Samar Bahadur Singh & others v. State of U.P. & others in proceedings under section
Case Details
Acts & Sections
1. Heard learned counsel for the petitioners-Sri Ashok Kumar Muarya and Sri Alok Kumar Tripathi, learned counsel for the opposite party No. 3 and Sri Ajay Kumar, learned counsel for the State-respondents.
2. Present petition has been filed for the following main relief(s):- "(i) quash / set aside the impugned judgment and order dated 19.11.2024 passed by Session Judge, Pratapgarh in Criminal Revision No.227/2024 Samar Bahadur Singh & others Vs State of U.P. & others in proceedings under section 438/440 Bhartiya Nagrik Suraksha Sanhita 2023, contained as Annexure No.1 to this writ petition. (ii) quash / set aside the impugned order dated 31.08.2024 passed by Sub-Divisional Officer Lalganj, Pratapgarh in Criminal case no.42/2016 Computerized Case No.T- 201602570203650 Bhagwat Prasad & others Vs Achal Singh & others, in proceedings under section 133 Cr. P.C.. contained as Annexure No.2 to this writ petition."
3. Vide impugned order dated 31.08.2024 passed in exercise of powers under Section 133 CrPC in a case registered as Case No. 42 of 2016 the Sub- Divisional Magistrate, Lalganj, Pratapgarh (hereinafter referred to as "Magistrate"), directed the SHO, Police Station Sangipur, to get the drain opened within 14 days. The relevant portion of the order dated 31.08.2024 reads as under:- "प्ऴावली पेश हुई। ्ऺश्नगत वाद भगवत ्ऺसाद आिद सुत महादेव यादव िनवासी ्षाम मेहरवान िसह का पुरवा, हुसैनपुर थाना सांगीपुर जनपद ्ऺतापगढ़ के वाद प्ऴ िदनांक 22.01.2016 पर संिस्थत िकया गया। ्ऺथम प्ष ने अपने वाद प्ऴ में कथन िकया है िक आवेदकगण उपरो्व ्षाम के िनवासी है तथा पूवर्जों के समय से आबाद चले आ रहे है, तथा आबादी नं० 200 है। आवेदकगणों के घर व दरवाजे तथा बरसात आिद का पानी सैकड़ों वषॏल से गाँव को पूवर् िदशा में भूिम से होकर रंगौली के तालाब में बहता चला आ रहा है। ्षामवािसयों को ्षाम असांव जाने के िलए बहुत पुराना कच्चा चौड़ा रास्ता पूवर्जों के समय से था, िजससे लोग आते जाते थे। उसी रास्ते पर सरकार ्षारा पक्की सड़क का िनमार्ण कराया गया तथा पानी िनकास हेतु सड़क के नीचे पक्की सीमेंट की पाईप भी लगायी गयी। िजससे दरवाजे व बरसात का पानी नाली से होते हुए तालाब में चला जाता है। ि्षतीय प्ष ्षारा पानी के बहाव में अवरोध उत्पन्न करने की धमकी दी गयी तो ्ऺथम प्ष ने ्ऺशािनक अिधकािरयों को कई िशकायती ्ऺाथर्ना प्ऴ िदया। परन्तु कोई कायर्वाही नहीं की गयी तो ्ऺथम प्ष के भगवत ्ऺसाद सुत महादेव यादव िनवासी ्षाम उपरो्व ्षारा उ्व 2 CRLP No. 151 of 2025 न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ में एक जनिहत यािचका ्ऺस्तुत िकया। मा० उच्च न्यायालय ने यह िनदरॏिशत िदया िक धारा 133 जा०फौ० के अन्तगर्त कायर्वाही करके नाली में उत्पन्न हुए अवरोध हटवाये। यिद नाली न खुलवायी गयी तो और जल िनकासी की ्िवस्था न करायी गयी तो आवेदकगणों के घर में भर जायेगा। मकान िगर जायेगें, जान, माल की ्षित होगी। नाली बन्द करने से मना करने पर ि्षतीय प्ष आमादा फौजदारी होते है। मा० उच्च न्यायालय के िनदरॏशों के अनुसार कायर्वाही करते हुए अिवलम्ब नाली खुलवाने की कृ पा की जाये। थानाध्य्ष सांगीपुर से आख्या आहूत की गयी। थानाध्य्ष सांगीपुर ्षारा िदनांक 17.02.2016 मय नजरी नक्शा न्यायालय में ्ऺस्तुत िकया गया। थानाध्य्ष सांगीपुर ने वाद प्ऴ के ्वम में अपनी आख्या ्ऺस्तुत िकया गया। साथ में मा० उच्च न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ में योिजत िरट यािचका सं० 9140/2015 ्ऺस्तुत की गयी। िनयमानुसर सशतर् आदेश िदनांक 05.03.2016 जारी हुआ, जो वाद तामीला संलग्न प्ऴावली है। ि्षतीय प्ष सं० 2 ता 5 िदनांक 28.10.2016 को न्यायालय उपिस्थत होकर आपि्त ्ऺस्तुत िकया। ि्षतीय प्ष ्षारा िदनांक 05.10.2018 को