High Court · 2025
Case Details
Acts & Sections
Heard learned counsel for the revisionist, learned AGA for the State
1. and perused the record. The present criminal revision has been filed seeking the following
2. main relief(s):- "WHEREFORE, it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may be pleased to call for and examine the record of learned court below and set-aside the judgment and order so far it is against the revisionist No. 1 and allow the application under section 125 Cr.P.C. in respect of all the revisionists in toto with cost throughout and direct the opposite party No. 2 to provide Rs.5,000/- each per month to the revisionists as maintenance, in the interest of justice." Vide order dated 12.12.2017, under challenged, the Principal Judge, 3. Family Court, Ambedkar Nagar (in short"Family Court") declined to award maintenance to the revisionist No.1 w/o of opposite party No.2 and awarded the maintenance to the minors (children of opposite party No.2). The operative portion of the order dated 12.12.2017 reads as under :- "प्ቔावली में उपलब्ध साቌኚय की विववेचना से न्यायालय का मत है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या व विवप्ቌी के संस्ቇ से उत्प्ቐ ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 है। वे अभी अवयस्क है त(cid:28)ा अपना भरण पोषण करने में असम(cid:28) है। ्ቚाቕኌ(cid:28)या ्ቛारा अपने ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ में भरण पोषण की धनराशि/ के रूप में विवप्ቌी सं . 2 को 5000/- रूपया व विवप्ቌी सं० 3 को 5000 / कु ल मु. 10000/- रूपया ्ቚतितमाह की मां्ቇ की है। ्ቚाቕኌ(cid:28)नी ्ቛारा प्ቔावली पर विवप्ቌी के अपने विपता के हा्ቑ वेयर की दुकान को चलाने व उससे आय के संबंध में मौखि9क साቌኚय विदया है त(cid:28)ा दुकान से संबंतिधत फोटो्ቇाफस आविद ्ቚप्ቔ दाखि9ल विकये हैं जि?ससे विवप्ቌी की ्ቚ्या् आमदनी ्ቚतीत होती है। चू ंविक विववा्ቕक संख्या 2 के परिर्ቚेቌኚय में न्यायालय ्ቛारा यह पाया ्ቇया है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 विवप्ቌी से विबना विकसी उतिचत व ्ቚ्या् कारण के अल्ቇ रह रही है। अतः उसके संबंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ विनरस्त विकये ?ाने योग्य है परन्तु ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 नाबाखिल्ቇ पु्ቔ व पु्ቔी है, ?ो विक अपनी माता के सा(cid:28) नविनहाल में रह रहे हैं। अतः ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 अपने विपता से भरणं पोषण भ्ቈा वयस्क 2 होने तक पाने के अतिधकारी हैं। विवप्ቌी ्ቛारा भी अपनी आपखि्ቈ में ्ቚाቕኌ(cid:28)नी की माजिसक आमदनी विकतनी है, के सम्बंध में विकसी धनराशि/ का उ्ቤे9 नहीं विकया है न ही आमदनी के संबंध में कोई दस्तावे? दाखि9ल विकया है। ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में प्ቌकारों की सामाजि?क व आቕኌ(cid:28)क ቝኌस्(cid:28)तित को दे9ते हुए ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 2-मविहमा व ्ቚा(cid:28)# सं० अतिQनी कम/ः 2500/-, 2500/-रूपये ्ቚतितमाह उनके वयस्क होने तक भरण पोषण के रूप में पाने के अतिधकारी है। तदानुसार यातिचका ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 के संबंध में विनरस्त विकये ?ाने योग्य है एवं ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं0 2 व -3 के सम्बंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ स्वीकार विकये ?ाने योग्य है। आदे/ तदानुसार ्ቚाቕኌ(cid:28)या संख्या-1 विकरन के सम्बंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ विनरस्त विकया ?ाता है त(cid:28)ा ्ቚा(cid:28)#्ቇण संख्या-2 व 3 कम/ः मविहमा व अतिQनी के सम्बंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ स्वीकृ त विकया ?ाता है। विवप्ቌी आ/ीष कु मार को आदेशि/त विकया ?ाता है विक वह आदे/ की तितशि(cid:28) से अपने ब्ሴों कम/ः ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 2 मविहमा को 2500/-रूपये एवं ्ቚा(cid:28)# सं० 3 अतिQनी को 2500/-रूपये ्ቚतितमाह ्ቇु?ारा भ्ቈा उनके वयस्क होने तक ्ቚत्येक माह की 07 तारी9 तक अदा करे।"
