✦ High Court of India · 15 May 2025

High Court · 2025

Case Details High Court of India · 15 May 2025
Court
High Court of India
Decided
15 May 2025
Bench
Not available
Length
1,026 words

1. Heard Shri Onkar Nath Tiwari, learned counsel for the petitioners and Shri Hemant Kumar Pandey, learned Standing Counsel for State-respondents.

2. By means of the instant petition, the petitioner has challenged the order dated 19.11.2003 (Annexure No. 1 to the petition) passed by opposite party no. 1/Deputy Director Of Consolidation, Faizabad (in short "D.D.C."); the order dated 05.09.2003 (Annexure No. 2 to the petition) passed by opposite party no. 2/Settlement Officer of Consolidation, Faizabad (in short "S.O.C."), and the order dated 16.04.2003 (Annexure No.3 to the petition) passed by opposite party no.3/Consolidation Officer, Kuchera Baza, Faizabad (in short "C.O."), in the proceedings instituted under U.P. Consolidation of Holdings Act, 1953 (in short "Act of 1953").

3. Being relevant, the order dated 19.11.2003 is extracted herein-under :- ननररधननयन पककधरन तथध अनतररत यह 2 ननररधनद " उतर पददश जजत चकबनदद अधधननयम कक धधरध - 48 नवदधन बनदजबसत अधधकधरद चकबनदद कद आददश नदनधनक 5-9-2003 नवरद उसद कद अववधधननक तथध नवधध नवरद बतधतद हहए उसद ननरसत नकयद जधनद कक यधचनध सनहत नववधद ननषय मम परसपर पसततत कक रई हव। दजनन हद समबननधत हम। अतत सतनवधध कद दनषकजण सद इन दजनन हद ननररधननयन कज समदनकत नकयध जधतध हव। ननररधनद सनखयध - करतद हहए इनकध ननसतधरण एक हद आददश दधरध 1920 कक पतधवलद अगणद हजरद तथध यहद आददश ददसरद ननररधनद पतधवलद पर भद पभधवद हजरध। मवनद पककधर कक ओर सद पसततत नकयद रयद तकर न कज नवसतधर सद सतनध तथध गधम अनभलदखन एवन भदनमकध कध भधलभधननत अवलजकन एवन अधययन नकयध । यह दजनन ननररधननयधन कधलवधधधत हम, कधरण दशधरतद हहए शपथ- सदमधवधध अधधननयम कक धधरध-5 जधतध हव। ननररधनदकतधर शदमतद ननमरलधददवद कक ओर सद पसततत नकयद रयद तकर न मम मतखयतयध यह कहध रयध हव नक रधटध सनखयध -2143 उसकद आवधस सरहदद गधम - करमडधडध सद कधफक ददरद पर हव, नवपरदतत बचत भदनम रधटध सनखय - 1859, 1861, 1862 आनद अपदकधकक त ननकट हव। अतत उसकक यधचनध हव नक रधटध सनखयध - 2143 1863 कज बचत करतद हहए रधटध सनखयध - 1859, 1861 आनद बचत पर उक पनदष नकयध जधय। ननररधनदकतधर हररभधनदत कक ओर सद पसततत नकयद रयद तकर न मम यह कहध रयध हव नक पदवर अननकत खधतददधर सतरसतद सद नतमधइसद बवनधमध धलयध धलयध रयध हव धजसकद आधधर पर दधधखल खधररज करधकर अपनध नधम बवनधममदधरन दधरध अननकत करध धलयध ननरसतदकरण हदतत वधद ददवधनद नयधयधलय मम नवचधरधधदन हव। रयध हव। उक बवनधमन कद अतत नववधदगसत भदनम यथधवत रखद जधय । नकनतत ननररधनदकतधर कक ओर सद नवलमब कध पत नदयध रयध हव अतत उदधर दनषकजण अपनधतद हहए भधरतदय कध लधभ पदधन करतद हहए नवलमब कध मषरण नकयध इसकद