न्यायालय ्शीमान िसिवल जज (सी०िड०) ्ऺतापगढ़ के योिजत वाद समर बहादुर िसह आिद बनाम भगवत आिद की ्ऺमािणत छाया्ऺित अिभलेखीय साष्य के रूप में ्ऺस्तुत की गयी। साष्य शपथ प्ऴ के रूप में भवगत ्ऺसाद सुत महादेव यादव िनवासी ्षाम उपरो्व ्षारा िदनांक 17.03.2023, रमाशंकर यादव सुत रामशरण यादव िनवासी ्षाम उपरो्व ्षारा िदनांक 24.03.2023 एवं रमाशंकर यादव सुत अयोध्या ्ऺसाद यादव, रामबरन सुत ि्ऴभुवननाथ िव्षकमार्, िशवसागर सुत रामअंजोर यादव तथा हिरलाल सुत सुखई लाल सरोज िनवासीगण उपरो्व ्षारा िदनांक 31.03.2023 को ्ऺस्तुत िकया गया। ि्षतीय प्ष के िवरू्ध िदनांक 19.05.2023 को अनुपिस्थत रहने पर साष्य का अवसर समाप्त कर िदया गया एवं िदनांक 01.12.2023 को पुनः अनुपिस्थत रहने पर एकप्षीय कायर्वाही की गयी। न्यायालयगत सुनवाई के दौरान िदनांक 23.08.2024 को ्ऺथम प्ष मय अिधव्वा उपिस्थत आये। ि्षतीय प्ष अनुपिस्थत। ्ऺथम प्ष के िव्षान अपने मंत्ि में कहा िक ि्षतीय प्ष ्षारा सावर्जिनक नाली को बन्द कर िदया गया है। बरसात होने पर पानी ्ऺथम प्ष व अन्य ्षामीणों के घर में जाने लगता है, कभी भी िकसी का मकान इत्यािद िगरने से बड़ी ्षित कािरत हो सकती है। पूवर् में गाँव के घरों का पानी आबादी नं0 201 से लगभग 100 वषॏल से पूवर् िदशा में रंगौली के तालाब में बहता है। वतर्मान समय में नाली मौजूद है। िजसे ि्षतीय प्ष ्षारा बन्द कर िदया गया है, पानी के िनकास हेतु सावर्जिनक नाली का खुलवाया जाना िविध संगत है। मैंने प्ऴावली पर उपलब्ध साष्यों एवं अिभलेखों का अवलोकन िकया। ्ऺथम प्ष के िव्षान अिधव्वा के मंत्िों पर िवचार िकया। ि्षतीय प्ष ्षारा सावर्जिनक नाली को बन्द कर िदया गया। सावर्जिनक नाली बन्द होने से बरसात के समय पानी भर जाने से अि्ऺय घटना कािरत हो सकती है। दण्ड ्ऺि्वया संिहता की धारा 136 के अन्तगर्त यिद ऐसा ्िि्व ऐसे कायर् को नही करता है, या हािजर होकर कारण दिशत नहीं करता है तो वह भारतीय दण्ड संिहता 1860 (1860का 45) की धारा 188 में उस िनिम्त िविहत शािस्त का दायी होगा और आदेश अिन्तम कर िदया जायेगा। ि्षतीय प्ष को कारण दिशत करने का पयार्प्त अवसर िदया गया है, िकन्तु ि्षतीय प्ष ने अपना प्ष समुिचत तरीके से रखने में रूिच नहीं ली है। चू ंिक यह ्ऺकरण ि्षतीय प्ष ्षारा सावर्जिनक नाली में न्यूशेन्स करके आम जनमानस के सुखािधकार के अिधकार का हनन िकया गया है। सशर्त आदेश िदनांक 05.03.2016 को अिन्तम िकया जाना न्यायोिचत है। आदेश उपरो्व िववेचना के आधार पर थानाध्य्ष सांगीपुर की चालानी िरपोटर् िदनांक 17.02.2016 के साथ संलग्न नजरी नक्शा में ्ऺदिशत A. B. С. D. को नािलयों के रूप में दशार्या गया है तथा नािलयों का िनकास ्षार बन्द पाया गया है। थानाध्य्ष सांगीपुर को आदेिशत िकया जाता है िक नािलयों का िनकास्षार खुलवाकर जल िनकासी की समुिचत ्िवस्था सुिनि्ात करें तथा अपनी अनुपालन आख्या 14 िदवस के अन्दर न्यायालय में ्ऺस्तुत करें। बाद आवश्यक कायर्वाही दािखल दफ्तर हो।"
4. Being aggrieved by the order dated 31.08.2024, the petitioner preferred a Criminal Revision No. 227 of 2024 before the learned Sessions Judge, Pratapgarh (hereinafter referred to as 'Revisional Court'). The Revisional Court dismissed the same vide impugned order dated 19.11.2024 thereby affirming the order of the Magistrate dated 31.08.2024. The relevant portion of the order dated 19.11.2024 reads as under:- "अवर न्यायालय के सम्ष िनगरानीकतार् / ि्षतीय प्ष िदनांक २८.१०.२०१६ को उपिस्थत होकर आपि्त ्ऺस्तुत िकया गया है और वह स्वयं अनुपिस्थत हुए और अपना साष्य अवर न्यायालय के सम्ष ्ऺस्तुत नहीं िकया। अतः ि्षतीय प्ष/िनगरानीकतार् के िवरु्ध अवर न्यायालय के ्षारा िदनांक १९.०५.२०२३ को अनुपिस्थत रहने के कारण साष्य का अवसर समाप्त कर िदया एवं पुन अनुपिस्थत रहने के कारण िदनांक ०१.१२.२०२३ को एकप्षीय कायर्वाही की। उसके उपरांत अवर न्यायालय के सम्ष सुनवाई के दौरान िदनाक २३.०८.२०२४ को ्ऺथम 3 CRLP No. 151 of 2025 प्ष/भगवत ्ऺसाद मय अिधव्वा उपिस्थत थे। जबिक ि्षतीय प्ष अचल िसह आिद अनुपिस्थत रहें। ि्षतीय प्ष / िनगरानीकतार् को कारण दिशत करने का अवर न्यायालय के ्षारा पयार्प्त अवसर िदया गया है, परन्तु ि्षतीय प्ष / िनगरानीकतार् के ्षारा अपना प्ष समुिचत तरीके से अवर न्यायालय के सम्ष रखने में रूिच नहीं ली। अन्ततः अवर न्यायालय के ्षारा सावर्जिनक नाली के संबंध में आम जनमानस के सुखािधकार के दृि्िगत ्ऺश््शगत आदेश िदनांक ३१.०८.२०२४ पािरत िकया गया।
१०. िनगरानीकतार्/ि्षतीय प्ष अवर न्यायालय के सम्ष अपना प्ष ्ऺस्तुत करने का पयार्प्त अवसर मौजूद था, उनके ्षारा अवर न्यायालय के सम्ष अपनी उपिस्थित िदनांक २८.१०.२०१६ को दजर् करायी गयी, परन्तु अनुिस्थत रहने के कारण िदनांक १९.०५.२०२३ िनगरानीकतार् / ि्षतीय प्ष का साष्य समाप्त िकया गया। पुनः िदनांक १.१२.२०३ को िनगरानीकतार्/ि्षतीय प्ष के अनुपिस्थित के कारण एकप्षीय कायार्वाही की गयी है। पुनः िदनांक २३.०८.२०२४ को सुनवाई के दौरान ्ऺथम प्ष भगवत ्ऺसाद आिद न्यायालय के सम्ष उपिस्थत आये और ि्षतीय प्ष अचल िसह आिद / िनगरानीकतार् पुनः अनुपिस्थत। न्यायालय के ्षारा वादकारी को सुनवाई का अवसर भी ्ऺदान िकया जा सकता है। उसको न्यायालय के सम्ष अपने तथ्य एवं साष्य ्ऺस्तुत करने हेतु बाध्य नहीं िकया जा सकता है। िकसी भी न्याियक ्ऺि्वया को अिवलम्ब समय के िलए लंिबत नहीं रखा जा सकता। िवशेषकर उन पिरिस्थितयों में जहाँ जनमानस के सुखािधकार का िवषयक िबन्दु िनिहत हो। अवर न्यायालय के सम्ष वाद ४२/२०१६ अन्तगर्त धारा १३३ सीआरपीसी लंिबत था। िजसमें ि्षतीय प्ष / िनगरानीकतार् िदनांक २८.१०.२०१६ को उपिस्थत आये हैं और उसके उपरांत अनुपिस्थत हुए। अतः अवर न्यायालय के ्षारा ्ऺश्नगत आदेश िदनांिकत ३१.०८.२०२४ पािरत िकया गया। अवर न्यायालय के ्षारा पािरत आदेश िदनांिकत ३१.०८.२०२४ िविध सम्मत आदेश है एवं पु्ि िकये जाने योग्य है, इसमें िकसी भी ्ऺकार की ताित्वकता अिनयिमतता एवं ्षे्ऴािधकार से परे पािरत िकया जाना पिरलि्षत नहीं होता है। अतः समस्त विणत पिर्ऺेष्य में दािण्डक िनगरानी िनरस्त िकये जाने के योग्य है। दािण्डक िनगरानी िनरस्त की जाती है। आदेश अवर न्यायालय उप िजला अिधकारी, तहसील लालगंज, ्ऺतापगढ़ के ्षारा वाद संख्या-४२/२०१६ कम्प्युटरीकृ त वाद संख्या टी२०१६०२५७०२०३६५० भगवत ्ऺसाद आिद बनाम अचल िसह अन्तगर्त धारा १३३ दण्ड ्ऺि्वया संिहता, में पािरत ्ऺश्नगत आदेश िदनांिकत ३१.०८.२०२४ को पु्ि िकया जाता है। इस आदेश की सत्य ्ऺित सिहत, मूल प्ऴावली सम्बिन्धत अवर न्यायालय को, अिवलम्ब ्ऺेिषत हो। दािण्डक िनगरानी की प्ऴावली बाद आवश्यक कायर्वाही दािखल दफ्तर हो। कायार्लय आवश्यक कायर्वाही िनयमानुसार िकया जाना सुिनि्ात करें।"
5. For arriving at the conclusion and causing interference in the impugned order(s), this Court took note of following facts:- (i) A Regular Suit No. 273 of 2015 (Samar Bahadur & Others vs. Bhagwat & Others) was instituted before the Court of Civil Judge, S.D., Court No.15, Pratapgarh. (ii) From the averments made in the plaint of aforesaid suit, it appears that the suit was filed being aggrieved by the alleged illegal constructions raised over Gata No. 201, which includes the construction of a drain. In this regard, it would be appropriate to refer to paragraph 9 of the plaint, which reads as under:- "यह की, इस ्ऺकार वाद का कारण ्ऺितवादीगण ्षारा जबरन तािलका अ की भूिम में अवैध िनमार्ण करने, वृ्ष काटने व तथा तािलका ब की भूिम में जबरन नाली िनकालने की धमकी देने से तथा िनमार्ण िगराकर कब्जा देने से इंकार करने से शुरू नवंबर सन 2014 व 31-7-2015 से, स्थान ्षाम हुसैनपुर, परगना सदर, तहसील लालगंज, िजला ्ऺतापगढ़ में उत्पन्न होकर इस न्यायालय की अिधकार सीमानतगर्त जारी है।" (iii) In continuation of the above, it would also be relevant to refer to the 4 CRLP No. 151 of 2025 prayer clause of the plaint, which, upon reproduction, reads as under:- "अ- वादीगण के प्ष में ्ऺितवादीगण के िवरू्ध तािलका अ की भूिम के संबंध में िड्षी आ्ञापक ्िादेश एवं दखल की पािरत करते हुए िववािदत भूिम में कायम िनमार्णों को ध्वस्त करा कर उसके नीचे की भूिम पर दखल वाकई वादीगण को ्ऺितवादीगण से िदलाया जाय और यिद वे ऐसा न करे तो िड्षी की पूित ्ऺितवादीगण के खचरॏ पर जिरये अदालत करा दी जाय। ब- वादीगण के प्ष में ्ऺितवादीगण के िवरु्ध स्थाई िनषेधा्ञा की िड्षी देते हुए उन्हें सदा सवर्दा के िलए मना कर िदया जाय िक वे िववािदत भूिम विणत तािलका अ में अ्षेतर कोई िनमार्ण न करें, वृ्ष न काटें और तािलका ब की भूिम में कोई नई नाली न बनावे, तािलका ब की भूिम की यथािस्थित कायम रखें।" (iv) From the aforesaid, it is evident that, if the allegations made in the plaint are taken at their face value, the drain in question was constructed way back in the year 2015 itself. (v) At this stage, on being asked, learned counsel for the petitioners submitted that no interim protection or injunction was granted in the aforesaid suit, which is still pending consideration. (vi) During the pendency of the aforesaid suit, which was filed in the month of August 2015, the petitioner closed the drain. Consequently, a Public Interest Litigation (PIL) bearing Writ Petition No. 9140 (M/B) of 2015 (PIL) (Bhagwat Prasad Yadav vs. State of U.P. and Others) was filed before this Court and this Court disposed of the same vide its order dated 01.10.2015, which reads as under:- "The grievance of the petitioner is that respondents 6 and 7 have closed the Naali affecting the proper flow of water, situated at Village Husainpur (Meharban Singh Ka Purwa), Police Station Sangipur, Tehsil Lalganj, District Pratapgarh, as a result of which a nuisance is being caused. An efficacious remedy is available under Section 133 of the Code of Criminal Procedure, 1973, which we leave open to the petitioner to pursue. We clarify that we have not made any finding on the merits of the allegations and the competent authority shall take an expeditious decision upon being moved, after furnishing a reasonable opportunity of being heard to all the concerned parties. The petition is, accordingly, disposed of. There shall be no order as to costs." (vii) In terms of the order of the Division Bench dated 01.10.2015, an application under Section 133 CrPC was filed by ten persons. Thereafter, the Magistrate sought a report from the concerned officers/officials and in compliance thereof a report dated 17.02.2016 (Annexure No. 8) was submitted, which indicates that the drain in question was in existence and was closed and the report further indicates that in exercise of powers under Section 133 CrPC, the drain should be opened. The relevant portion of the said report dated 17.02.2016 reads as under:- "इस कथन के संबंध में कहना है िक आवेदकगण को जल िनकासी हेतु नाली की परम आवश्यकता है अतः अनुरोध है िक धारा 133 Crpc की कायर्वाही कर जल िनकासी हेतु नाली बनवाया जाना िनतान्त आवश्यकता है। उभयप्षों के िवरु्ध 107/116 Crpc की कायर्वाही हेतु िरपोटर् अलग से ्ऺेिषत है। आख्या सादर अवलोकनाथर् सेवा में ्ऺेिषत है।" 5 CRLP No. 151 of 2025 (viii) After submission of the report aforesaid, notices were issued to the petitioners. The petitioners thereafter filed an objection dated 28.10.2016 but subsequently the Magistrate concerned. appear before Consequently, the Magistrate, based upon the said report and affidavits of evidence on record passed the order affirming the direction for reopening of the drain. failed
6. Upon due consideration of aforesaid, this Court finds that no interference is required in the impugned order(s) dated 31.08.2024 and 19.11.2024 passed by the Magistrate and Revisional Court, respectively.
