िकसी मिहला के रहने की पिरिस्थितयां कु छ ्ऺितकू ल भी हो, तब भी मिहला यथा सम्भव उन पिरिस्थितयों के अनुरूप स्वयं को ढालने का ्ऺयास करती है, क्योंिक उसके सामने दूसरा िवकल्प अथार्त मायके में रहने का, अिधक अच्छा िवकल्प नहीं होता। इन पिरिस्थितयों के आधार पर यह कहा जा सकता है िक सामान्य पिरिस्थितयों में कोई मिहला अकारण अपने पित को छोडकर अपने मायके में रहना पसन्द नहीं करेगी। स्प्ि है िक इस मामले में भी यह कहा जा सकता है िक ्ऺािथनी सरोज िसह के िलये उसकी ससुराल में रहने की पिरिस्थितयां सहज एवं स्वाभािवक नहीं थी, िजसके कारण उसे अपनी ससुराल को छोड़कर अपने मायके में रहना पड रहा है। यिद ्ऺािथनी अपने माता िपता का घर छोडकर िवप्षी के घर शेष जीवन ्ितीत करने के िलये गयी थी, तो यह कहा जा सकता है िक यह उ्तरदाियत्व िवप्षी का था िक वह ्ऺािथनी को इस ्ऺकार अपने घर में रखता िजससे ्ऺािथनी सामान्य रूप से अपना जीवन ्ितीत कर सकें । य्यिप यह सही है िक कु छ मिहलायें अपनी संकीणर् मानिसक सोच के कारण शादी के बाद से ही पित पर यह दबाव बनाने लगती हैं िक उसके पित उसकी इच्छाओं के अनुसार चले और वह अपनी कमाई का पूरा भाग या अिधकांश भाग उस पर और उसके बचों पर खचर् करे। इस ्ऺवृि्त की मिहलायें यह सहन नहीं कर पाती िक पित की कमाई का कोई भाग पित के माता िपता या भाई बहन के ऊपर खचर् हो। कभी कभी पत्नी की यही ्ऺवृि्त बड़े िववाद का रूप ले लेती है, िकन्तु इस मामले में यिद ऐसी कोई पिरिस्थित थी तो िवप्षी को यह बात न्यायालय के सम्ष ्ऺस्तुत करना चािहए था और अपने साष्यों से इसे सािबत करना चािहए था। यिद ्ऺािथनी के अपने ससुराल में रहने की पिरिस्थितयां सही नही थी और िवप्षी ्षारा भी ्ऺािथनी के अलग रहने का कोई तकर् संगत कारण स्प्ि नहीं िकया गया है तो इन पिरिस्थितयों में यह माना जा सकता है िक िवप्षी का ्िवहार ्ऺािथनी के ्ऺित उिचत नहीं था। स्प्ि है िक इन समस्त तथ्यों पिरिस्थितयों को देखते हुये यह कहा जा सकता है िक भले ही ्ऺािथनी के ्िवहार में कु छ ्ऴुिट या कमी रही हो, िकन्तु यिद ्ऺािथनी को अपने मायके में रहना पड़ रहा है तो िवप्षी उसके भरण पोषण के िलये उ्तरदायी है। तदनुसार िवचारणीय िबन्दु सं० 4 िनस्तािरत िकया जाता है। िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 5 23- वाद िबन्दु सं० 5 इस आशय से िविनि्ात िकया गया है िक क्या िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी का भरण-पोषण करने में उपे्षा की गयी है या इन्कार िकया गया है? 24- उ्व के पिर्ऺेष्य में ्ऺािथनी का कथन है िक िवप्षी ने जब से ्ऺािथनी को मारपीट कर घर िनकाला है तब से आजतक िवप्षी ने ्ऺािथनी की कोई खोज खबर नहीं ली है और न ही कोई खाना खचार् आिद िदया है। मजबूर होकर ्ऺािथनी अपनी बहन के यहां रह रही है। िवप्षी की ओर से ्ऺािथनी के भरण पोषण ्ऺाथर्ना प्ऴ के िवरू्ध 16 क अपना जवाब दावा दािखल िकया गया है िजसमे िवप्षी ने कही पर भी यह कथन नहीं िकया है िक जब से ्ऺािथनी अपनी बहन के यहां रह रही है तब से िवप्षी ने ्ऺािथनी को भरण पोषण की कोई धनरािश दी हो। उभय प्ष की ओर से रजनेश बनाम नेहा के अनुपालन में शपथ प्ऴ दािखल िकये गये हैं। शपथ प्ऴ में भी उभय प्षों ने यह उल्लेख िकया है िक पूवर् के िकसी मामले में ्ऺािथनी को भरण पोषण की धनरािश ्ऺाप्त नही हो रही है। इसके अितिर्व िवप्षी की ओर से कोई भी ऐसा साष्य प्ऴावली पर दािखल नहीं िकया गया है िजससे यह पाया जाये िक िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को उसके भरण पोषण हेतु कोई ्िवस्था की गयी हो। ्ऺािथनी िवप्षी की िववािहता पत्नी है। अतः िवप्षी का यह दाियत्व है िक अपनी पत्नी के भरण पोषण की ्िवस्था करें। इस ्ऺकार यह कहा जा सकता है िक िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी के भरण पोषण में उपे्षा बरती जा रही है एवं इनकार िकया जा रहा है। तदनुसार िवचारणीय िबन्दु सं० 5 िनस्तािरत िकया जाता है। िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 6 25- िवचारणीय िबन्दु सं० 6 इस तथ्य से सम्बिन्धत है िक क्या ्ऺािथनी कोई अनुतोष ्ऺाप्त करने की अिधकािरणी है? 