इस ननररधनदकतधर कद कथन कध नवरजध पनतपकदरण अननकत खधतदधर दधरध नकयध रयध हव तथध ननररधनदकतधर कज उनकद पसतधनवत चक कद नवरद कत छ कहनद कध अधधकधर न हजनध कहध रयध हव। पसततत नकयद रयद तकरन कद पररपदकय मम नवनदत हजतध हव नक वसतततत ननररधनदकतद ननमरलधददवद कद आवधस जज सरहदद गधम करमडधडध मम हव सद रधटध सनखयध - शदमतद 2193 कधफक ददरद पर हव, धजससद उनहम कक नष कधयर करनद मम असतनवधध हजनध सवधभधनवक हव, उनहम उक बचत भदनम पर चक पनदष नकयद जधनद कध नवरजध नकसद दधरध नहह नकयध रयध हव। चकबनदद नकयधयन कद अनतररत चकन कध पददशन अननकत खधतददधर कक सतनवधध कज दनषरत रखतद हहए नकरद जधनद पधवधधन हव। इन पररनसथनतयन मम बचत भदनम रधटध सनखयध -1861, 1862 आनद पर चक पनदष नकयद जधनद मम अनननचतय नहह हव, तदनतसधर उक बचत भदनम पर इसद चक पनदष नकयध जधतध हव तथध रधटध सनखयध -2143 पर पनदष उसकद चक कज बचत नकयध जधतध हव। जहधह तक ननररधनदकतधर हररभधनदत कक ओर पसततत तकर कध पशन हव, यह तथय नननवरवधद हव नक नववधदगसत भदनम पर अभद तक कधफक अरसध सद बवनधमधदधरन कद पक मम नधमधनतरण हजकर उनकध उनकध नधम गधम अनभलदखन मम अनभधलधखत चलध आ रहध हव। अतत उनकद नधम अननकत भदनम कद मदलयधनकन कध चक उनहम अपनद सतनवधधनतसधर पधप करनद कध पदणर अधधकधर हव। ननररधनदकतधर हररभधनदत कध नधम नकसद भद सकम नयधयधलय सद अभद तक अननकत नहह हहआ हव और न हद ऐसध कजई सधकय पतधवधलत नकयध जध सकध हव धजससद यह जधत हजतध नक कधथत बवनधमध नकसद सकम नयधयधलय ननरसत नकयध रयध हव, ऐसद नसथनत मम गधम अनभलदखन खधतददधर न हजनद कद कधरण उनकक ननररधनद पजषणदय नहद हव। जब नववधनदत भदनम कद समबनध , मम ननररधनदकतधर कज नकसद पकधर कध सवतव पधप हज जधयरध तज उसकद दधरध एतदनवषयक कधयरवधहद चक पददशन आनद कक ननयमधनतसधर कक जध सकतद हव। वतरमधन मम उसद कजई उपदधन नदयध जध पधनध समभव नहह हव। तदनतसधर ननररधनद ननरधधधर हव। उपयतक नववदचन, कज सवदकधर नकयध जधतध हव तथध ननररधनद सनखयध -1954 कज ननरसत नकयध जधतध हव। सनलग सनशजधन तधधलकध धजस पर मदरद हसतधकर हव, तथध जज इस आददश कध अनर हव कद अनतसधर गधम अनभलदख सनशजधधत हज। सथल पर सदमधनकन नकयध जधय। अगदतर कधयरवधहद कद पतधवधलयधन सनगहदत हज।" . कद आधधर पर ननररधनद सनखयध 1920

4. It is not in dispute that land involved in the case i.e. land of Gata No. 2143, situated at Village - Mehdauna Pargana - Paschim Rath, Tehsil - Milkipur, District - Faizabad (now Ayodhya).

5. At this stage, after taking of note of the fact that for claiming rights related to land in dispute the civil suit was pending when the final order dated 19.11.2003 was passed by D.D.C., on being asked, learned counsel for the petitioner states that decree of civil Court was in favor of the petitioner, thereafter, the First Appellate Court reversed the decree of the Court of first instance and against the judgment of the First Appellate Court, the second appeal is pending in which there is no stay order.

6. In view of aforesaid admitted position, this Court is of the view that no relief can be granted to the petitioner at this stage. Accordingly, challenging the order(s) dated 19.11.2003, 05.09.2003 and 16.04.2003, the petition is hereby dismissed. Interim order, if any, stands vacated. Order Date :- 15.5.2025/Mohit Singh/- MOHIT SINGH High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

1. Heard Shri Onkar Nath Tiwari, learned counsel for the petitioners and Shri Hemant Kumar Pandey, learned Standing Counsel for State-respondents.

2. By means of the instant petition, the petitioner has challenged the order dated 19.11.2003 (Annexure No. 1 to the petition) passed by opposite party no. 1/Deputy Director Of Consolidation, Faizabad (in short "D.D.C."); the order dated 05.09.2003 (Annexure No. 2 to the petition) passed by opposite party no. 2/Settlement Officer of Consolidation, Faizabad (in short "S.O.C."), and the order dated 16.04.2003 (Annexure No.3 to the petition) passed by opposite party no.3/Consolidation Officer, Kuchera Baza, Faizabad (in short "C.O."), in the proceedings instituted under U.P. Consolidation of Holdings Act, 1953 (in short "Act of 1953").

3. Being relevant, the order dated 19.11.2003 is extracted herein-under :- ननररधननयन पककधरन तथध अनतररत यह 2 ननररधनद " उतर पददश जजत चकबनदद अधधननयम कक धधरध - 48 नवदधन बनदजबसत अधधकधरद चकबनदद कद आददश नदनधनक 5-9-2003 नवरद उसद कद अववधधननक तथध नवधध नवरद बतधतद हहए उसद ननरसत नकयद जधनद कक यधचनध सनहत नववधद ननषय मम परसपर पसततत कक रई हव। दजनन हद समबननधत हम। अतत सतनवधध कद दनषकजण सद इन दजनन हद ननररधननयन कज समदनकत नकयध जधतध हव। ननररधनद सनखयध - करतद हहए इनकध ननसतधरण एक हद आददश दधरध 1920 कक पतधवलद अगणद हजरद तथध यहद आददश ददसरद ननररधनद पतधवलद पर भद पभधवद हजरध। मवनद पककधर कक ओर सद पसततत नकयद रयद तकर न कज नवसतधर सद सतनध तथध गधम अनभलदखन एवन भदनमकध कध भधलभधननत अवलजकन एवन अधययन नकयध । यह दजनन ननररधननयधन कधलवधधधत हम, कधरण दशधरतद हहए शपथ- सदमधवधध अधधननयम कक धधरध-5 जधतध हव। ननररधनदकतधर शदमतद ननमरलधददवद कक ओर सद पसततत नकयद रयद तकर न मम मतखयतयध यह कहध रयध हव नक रधटध सनखयध -2143 उसकद आवधस सरहदद गधम - करमडधडध सद कधफक ददरद पर हव, नवपरदतत बचत भदनम रधटध सनखय - 1859, 1861, 1862 आनद अपदकधकक त ननकट हव। अतत उसकक यधचनध हव नक रधटध सनखयध - 2143 1863 कज बचत करतद हहए रधटध सनखयध - 1859, 1861 आनद बचत पर उक पनदष नकयध जधय। ननररधनदकतधर हररभधनदत कक ओर सद पसततत नकयद रयद तकर न मम यह कहध रयध हव नक पदवर अननकत खधतददधर सतरसतद सद नतमधइसद बवनधमध धलयध धलयध रयध हव धजसकद आधधर पर दधधखल खधररज करधकर अपनध नधम बवनधममदधरन दधरध अननकत करध धलयध ननरसतदकरण हदतत वधद ददवधनद नयधयधलय मम नवचधरधधदन हव। रयध हव। उक बवनधमन कद अतत नववधदगसत भदनम यथधवत रखद जधय । नकनतत ननररधनदकतधर कक ओर सद नवलमब कध पत नदयध रयध हव अतत उदधर दनषकजण अपनधतद हहए भधरतदय कध लधभ पदधन करतद हहए नवलमब कध मषरण नकयध इसकद इस ननररधनदकतधर कद कथन कध नवरजध पनतपकदरण अननकत खधतदधर दधरध नकयध रयध हव तथध ननररधनदकतधर कज उनकद पसतधनवत चक कद नवरद कत छ कहनद