4. For not providing maintenance to the revisionist No.1, the Family Court decided the Issue No.2 against the revisionist No.2, which reads as under:- "वि्ቛतीय विनधा रण विबन्दु यह है विक क्या ्ቚाቕኌ(cid:28)या विबना विकसी युविU ? के विवप्ቌी से अल्ቇ रह रही है - युU कारण ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने अपनी यातिचका में विवप्ቌी से अल्ቇ रहने का कारण यातिचका की धारा 2 ता 7 में वण न विकया है और बल विदया है विक विवप्ቌी व उसके परिर?नों ्ቛारा अतितरिरU दहे? के रूप में 10 ला9 रूपये रो?्ቇार हेतु मां्ቇ विवदायी से पूव की ्ቇयी जि?से पूरा न करने के कारण वह नारा? हो ्ቇयी लेविकन जि?म्मेदार व्यविUयों के बीच में पड़ने के कारण ्ቚाቕኌ(cid:28)नी की विवदाई हो सकी। विवप्ቌी व उसके परिर?न ्ቚाቕኌ(cid:28)नी के विपता ्ቛारा विदये ्ቇये दान दहे? से 9ु/ नहीं (cid:28)े और अतितरिरU दहे? के खिलए ताना देकर ्ቚताड़ना करते रहे। ्ቚाቕኌ(cid:28)या यह सोचकर बदा श्त करती रही विक भविवष्य में सब ठीक हो ?ाये्ቇा लेविकन विवप्ቌी का रवैया 9राब होता चला ्ቇया। विवप्ቌी ने ्ቚाቕኌ(cid:28)या को 2 बार विमटटी का तेल शि\ड़कर मार ्ቑालने का ्ቚयास विकया ्ቇया जि?ससे दोनों के बीच कटुता और हो ्ቇयी। इसके पूव विवप्ቌी ने ्ቚाቕኌ(cid:28)या के विवरू्ቍ पारिरवारिरक न्यायालय में एक वाद ्ቚस्तुत विकया जि?समें विदनांक 27.11.09 को सुलह हुई और उU में विवप्ቌी ने यह खिलखि9त क(cid:28)न विकया विक वह अब ्ቚाቕኌ(cid:28)या को कभी भी मानजिसक व /ारीरिरक ्ቚताड़ना नहीं दे्ቇा लेविकन ?ब ्ቚाቕኌ(cid:28)या विवदा होकर उसके घर ्ቇयी तो विवप्ቌी ने उसे ्ቇाखिलयां दी वा मारापीटा और ्ቚाቕኌ(cid:28)नी का सारा ?ेवर कपड़ा आविद लेकर एक ्ቇाड़ी में बैठाकर यह कहते हुए विक उसकी विपता दृघ टना में घायल हो ्ቇये हैं, विदनांक 14.6.14 को दोपहर 12 ब?े पदुमपुर बा?ार के दति्ቌण सुनसान ?्ቇह पर ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके ब्ሴों को उतार विदये और धमकी विदये विक अतितरिरU दहे? की धनराशि/ 10 ला9 रूपये लेकर ही आये। ्ቚाቕኌ(cid:28)या अपने ब्ሴों के सा(cid:28) रोते हुए अपने विपता के घर पहु ंची। विवप्ቌी ने अपनी खिलखि9त आपखि्ቈ में यातिचका में वቕኌणत उपरोU बातों को ्ቇलत बताया और बल विदया विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या विवप्ቌी के संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है और अपने मायके वालों को बुलाकर अपने घर चली ?ाती है त(cid:28)ा ्ቚाቕኌ(cid:28)या को अपमाविनत करती है। विवप्ቌी ने कई बार पंचायत 3 करके उसकी विवदाई का ्ቚयास विकया परन्तु वह तैयार नहीं हुई। ?ब विवप्ቌी ने पारिरवारिरक न्यायालय आ?म्ቇढ़ में एक याद ्ቚस्तुत विकया जि?सकी नोविटस के उपरांत ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने झूठे क(cid:28)नों के आधार पर विवप्ቌी के विवरू्ቍ घरेलू िሻहसा व दहे? उत्पीड़न का याद ्ቚस्तुत विकया। बहस के अनु्ቅम में विवप्ቌी के विव्ቛान अतिधवUा ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके ्ቇवाहान के बयानों के आधार पर बल विदया है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)नी विबना विकसी उतिचत व पया ् कारण के विवप्ቌी से अल्ቇ रह रही है। विवतिधअनुसार विकसी सा्ቌी का बयान एकरूपेण पढ़ा ?ाता है। मा्ቔ एक अं/ या वाक्य से सम्पूण अ(cid:28) नहीं विनकाला ?ाता है। ्ቚाቕኌ(cid:28)नी ने पी.्ቑब्लू, 1 के रूप में अपनी मुख्य परी्ቌा में वाद क(cid:28)नों का दोहराई है जि?से पुनः अंविकत करने की आवश्यकता नहीं है। ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने साቌኚय में विवप्ቌी के विवरू्ቍ /ादी के विदन से ही ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके विपता से अपने व्यवसाय हेतु 10 ला9 अतितरिरU दहे? की मां्ቇ करने की बात कही है और उसी के परिर्ቚेቌኚय में /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना देना कहा है। ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में अपनी जि?रह में बल विदया है विक मेरी /ादी हम लो्ቇों के परिरवार वालों ने दे9कर समझकर तय विकया (cid:28)ा। /ादी की बातचीत होने के ल्ቇभ्ቇ ्ቑेढ़ माह बाद विववाद हुआ। इस ्ቑेढ़ माह के बीच में मेरे मायके वालों व ससुराल वालो के बीच बातचीत होती (cid:28)ी। विववाह के पूव ससुराल वालों व मेरे मायके वालो के बीच ?ो लेन देन तय हुआ (cid:28)ा वह मेरे मायके वालों ने विदया (cid:28)ा। विववाह के समय मेरी ससुराल व मेरे मायके वालों के बीच कोई दान दहे? का विववाद नहीं हुआ (cid:28)ा। मैं विववाह में विवदा होकर ्ቇयी तो मैं 3 माह तक रही। पहली विवदाई में अपने पतित व ससुराल वालों के पहली बार सा(cid:28) हंसी9ु/ी रही। इसके बाद मायके आयी और एक माह रहने के बाद पुनः ससुराल ्ቇयी और ल्ቇभ्ቇ माह ससुराल में रही। इस बीच मुझे ्ቇभ आ ्ቇया (cid:28)ा। मेरी ससुराल में संयुU परिरवार है। मेरी ससुराल में मविहलाओं में 2 नन्दें घर में रहती हैं। /ादी के बाद मैं अपनी ससुराल कई मेरी सास व बार आयी ्ቇयी हू ं रीतित रिरवा? के अनुसार आई ्ቇई हू ं। मेरी ससुराल में सबके बे्ቑरूम अल्ቇ अल्ቇ है। मेरे पतित ने आ?म्ቇढ़ में विकया (cid:28)ा। इस मुकदमे में आ?म्ቇढ में विवदाई का एक मुकदमा सन के न्यायालय में हम लो्ቇों के बीच सुलह हो ्ቇयी (cid:28)ी। हम लो्ቇों ने /प(cid:28) प्ቔ दाखि9ल विकया है। मेरी सभी आवश्यकताओं को मेरी पतित पूरा करते (cid:28)े। मैं संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है। यविद मेरे पतित अल्ቇ लेकर रहें तो मैं उनके सा(cid:28) ?ाने को तैयार हू ं। मेरे पतित अपने मां बाप से अल्ቇ नहीं रहना चाहते ?ो सुलहनामा आ?म्ቇढ़ में दाखि9ल है उसमें दान दहे? मां्ቇने की ं। मैं अंतितम बार बात नहीं कही ्ቇयी है। मैं अपने मायके में ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) मायके आयी (cid:28)ी। ं। मैं जि?तनी बार आई ्ቇई हू 4 साल से बैठी हू 2009 8, 9 ्ቚाቕኌ(cid:28)नी के अन्य सा्ቌी उसका भाई के /व ्ቚसाद पी.्ቑब्लू. 2 के रूप में अपनी मुख्य परी्ቌा में विवप्ቌी पर 10 ला9 अतितरिरU दहे? के खिलए अपनी बहन के सा(cid:28) /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना देना बताया है। सा्ቌी ने जि?रह में बल विदया है विक विवप्ቌी का परिरवार संयुU परिरवार है। आ/ीष के विपता की हा्ቑ वेयर की दुकान है। आ/ीष के यहां मेरी बहन का कमरा से्ቚेट है। सा्ቌी ने जि?रह के पृ् सं० 3 पर बल विदया है विक घर से ही दान दहे? मां्ቇने की बात /ुरू हुई (cid:28)ी। मेरी बहन को तलाक की नोविटस 2014 में विमली है। यविद मेरी बहन ने अपनी जि?रह के पे? 3 पर यह कहा है विक मैं अंतितम बार अपनी ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) मायके आयी (cid:28)ी तो उU क(cid:28)न ्ቇलत हो्ቇा। ऐसा नहीं है विक मेरी बहन अपनी सुराल में संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है बቝኌhक अल्ቇ रहना चाहती है। विवप्ቌी ने ्ቑी.्ቑब्लू. 1 के रूप में अपने बयान में बल विदया है विक मेरा संयुU परिरवार है। मेरी पत्नी संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती ?बविक मैं 4 संयुU परिरवार में र9ना चाहता हू ं। इन्हीं बातों को लेकर झ्ቇड़ा झंझट करती (cid:28)ी। उसके बाद अक्सर अपने भाई को बुलाकर 15, 20 विदन में चली ?ाती (cid:28)ी। मैं व मेरे परिरवार वाले र9ना चाहते हैं परन्तु वह सा(cid:28) में नहीं रहना चाहती है। मैं व मेरे विपता ने कई बार विकरन के घर ?ाकर सुलह समझौता करके विवदाई कराना चाहा परन्तु मेरी पत्नी संयुU परिरवार में न रहने की जि?द पर अड़ी रही। सा्ቌी से विवस्तृत जि?रह की ्ቇयी है जि?समें उसने स्प्ቖ रूप से यह बल विदया है विक यविद विकरन मेरे सा(cid:28) ?ाना चाहे तो मैं उसे अपने ं। उसके ्ቛारा यह भी बल विदया ्ቇया विक इस सा(cid:28) ले ?ाने के खिलए तैयार हू संबंध में ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में मैं तलाक चाह रहा हू ं। इस समय तलाक का मुकदमा चल रहा है। विवप्ቌी के वि्ቛतीय सा्ቌी ्ቑी. ्ቑब्लू, 1 ने भी अपने बयानों में विवप्ቌी के क(cid:28)नों का सम(cid:28) न विकया है। प्ቔावली पर उपलब्ध खिलखि9त व मौखि9क साቌኚय से यह स्प्ቖ है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने अपनी यातिचका में विववाह के समय ही विवप्ቌी ्ቛारा 10 ला9 रूपये अतितरिरU दहे? के रूप में मां्ቇने के परिर्ቚेቌኚय में /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना देने और उसको ब्ሴों के सा(cid:28) परसनपुर बा?ार के दति्ቌण सुनसान ?्ቇह पर \ोड़ देने की बात कही है। विकन्तु उसने अपने जि?रह में यह स्वीकार विकया है विक विववाह के समय उसकी ससुराल वाले और मायके वालों के बीच में दान दहे? का कोई विववाद नहीं (cid:28)ा। उसने यह भी स्वीकार 3 माह रही। वहां उसके पतित विकया है विक यह विवदा होकर ससुराल ्ቇयी और व ससुराल वाले हंसी 9ु/ी से रहे। सा्ቌी ने यह बल विदया है विक विवप्ቌी उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता (cid:28)ा लेविकन वह संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है। यविद उसके पतित अल्ቇ लेकर रहें तो उसके सा(cid:28) ?