7. Accordingly, the petition is dismissed. No order as to costs. October 27, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Lucknow Bench
1. Heard learned counsel for the petitioners-Sri Ashok Kumar Muarya and Sri Alok Kumar Tripathi, learned counsel for the opposite party No. 3 and Sri Ajay Kumar, learned counsel for the State-respondents.
2. Present petition has been filed for the following main relief(s):- "(i) quash / set aside the impugned judgment and order dated 19.11.2024 passed by Session Judge, Pratapgarh in Criminal Revision No.227/2024 Samar Bahadur Singh & others Vs State of U.P. & others in proceedings under section 438/440 Bhartiya Nagrik Suraksha Sanhita 2023, contained as Annexure No.1 to this writ petition. (ii) quash / set aside the impugned order dated 31.08.2024 passed by Sub-Divisional Officer Lalganj, Pratapgarh in Criminal case no.42/2016 Computerized Case No.T- 201602570203650 Bhagwat Prasad & others Vs Achal Singh & others, in proceedings under section 133 Cr. P.C.. contained as Annexure No.2 to this writ petition."
3. Vide impugned order dated 31.08.2024 passed in exercise of powers under Section 133 CrPC in a case registered as Case No. 42 of 2016 the Sub- Divisional Magistrate, Lalganj, Pratapgarh (hereinafter referred to as "Magistrate"), directed the SHO, Police Station Sangipur, to get the drain opened within 14 days. The relevant portion of the order dated 31.08.2024 reads as under:- "प्ऴावली पेश हुई। ्ऺश्नगत वाद भगवत ्ऺसाद आिद सुत महादेव यादव िनवासी ्षाम मेहरवान िसह का पुरवा, हुसैनपुर थाना सांगीपुर जनपद ्ऺतापगढ़ के वाद प्ऴ िदनांक 22.01.2016 पर संिस्थत िकया गया। ्ऺथम प्ष ने अपने वाद प्ऴ में कथन िकया है िक आवेदकगण उपरो्व ्षाम के िनवासी है तथा पूवर्जों के समय से आबाद चले आ रहे है, तथा आबादी नं० 200 है। आवेदकगणों के घर व दरवाजे तथा बरसात आिद का पानी सैकड़ों वषॏल से गाँव को पूवर् िदशा में भूिम से होकर रंगौली के तालाब में बहता चला आ रहा है। ्षामवािसयों को ्षाम असांव जाने के िलए बहुत पुराना कच्चा चौड़ा रास्ता पूवर्जों के समय से था, िजससे लोग आते जाते थे। उसी रास्ते पर सरकार ्षारा पक्की सड़क का िनमार्ण कराया गया तथा पानी िनकास हेतु सड़क के नीचे पक्की सीमेंट की पाईप भी लगायी गयी। िजससे दरवाजे व बरसात का पानी नाली से होते हुए तालाब में चला जाता है। ि्षतीय प्ष ्षारा पानी के बहाव में अवरोध उत्पन्न करने की धमकी दी गयी तो ्ऺथम प्ष ने ्ऺशािनक अिधकािरयों को कई िशकायती ्ऺाथर्ना प्ऴ िदया। परन्तु कोई कायर्वाही नहीं की गयी तो ्ऺथम प्ष के भगवत ्ऺसाद सुत महादेव यादव िनवासी ्षाम उपरो्व ्षारा उ्व 2 CRLP No. 151 of 2025 न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ में एक जनिहत यािचका ्ऺस्तुत िकया। मा० उच्च न्यायालय ने यह िनदरॏिशत िदया िक धारा 133 जा०फौ० के अन्तगर्त कायर्वाही करके नाली में उत्पन्न हुए अवरोध हटवाये। यिद नाली न खुलवायी गयी तो और जल िनकासी की ्िवस्था न करायी गयी तो आवेदकगणों के घर में भर जायेगा। मकान िगर जायेगें, जान, माल की ्षित होगी। नाली बन्द करने से मना करने पर ि्षतीय प्ष आमादा फौजदारी होते है। मा० उच्च न्यायालय के िनदरॏशों के अनुसार कायर्वाही करते हुए अिवलम्ब नाली खुलवाने की कृ पा की जाये। थानाध्य्ष सांगीपुर से आख्या आहूत की गयी। थानाध्य्ष सांगीपुर ्षारा िदनांक 17.02.2016 मय नजरी नक्शा न्यायालय में ्ऺस्तुत िकया गया। थानाध्य्ष सांगीपुर ने वाद प्ऴ के ्वम में अपनी आख्या ्ऺस्तुत िकया गया। साथ में मा० उच्च न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ में योिजत िरट यािचका सं० 9140/2015 ्ऺस्तुत की गयी। िनयमानुसर सशतर् आदेश िदनांक 05.03.2016 जारी हुआ, जो वाद तामीला संलग्न प्ऴावली है। ि्षतीय प्ष सं० 2 ता 5 िदनांक 28.10.2016 को न्यायालय उपिस्थत होकर आपि्त ्ऺस्तुत िकया। ि्षतीय प्ष ्षारा िदनांक 05.10.2018 को न्यायालय ्शीमान िसिवल जज (सी०िड०) ्ऺतापगढ़ के योिजत वाद समर बहादुर िसह आिद बनाम भगवत आिद की ्ऺमािणत छाया्ऺित अिभलेखीय साष्य के रूप में ्ऺस्तुत की गयी। साष्य शपथ प्ऴ के रूप में भवगत ्ऺसाद सुत महादेव यादव िनवासी ्षाम उपरो्व ्षारा िदनांक 17.03.2023, रमाशंकर यादव सुत रामशरण यादव िनवासी ्षाम उपरो्व ्षारा िदनांक 24.03.2023 एवं रमाशंकर यादव सुत अयोध्या ्ऺसाद यादव, रामबरन सुत ि्ऴभुवननाथ िव्षकमार्, िशवसागर सुत रामअंजोर यादव तथा हिरलाल सुत सुखई लाल सरोज िनवासीगण उपरो्व ्षारा िदनांक 31.03.2023 को ्ऺस्तुत िकया गया। ि्षतीय प्ष के िवरू्ध िदनांक 19.05.2023 को अनुपिस्थत रहने पर साष्य का अवसर समाप्त कर िदया गया एवं िदनांक 01.12.2023 को पुनः अनुपिस्थत रहने पर एकप्षीय कायर्वाही की गयी। न्यायालयगत सुनवाई के दौरान िदनांक 23.08.2024 को ्ऺथम प्ष मय अिधव्वा उपिस्थत आये। ि्षतीय प्ष अनुपिस्थत। ्ऺथम प्ष के िव्षान अपने मंत्ि में कहा िक ि्षतीय प्ष ्षारा सावर्जिनक नाली को बन्द कर िदया गया है। बरसात होने पर पानी ्ऺथम प्ष व अन्य ्षामीणों के घर में जाने लगता है, कभी भी िकसी का मकान इत्यािद िगरने से बड़ी ्षित कािरत हो सकती है। पूवर् में गाँव के घरों का पानी आबादी नं0 201 से लगभग 100 वषॏल से पूवर् िदशा में रंगौली के तालाब में बहता है। वतर्मान समय में नाली मौजूद है। िजसे ि्षतीय प्ष ्षारा बन्द कर िदया गया है, पानी के िनकास हेतु सावर्जिनक नाली का खुलवाया जाना िविध संगत है। मैंने प्ऴावली पर उपलब्ध साष्यों एवं अिभलेखों का अवलोकन िकया। ्ऺथम प्ष के िव्षान अिधव्वा के मंत्िों पर िवचार िकया। ि्षतीय प्ष ्षारा सावर्जिनक नाली को बन्द कर िदया गया। सावर्जिनक नाली बन्द होने से बरसात के समय पानी भर जाने से अि्ऺय घटना कािरत हो सकती है। दण्ड ्ऺि्वया संिहता की धारा 136 के अन्तगर्त यिद ऐसा ्िि्व ऐसे कायर् को नही करता है, या हािजर होकर कारण दिशत नहीं करता है तो वह भारतीय दण्ड संिहता 1860 (1860का 45) की धारा 188 में उस िनिम्त िविहत शािस्त का दायी होगा और आदेश अिन्तम कर िदया जायेगा। ि्षतीय प्ष को कारण दिशत करने का पयार्प्त अवसर िदया गया है, िकन्तु ि्षतीय प्ष ने अपना प्ष समुिचत तरीके से रखने में रूिच नहीं ली है। चू ंिक यह ्ऺकरण ि्षतीय प्ष ्षारा सावर्जिनक नाली में न्यूशेन्स करके आम जनमानस के सुखािधकार के अिधकार का हनन िकया गया है। सशर्त आदेश िदनांक 05.03.2016 को अिन्तम िकया जाना न्यायोिचत है। आदेश उपरो्व िववेचना के आधार पर थानाध्य्ष सांगीपुर की चालानी िरपोटर् िदनांक 17.02.2016 के साथ संलग्न नजरी नक्शा में ्ऺदिशत A. B. С. D. को नािलयों के रूप में दशार्या गया है तथा नािलयों का िनकास ्षार बन्द पाया गया है। थानाध्य्ष सांगीपुर को आदेिशत िकया जाता है िक नािलयों का िनकास्षार खुलवाकर जल िनकासी की समुिचत ्िवस्था सुिनि्ात करें तथा अपनी अनुपालन आख्या 14 िदवस के अन्दर न्यायालय में ्ऺस्तुत करें। बाद आवश्यक कायर्वाही दािखल दफ्तर हो।"
4. Being aggrieved by the order dated 31.08.2024, the petitioner preferred a Criminal Revision No. 227 of 2024 before the learned Sessions Judge, Pratapgarh (hereinafter referred to as 'Revisional Court'). The Revisional Court dismissed the same vide impugned order dated 19.11.2024 thereby affirming the order of the Magistrate dated 31.08.2024. The relevant portion of the order dated 19.11.2024 reads as under:- "अवर न्यायालय के सम्ष िनगरानीकतार् / ि्षतीय प्ष िदनांक २८.१०.२०१६ को उपिस्थत होकर आपि्त ्ऺस्तुत िकया गया है और वह स्वयं अनुपिस्थत हुए और अपना साष्य अवर न्यायालय के सम्ष ्ऺस्तुत नहीं िकया। अतः ि्षतीय प्ष/िनगरानीकतार् के िवरु्ध अवर न्यायालय के ्षारा िदनांक १९.०५.२०२३ को अनुपिस्थत रहने के कारण साष्य का अवसर समाप्त कर िदया एवं पुन अनुपिस्थत रहने के कारण िदनांक ०१.१२.२०२३ को एकप्षीय कायर्वाही की। उसके उपरांत अवर न्यायालय के सम्ष सुनवाई के दौरान िदनाक २३.०८.२०२४ को ्ऺथम 3 CRLP No. 151 of 2025 प्ष/भगवत ्ऺसाद मय अिधव्वा उपिस्थत थे। जबिक ि्षतीय प्ष अचल िसह आिद अनुपिस्थत रहें। ि्षतीय प्ष / िनगरानीकतार् को कारण दिशत करने का अवर न्यायालय के ्षारा पयार्प्त अवसर िदया गया है, परन्तु ि्षतीय प्ष / िनगरानीकतार् के ्षारा अपना प्ष समुिचत तरीके से अवर न्यायालय के सम्ष रखने में रूिच नहीं ली। अन्ततः अवर न्यायालय के ्षारा सावर्जिनक नाली के संबंध में आम जनमानस के सुखािधकार के दृि्िगत ्ऺश््शगत आदेश िदनांक ३१.०८.२०२४ पािरत िकया गया।
१०. िनगरानीकतार्/ि्षतीय प्ष अवर न्यायालय के सम्ष अपना प्ष ्ऺस्तुत करने का पयार्प्त अवसर मौजूद था, उनके ्षारा अवर न्यायालय के सम्ष अपनी उपिस्थित िदनांक २८.१०.२०१६ को दजर् करायी गयी, परन्तु अनुिस्थत रहने के कारण िदनांक १९.०५.२०२३ िनगरानीकतार् / ि्षतीय प्ष का साष्य समाप्त िकया गया। पुनः िदनांक १.१२.२०३ को िनगरानीकतार्/ि्षतीय प्ष के अनुपिस्थित के कारण एकप्षीय कायार्वाही की गयी है। पुनः िदनांक २३.०८.२०२४ को सुनवाई के दौरान ्ऺथम प्ष भगवत ्ऺसाद आिद न्यायालय के सम्ष उपिस्थत आये और ि्षतीय प्ष अचल िसह आिद / िनगरानीकतार् पुनः अनुपिस्थत। न्यायालय के ्षारा वादकारी को सुनवाई का अवसर भी ्ऺदान िकया जा सकता है। उसको न्यायालय के सम्ष अपने तथ्य एवं साष्य ्ऺस्तुत करने हेतु बाध्य नहीं िकया जा सकता है। िकसी भी न्याियक ्ऺि्वया को अिवलम्ब समय के िलए लंिबत नहीं रखा जा सकता। िवशेषकर उन पिरिस्थितयों में जहाँ जनमानस के सुखािधकार का िवषयक िबन्दु िनिहत हो। अवर न्यायालय के सम्ष वाद ४२/२०१६ अन्तगर्त धारा १३३ सीआरपीसी लंिबत था। िजसमें ि्षतीय प्ष / िनगरानीकतार् िदनांक २८.१०.२०१६ को उपिस्थत आये हैं और उसके उपरांत अनुपिस्थत हुए। अतः अवर न्यायालय के ्षारा ्ऺश्नगत आदेश िदनांिकत ३१.०८.२०२४ पािरत िकया गया। अवर न्यायालय के ्षारा पािरत आदेश िदनांिकत ३१.०८.२०२४ िविध सम्मत आदेश है एवं पु्ि िकये जाने योग्य है, इसमें िकसी भी ्ऺकार की ताित्वकता अिनयिमतता एवं ्षे्ऴािधकार से परे पािरत िकया जाना पिरलि्षत नहीं होता है। अतः समस्त विणत पिर्ऺेष्य में दािण्डक िनगरानी िनरस्त िकये जाने के योग्य है। दािण्डक िनगरानी िनरस्त की जाती है। आदेश अवर न्यायालय उप िजला अिधकारी, तहसील लालगंज, ्ऺतापगढ़ के ्षारा वाद संख्या-४२/२०१६ कम्प्युटरीकृ त वाद संख्या टी२०१६०२५७०२०३६५० भगवत ्ऺसाद आिद बनाम अचल िसह अन्तगर्त धारा १३३ दण्ड ्ऺि्वया संिहता, में पािरत ्ऺश्नगत आदेश िदनांिकत ३१.०८.२०२४ को पु्ि िकया जाता है। इस आदेश की सत्य ्ऺित सिहत, मूल प्ऴावली सम्बिन्धत अवर न्यायालय को, अिवलम्ब ्ऺेिषत हो। दािण्डक िनगरानी की प्ऴावली बाद आवश्यक कायर्वाही दािखल दफ्तर हो। कायार्लय आवश्यक कायर्वाही िनयमानुसार िकया जाना सुिनि्ात करें।"
5. For arriving at the conclusion and causing interference in the impugned order(s), this Court took note of following facts:- (i) A Regular Suit No. 273 of 2015 (Samar Bahadur & Others vs. Bhagwat & Others) was instituted before the Court of Civil Judge, S.D., Court No.15, Pratapgarh. (ii) From the averments made in the plaint of aforesaid suit, it appears that the suit was filed being aggrieved by the alleged illegal constructions raised over Gata No. 201, which includes the construction of a drain. In this regard, it would be appropriate to refer to paragraph 9 of the plaint, which reads as under:- "यह की, इस ्ऺकार वाद का कारण ्ऺितवादीगण ्षारा जबरन तािलका अ की भूिम में अवैध िनमार्ण करने, वृ्ष काटने व तथा तािलका ब की भूिम में जबरन नाली िनकालने की धमकी देने से तथा िनमार्ण िगराकर कब्जा देने से इंकार करने से शुरू नवंबर सन 2014 व 31-7-2015 से, स्थान ्षाम हुसैनपुर, परगना सदर, तहसील लालगंज, िजला ्ऺतापगढ़ में उत्पन्न होकर इस न्यायालय की अिधकार सीमानतगर्त जारी है।" (iii) In continuation of the above, it would also be relevant to refer to the 4 CRLP No. 151 of 2025 prayer clause of the plaint, which, upon reproduction, reads as under:- "अ- वादीगण के प्ष में ्ऺितवादीगण के िवरू्ध तािलका अ की भूिम के संबंध में िड्षी आ्ञापक ्िादेश एवं दखल की पािरत करते हुए िववािदत भूिम में कायम िनमार्णों को ध्वस्त करा कर उसके नीचे की भूिम पर दखल वाकई वादीगण को ्ऺितवादीगण से िदलाया जाय और यिद वे ऐसा न करे तो िड्षी की पूित ्ऺितवादीगण के खचरॏ पर जिरये अदालत करा दी जाय। ब- वादीगण के प्ष में ्ऺितवादीगण के िवरु्ध स्थाई िनषेधा्ञा की िड्षी देते हुए उन्हें सदा सवर्दा के िलए मना कर िदया जाय िक वे िववािदत भूिम विणत तािलका अ में अ्षेतर कोई िनमार्ण न करें, वृ्ष न काटें और तािलका ब की भूिम में कोई नई नाली न बनावे, तािलका ब की भूिम की यथािस्थित कायम रखें।" (iv) From the aforesaid, it is evident that, if the allegations made in the plaint are taken at their face value, the drain in question was constructed way back in the year 2015 itself. (v) At this stage, on being asked, learned counsel for the petitioners submitted that no interim protection or injunction was granted in the aforesaid suit, which is still pending consideration. (vi) During the pendency of the aforesaid suit, which was filed in the month of August 2015, the petitioner closed the drain. Consequently, a Public Interest Litigation (PIL) bearing Writ Petition No. 9140 (M/B) of 2015 (PIL) (Bhagwat Prasad Yadav vs. State of U.P. and Others) was filed before this Court and this Court disposed of the same vide its order dated 01.10.2015, which reads as under:- "The grievance of the petitioner is that respondents 6 and 7 have closed the Naali affecting the proper flow of water, situated at Village Husainpur (Meharban Singh Ka Purwa), Police Station Sangipur, Tehsil Lalganj, District Pratapgarh, as a result of which a nuisance is being caused. An efficacious remedy is available under Section 133 of the Code of Criminal Procedure, 1973, which we leave open to the petitioner to pursue. We clarify that we have not made any finding on the merits of the allegations and the competent authority shall take an expeditious decision upon being moved, after furnishing a reasonable opportunity of being heard to all the concerned parties. The petition is, accordingly, disposed of. There shall be no order as to costs." (vii) In terms of the order of the Division Bench dated 01.10.2015, an application under Section 133 CrPC was filed by ten persons. Thereafter, the Magistrate sought a report from the concerned officers/officials and in compliance thereof a report dated 17.02.2016 (Annexure No. 8) was submitted, which indicates that the drain in question was in existence and was closed and the report further indicates that in exercise of powers under Section 133 CrPC, the drain should be opened. The relevant portion of the said report dated 17.02.2016 reads as under:- "इस कथन के संबंध में कहना है िक आवेदकगण को जल िनकासी हेतु नाली की परम आवश्यकता है अतः अनुरोध है िक धारा 133 Crpc की कायर्वाही कर जल िनकासी हेतु नाली बनवाया जाना िनतान्त आवश्यकता है। उभयप्षों के िवरु्ध 107/116 Crpc की कायर्वाही हेतु िरपोटर् अलग से ्ऺेिषत है। आख्या सादर अवलोकनाथर् सेवा में ्ऺेिषत है।" 5 CRLP No. 151 of 2025 (viii) After submission of the report aforesaid, notices were issued to the petitioners. The petitioners thereafter filed an objection dated 28.10.2016 but subsequently the Magistrate concerned. appear before Consequently, the Magistrate, based upon the said report and affidavits of evidence on record passed the order affirming the direction for reopening of the drain. failed
6. Upon due consideration of aforesaid, this Court finds that no interference is required in the impugned order(s) dated 31.08.2024 and 19.11.2024 passed by the Magistrate and Revisional Court, respectively.
7. Accordingly, the petition is dismissed. No order as to costs. October 27, 2025 Vinay/- (Saurabh Lavania,J.) VINAY KUMAR VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Lucknow Bench