✦ High Court of India · 22 Aug 2025

Smt. Kamar Jahan v. Firoj whereby allow the application under sections

Case Details High Court of India · 22 Aug 2025
Court
High Court of India
Decided
22 Aug 2025
Length
1,207 words

Judgment

1. Case called out. None appeared on behalf of the revisionist to press the revision. However, learned A.G.A. for the State is present. In these circumstances, the court proceeded to decide the case with the assistance of learned A.G.A. The present criminal revision under Section 19(4) of the Family

2. Court Act has been filed seeking following main relief (s):-

"WHEREFORE, it is most respectfully prayed that this Hon'ble court may kindly be pleased to summon the record of the learned court below/trial court and after persuaded of the same set aside the judgment and order dated 04.01.2018 passed by the learned Principal Judge Family Court Gonda Case 204 of 2016 Smt. Kamar Jahan Versus Firoj whereby allow the application under sections 125 Cr.P.C. filed by the respondent no 2 and directed the revisionist to pay the maintenance 4000/- per month to the respondent no 2 from the date of filing and also allow the revision and in the interest of justice."

3. The relevant portion of the judgment in question reads as under :- "मैंने उभय प्ቌो के वि(cid:14)्ቛान अधि(cid:19)(cid:14)्ሹा की बहस सुना तथा प्ቔा(cid:14)ली पर उपलब्(cid:19) ्ቚप्ቔो का अ(cid:14)लोकन विकया। प्ቌकारो के वि(cid:14)्ቛान अधि(cid:19)(cid:14)्ሹा को सुनने, प्ቔा(cid:14)ली पर (cid:19)ारा-125 द० ्ቚ० सं० के ्ቚाथ&ना प्ቔ का अ(cid:14)लोकन विकया और वि(cid:14)प्ቌी की आपቈኌ* ए(cid:14)ं साቌኚय का अ(cid:14)लोकन करने के उपरान्त न्यायालय का विनष्क्ቧ& है विक ्ቚस्तुत मामले में विनम्न वि(cid:14)न्दुओ पर देखा जाना है:- 1-क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज की वि(cid:14)(cid:14)ाविहता पत्नी है ? 2-क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ अपना भरण-पो्ቧण करने में असमथ& है? 3-क्या वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज के आय के पया&्቎ सा(cid:19)न होते हुए अपनी पत्नी का भरण-पो्ቧण नहीं कर रहा है? 2 4-क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ को अपने पधित से अलग रहने का पया&्቎ कारण है? वि(cid:14)न्दु संख्या-1 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज की वि(cid:14)(cid:14)ाविहता पत्नी है ? उपरो्ሹ वि(cid:14)न्दु के सन्दभ& में प्ቌकारो के अभिभ(cid:14)चनो का अ(cid:14)लोकन करने के बाद यह स्(cid:14)ीकृत तथ्य है विक कमर जहाँ ए(cid:14)ं वि9रोज आपस में पधित-पत्नी है। वि(cid:14)न्दु संख्या-2 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ अपना भरण-पो्ቧण करने में असमथ& है? इस सन्दभ& में (cid:14)ाविदनी ने अपने ्ቚाथ&ना प्ቔ में कहा है विक (cid:14)ह एक पदा&नसीन मविहला है, पढ़ी-ቈኌलखी नहीं है, उसके पास आय का कोई विनजी ्ቦोत नहीं है। इन कथनो के समथ&न में (cid:14)ाविदनी ने पी० डब्लू०-1 के रूप में स्(cid:14)यं की साቌኚय ्ቚस्तुत की है तथा पी० डब्लू0-2 के रूप में नाजमा परीधि्ቌत हुई है। अपनी साቌኚय में पी० डब्लू०-1 कमर जहाँ ए(cid:14)ं पी० डब्लू0-2 नाजमा ने इन कथनो के समथ&न में साቌኚय दी है। ्ቚधित(cid:14)ादी ने अपनी आपቈኌ* में यह कहा है विक (cid:14)ह बचन देता है विक (cid:14)ाविदनी को बतौर पत्नी रखने, मेनटेन करने, द(cid:14)ा इलाज (cid:14) खाना- पानी आविद की व्य(cid:14)स्था करता रहेगा, कोई तकली9 नहीं होने देगा। वि(cid:14)प्ቌी के अभिभ(cid:14)चनो के इन कथनो से ही स्प्ቖ हो रहा है विक (cid:14)ाविदनी कोई काय& नहीं करती है, इसቈኌलए वि(cid:14)प्ቌी ने कहा है विक (cid:14)ह अपनी पत्नी को द(cid:14)ा- इलाज (cid:14) खानी पानी देता रहेगा। वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज ने (cid:14)ाविदनी को सिसलाई कढ़ाई करके अपना (cid:14) अपने माता-विपता का खच& उठाने का कथन विकया है, विकन्तु यह स्प्ቖ नहीं है विक (cid:14)ाविदनी कहाँ पर सिसलाई-कढ़ाई करती है। अतः एक सामान्य आपቈኌ* ए(cid:14)ं कथन (cid:14)ाविदनी के वि(cid:14)रू्ቍ कर विदया है विक (cid:14)ाविदनी सिसलाई-कढ़ाई करती है जो वि(cid:14)्ቫास करने योग्य नहीं है। अतः न्यायालय के विनष्क्ቧ& में (cid:14)ाविदनी का कोई आय का ्ቦोत नहीं है और (cid:14)ह अपना भरण-पो्ቧण करने में असमथ& है। वि(cid:14)न्दु संख्या-3 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज के आय के पया&्቎ सा(cid:19)न होते हुए अपनी पत्नी का भरण-पो्ቧण नहीं कर रहा है? इस वि(cid:14)न्दु के सन्दभ& में (cid:14)ाविदनी ने अपने (cid:14)ाद प्ቔ में कहा है विक वि(cid:14)प्ቌी बम्बई में रहकर बेकरी के कारखाना में नौकरी करता है और पन््ቖह हजार रूपये ्ቚधितमाह कमाता है तथा घर में अच्छी खेती होती है, सिजससे ्ቚधितमाह बीस हजार रूपये आमदनी होती है। इन कथनो के समथ&न में पी० डब्लू0-1, कमर जहाँ ए(cid:14)ं पी० डब्लू०-2 नाजमा साቌኚय ्ቚस्तुत की है। डी० डब्लू0-1 वि9रोज ने अपनी ्ቚधितपरी्ቌा में स्(cid:14)ीकार विकया है विक (cid:14)ह पहले मुम्बई में रहकर बेकरी के कारखाने में काम नहीं करता था, (cid:14)हाँ रहकर हाथ गाड़ी चलाता था। अतः इस ्ቚधित पृच्छा के कथनो से स्प्ቖ है विक वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज मुम्बई में आय का कोई काय& जरूर करता था और उससे उसकी आय थी, क्योंविक उसने स्(cid:14)यं हाथ गाड़ी मुम्बई में चलाना स्(cid:14)ीकार विकया है। अतः न्यायालय के विनष्क्ቧ& में वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज की पया&्቎ आय है। 3 (cid:14)त&मान में ्ቦीमती कमर जहाँ अपने मायके में रह रही है और ऐसा कोई कथन वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज ्ቛारा नहीं विकया गया है विक वि9रोज, कमर जहाँ के उसके मायके में रहने के दौरान खाना-खुराक (cid:14) द(cid:14)ा इलाज आविद का खचा& भेजता हो। अतः स्प्ቖ है विक वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज आय के पया&्቎ सा(cid:19)न होते हुए भी (cid:14)ह अपनी पत्नी का भरण-पो्ቧण नहीं कर रहा है। वि(cid:14)न्दु संख्या -4 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या (cid:14)ाविदनी कमर ? इस सम्बन्(cid:19) में जहाँ को अपने पधित से अलग रहने का पया&्቎ कारण है (cid:14)ाविदनी ने अपने ्ቚाथ&ना प्ቔ में अलग रहने का कारण दहेज मांगने और दहेज न देने के कारण यातनाए देने के वि(cid:14)्ቧय में कथन विकया है। इन 0-2 नाजमा ने -1 वि9रोज ने अपनी ्ቚधित पृच्छा में साቌኚय ्ቚस्तुत की है। डी० डब्लू० -1 कमर जहाँ ए(cid:14)ं पी० डब्लू कथनो का समथ&न पी० डब्लू० स्(cid:14)ीकार विकया है विक दहेज का मुकदमा मेरे (cid:14) मेरे घर (cid:14)ालो के ቈኌखला9 चल रहा है उसमें हम लोगो ने जमानत करा ቈኌलया है। अतः इससे स्प्ቖ है विक प्ቌकारो के बीच अपराधि(cid:19)क मामला लቚኌम्बत है। ऐसी दशा में ्ቦीमती कमर जहाँ को वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज से अलग रहने का पया&्቎ कारण है। डी० डब्लू०-1 वि9रोज ने अपनी ्ቚधित पृच्छा में स्(cid:14)ीकार विकया है विक मैने बीरेपुर विन(cid:14)ासी अख्तर की बेटी सुघरा से विनकाह कर ቈኌलया है, सुघरा से मेरे कोई ब्ሴे नहीं है। अतः इस दशा में ्ቦीमती कमर जहाँ को वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज से अलग रहने का पया&्቎ कारण है। ्ቚस्तुत मामले के विनस्तारण में वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज के ्ቛारा देरी की गयी है। अतः न्यायालय के विनष्क्ቧ& में (cid:14)ाविदनी को (cid:14)ाद दायर करने के विदनांक से गुजारा भ*ा विदलाया जाना उधिचत होगा। आदेश (cid:14)ाविदनी का (cid:14)ाद स्(cid:14)ीकार विकया जाता है। ्ቚधित(cid:14)ादी को आदेभिशत विकया जाता है विक (cid:14)ह (cid:14)ाद दायर करने के विदनांक 14.05.2009 से ्ቦीमती कमर जहाँ को गुजारा भ*ा के रूप में चार हजार रूपये ्ቚधितमाह ्ቚत्येक अं्ቇेजी माह के ्ቚथम स्቎ाह में अदा करेंगे।"

4. Upon perusal of the record including the above quoted portion of impugned order, this Court finds that the finding recorded by the trial court, to the view of this Court, is justified as on account of cruelty related to demand of dowry i.e. under compelling circumstances, opposite party No.2/wife of the revisionist left her matrimonial home. Accordingly, the criminal revision is dismissed. Order Date :- 22.8.2025 ML/- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

"WHEREFORE, it is most respectfully prayed that this Hon'ble court may kindly be pleased to summon the record of the learned court below/trial court and after persuaded of the same set aside the judgment and order dated 04.01.2018 passed by the learned Principal Judge Family Court Gonda Case 204 of 2016 Smt. Kamar Jahan Versus Firoj whereby allow the application under sections 125 Cr.P.C. filed by the respondent no 2 and directed the revisionist to pay the maintenance 4000/- per month to the respondent no 2 from the date of filing and also allow the revision and in the interest of justice."

3. The relevant portion of the judgment in question reads as under :- "मैंने उभय प्ቌो के वि(cid:14)्ቛान अधि(cid:19)(cid:14)्ሹा की बहस सुना तथा प्ቔा(cid:14)ली पर उपलब्(cid:19) ्ቚप्ቔो का अ(cid:14)लोकन विकया। प्ቌकारो के वि(cid:14)्ቛान अधि(cid:19)(cid:14)्ሹा को सुनने, प्ቔा(cid:14)ली पर (cid:19)ारा-125 द० ्ቚ० सं० के ्ቚाथ&ना प्ቔ का अ(cid:14)लोकन विकया और वि(cid:14)प्ቌी की आपቈኌ* ए(cid:14)ं साቌኚय का अ(cid:14)लोकन करने के उपरान्त न्यायालय का विनष्क्ቧ& है विक ्ቚस्तुत मामले में विनम्न वि(cid:14)न्दुओ पर देखा जाना है:- 1-क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज की वि(cid:14)(cid:14)ाविहता पत्नी है ? 2-क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ अपना भरण-पो्ቧण करने में असमथ& है? 3-क्या वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज के आय के पया&्቎ सा(cid:19)न होते हुए अपनी पत्नी का भरण-पो्ቧण नहीं कर रहा है? 2 4-क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ को अपने पधित से अलग रहने का पया&्቎ कारण है? वि(cid:14)न्दु संख्या-1 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज की वि(cid:14)(cid:14)ाविहता पत्नी है ? उपरो्ሹ वि(cid:14)न्दु के सन्दभ& में प्ቌकारो के अभिभ(cid:14)चनो का अ(cid:14)लोकन करने के बाद यह स्(cid:14)ीकृत तथ्य है विक कमर जहाँ ए(cid:14)ं वि9रोज आपस में पधित-पत्नी है। वि(cid:14)न्दु संख्या-2 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या (cid:14)ाविदनी कमर जहाँ अपना भरण-पो्ቧण करने में असमथ& है? इस सन्दभ& में (cid:14)ाविदनी ने अपने ्ቚाथ&ना प्ቔ में कहा है विक (cid:14)ह एक पदा&नसीन मविहला है, पढ़ी-ቈኌलखी नहीं है, उसके पास आय का कोई विनजी ्ቦोत नहीं है। इन कथनो के समथ&न में (cid:14)ाविदनी ने पी० डब्लू०-1 के रूप में स्(cid:14)यं की साቌኚय ्ቚस्तुत की है तथा पी० डब्लू0-2 के रूप में नाजमा परीधि्ቌत हुई है। अपनी साቌኚय में पी० डब्लू०-1 कमर जहाँ ए(cid:14)ं पी० डब्लू0-2 नाजमा ने इन कथनो के समथ&न में साቌኚय दी है। ्ቚधित(cid:14)ादी ने अपनी आपቈኌ* में यह कहा है विक (cid:14)ह बचन देता है विक (cid:14)ाविदनी को बतौर पत्नी रखने, मेनटेन करने, द(cid:14)ा इलाज (cid:14) खाना- पानी आविद की व्य(cid:14)स्था करता रहेगा, कोई तकली9 नहीं होने देगा। वि(cid:14)प्ቌी के अभिभ(cid:14)चनो के इन कथनो से ही स्प्ቖ हो रहा है विक (cid:14)ाविदनी कोई काय& नहीं करती है, इसቈኌलए वि(cid:14)प्ቌी ने कहा है विक (cid:14)ह अपनी पत्नी को द(cid:14)ा- इलाज (cid:14) खानी पानी देता रहेगा। वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज ने (cid:14)ाविदनी को सिसलाई कढ़ाई करके अपना (cid:14) अपने माता-विपता का खच& उठाने का कथन विकया है, विकन्तु यह स्प्ቖ नहीं है विक (cid:14)ाविदनी कहाँ पर सिसलाई-कढ़ाई करती है। अतः एक सामान्य आपቈኌ* ए(cid:14)ं कथन (cid:14)ाविदनी के वि(cid:14)रू्ቍ कर विदया है विक (cid:14)ाविदनी सिसलाई-कढ़ाई करती है जो वि(cid:14)्ቫास करने योग्य नहीं है। अतः न्यायालय के विनष्क्ቧ& में (cid:14)ाविदनी का कोई आय का ्ቦोत नहीं है और (cid:14)ह अपना भरण-पो्ቧण करने में असमथ& है। वि(cid:14)न्दु संख्या-3 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज के आय के पया&्቎ सा(cid:19)न होते हुए अपनी पत्नी का भरण-पो्ቧण नहीं कर रहा है? इस वि(cid:14)न्दु के सन्दभ& में (cid:14)ाविदनी ने अपने (cid:14)ाद प्ቔ में कहा है विक वि(cid:14)प्ቌी बम्बई में रहकर बेकरी के कारखाना में नौकरी करता है और पन््ቖह हजार रूपये ्ቚधितमाह कमाता है तथा घर में अच्छी खेती होती है, सिजससे ्ቚधितमाह बीस हजार रूपये आमदनी होती है। इन कथनो के समथ&न में पी० डब्लू0-1, कमर जहाँ ए(cid:14)ं पी० डब्लू०-2 नाजमा साቌኚय ्ቚस्तुत की है। डी० डब्लू0-1 वि9रोज ने अपनी ्ቚधितपरी्ቌा में स्(cid:14)ीकार विकया है विक (cid:14)ह पहले मुम्बई में रहकर बेकरी के कारखाने में काम नहीं करता था, (cid:14)हाँ रहकर हाथ गाड़ी चलाता था। अतः इस ्ቚधित पृच्छा के कथनो से स्प्ቖ है विक वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज मुम्बई में आय का कोई काय& जरूर करता था और उससे उसकी आय थी, क्योंविक उसने स्(cid:14)यं हाथ गाड़ी मुम्बई में चलाना स्(cid:14)ीकार विकया है। अतः न्यायालय के विनष्क्ቧ& में वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज की पया&्቎ आय है। 3 (cid:14)त&मान में ्ቦीमती कमर जहाँ अपने मायके में रह रही है और ऐसा कोई कथन वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज ्ቛारा नहीं विकया गया है विक वि9रोज, कमर जहाँ के उसके मायके में रहने के दौरान खाना-खुराक (cid:14) द(cid:14)ा इलाज आविद का खचा& भेजता हो। अतः स्प्ቖ है विक वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज आय के पया&्቎ सा(cid:19)न होते हुए भी (cid:14)ह अपनी पत्नी का भरण-पो्ቧण नहीं कर रहा है। वि(cid:14)न्दु संख्या -4 में यह विनस्तारण विकया जाना है विक क्या (cid:14)ाविदनी कमर ? इस सम्बन्(cid:19) में जहाँ को अपने पधित से अलग रहने का पया&्቎ कारण है (cid:14)ाविदनी ने अपने ्ቚाथ&ना प्ቔ में अलग रहने का कारण दहेज मांगने और दहेज न देने के कारण यातनाए देने के वि(cid:14)्ቧय में कथन विकया है। इन 0-2 नाजमा ने -1 वि9रोज ने अपनी ्ቚधित पृच्छा में साቌኚय ्ቚस्तुत की है। डी० डब्लू० -1 कमर जहाँ ए(cid:14)ं पी० डब्लू कथनो का समथ&न पी० डब्लू० स्(cid:14)ीकार विकया है विक दहेज का मुकदमा मेरे (cid:14) मेरे घर (cid:14)ालो के ቈኌखला9 चल रहा है उसमें हम लोगो ने जमानत करा ቈኌलया है। अतः इससे स्प्ቖ है विक प्ቌकारो के बीच अपराधि(cid:19)क मामला लቚኌम्बत है। ऐसी दशा में ्ቦीमती कमर जहाँ को वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज से अलग रहने का पया&्቎ कारण है। डी० डब्लू०-1 वि9रोज ने अपनी ्ቚधित पृच्छा में स्(cid:14)ीकार विकया है विक मैने बीरेपुर विन(cid:14)ासी अख्तर की बेटी सुघरा से विनकाह कर ቈኌलया है, सुघरा से मेरे कोई ब्ሴे नहीं है। अतः इस दशा में ्ቦीमती कमर जहाँ को वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज से अलग रहने का पया&्቎ कारण है। ्ቚस्तुत मामले के विनस्तारण में वि(cid:14)प्ቌी वि9रोज के ्ቛारा देरी की गयी है। अतः न्यायालय के विनष्क्ቧ& में (cid:14)ाविदनी को (cid:14)ाद दायर करने के विदनांक से गुजारा भ*ा विदलाया जाना उधिचत होगा। आदेश (cid:14)ाविदनी का (cid:14)ाद स्(cid:14)ीकार विकया जाता है। ्ቚधित(cid:14)ादी को आदेभिशत विकया जाता है विक (cid:14)ह (cid:14)ाद दायर करने के विदनांक 14.05.2009 से ्ቦीमती कमर जहाँ को गुजारा भ*ा के रूप में चार हजार रूपये ्ቚधितमाह ्ቚत्येक अं्ቇेजी माह के ्ቚथम स्቎ाह में अदा करेंगे।"

4. Upon perusal of the record including the above quoted portion of impugned order, this Court finds that the finding recorded by the trial court, to the view of this Court, is justified as on account of cruelty related to demand of dowry i.e. under compelling circumstances, opposite party No.2/wife of the revisionist left her matrimonial home. Accordingly, the criminal revision is dismissed. Order Date :- 22.8.2025 ML/- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

This is the original judgment text as indexed from the source corpus. Always verify against the official court record before relying on it in a filing — you can do so on eCourts or the Supreme Court of India website. ← Search more judgments