कध अधधकधर न हजनध कहध रयध हव। पसततत नकयद रयद तकरन कद पररपदकय मम नवनदत हजतध हव नक वसतततत ननररधनदकतद ननमरलधददवद कद आवधस जज सरहदद गधम करमडधडध मम हव सद रधटध सनखयध - शदमतद 2193 कधफक ददरद पर हव, धजससद उनहम कक नष कधयर करनद मम असतनवधध हजनध सवधभधनवक हव, उनहम उक बचत भदनम पर चक पनदष नकयद जधनद कध नवरजध नकसद दधरध नहह नकयध रयध हव। चकबनदद नकयधयन कद अनतररत चकन कध पददशन अननकत खधतददधर कक सतनवधध कज दनषरत रखतद हहए नकरद जधनद पधवधधन हव। इन पररनसथनतयन मम बचत भदनम रधटध सनखयध -1861, 1862 आनद पर चक पनदष नकयद जधनद मम अनननचतय नहह हव, तदनतसधर उक बचत भदनम पर इसद चक पनदष नकयध जधतध हव तथध रधटध सनखयध -2143 पर पनदष उसकद चक कज बचत नकयध जधतध हव। जहधह तक ननररधनदकतधर हररभधनदत कक ओर पसततत तकर कध पशन हव, यह तथय नननवरवधद हव नक नववधदगसत भदनम पर अभद तक कधफक अरसध सद बवनधमधदधरन कद पक मम नधमधनतरण हजकर उनकध उनकध नधम गधम अनभलदखन मम अनभधलधखत चलध आ रहध हव। अतत उनकद नधम अननकत भदनम कद मदलयधनकन कध चक उनहम अपनद सतनवधधनतसधर पधप करनद कध पदणर अधधकधर हव। ननररधनदकतधर हररभधनदत कध नधम नकसद भद सकम नयधयधलय सद अभद तक अननकत नहह हहआ हव और न हद ऐसध कजई सधकय पतधवधलत नकयध जध सकध हव धजससद यह जधत हजतध नक कधथत बवनधमध नकसद सकम नयधयधलय ननरसत नकयध रयध हव, ऐसद नसथनत मम गधम अनभलदखन खधतददधर न हजनद कद कधरण उनकक ननररधनद पजषणदय नहद हव। जब नववधनदत भदनम कद समबनध , मम ननररधनदकतधर कज नकसद पकधर कध सवतव पधप हज जधयरध तज उसकद दधरध एतदनवषयक कधयरवधहद चक पददशन आनद कक ननयमधनतसधर कक जध सकतद हव। वतरमधन मम उसद कजई उपदधन नदयध जध पधनध समभव नहह हव। तदनतसधर ननररधनद ननरधधधर हव। उपयतक नववदचन, कज सवदकधर नकयध जधतध हव तथध ननररधनद सनखयध -1954 कज ननरसत नकयध जधतध हव। सनलग सनशजधन तधधलकध धजस पर मदरद हसतधकर हव, तथध जज इस आददश कध अनर हव कद अनतसधर गधम अनभलदख सनशजधधत हज। सथल पर सदमधनकन नकयध जधय। अगदतर कधयरवधहद कद पतधवधलयधन सनगहदत हज।" . कद आधधर पर ननररधनद सनखयध 1920

4. It is not in dispute that land involved in the case i.e. land of Gata No. 2143, situated at Village - Mehdauna Pargana - Paschim Rath, Tehsil - Milkipur, District - Faizabad (now Ayodhya).

5. At this stage, after taking of note of the fact that for claiming rights related to land in dispute the civil suit was pending when the final order dated 19.11.2003 was passed by D.D.C., on being asked, learned counsel for the petitioner states that decree of civil Court was in favor of the petitioner, thereafter, the First Appellate Court reversed the decree of the Court of first instance and against the judgment of the First Appellate Court, the second appeal is pending in which there is no stay order.

6. In view of aforesaid admitted position, this Court is of the view that no relief can be granted to the petitioner at this stage. Accordingly, challenging the order(s) dated 19.11.2003, 05.09.2003 and 16.04.2003, the petition is hereby dismissed. Interim order, if any, stands vacated. Order Date :- 15.5.2025/Mohit Singh/- MOHIT SINGH High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

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