ाने को तैयार हू ं। सा्ቌी ने यह भी स्वीकार विकया है विक मैं अंतितम बार अपने ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) मायके आयी (cid:28)ी। प्ቔावली पर ्ቚाቕኌ(cid:28)नी की ओर ्ቚस्तुत सूची के माध्यम से दाखि9ल का्ቇ?ात के अवलोकन से ्ቚतीत होता है विक पारिरवारिरक न्यायालय आ?म्ቇढ़ में अ/ीष कु मार विवप्ቌी ्ቛारा विवदाई का वाद विकरन के विवरू्ቍ योजि?त विकया (cid:28)ा जि?समें प्ቌकारों के बीच , जि?सकी सत्याविपत ्ቚतितखिलविप प्ቔावली पर उपलब्ध है। समझौता हुआ (cid:28)ा 27.11.2009 सुलहनामा विदनांक में ऐसा कोई तथ्य नहीं खिल9ा है जि?ससे यह ्ቚतीत होता हो विक विवप्ቌी ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)या को अतितरिरU दहे? के संबंध में /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना दी ्ቇयी हो। उपरोU संतिधप्ቔ से विवप्ቌी ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)नी को /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚता्ቑना देने का तथ्य जिस्ቍ नहीं होता है। अन्य ्ቚप्ቔों से यह ्ቚतीत होता है विक प्ቌकारों के बीच में घरेलू िሻहसा व दहे? ्ቚताड़ना से संबंतिधत वाद भी लቝኌम्बत है। विवप्ቌी के बयान से यह ्ቚतीत होता है विक वत मान में उसके ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 के विवरू्ቍ विववाह विवच्\ेद का मुकदमा दाखि9ल विकया है ?ो अभी लቝኌम्बत है। विवप्ቌी ने अपनी जि?रह में यह भी स्वीकार विकया है विक वह अब अपनी पत्नी के सा(cid:28) नहीं रहना चाहता और तलाक चाहता है। ्ቚाቕኌ(cid:28)नी व उसके ्ቇवाह उसके भाई के /व ्ቚसाद ने अपने बयान में यह स्वीकार विकया है विक विवप्ቌी का एक संयुU परिरवार है जि?सके परिरवार में उसके माता विपता व 2 बहने, भाई व उसकी पत्नी रहती है। स्वयं ्ቚाቕኌ(cid:28)नी ने यह भी स्वीकार विकया है विक विवप्ቌी उसकी हर आवश्यकताओं की पूቔኌत करता (cid:28)ा लेविकन वह उसके सा(cid:28) संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती। यविद उसका पतित उसे अल्ቇ लेकर रहे तो वह सा(cid:28) रहने को तैयार है। प्ቔावली पर उपलब्ध ्ቚाቕኌ(cid:28)नी के बयान में आयी हुई स्वीकारोविU के परिर्ቚेቌኚय में उसका यह तथ्य पु्ቖ नहीं होता है विक विवप्ቌी ्ቛारा विववाह के समय ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके पतित से 10 ला9 रूपये की मां्ቇ की ्ቇयी और इसी के कारण प्ቌकारों के बीच विववाद हुआ। उसकी स्वीकारोविU से यह भी जिस्ቍ है विक वह अंतितम बार अपनी ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) 5 अपने मायके आयी जि?ससे यह तथ्य पु्ቖ नहीं होता विक विवप्ቌी ्ቛारा उसे मारपीटकर विदनांक 14.09.2016 को दोपहर 12 ब?े पदुमपुर बा?ार के दति्ቌण सुनसान ?्ቇह पर \ोड़ विदये। प्ቔावली पर उपलब्ध साቌኚय से यह जिस्ቍ है विक विवप्ቌी का एक संयुU परिरवार है और ्ቚाቕኌ(cid:28)या विवप्ቌी के सा(cid:28) अल्ቇ रहना चाहती है। विवप्ቌी अपने परिरवार से अल्ቇ नहीं रहना चाहता। अतः प्ቔावली पर उजि्ቤखि9त मौखि9क साቌኚय से स्प्ቖ है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)नी विबना विकसी युविU युU कारण के विवप्ቌी से अल्ቇ रह रही है। वत मान यौतिचका विवप्ቌी संख्या 2 व 3 के संबंध में यातिचत की ्ቇयी है विक विवप्ቌी उनका विपता है। प्ቌकारों के बीच यह तथ्य अविववाविदत है विक विवप्ቌी ्ቛारा अपने ब्ሴों को कभी कोई भरण पोषण धनराशि/ दी हो। यह उन्हें अपने अशिभर्ቌा में लेने का ्ቚयास विकया हो। ्ቚा(cid:28)# सं० 2 व 3 ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 के सा(cid:28) अपने नविनहाल में रह रहे है। ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 विवप्ቌी से भरण पोषण पाने का युविU युU कारण मौ?ूद है।"
5. Upon perusal of the record including the above quoted part of impugned order dated 12.12.2017 i.e. the decision on Issue No.2, this Court finds that the finding on the Issue No.2 recorded by the Family Court is justified for the reason that the revisionist No.1 failed to establish that under compelling circumstances she left the matrimonial home.
6. Accordingly, the criminal revision is dismissed. Order Date :- 22.8.2025 ML/- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench
Heard learned counsel for the revisionist, learned AGA for the State
1. and perused the record. The present criminal revision has been filed seeking the following
2. main relief(s):- "WHEREFORE, it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may be pleased to call for and examine the record of learned court below and set-aside the judgment and order so far it is against the revisionist No. 1 and allow the application under section 125 Cr.P.C. in respect of all the revisionists in toto with cost throughout and direct the opposite party No. 2 to provide Rs.5,000/- each per month to the revisionists as maintenance, in the interest of justice." Vide order dated 12.12.2017, under challenged, the Principal Judge, 3. Family Court, Ambedkar Nagar (in short"Family Court") declined to award maintenance to the revisionist No.1 w/o of opposite party No.2 and awarded the maintenance to the minors (children of opposite party No.2). The operative portion of the order dated 12.12.2017 reads as under :- "प्ቔावली में उपलब्ध साቌኚय की विववेचना से न्यायालय का मत है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या व विवप्ቌी के संस्ቇ से उत्प्ቐ ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 है। वे अभी अवयस्क है त(cid:28)ा अपना भरण पोषण करने में असम(cid:28) है। ्ቚाቕኌ(cid:28)या ्ቛारा अपने ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ में भरण पोषण की धनराशि/ के रूप में विवप्ቌी सं . 2 को 5000/- रूपया व विवप्ቌी सं० 3 को 5000 / कु ल मु. 10000/- रूपया ्ቚतितमाह की मां्ቇ की है। ्ቚाቕኌ(cid:28)नी ्ቛारा प्ቔावली पर विवप्ቌी के अपने विपता के हा्ቑ वेयर की दुकान को चलाने व उससे आय के संबंध में मौखि9क साቌኚय विदया है त(cid:28)ा दुकान से संबंतिधत फोटो्ቇाफस आविद ्ቚप्ቔ दाखि9ल विकये हैं जि?ससे विवप्ቌी की ्ቚ्या् आमदनी ्ቚतीत होती है। चू ंविक विववा्ቕक संख्या 2 के परिर्ቚेቌኚय में न्यायालय ्ቛारा यह पाया ्ቇया है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 विवप्ቌी से विबना विकसी उतिचत व ्ቚ्या् कारण के अल्ቇ रह रही है। अतः उसके संबंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ विनरस्त विकये ?ाने योग्य है परन्तु ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 नाबाखिल्ቇ पु्ቔ व पु्ቔी है, ?ो विक अपनी माता के सा(cid:28) नविनहाल में रह रहे हैं। अतः ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 अपने विपता से भरणं पोषण भ्ቈा वयस्क 2 होने तक पाने के अतिधकारी हैं। विवप्ቌी ्ቛारा भी अपनी आपखि्ቈ में ्ቚाቕኌ(cid:28)नी की माजिसक आमदनी विकतनी है, के सम्बंध में विकसी धनराशि/ का उ्ቤे9 नहीं विकया है न ही आमदनी के संबंध में कोई दस्तावे? दाखि9ल विकया है। ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में प्ቌकारों की सामाजि?क व आቕኌ(cid:28)क ቝኌस्(cid:28)तित को दे9ते हुए ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 2-मविहमा व ्ቚा(cid:28)# सं० अतिQनी कम/ः 2500/-, 2500/-रूपये ्ቚतितमाह उनके वयस्क होने तक भरण पोषण के रूप में पाने के अतिधकारी है। तदानुसार यातिचका ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 के संबंध में विनरस्त विकये ?ाने योग्य है एवं ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं0 2 व -3 के सम्बंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ स्वीकार विकये ?ाने योग्य है। आदे/ तदानुसार ्ቚाቕኌ(cid:28)या संख्या-1 विकरन के सम्बंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ विनरस्त विकया ?ाता है त(cid:28)ा ्ቚा(cid:28)#्ቇण संख्या-2 व 3 कम/ः मविहमा व अतिQनी के सम्बंध में ्ቚा(cid:28) ना प्ቔ स्वीकृ त विकया ?ाता है। विवप्ቌी आ/ीष कु मार को आदेशि/त विकया ?ाता है विक वह आदे/ की तितशि(cid:28) से अपने ब्ሴों कम/ः ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 2 मविहमा को 2500/-रूपये एवं ्ቚा(cid:28)# सं० 3 अतिQनी को 2500/-रूपये ्ቚतितमाह ्ቇु?ारा भ्ቈा उनके वयस्क होने तक ्ቚत्येक माह की 07 तारी9 तक अदा करे।"
4. For not providing maintenance to the revisionist No.1, the Family Court decided the Issue No.2 against the revisionist No.2, which reads as under:- "वि्ቛतीय विनधा रण विबन्दु यह है विक क्या ्ቚाቕኌ(cid:28)या विबना विकसी युविU ? के विवप्ቌी से अल्ቇ रह रही है - युU कारण ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने अपनी यातिचका में विवप्ቌी से अल्ቇ रहने का कारण यातिचका की धारा 2 ता 7 में वण न विकया है और बल विदया है विक विवप्ቌी व उसके परिर?नों ्ቛारा अतितरिरU दहे? के रूप में 10 ला9 रूपये रो?्ቇार हेतु मां्ቇ विवदायी से पूव की ्ቇयी जि?से पूरा न करने के कारण वह नारा? हो ्ቇयी लेविकन जि?म्मेदार व्यविUयों के बीच में पड़ने के कारण ्ቚाቕኌ(cid:28)नी की विवदाई हो सकी। विवप्ቌी व उसके परिर?न ्ቚाቕኌ(cid:28)नी के विपता ्ቛारा विदये ्ቇये दान दहे? से 9ु/ नहीं (cid:28)े और अतितरिरU दहे? के खिलए ताना देकर ्ቚताड़ना करते रहे। ्ቚाቕኌ(cid:28)या यह सोचकर बदा श्त करती रही विक भविवष्य में सब ठीक हो ?ाये्ቇा लेविकन विवप्ቌी का रवैया 9राब होता चला ्ቇया। विवप्ቌी ने ्ቚाቕኌ(cid:28)या को 2 बार विमटटी का तेल शि\ड़कर मार ्ቑालने का ्ቚयास विकया ्ቇया जि?ससे दोनों के बीच कटुता और हो ्ቇयी। इसके पूव विवप्ቌी ने ्ቚाቕኌ(cid:28)या के विवरू्ቍ पारिरवारिरक न्यायालय में एक वाद ्ቚस्तुत विकया जि?समें विदनांक 27.11.09 को सुलह हुई और उU में विवप्ቌी ने यह खिलखि9त क(cid:28)न विकया विक वह अब ्ቚाቕኌ(cid:28)या को कभी भी मानजिसक व /ारीरिरक ्ቚताड़ना नहीं दे्ቇा लेविकन ?ब ्ቚाቕኌ(cid:28)या विवदा होकर उसके घर ्ቇयी तो विवप्ቌी ने उसे ्ቇाखिलयां दी वा मारापीटा और ्ቚाቕኌ(cid:28)नी का सारा ?ेवर कपड़ा आविद लेकर एक ्ቇाड़ी में बैठाकर यह कहते हुए विक उसकी विपता दृघ टना में घायल हो ्ቇये हैं, विदनांक 14.6.14 को दोपहर 12 ब?े पदुमपुर बा?ार के दति्ቌण सुनसान ?्ቇह पर ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके ब्ሴों को उतार विदये और धमकी विदये विक अतितरिरU दहे? की धनराशि/ 10 ला9 रूपये लेकर ही आये। ्ቚाቕኌ(cid:28)या अपने ब्ሴों के सा(cid:28) रोते हुए अपने विपता के घर पहु ंची। विवप्ቌी ने अपनी खिलखि9त आपखि्ቈ में यातिचका में वቕኌणत उपरोU बातों को ्ቇलत बताया और बल विदया विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या विवप्ቌी के संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है और अपने मायके वालों को बुलाकर अपने घर चली ?ाती है त(cid:28)ा ्ቚाቕኌ(cid:28)या को अपमाविनत करती है। विवप्ቌी ने कई बार पंचायत 3 करके उसकी विवदाई का ्ቚयास विकया परन्तु वह तैयार नहीं हुई। ?ब विवप्ቌी ने पारिरवारिरक न्यायालय आ?म्ቇढ़ में एक याद ्ቚस्तुत विकया जि?सकी नोविटस के उपरांत ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने झूठे क(cid:28)नों के आधार पर विवप्ቌी के विवरू्ቍ घरेलू िሻहसा व दहे? उत्पीड़न का याद ्ቚस्तुत विकया। बहस के अनु्ቅम में विवप्ቌी के विव्ቛान अतिधवUा ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके ्ቇवाहान के बयानों के आधार पर बल विदया है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)नी विबना विकसी उतिचत व पया ् कारण के विवप्ቌी से अल्ቇ रह रही है। विवतिधअनुसार विकसी सा्ቌी का बयान एकरूपेण पढ़ा ?ाता है। मा्ቔ एक अं/ या वाक्य से सम्पूण अ(cid:28) नहीं विनकाला ?ाता है। ्ቚाቕኌ(cid:28)नी ने पी.्ቑब्लू, 1 के रूप में अपनी मुख्य परी्ቌा में वाद क(cid:28)नों का दोहराई है जि?से पुनः अंविकत करने की आवश्यकता नहीं है। ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने साቌኚय में विवप्ቌी के विवरू्ቍ /ादी के विदन से ही ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके विपता से अपने व्यवसाय हेतु 10 ला9 अतितरिरU दहे? की मां्ቇ करने की बात कही है और उसी के परिर्ቚेቌኚय में /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना देना कहा है। ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में अपनी जि?रह में बल विदया है विक मेरी /ादी हम लो्ቇों के परिरवार वालों ने दे9कर समझकर तय विकया (cid:28)ा। /ादी की बातचीत होने के ल्ቇभ्ቇ ्ቑेढ़ माह बाद विववाद हुआ। इस ्ቑेढ़ माह के बीच में मेरे मायके वालों व ससुराल वालो के बीच बातचीत होती (cid:28)ी। विववाह के पूव ससुराल वालों व मेरे मायके वालो के बीच ?ो लेन देन तय हुआ (cid:28)ा वह मेरे मायके वालों ने विदया (cid:28)ा। विववाह के समय मेरी ससुराल व मेरे मायके वालों के बीच कोई दान दहे? का विववाद नहीं हुआ (cid:28)ा। मैं विववाह में विवदा होकर ्ቇयी तो मैं 3 माह तक रही। पहली विवदाई में अपने पतित व ससुराल वालों के पहली बार सा(cid:28) हंसी9ु/ी रही। इसके बाद मायके आयी और एक माह रहने के बाद पुनः ससुराल ्ቇयी और ल्ቇभ्ቇ माह ससुराल में रही। इस बीच मुझे ्ቇभ आ ्ቇया (cid:28)ा। मेरी ससुराल में संयुU परिरवार है। मेरी ससुराल में मविहलाओं में 2 नन्दें घर में रहती हैं। /ादी के बाद मैं अपनी ससुराल कई मेरी सास व बार आयी ्ቇयी हू ं रीतित रिरवा? के अनुसार आई ्ቇई हू ं। मेरी ससुराल में सबके बे्ቑरूम अल्ቇ अल्ቇ है। मेरे पतित ने आ?म्ቇढ़ में विकया (cid:28)ा। इस मुकदमे में आ?म्ቇढ में विवदाई का एक मुकदमा सन के न्यायालय में हम लो्ቇों के बीच सुलह हो ्ቇयी (cid:28)ी। हम लो्ቇों ने /प(cid:28) प्ቔ दाखि9ल विकया है। मेरी सभी आवश्यकताओं को मेरी पतित पूरा करते (cid:28)े। मैं संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है। यविद मेरे पतित अल्ቇ लेकर रहें तो मैं उनके सा(cid:28) ?ाने को तैयार हू ं। मेरे पतित अपने मां बाप से अल्ቇ नहीं रहना चाहते ?ो सुलहनामा आ?म्ቇढ़ में दाखि9ल है उसमें दान दहे? मां्ቇने की ं। मैं अंतितम बार बात नहीं कही ्ቇयी है। मैं अपने मायके में ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) मायके आयी (cid:28)ी। ं। मैं जि?तनी बार आई ्ቇई हू 4 साल से बैठी हू 2009 8, 9 ्ቚाቕኌ(cid:28)नी के अन्य सा्ቌी उसका भाई के /व ्ቚसाद पी.्ቑब्लू. 2 के रूप में अपनी मुख्य परी्ቌा में विवप्ቌी पर 10 ला9 अतितरिरU दहे? के खिलए अपनी बहन के सा(cid:28) /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना देना बताया है। सा्ቌी ने जि?रह में बल विदया है विक विवप्ቌी का परिरवार संयुU परिरवार है। आ/ीष के विपता की हा्ቑ वेयर की दुकान है। आ/ीष के यहां मेरी बहन का कमरा से्ቚेट है। सा्ቌी ने जि?रह के पृ् सं० 3 पर बल विदया है विक घर से ही दान दहे? मां्ቇने की बात /ुरू हुई (cid:28)ी। मेरी बहन को तलाक की नोविटस 2014 में विमली है। यविद मेरी बहन ने अपनी जि?रह के पे? 3 पर यह कहा है विक मैं अंतितम बार अपनी ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) मायके आयी (cid:28)ी तो उU क(cid:28)न ्ቇलत हो्ቇा। ऐसा नहीं है विक मेरी बहन अपनी सुराल में संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है बቝኌhक अल्ቇ रहना चाहती है। विवप्ቌी ने ्ቑी.्ቑब्लू. 1 के रूप में अपने बयान में बल विदया है विक मेरा संयुU परिरवार है। मेरी पत्नी संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती ?बविक मैं 4 संयुU परिरवार में र9ना चाहता हू ं। इन्हीं बातों को लेकर झ्ቇड़ा झंझट करती (cid:28)ी। उसके बाद अक्सर अपने भाई को बुलाकर 15, 20 विदन में चली ?ाती (cid:28)ी। मैं व मेरे परिरवार वाले र9ना चाहते हैं परन्तु वह सा(cid:28) में नहीं रहना चाहती है। मैं व मेरे विपता ने कई बार विकरन के घर ?ाकर सुलह समझौता करके विवदाई कराना चाहा परन्तु मेरी पत्नी संयुU परिरवार में न रहने की जि?द पर अड़ी रही। सा्ቌी से विवस्तृत जि?रह की ्ቇयी है जि?समें उसने स्प्ቖ रूप से यह बल विदया है विक यविद विकरन मेरे सा(cid:28) ?ाना चाहे तो मैं उसे अपने ं। उसके ्ቛारा यह भी बल विदया ्ቇया विक इस सा(cid:28) ले ?ाने के खिलए तैयार हू संबंध में ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में मैं तलाक चाह रहा हू ं। इस समय तलाक का मुकदमा चल रहा है। विवप्ቌी के वि्ቛतीय सा्ቌी ्ቑी. ्ቑब्लू, 1 ने भी अपने बयानों में विवप्ቌी के क(cid:28)नों का सम(cid:28) न विकया है। प्ቔावली पर उपलब्ध खिलखि9त व मौखि9क साቌኚय से यह स्प्ቖ है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)या ने अपनी यातिचका में विववाह के समय ही विवप्ቌी ्ቛारा 10 ला9 रूपये अतितरिरU दहे? के रूप में मां्ቇने के परिर्ቚेቌኚय में /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना देने और उसको ब्ሴों के सा(cid:28) परसनपुर बा?ार के दति्ቌण सुनसान ?्ቇह पर \ोड़ देने की बात कही है। विकन्तु उसने अपने जि?रह में यह स्वीकार विकया है विक विववाह के समय उसकी ससुराल वाले और मायके वालों के बीच में दान दहे? का कोई विववाद नहीं (cid:28)ा। उसने यह भी स्वीकार 3 माह रही। वहां उसके पतित विकया है विक यह विवदा होकर ससुराल ्ቇयी और व ससुराल वाले हंसी 9ु/ी से रहे। सा्ቌी ने यह बल विदया है विक विवप्ቌी उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता (cid:28)ा लेविकन वह संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है। यविद उसके पतित अल्ቇ लेकर रहें तो उसके सा(cid:28) ?ाने को तैयार हू ं। सा्ቌी ने यह भी स्वीकार विकया है विक मैं अंतितम बार अपने ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) मायके आयी (cid:28)ी। प्ቔावली पर ्ቚाቕኌ(cid:28)नी की ओर ्ቚस्तुत सूची के माध्यम से दाखि9ल का्ቇ?ात के अवलोकन से ्ቚतीत होता है विक पारिरवारिरक न्यायालय आ?म्ቇढ़ में अ/ीष कु मार विवप्ቌी ्ቛारा विवदाई का वाद विकरन के विवरू्ቍ योजि?त विकया (cid:28)ा जि?समें प्ቌकारों के बीच , जि?सकी सत्याविपत ्ቚतितखिलविप प्ቔावली पर उपलब्ध है। समझौता हुआ (cid:28)ा 27.11.2009 सुलहनामा विदनांक में ऐसा कोई तथ्य नहीं खिल9ा है जि?ससे यह ्ቚतीत होता हो विक विवप्ቌी ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)या को अतितरिरU दहे? के संबंध में /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚताड़ना दी ्ቇयी हो। उपरोU संतिधप्ቔ से विवप्ቌी ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)नी को /ारीरिरक व मानजिसक ्ቚता्ቑना देने का तथ्य जिस्ቍ नहीं होता है। अन्य ्ቚप्ቔों से यह ्ቚतीत होता है विक प्ቌकारों के बीच में घरेलू िሻहसा व दहे? ्ቚताड़ना से संबंतिधत वाद भी लቝኌम्बत है। विवप्ቌी के बयान से यह ्ቚतीत होता है विक वत मान में उसके ्ቛारा ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 के विवरू्ቍ विववाह विवच्\ेद का मुकदमा दाखि9ल विकया है ?ो अभी लቝኌम्बत है। विवप्ቌी ने अपनी जि?रह में यह भी स्वीकार विकया है विक वह अब अपनी पत्नी के सा(cid:28) नहीं रहना चाहता और तलाक चाहता है। ्ቚाቕኌ(cid:28)नी व उसके ्ቇवाह उसके भाई के /व ्ቚसाद ने अपने बयान में यह स्वीकार विकया है विक विवप्ቌी का एक संयुU परिरवार है जि?सके परिरवार में उसके माता विपता व 2 बहने, भाई व उसकी पत्नी रहती है। स्वयं ्ቚाቕኌ(cid:28)नी ने यह भी स्वीकार विकया है विक विवप्ቌी उसकी हर आवश्यकताओं की पूቔኌत करता (cid:28)ा लेविकन वह उसके सा(cid:28) संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती। यविद उसका पतित उसे अल्ቇ लेकर रहे तो वह सा(cid:28) रहने को तैयार है। प्ቔावली पर उपलब्ध ्ቚाቕኌ(cid:28)नी के बयान में आयी हुई स्वीकारोविU के परिर्ቚेቌኚय में उसका यह तथ्य पु्ቖ नहीं होता है विक विवप्ቌी ्ቛारा विववाह के समय ्ቚाቕኌ(cid:28)या व उसके पतित से 10 ला9 रूपये की मां्ቇ की ्ቇयी और इसी के कारण प्ቌकारों के बीच विववाद हुआ। उसकी स्वीकारोविU से यह भी जिस्ቍ है विक वह अंतितम बार अपनी ससुराल से अपने भाई के सा(cid:28) 5 अपने मायके आयी जि?ससे यह तथ्य पु्ቖ नहीं होता विक विवप्ቌी ्ቛारा उसे मारपीटकर विदनांक 14.09.2016 को दोपहर 12 ब?े पदुमपुर बा?ार के दति्ቌण सुनसान ?्ቇह पर \ोड़ विदये। प्ቔावली पर उपलब्ध साቌኚय से यह जिस्ቍ है विक विवप्ቌी का एक संयुU परिरवार है और ्ቚाቕኌ(cid:28)या विवप्ቌी के सा(cid:28) अल्ቇ रहना चाहती है। विवप्ቌी अपने परिरवार से अल्ቇ नहीं रहना चाहता। अतः प्ቔावली पर उजि्ቤखि9त मौखि9क साቌኚय से स्प्ቖ है विक ्ቚाቕኌ(cid:28)नी विबना विकसी युविU युU कारण के विवप्ቌी से अल्ቇ रह रही है। वत मान यौतिचका विवप्ቌी संख्या 2 व 3 के संबंध में यातिचत की ्ቇयी है विक विवप्ቌी उनका विपता है। प्ቌकारों के बीच यह तथ्य अविववाविदत है विक विवप्ቌी ्ቛारा अपने ब्ሴों को कभी कोई भरण पोषण धनराशि/ दी हो। यह उन्हें अपने अशिभर्ቌा में लेने का ्ቚयास विकया हो। ्ቚा(cid:28)# सं० 2 व 3 ्ቚाቕኌ(cid:28)या सं० 1 के सा(cid:28) अपने नविनहाल में रह रहे है। ऐसी ቝኌस्(cid:28)तित में ्ቚा(cid:28)#्ቇण सं० 2 व 3 विवप्ቌी से भरण पोषण पाने का युविU युU कारण मौ?ूद है।"
5. Upon perusal of the record including the above quoted part of impugned order dated 12.12.2017 i.e. the decision on Issue No.2, this Court finds that the finding on the Issue No.2 recorded by the Family Court is justified for the reason that the revisionist No.1 failed to establish that under compelling circumstances she left the matrimonial home.
6. Accordingly, the criminal revision is dismissed. Order Date :- 22.8.2025 ML/- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench