✦ High Court of India · 17 Sep 2025

Vihaan Kumar v. State of Ha

Case Details High Court of India · 17 Sep 2025
Court
High Court of India
Decided
17 Sep 2025
Length
2,106 words

Acts & Sections

Cited in this judgment

FIR and Section applied, place of arrest, date and time of arrest, the name of the officer arresting the accused and name, address and phone number of the person to whom information about arrest has been given. We have perused the arrest memo in the present case. The same contains only the information stated above and not the grounds of arrest. The information about the arrest is completely different from information about the grounds of arrest. Mere information of arrest will not 6 BAIL No. 31959 of 2025 amount to furnishing grounds of arrest.” (घ) पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 26.04.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।

5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं को जमानत पर न छोड़ा जाय।

6. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।

7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके ़। कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे

8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। September 17, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.) PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad

FIR and Section applied, place of arrest, date and time of arrest, the name of the officer arresting the accused and name, address and phone number of the person to whom information about arrest has been given. We have perused the arrest memo in the present case. The same contains only the information stated above and not the grounds of arrest. The information about the arrest is completely different from information about the grounds of arrest. Mere information of arrest will not 6 BAIL No. 31959 of 2025 amount to furnishing grounds of arrest.” (घ) पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 26.04.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।

5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं को जमानत पर न छोड़ा जाय।

6. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।

7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके ़। कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे

8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। September 17, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.) PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad

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