26- वाद िबन्दु सं० 1, 2, 3, 4 एवं 5 के अवधारण के दौरान न्यायालय ्षारा यह अवधािरत िकया जा चुका है िक ्ऺािथनी सरोज िसह िवप्षी संजय िसह की िववािहता पत्नी है। ्ऺािथनी अपना भरण पोषण करने में असमथर् मिहला है जबिक िवप्षी संजय िसह पयार्प्त साधनों वाला ्िि्व है। अतः िवप्षी का वैधािनक दाियत्य है िक वह अपनी पत्नी का भरण पोषण अपने संसाधनों से करे। प्ऴावली पर ऐसा कोई साष्य उपलब्ध नहीं है िक िजससे यह पाया जाये िक ्ऺािथनी ने िवप्षी का पिरत्याग िकया हो या वह जारता की दशा में रह रही है। ्ऺािथनी की ओर 5 CRLR No. 803 of 2025 से ्ऺस्तुत रजनेश बनाम नेहा के िवस्तृत शपथ प्ऴ में यह भी उल्लेख िकया है िक उसे अन्य िकसी भी कायर्वाही में भरण पोषण का आदेश पािरत नहीं िकया गया है, न ही उसे कोई भरण पोषण ्ऺाप्त हो रहा है। ऐसी िस्थित में ्ऺािथनी के ्षारा िदनांक 27.7.2019 को ्ऺस्तुत भरण पोषण ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा 125 दं०्ऺ०सं० स्वीकार िकये जाने योग्य है एवं ्ऺािथनी सरोज िसह अपने पित संजय िसह से भरण पोषण ्ऺाप्त करने की अिधकािरणी है। 27- अब यहां पर यह देखा जाना है िक ्ऺािथनी को िवप्षी संजय िसह से िकतनी भरण पोषण की धनरािश िदलायी जाये? िवचारणीय िबन्दु सं० 3 के िनस्तारण के समय यह पाया जा चुका है िक िवप्षी के पास ढाई बीघा कच्चे भूिम है तथा उसके िपता के नाम लगभग 18-20 बीघा कच्चे कृ िष भूिम है। इस ्ऺकार स्वयं िवप्षी के ही कथनों से यह स्प्ि है िक िवप्षी के पास ढाई बीघा तथा उसके िपता के पास 18-20 बीघा खेती है। चू ंिक िवप्षी ने स्वयं स्वीकार िकया है िक उसके पास ढाई बीघा व उसके िपता के नाम 18-20 बीघा खेती है। अतः यह माना जा सकता है िक िवप्षी पयार्प्त साधनों वाला ्िि्व है और ्ऺािथनी का भरण पोषण करने में स्षम है। 28- ्ऺािथनी पी०डब्ल्यू 1 के रूप में अपनी िजरह में यह कहा है िक तीनो बच्चों की पढ़ाई िलखाई व भरण पोषण का खचार् मेरे पित संजय ही वहन कर रहे है। इस ्ऺकार यह स्प्ि है िक ्ऺािथनी एवं िवप्षी के संसगर् से उत्पन्न तीनों बचों का भरण पोषण, पढ़ाई िलखाई आिद िवप्षी ही कर रहे है। अतः िवप्षी की उपरो्व आमदनी तथा मामले के समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों पर िवचार करने के उपरान्त उभय प्ष के आिथक, शै्षिणक एवं सामािजक पिरिस्थित को दृि्िगत रखते हुये न्यायालय इस मत का है िक ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकये जाने की ितिथ 27.7.2019 से िवप्षी से ्ऺािथनी को ्ऺितमाह 2500/-रूपये भरण पोषण के रूप में िदलवाया जाना उिचत होगा। आदेश 29- ्ऺािथनी ्शीमती सरोज िसह का ्ऺाथर्ना प्ऴ अन्तगर्त धारा 125 दं०्ऺ०सं० आंिशक रूप से स्वीकार िकया जाता है। िवप्षी संजय िसह को आदेश िदया जाता है िक वह धारा 125 दं०्ऺ०स० के अन्तगर्त भरण पोषण ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकए जाने की ितिथ 27.7.2019 से ्ऺािथनी सरोज िसह को ्ऺितमाह 2500/-रूपये की दर से भरण पोषण ्ऺद्त िकया जाना सुिनि्ात करे। 30- प्ऴावली के अवलोकन से यह स्प्ि है िक इसी मुकदमे में िदनांक 22.2.2024 को अन्तिरम भरण पोषण के रूप में ्ऺािथनी को अन्तिरम भरण पोषण के रूप में 2000/-रूपये का आदेश िदया गया है। यिद उ्व आदेश के अनुपालन में िवप्षी ्षारा ्ऺािथनी को अन्तिरम भरण पोषण की कोई धनरािश पूवर् में अदा की गयी है, तो पूवर् में अदा की गयी धनरािश इस भरण पोषण के आदेश में समायोिजत की जायेगी। 31- ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकये जाने की ितिथ से लेकर िनणर्य की ितिथ तक देय भरण-पोषण की धनरािश को िवप्षी 03 माह के भीतर ्ऺािथनी को ्ऺद्त कर सकता है। िनणर्य की ितिथ के बाद से देय भरण पोषण की धनरािश को हर महीने की 10 तारीख तक िवप्षी संजय िसह ्षारा ्ऺािथनी सरोज िसह को ्ऺद्त िकया जाये। दािण्डक ्ऺकीणर् वाद सं० 521/2019 ्शीमती सरोज िसह बनाम संजय िसह तद्नुसार िनस्तािरत की जाती है। प्ऴावली िनयमानुसार दािखल अिभलेखशाला हो।"
8. On the other hand, Shri Prashant Srivastva, who appeared on behalf of the opposite party No.2, submitted that the observations/findings of the Family Court on the issue No. 4 are perfectly justified. In continuation, he has also submitted that the opposite party No.2 was examined before the Family Court as PW-1 and she was also cross- examined by the revisionist and the opposite party No.2 (PW-1) supported her case as pleaded in the application under Section 125 Cr.P.C. and thereafter, Pramod Kumar Singh (PW-2) and Balak Ram (PW-3) were also examined before the Family Court, who failed to support the case of opposite party No.2, and in the instant case the Family Court on the basis of statement of opposite party No.2 (PW-1) passed the order dated 09.05.2025. 6 CRLR No. 803 of 2025
9. The statement of opposite party No.2 (PW-1) remained intact before the Family Court. According to the statement of opposite party No.2 (PW-1) she was ill treated by the revisionist and also on some occasions she was assaulted by the revisionist. Therefore, in compelling circumstances the opposite party No.2, who is the mother of three children left her matrimonial house.
10. According to Pramod Kumar Singh (PW-2) and Balak Ram (PW-3), the opposite party No.2 is legally wedded wife of revisionist and in their presence revisionist never assaulted the opposite party No.2. However, the fact remains that opposite party No.2 (PW-1), before the Family Court established/proved her case including the fact that under the compelling circumstances she left the matrimonial house.
11. It is also stated that the revisionist in the pleadings and in support thereof filed an affidavit of evidence wherein he leveled certain allegations according to which the opposite party No.2 was living with her 'Jija/brother-in-law' but the same were not proved/established and this aspect of the case proves that under the compelling circumstances, the opposite party No.2 left her matrimonial house.
12. At this stage, on being asked, after considering the meager amount awarded by the Family Court after recording the finding that under the compelling circumstances the opposite party No.2 left the matrimonial home, that if an opportunity is provided then in that eventuality can the amount awarded by the Family Court be reduced, which itself is meager, learned counsel for the revisionist has failed to reply.
13. Considered the aforesaid and also the judgments on the issue (See : Anju Garg and another vs. Deepak Kumar Garg, reported in 2022 SCC OnLine SC 1314; Sanjeev Kapoor vs. Chandana Kapoor and others, reported in (2020) 13 SCC 172; Chander Parkash Bodh Raj vs. Shila Rani Chander Prakash: 1968 SCC Online Del 52; Rajnesh vs. Neha, (2021) 2 SCC 324 : (2021) 2 SCC (Civ) 220 : 2020 SCC OnLine SC 903 347; Kulbhushan Kumar Vs. Raj Kumari, (1970) 3 SCC 129 ; Kalyan Dey Chaudhary Vs. Rita Dey Chaudhary Nee Nandy, (2017) 14 SCC 200.
14. Upon due consideration of the aforesaid including the judgments, referred above, and the meager amount awarded by the Principal Judge, Family Court, Hardoi vide order 09.05.2025, i.e. Rs.2500/- per month after recording finding based upon the statement of opposite party No.2 (PW-1), who could only prove/state the behaviour of revisionist with her and who in her cross-examination stated that it is incorrect/wrong to say that I am living with my brother-in-law on my own will and I am having illicit relation with my brother-in-law and also stated that revisionist assaulted and ill treated her on various occasions on account of non fulfillment of demand of dowry and that under compelling circumstances the opposite party No. 2 left her matrimonial home as well as the finding on financial status of the revisionist, this Court is of the view that no interference in the order impugned dated 09.05.2025 is required by this Court. 7 CRLR No. 803 of 2025
15. The instant revision is accordingly dismissed. No order as to costs.
16. The amount deposited by the revisionist before this Court, shall be released in favour of the opposite party No.2, which shall be adjusted in the amount of maintenance awarded by the Principal Judge, Family Court, Hardoi.
17. The copy of the order be sent to the Court concerned forthwith. September 17, 2025 ML/- (Saurabh Lavania,J.) MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench