Smt. Poonam and another v. Sanat Pandey) by which the revisionist has been ordered to pay Rs
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Cited in this judgment
1. Heard Shri Prem Kumar Singh with Shri Sunil Kumar Srivastva and Shir Dileep Kumar Yadav, learned counsel for the revisionist, Shri Ajai Kumar Srivastava, learned A.G.A. for the State and perused the record.
2. As per the letter of the Chief Judicial Magistrate, Faizabad (now Ayodhya) the service upon the opposite party No.2 is sufficient. However, when the case is called out neither the opposite party No.2 nor any one on her behalf appeared. In these circumstances, the court proceeded to decide the revision with the assistance of learned counsel for the revisionist and learned A.G.A. for the State.
3. Considering the facts as indicated in the affidavit filed in support of the application for condonation of delay, the application for condonation of delay (Crl. Misc.Application for Condonation of Delay/I.A. No.1 of 2025) is allowed. The delay in filing the revision is condoned. (Order on Memo of Revision) This Criminal Revision has been filed under Section 19 (4) of the 1. Family Court Act, 1984 impeaching the judgment and order dated 04.02.2021, passed by the 'Family Court', namely Additional Principal Judge, Family Court, Faizabad (now Ayodhya) in Case No.130 of 2009 (Smt. Poonam and another Vs. Sanat Pandey) by which the revisionist has been ordered to pay Rs.5,000/- per month to the private respondents from the date of presentation of the application. By this revision the revisionist has also impeached the order dated 10.01.2025 by which the recovery warrant has been issued against the revisionist. 2
2. The order has been impeached on the ground that the opposite party No.2 is not legally wedded wife of the revisionist as such in allowing the application under Section 125 Cr.P.C. the trial court has committed error of law. For coming to the just and proper conclusion, this Court is of the 3. view that the relevant portion of the impugned judgment and order should be referred, which reads as under :- "प्ቔावली के अवलोकन से स्प्ቖ है किक आवेकि(cid:20)का ्ቛारा ्ቚस्तुत वा(cid:20) अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 125 (cid:20).्ቚ.सं. किवप्ቌी के किवरू्ቍ स्वयं एवं अपने अवयस्क पु्ቔ के भरण पोषण धनराशि( ्ቚा् करने हेतु ्ቚस्तुत किकया ्ቇया है। आवेकि(cid:20)का का किवप्ቌी की पत्नी होने के सम्बन्ध में आवेकि(cid:20)का ने वा(cid:20)प्ቔ में यह कथन किकया है किक उसकी (ा(cid:20)ी किवप्ቌी के साथ किहन्(cid:20)ू धम(cid:28)(ास्व के अनुसार कि(cid:20)नांक 16-04-2004 को जि5ला अम्बेडकरन्ቇर में सम्प्ቐ हुआ था। आवेकि(cid:20)का तभी से अपने पतित के घर आयी और अपने पत्नी के (cid:20)ातियत्वों का किनव(cid:28)हन करने ल्ቇी। आवेकि(cid:20)का और किवप्ቌी के संयो्ቇ से एक पु्ቔ अनरू्ቍ पै(cid:20)ा हुआ 5बकिक इसके किवपरीत किवप्ቌी ने अपने 5बाब(cid:20)ावे में उपरो्ሹ तथ्यों को इंकार किकया ्ቇया एवं किव(ेष कथन में यह कहा ्ቇया किक किवप्ቌी (ा(cid:20)ी(ु(cid:20)ा है उसकी (ा(cid:20)ी किमथले( पाण्डेय पु्ቔी ्ቦी रमा(ंकर पाण्डेय किनवासी जिसधौरा हिሲरग्टन्ቇं5, जि5ला फै5ाबा(cid:20) के साथ हुई है और (cid:20)ोनों से एक लड़का आयुष पाण्डेय है। किवप्ቌी ्ቛारा यह भी कहा ्ቇया किक पूनम ने वत(cid:28)मान मुक(cid:20)में के पूव(cid:28) किवप्ቌी के किवरू्ቍ अपने को किवप्ቌी की पत्नी कहते हुए मु०अ०सं० 793/2009, अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 498 ए, 323,504,506 भा.(cid:20)ं.सं. एवं धारा 3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) में (cid:20)5(cid:28) कराया 5ो किवचारणोंउपरान्त कि(cid:20)नांक 07-08-2012 को किनणKत हुआ। आ5 न्ययालय के सम्ቌ उपरो्ሹ मु०अ०सं० 793/2009, अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 498 ए, 323,504,506 भा.(cid:20)ं.स. एवंधारा3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट, थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) सरकार बनाम सनत कुमार पाण्डेय आकि(cid:20) ्ቚस्तुत है उ्ሹ किनण(cid:28)य कि(cid:20)नांकिकत 07-08-2012 के किनष्कष(cid:28) के अቌኌन्तम पैरा 27 में न्यायालय ्ቛारा यह उजिNखिPत किकया ्ቇया है किक " अशिभयो5न यह जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ सनत कुमार ने वाकि(cid:20)नी को (cid:20)हे5 के खिलए मारा पीटा या ्ቚताकिड़त किकया और यह भी जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ ने वाकि(cid:20)नी को मारा पीटा या ्ቇाली कि(cid:20)या , बቌኌRक यह स्प्ቖ है किक या धमकी कि(cid:20)या और 5ातित सूचक (ब्(cid:20)ों का ्ቚयो्ቇ करके अपमाकिनत किकया वाकि(cid:20)नी का (ारीरिरक सम्बन्ध अशिभयु्ሹ सनत कुमार से रहा " , जि5ससे वाकि(cid:20)नी को एक ब्ሴा पै(cid:20)ा हुआ। यह भी उNेPनीय है किक उपरो्ሹ स्ቔ परी्ቌण की प्ቔावली पर बयान अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 313 (cid:20)ं.्ቚ.सं. उपलब्ध है जि5समें सभी मुቌኌR5मान के साथ ही सनत कुमर पाण्डेय ने भी यह स्वीकार किकया है किक मकिहला थाना में पूनम एवं सनत कुमार व उसके परिरवार वालों को बुलाया ्ቇया 5हां पर समझाने बुझाने पर कचेहरी आकर सनत कुमार व पूनम ने सुलहनामा तैयार किकया जि5सके उ्ቈर में सभी अशिभयु्ሹ्ቇण के साथ सनत कुमार पाण्डेय ने भी कचेहरी में सुलहनामा किकया 5ाना स्वीकार किकया है। वत(cid:28)मान प्ቔावली में का्ቇ5 सं.55 ब के रूप में उपरो्ሹ वቓኌणत सुलहनामा की छाया्ቚतित उपलब्ध है जि5स पर मु्ቐी (cid:20)ेवी के नोटरी की मुहर ल्ቇी है जि5स पर तारीP 29-06-2009 अंकिकत है। प्ቔावली पर उ्ሹ मु्ቐी (cid:20)ेवी ्ቛारा इस तथ्य के बाबत एक (पथ प्ቔ कि(cid:20)नांकिकत 01-02-2021 कि(cid:20)या ्ቇया है जि5समें मु्ቐी (cid:20)ेवी एडवोकेट ने (पथ पर यह कहा है किक वह (ेड नं. 5 जिसकिवल कोट(cid:28), फै5ाबा(cid:20) में (पथायु्ሹ का किवतिध व्यवसाय करती है कि(cid:20)नांक 29-06-2009 को आफताब आलम एडवोकेट ने एक (पथ प्ቔ उनके सम्ቌ ्ቚस्तुत किकया था जि5स पर उनके सामने पूनम व सनत कुमार पाण्डेय ने अपना अपना हस्ता्ቌर बनाया था जि5से एडवोकेट आफताब आलम ने ्ቚमाशिणत किकया था। उ्ሹ नोटरी उन्होनें कि(cid:20)नांक 29-06- 2009 को तस(cid:20)ीक किकया था जि5स पर उनकी मुहर व हस्ता्ቌर अंकिकत है। उपरो्ሹ सुलहनामा के (ुरूआत में ही यह उजिNखिPत है किक " मैं किक सनत कुमार पु्ቔ पुरूषो्ቈम किनवासी सराय सूरा, थाना बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) व ्ቦीमती पूनम पु्ቔी रमापतित पत्नी सनत कुमार किनवासी रामपुर भ्ቇन, थाना तारून, जि5ला फै5ाबा(cid:20) 5ो आपस में साथ साथ रहते थे जि5ससे हम लो्ቇों के मध्य एक लड़का जि5सका नाम कुंवर अकिनरू्ቍ ्ቚताप जि5सकी उ् आठ माह हो्ቇी पै(cid:20)ा हुआ है। हम लो्ቇों के मध्य आपस में हुए ्ቇलत फहमी की व5ह से किववा(cid:20) हो ्ቇया था 5ो अब सुलह समझौते के माध्यम से समा् हो ्ቇया है। प्ቔावली पर सनत कुमार पाण्डेय ्ቛारा का्ቇ5 सं. 57 ब ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ कि(cid:20)या ्ቇया जि5समें सुलहनामा का्ቇ5 सं.55 ब/2 ता 3 कि(cid:20)नांकिकत 29-06-2009 को फ5K एवं कूट रतिचत कहा ्ቇया उ्ሹ आवे(cid:20)न पर आ(cid:20)े( कि(cid:20)नांकिकत 27-07-2019 में न्यायालय ने यह कहा किक उपरो्ሹ सुलहनामा पर किवप्ቌी सनत कुमार को साቌኚय ्ቚस्तुत करने का पूण(cid:28) अवसर उपलब्ध रहे्ቇा इसी स्तर पर सुलहनामा को फ5K व कूट रतिचत होना नहीं कहा 5ा सकता।" प्ቔावली पर उपरो्ሹ मु०अ०सं० 793/2009 में सनत कुमार पाण्डेय का 5मानत ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ संख्या 1011/2009 के आ(cid:20)े( की ्ቚतितखिलकिप का्ቇ5 सं.74 ब/3 भी (cid:20)ाखिPल की ्ቇयी है जि5सके पे5 संख्य 2 पर पीठासीन अतिधकारी ्ቛारा यड उजिNखिPत किकया ्ቇया है किक "प्ቔावली का अवलोकन किकया। 3 किववेचक ्ቛारा संकखिलत साቌኚयों के अवलोकन से ्ቚतीत होता है किक वाकि(cid:20)नी ्ቛारा अशिभयु्ሹ से ्ቚेम किववाह किकया ्ቇया था जि5सके खिलए वाकि(cid:20)नी को अपना घर भी छोड़ना पड़ा। किववेचक ्ቛारा संकखिलत साቌኚयों में (cid:20)ो फोटो्ቇाफ भी है जि5समें से एक फोटो्ቇाफ में वाकि(cid:20)नी की मां्ቇ में िሺस(cid:20)ूर भरा 5ा रहा है 5ब किक (cid:20)ूसरे में वाकि(cid:20)नी व अशिभयु्ሹ एक साथ अ्ቇल ब्ቇल Pड़े हैं। किववेचक ्ቛारा संकखिलत साቌኚयों में एक नोटरी (पथ ्ቦी जि5समें ्ቚीतित अशिभयु्ሹ के मध्य एक पु्ቔ होने की बात कही ्ቇयी है तथा आपसी मतभे(cid:20) के सुलह समझौते ्ቛारा समा् किकये 5ाने की बात कही ्ቇयी है। मेरे किवचार से यह धृ्ቖता की पराका्ቖा है किक जि5स मकिहला ने अशिभयु्ሹ के खिलए अपना घर परिरवार छोड़ कि(cid:20)या उसके साथ कुछ समय किबता कर अशिभयु्ሹ उसे छोड़ कर (cid:20)ूसरा किववाह कर ले और उसे पहचानने से भी इंकार कर (cid:20)े।" उपरो्ሹ 5मानत ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ किनरस्त किकया ्ቇया है। प्ቔावली पर 5्ሴा ब्ሴा र्ቌा काड(cid:28) का्ቇ5 सं.74 ब/4 ्ቅम सं. 9014 (cid:20)ाखिPल है जि5समें शि((ु का नाम अकिनरू्ቍ 5न्म तितशिथ 31-10-2008 एवं पतित का नाम सनत पाण्डेय अंकिकत है। प्ቔावली पर य(लोक हाቌኌस्पटल (cid:20)ेवकाली रोड, फै5ाबा(cid:20) ्ቛारा 5ारी तिडस्चा5(cid:28) ቌኌस्लप का्ቇ5 सं. 744/5 (cid:20)ाखिPल की ्ቇयी है जि5समें पूनम पत्नी सनत पाण्डेय उजिNखिPत है। प्ቔावली पर मृतक अकिनरू्ቍ पाण्डेय की मृत्यु ्ቚमाण प्ቔ का्ቇ5 सं.74 ब/14 भी मूल रूप से (cid:20)ाखिPल है जि5समें मृत्यु की तितशिथ 14-03-2020 उजिNखिPत है मृतक की उ् 12 वष(cid:28) उजिNखिPत है माता का नाम पूनम पाण्डेय एवं किपता का नाम सनत पाण्डेय अंकिकत है। प्ቔावली पर सनत पाण्डेय का हाई स्कूल अंकप्ቔ मूल का्ቇ5 सं.74 ब/15, इण्टरमी尷宸डयट ्ቚमाण प्ቔ का्ቇ5 स. 74 ब/16 एवं एम.ए.पूवा(cid:28)्ቍ(cid:28) अंकप्ቔ मूल का्ቇ5 सं. 74 ब/18, चरिर्ቔ ्ቚमाण प्ቔ मूल का्ቇ5 सं. 74 ब/19, स्थायी 層擯नवास ्ቚमाण प्ቔ का्ቇ5 स. 74 ब/20 मूलरूप से ्ቚस्तुत किकया ्ቇया है जि5सके बारे में आवेकि(cid:20)का का कहना है किक सनत कुमार पाण्डेय के उपरो्ሹ मूल ्ቚप्ቔ उसके पास पत्नी की हैजिसयत से उपलब्ध है। उपरो्ሹ सम्पूण(cid:28) तथ्यों से यह स्प्ቖता साकिबत हो रहा है किक आवेकि(cid:20)का एवं किवप्ቌी के बीच पतित-पत्नी 5ैसे ्ቇम्भीर (ारीरिरक सम्बन्ध थे जि5ससे अकिनरू्ቍ नामक एक पु्ቔ भी पै(cid:20)ा हुआ । उपरो्ሹ के सन्(cid:20)भ(cid:28) में माननीय उ्ሴतम न्यायालय ्ቛारा खिलव-इन-रिरले(नशि(प को भी किववाह के रूप में मान्यता (cid:20)ी ्ቇयी है (ए.आई.आर. 2010 एस.सी. पृ् 2933) इसके अतितरिर्ሹ ए.एल.आर.2010 (78) (एन.ओ.सी.नं. 16) पृ् सं.9 पर भी यह व्यवस्था (cid:20)ी ्ቇयी है किक यकि(cid:20) एक पुरुष और ኚᮌी एक साथ लम्बे समय तक रहते रहे हो और बतौर पतित पत्नी के सामाजि5क मान्यता किमली हो वह भी बैध किववाह की ्ቦेणी में आये्ቇा तथा 5ो भी प्ቌ किववाह के किबन्(cid:20)ु को अस्वीकार कर रहा है उसे जिस्ቍ करने का भार उसी व्यकि्ሹ के ऊपर है। एक अन्य न्यातियक व्यवस्था (ए.आई.आर. 2003 कना(cid:28)टक पृ् 54 के पैरा 6 में) माननीय न्यायालय ने साቌኚय अतिधकिनयम की धारा 56,57 एवं 112 को सं्ሺान में लेते हुए यह व्यवस्था (cid:20)ी किक मानवीय अनुभव यह स्थाकिपत करता है किक कोई भी स्वी अपने ब्ሴे के साथ किकसी व्यकि्ሹ की पत्नी होने का (cid:20)ावा नहीं करे्ቇी 5ो उसका पतित न हो। अ्ቕतन किवतिध व्यवस्था इቌኌन्(cid:20)रा (मा(cid:28) बनाम वी.के.वी. (मा(cid:28) (2013) 15 एस.सी.सी.पे5 755 किनणKत कि(cid:20)नांकिकत 26-11-2013 में माननीय उ्ሴतम न्यायालय ने खिलव-इन रिरले(नशि(प के बारे में ्ቇाइड लाइन किनधा(cid:28)रिरत किकया जि5सके अनुसार प्ቌकारों के बीच उनके साथ से ब्ሴा पै(cid:20)ा होना वैवाकिहक सम्बन्धों की ्ቚकृतित का सम्बन्ध होने का ्ቚबल ्ቚमाण होता है। उ्ሹ संपूण(cid:28) किववेचना से स्प्ቖ है किक पूनम एवं सनत कुमार पांडे के बीच वैवाकिहक स्तर का (ारीरिरक संबंध स्थाकिपत है। 5हां तक सनत कुमार ्ቛारा पूनम को परिरत्य्ሹ किकये 5ाने का सम्बन्ध है यह स्प्ቖ है किक वत(cid:28)मान वा(cid:20) पूनम ्ቛारा अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 125 (cid:20)ं.्ቚ.सं. केक तहत भरण पोषण के खिलए अ्ቇस्त, 2009 में (cid:20)ाखिPल किकया ्ቇया है जि5समें कि(cid:20)नांक 18-07-2011 को एकप्ቌीय किनण(cid:28)य पूनम के प्ቌ में सुनया ्ቇया तत्प्ቐात् किवप्ቌी का रिरकाल ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ स०्ቚ० वा(cid:20) सं. 42/2012 स्वीकार होकर प्ቔावली अपने मूल नम्बर पर (cid:20)5(cid:28) हुई । किवप्ቌी ्ቛारा पूरी प्ቔावली पर आवेकि(cid:20)का पूनम को अपनी पत्नी व अकिनरू्ቍ को पु्ቔ होने से इंकार किकया ्ቇया है । उपरो्ሹ तथ्य पूनम के अल्ቇ रहने का पया(cid:28)् युकि्ሹयु्ሹ कारण है।" It would be apt to indicate, from the above quoted portion of the impugned 4. judgment and order, that for the purposes of passing the order dated 04.02.2021 the trial court took note of the specific finding recorded by the trial court in the judgment passed on 07.08.2012, in the case arising out of Case Crime No.793 of 2009, under Sections 498-A, 323, 504, 506 I.P.C. and Section 3 (1)(X) of the SC/ST Act, Police Station - Bikapur, District - Faizabad, according to which the revisionist and the opposite party No.2 were living as husband and wife and out of this relationship one child was born. The relevant portion of the judgment is extracted herein under :- "आ5 न्ययालय के सम्ቌ उपरो्ሹ मु०अ०सं० 793/2009, अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 498 ए, 323,504,506 भा.(cid:20)ं.स. एवंधारा3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट, थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) सरकार बनाम सनत कुमार पाण्डेय आकि(cid:20) ्ቚस्तुत है उ्ሹ किनण(cid:28)य कि(cid:20)नांकिकत 07-08-2012 के किनष्कष(cid:28) के अቌኌन्तम 4 पैरा 27 में न्यायालय ्ቛारा यह उजिNखिPत किकया ्ቇया है किक "अशिभयो5न यह जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ सनत कुमार ने वाकि(cid:20)नी को (cid:20)हे5 के खिलए मारा पीटा या ्ቚताकिड़त किकया और यह भी जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ ने वाकि(cid:20)नी को मारा पीटा या ्ቇाली कि(cid:20)या या धमकी कि(cid:20)या और 5ातित सूचक (ब्(cid:20)ों का ्ቚयो्ቇ करके अपमाकिनत किकया, बቌኌRक यह स्प्ቖ है किक वाकि(cid:20)नी का (ारीरिरक सम्बन्ध अशिभयु्ሹ सनत कुमार से रहा " , जि5ससे वाकि(cid:20)नी को एक ब्ሴा पै(cid:20)ा हुआ। This court also took note of various pronouncements on the aforesaid aspect of 5. the case including the judgment(s) of Hon'ble Apex Court passed in the case of Chanmuniya Vs. Virendra Kumar Singh Kushwaha and another (2011) 1 SCC 141, Indra Sarma Vs. V.K.V. Sarma (2013) 15 SCC 755, Kamla and others Vs. M.R. Mohan Kumar (2019) 11 SCC 491, D. Velusamy Vs. D.Patchaiammal (2010) 10 SCC 469 and Smt. N. Usha Rani Vs. Moodudulda Sriniwas2025 SCC OnLine SC 225, which are related to grant of maintenance to a female in live-in relationship. Upon due consideration of aforesaid, this court does not find any force in the
6. revision. It is accordingly dismissed. No order as to costs. Order Date :- 6.8.2025 ML/- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench
1. Heard Shri Prem Kumar Singh with Shri Sunil Kumar Srivastva and Shir Dileep Kumar Yadav, learned counsel for the revisionist, Shri Ajai Kumar Srivastava, learned A.G.A. for the State and perused the record.
2. As per the letter of the Chief Judicial Magistrate, Faizabad (now Ayodhya) the service upon the opposite party No.2 is sufficient. However, when the case is called out neither the opposite party No.2 nor any one on her behalf appeared. In these circumstances, the court proceeded to decide the revision with the assistance of learned counsel for the revisionist and learned A.G.A. for the State.
3. Considering the facts as indicated in the affidavit filed in support of the application for condonation of delay, the application for condonation of delay (Crl. Misc.Application for Condonation of Delay/I.A. No.1 of 2025) is allowed. The delay in filing the revision is condoned. (Order on Memo of Revision) This Criminal Revision has been filed under Section 19 (4) of the 1. Family Court Act, 1984 impeaching the judgment and order dated 04.02.2021, passed by the 'Family Court', namely Additional Principal Judge, Family Court, Faizabad (now Ayodhya) in Case No.130 of 2009 (Smt. Poonam and another Vs. Sanat Pandey) by which the revisionist has been ordered to pay Rs.5,000/- per month to the private respondents from the date of presentation of the application. By this revision the revisionist has also impeached the order dated 10.01.2025 by which the recovery warrant has been issued against the revisionist. 2
2. The order has been impeached on the ground that the opposite party No.2 is not legally wedded wife of the revisionist as such in allowing the application under Section 125 Cr.P.C. the trial court has committed error of law. For coming to the just and proper conclusion, this Court is of the 3. view that the relevant portion of the impugned judgment and order should be referred, which reads as under :- "प्ቔावली के अवलोकन से स्प्ቖ है किक आवेकि(cid:20)का ्ቛारा ्ቚस्तुत वा(cid:20) अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 125 (cid:20).्ቚ.सं. किवप्ቌी के किवरू्ቍ स्वयं एवं अपने अवयस्क पु्ቔ के भरण पोषण धनराशि( ्ቚा् करने हेतु ्ቚस्तुत किकया ्ቇया है। आवेकि(cid:20)का का किवप्ቌी की पत्नी होने के सम्बन्ध में आवेकि(cid:20)का ने वा(cid:20)प्ቔ में यह कथन किकया है किक उसकी (ा(cid:20)ी किवप्ቌी के साथ किहन्(cid:20)ू धम(cid:28)(ास्व के अनुसार कि(cid:20)नांक 16-04-2004 को जि5ला अम्बेडकरन्ቇर में सम्प्ቐ हुआ था। आवेकि(cid:20)का तभी से अपने पतित के घर आयी और अपने पत्नी के (cid:20)ातियत्वों का किनव(cid:28)हन करने ल्ቇी। आवेकि(cid:20)का और किवप्ቌी के संयो्ቇ से एक पु्ቔ अनरू्ቍ पै(cid:20)ा हुआ 5बकिक इसके किवपरीत किवप्ቌी ने अपने 5बाब(cid:20)ावे में उपरो्ሹ तथ्यों को इंकार किकया ्ቇया एवं किव(ेष कथन में यह कहा ्ቇया किक किवप्ቌी (ा(cid:20)ी(ु(cid:20)ा है उसकी (ा(cid:20)ी किमथले( पाण्डेय पु्ቔी ्ቦी रमा(ंकर पाण्डेय किनवासी जिसधौरा हिሲरग्टन्ቇं5, जि5ला फै5ाबा(cid:20) के साथ हुई है और (cid:20)ोनों से एक लड़का आयुष पाण्डेय है। किवप्ቌी ्ቛारा यह भी कहा ्ቇया किक पूनम ने वत(cid:28)मान मुक(cid:20)में के पूव(cid:28) किवप्ቌी के किवरू्ቍ अपने को किवप्ቌी की पत्नी कहते हुए मु०अ०सं० 793/2009, अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 498 ए, 323,504,506 भा.(cid:20)ं.सं. एवं धारा 3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) में (cid:20)5(cid:28) कराया 5ो किवचारणोंउपरान्त कि(cid:20)नांक 07-08-2012 को किनणKत हुआ। आ5 न्ययालय के सम्ቌ उपरो्ሹ मु०अ०सं० 793/2009, अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 498 ए, 323,504,506 भा.(cid:20)ं.स. एवंधारा3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट, थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) सरकार बनाम सनत कुमार पाण्डेय आकि(cid:20) ्ቚस्तुत है उ्ሹ किनण(cid:28)य कि(cid:20)नांकिकत 07-08-2012 के किनष्कष(cid:28) के अቌኌन्तम पैरा 27 में न्यायालय ्ቛारा यह उजिNखिPत किकया ्ቇया है किक " अशिभयो5न यह जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ सनत कुमार ने वाकि(cid:20)नी को (cid:20)हे5 के खिलए मारा पीटा या ्ቚताकिड़त किकया और यह भी जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ ने वाकि(cid:20)नी को मारा पीटा या ्ቇाली कि(cid:20)या , बቌኌRक यह स्प्ቖ है किक या धमकी कि(cid:20)या और 5ातित सूचक (ब्(cid:20)ों का ्ቚयो्ቇ करके अपमाकिनत किकया वाकि(cid:20)नी का (ारीरिरक सम्बन्ध अशिभयु्ሹ सनत कुमार से रहा " , जि5ससे वाकि(cid:20)नी को एक ब्ሴा पै(cid:20)ा हुआ। यह भी उNेPनीय है किक उपरो्ሹ स्ቔ परी्ቌण की प्ቔावली पर बयान अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 313 (cid:20)ं.्ቚ.सं. उपलब्ध है जि5समें सभी मुቌኌR5मान के साथ ही सनत कुमर पाण्डेय ने भी यह स्वीकार किकया है किक मकिहला थाना में पूनम एवं सनत कुमार व उसके परिरवार वालों को बुलाया ्ቇया 5हां पर समझाने बुझाने पर कचेहरी आकर सनत कुमार व पूनम ने सुलहनामा तैयार किकया जि5सके उ्ቈर में सभी अशिभयु्ሹ्ቇण के साथ सनत कुमार पाण्डेय ने भी कचेहरी में सुलहनामा किकया 5ाना स्वीकार किकया है। वत(cid:28)मान प्ቔावली में का्ቇ5 सं.55 ब के रूप में उपरो्ሹ वቓኌणत सुलहनामा की छाया्ቚतित उपलब्ध है जि5स पर मु्ቐी (cid:20)ेवी के नोटरी की मुहर ल्ቇी है जि5स पर तारीP 29-06-2009 अंकिकत है। प्ቔावली पर उ्ሹ मु्ቐी (cid:20)ेवी ्ቛारा इस तथ्य के बाबत एक (पथ प्ቔ कि(cid:20)नांकिकत 01-02-2021 कि(cid:20)या ्ቇया है जि5समें मु्ቐी (cid:20)ेवी एडवोकेट ने (पथ पर यह कहा है किक वह (ेड नं. 5 जिसकिवल कोट(cid:28), फै5ाबा(cid:20) में (पथायु्ሹ का किवतिध व्यवसाय करती है कि(cid:20)नांक 29-06-2009 को आफताब आलम एडवोकेट ने एक (पथ प्ቔ उनके सम्ቌ ्ቚस्तुत किकया था जि5स पर उनके सामने पूनम व सनत कुमार पाण्डेय ने अपना अपना हस्ता्ቌर बनाया था जि5से एडवोकेट आफताब आलम ने ्ቚमाशिणत किकया था। उ्ሹ नोटरी उन्होनें कि(cid:20)नांक 29-06- 2009 को तस(cid:20)ीक किकया था जि5स पर उनकी मुहर व हस्ता्ቌर अंकिकत है। उपरो्ሹ सुलहनामा के (ुरूआत में ही यह उजिNखिPत है किक " मैं किक सनत कुमार पु्ቔ पुरूषो्ቈम किनवासी सराय सूरा, थाना बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) व ्ቦीमती पूनम पु्ቔी रमापतित पत्नी सनत कुमार किनवासी रामपुर भ्ቇन, थाना तारून, जि5ला फै5ाबा(cid:20) 5ो आपस में साथ साथ रहते थे जि5ससे हम लो्ቇों के मध्य एक लड़का जि5सका नाम कुंवर अकिनरू्ቍ ्ቚताप जि5सकी उ् आठ माह हो्ቇी पै(cid:20)ा हुआ है। हम लो्ቇों के मध्य आपस में हुए ्ቇलत फहमी की व5ह से किववा(cid:20) हो ्ቇया था 5ो अब सुलह समझौते के माध्यम से समा् हो ्ቇया है। प्ቔावली पर सनत कुमार पाण्डेय ्ቛारा का्ቇ5 सं. 57 ब ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ कि(cid:20)या ्ቇया जि5समें सुलहनामा का्ቇ5 सं.55 ब/2 ता 3 कि(cid:20)नांकिकत 29-06-2009 को फ5K एवं कूट रतिचत कहा ्ቇया उ्ሹ आवे(cid:20)न पर आ(cid:20)े( कि(cid:20)नांकिकत 27-07-2019 में न्यायालय ने यह कहा किक उपरो्ሹ सुलहनामा पर किवप्ቌी सनत कुमार को साቌኚय ्ቚस्तुत करने का पूण(cid:28) अवसर उपलब्ध रहे्ቇा इसी स्तर पर सुलहनामा को फ5K व कूट रतिचत होना नहीं कहा 5ा सकता।" प्ቔावली पर उपरो्ሹ मु०अ०सं० 793/2009 में सनत कुमार पाण्डेय का 5मानत ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ संख्या 1011/2009 के आ(cid:20)े( की ्ቚतितखिलकिप का्ቇ5 सं.74 ब/3 भी (cid:20)ाखिPल की ्ቇयी है जि5सके पे5 संख्य 2 पर पीठासीन अतिधकारी ्ቛारा यड उजिNखिPत किकया ्ቇया है किक "प्ቔावली का अवलोकन किकया। 3 किववेचक ्ቛारा संकखिलत साቌኚयों के अवलोकन से ्ቚतीत होता है किक वाकि(cid:20)नी ्ቛारा अशिभयु्ሹ से ्ቚेम किववाह किकया ्ቇया था जि5सके खिलए वाकि(cid:20)नी को अपना घर भी छोड़ना पड़ा। किववेचक ्ቛारा संकखिलत साቌኚयों में (cid:20)ो फोटो्ቇाफ भी है जि5समें से एक फोटो्ቇाफ में वाकि(cid:20)नी की मां्ቇ में िሺस(cid:20)ूर भरा 5ा रहा है 5ब किक (cid:20)ूसरे में वाकि(cid:20)नी व अशिभयु्ሹ एक साथ अ्ቇल ब्ቇल Pड़े हैं। किववेचक ्ቛारा संकखिलत साቌኚयों में एक नोटरी (पथ ्ቦी जि5समें ्ቚीतित अशिभयु्ሹ के मध्य एक पु्ቔ होने की बात कही ्ቇयी है तथा आपसी मतभे(cid:20) के सुलह समझौते ्ቛारा समा् किकये 5ाने की बात कही ्ቇयी है। मेरे किवचार से यह धृ्ቖता की पराका्ቖा है किक जि5स मकिहला ने अशिभयु्ሹ के खिलए अपना घर परिरवार छोड़ कि(cid:20)या उसके साथ कुछ समय किबता कर अशिभयु्ሹ उसे छोड़ कर (cid:20)ूसरा किववाह कर ले और उसे पहचानने से भी इंकार कर (cid:20)े।" उपरो्ሹ 5मानत ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ किनरस्त किकया ्ቇया है। प्ቔावली पर 5्ሴा ब्ሴा र्ቌा काड(cid:28) का्ቇ5 सं.74 ब/4 ्ቅम सं. 9014 (cid:20)ाखिPल है जि5समें शि((ु का नाम अकिनरू्ቍ 5न्म तितशिथ 31-10-2008 एवं पतित का नाम सनत पाण्डेय अंकिकत है। प्ቔावली पर य(लोक हाቌኌस्पटल (cid:20)ेवकाली रोड, फै5ाबा(cid:20) ्ቛारा 5ारी तिडस्चा5(cid:28) ቌኌस्लप का्ቇ5 सं. 744/5 (cid:20)ाखिPल की ्ቇयी है जि5समें पूनम पत्नी सनत पाण्डेय उजिNखिPत है। प्ቔावली पर मृतक अकिनरू्ቍ पाण्डेय की मृत्यु ्ቚमाण प्ቔ का्ቇ5 सं.74 ब/14 भी मूल रूप से (cid:20)ाखिPल है जि5समें मृत्यु की तितशिथ 14-03-2020 उजिNखिPत है मृतक की उ् 12 वष(cid:28) उजिNखिPत है माता का नाम पूनम पाण्डेय एवं किपता का नाम सनत पाण्डेय अंकिकत है। प्ቔावली पर सनत पाण्डेय का हाई स्कूल अंकप्ቔ मूल का्ቇ5 सं.74 ब/15, इण्टरमी尷宸डयट ्ቚमाण प्ቔ का्ቇ5 स. 74 ब/16 एवं एम.ए.पूवा(cid:28)्ቍ(cid:28) अंकप्ቔ मूल का्ቇ5 सं. 74 ब/18, चरिर्ቔ ्ቚमाण प्ቔ मूल का्ቇ5 सं. 74 ब/19, स्थायी 層擯नवास ्ቚमाण प्ቔ का्ቇ5 स. 74 ब/20 मूलरूप से ्ቚस्तुत किकया ्ቇया है जि5सके बारे में आवेकि(cid:20)का का कहना है किक सनत कुमार पाण्डेय के उपरो्ሹ मूल ्ቚप्ቔ उसके पास पत्नी की हैजिसयत से उपलब्ध है। उपरो्ሹ सम्पूण(cid:28) तथ्यों से यह स्प्ቖता साकिबत हो रहा है किक आवेकि(cid:20)का एवं किवप्ቌी के बीच पतित-पत्नी 5ैसे ्ቇम्भीर (ारीरिरक सम्बन्ध थे जि5ससे अकिनरू्ቍ नामक एक पु्ቔ भी पै(cid:20)ा हुआ । उपरो्ሹ के सन्(cid:20)भ(cid:28) में माननीय उ्ሴतम न्यायालय ्ቛारा खिलव-इन-रिरले(नशि(प को भी किववाह के रूप में मान्यता (cid:20)ी ्ቇयी है (ए.आई.आर. 2010 एस.सी. पृ् 2933) इसके अतितरिर्ሹ ए.एल.आर.2010 (78) (एन.ओ.सी.नं. 16) पृ् सं.9 पर भी यह व्यवस्था (cid:20)ी ्ቇयी है किक यकि(cid:20) एक पुरुष और ኚᮌी एक साथ लम्बे समय तक रहते रहे हो और बतौर पतित पत्नी के सामाजि5क मान्यता किमली हो वह भी बैध किववाह की ्ቦेणी में आये्ቇा तथा 5ो भी प्ቌ किववाह के किबन्(cid:20)ु को अस्वीकार कर रहा है उसे जिस्ቍ करने का भार उसी व्यकि्ሹ के ऊपर है। एक अन्य न्यातियक व्यवस्था (ए.आई.आर. 2003 कना(cid:28)टक पृ् 54 के पैरा 6 में) माननीय न्यायालय ने साቌኚय अतिधकिनयम की धारा 56,57 एवं 112 को सं्ሺान में लेते हुए यह व्यवस्था (cid:20)ी किक मानवीय अनुभव यह स्थाकिपत करता है किक कोई भी स्वी अपने ब्ሴे के साथ किकसी व्यकि्ሹ की पत्नी होने का (cid:20)ावा नहीं करे्ቇी 5ो उसका पतित न हो। अ्ቕतन किवतिध व्यवस्था इቌኌन्(cid:20)रा (मा(cid:28) बनाम वी.के.वी. (मा(cid:28) (2013) 15 एस.सी.सी.पे5 755 किनणKत कि(cid:20)नांकिकत 26-11-2013 में माननीय उ्ሴतम न्यायालय ने खिलव-इन रिरले(नशि(प के बारे में ्ቇाइड लाइन किनधा(cid:28)रिरत किकया जि5सके अनुसार प्ቌकारों के बीच उनके साथ से ब्ሴा पै(cid:20)ा होना वैवाकिहक सम्बन्धों की ्ቚकृतित का सम्बन्ध होने का ्ቚबल ्ቚमाण होता है। उ्ሹ संपूण(cid:28) किववेचना से स्प्ቖ है किक पूनम एवं सनत कुमार पांडे के बीच वैवाकिहक स्तर का (ारीरिरक संबंध स्थाकिपत है। 5हां तक सनत कुमार ्ቛारा पूनम को परिरत्य्ሹ किकये 5ाने का सम्बन्ध है यह स्प्ቖ है किक वत(cid:28)मान वा(cid:20) पूनम ्ቛारा अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 125 (cid:20)ं.्ቚ.सं. केक तहत भरण पोषण के खिलए अ्ቇस्त, 2009 में (cid:20)ाखिPल किकया ्ቇया है जि5समें कि(cid:20)नांक 18-07-2011 को एकप्ቌीय किनण(cid:28)य पूनम के प्ቌ में सुनया ्ቇया तत्प्ቐात् किवप्ቌी का रिरकाल ्ቚाथ(cid:28)ना प्ቔ स०्ቚ० वा(cid:20) सं. 42/2012 स्वीकार होकर प्ቔावली अपने मूल नम्बर पर (cid:20)5(cid:28) हुई । किवप्ቌी ्ቛारा पूरी प्ቔावली पर आवेकि(cid:20)का पूनम को अपनी पत्नी व अकिनरू्ቍ को पु्ቔ होने से इंकार किकया ्ቇया है । उपरो्ሹ तथ्य पूनम के अल्ቇ रहने का पया(cid:28)् युकि्ሹयु्ሹ कारण है।" It would be apt to indicate, from the above quoted portion of the impugned 4. judgment and order, that for the purposes of passing the order dated 04.02.2021 the trial court took note of the specific finding recorded by the trial court in the judgment passed on 07.08.2012, in the case arising out of Case Crime No.793 of 2009, under Sections 498-A, 323, 504, 506 I.P.C. and Section 3 (1)(X) of the SC/ST Act, Police Station - Bikapur, District - Faizabad, according to which the revisionist and the opposite party No.2 were living as husband and wife and out of this relationship one child was born. The relevant portion of the judgment is extracted herein under :- "आ5 न्ययालय के सम्ቌ उपरो्ሹ मु०अ०सं० 793/2009, अन्त्ቇ(cid:28)त धारा 498 ए, 323,504,506 भा.(cid:20)ं.स. एवंधारा3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट, थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै5ाबा(cid:20) सरकार बनाम सनत कुमार पाण्डेय आकि(cid:20) ्ቚस्तुत है उ्ሹ किनण(cid:28)य कि(cid:20)नांकिकत 07-08-2012 के किनष्कष(cid:28) के अቌኌन्तम 4 पैरा 27 में न्यायालय ्ቛारा यह उजिNखिPत किकया ्ቇया है किक "अशिभयो5न यह जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ सनत कुमार ने वाकि(cid:20)नी को (cid:20)हे5 के खिलए मारा पीटा या ्ቚताकिड़त किकया और यह भी जिस्ቍ करने में असमथ(cid:28) रहा है किक अशिभयु्ሹ ने वाकि(cid:20)नी को मारा पीटा या ्ቇाली कि(cid:20)या या धमकी कि(cid:20)या और 5ातित सूचक (ब्(cid:20)ों का ्ቚयो्ቇ करके अपमाकिनत किकया, बቌኌRक यह स्प्ቖ है किक वाकि(cid:20)नी का (ारीरिरक सम्बन्ध अशिभयु्ሹ सनत कुमार से रहा " , जि5ससे वाकि(cid:20)नी को एक ब्ሴा पै(cid:20)ा हुआ। This court also took note of various pronouncements on the aforesaid aspect of 5. the case including the judgment(s) of Hon'ble Apex Court passed in the case of Chanmuniya Vs. Virendra Kumar Singh Kushwaha and another (2011) 1 SCC 141, Indra Sarma Vs. V.K.V. Sarma (2013) 15 SCC 755, Kamla and others Vs. M.R. Mohan Kumar (2019) 11 SCC 491, D. Velusamy Vs. D.Patchaiammal (2010) 10 SCC 469 and Smt. N. Usha Rani Vs. Moodudulda Sriniwas2025 SCC OnLine SC 225, which are related to grant of maintenance to a female in live-in relationship. Upon due consideration of aforesaid, this court does not find any force in the
6. revision. It is accordingly dismissed. No order as to costs. Order Date :- 6.8.2025 ML/- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench