✦ High Court of India

Allahabad High Court

Case Details

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 31557 of 2025 Mushtaque Alam State of U.P. Versus .....Applicant(s) .....Opposite Party(s) Counsel for Applicant(s) : Anand Pratap Singh, Dhananjay Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Pandey Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 118/2022 अन्तगर्त धारा 409, 420, 467, 468, 471 व 120बी भारतीय दण्ड संिहता, थाना कैं ट, िजला वाराणसी में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. अिभयोजन कहानी सं्षेप में यह है िक वतर्मान ्ऺाथिमकी ्शी सतीश चं्श दुबे ्षारा िदनांक 17.03.2022 को दं०्ऺ०सं० की धारा 156(3) के तहत थाना कैं ट, िजला वाराणसी में छह आरोिपयों के िखलाफ दजर् कराई गई थी, जो मुकदमा अपराध संख्या 118/2022 धारा 420, 409 भा०दं०िव० के तहत पंजीकृ त है, िजसमें आरोप लगाया गया है िक िशकायतकतार् ने प्लॉट खरीदने के िलए शाइन िसटी कं पनी में 7,51,000 रुपये का िनवेश िकया था, लेिकन उन्होंने कब्जा नहीं िदया और न ही उनका पैसा वापस िकया। 4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक वतर्मान ्ऺाथिमकी में आवेदक की कोई भूिमका नहीं सौंपी गई है। न ही आवेदक पर धोखाधड़ी करने का कोई आरोप लगाया गया है, बिल्क आवेदक को वतर्मान मामले में के वल इस आधार पर झूठा फं साया गया है िक आवेदक कं पनी के मामलों का ्ऺभारी था। यहाँ यह भी ्ऺस्तुत िकया गया है िक ्ऺाथिमकी में ऐसा कोई आरोप नहीं है िक आवेदक ने अनुबंध की शुरुआत से ही सूचनादाता के साथ बेईमानी और धोखाधड़ी के इरादे से काम िकया/्िवहार िकया। यहाँ यह उल्लेख करना भी ्ऺासंिगक है िक जब अपराध िकया गया और ्ऺाथिमकी दजर् की गई, तब कं पनी का िनदेशक िकसी भी तरह से कं पनी से जुड़ा नहीं था। आवेदक ने िदनांक 01.03.2019 को कं पनी के िनदेशक पद से इस्तीफा दे िदया था, िजसकी सूचना संबंिधत कं पनी रिजस््िार को भी दी गई थी। माननीय 2 BAIL No. 31557 of 2025 सवरॏच्च न्यायालय ने कई िनणर्यों में यह माना है िक मुख्य कं पनी को आरोपी के रूप में शािमल न िकए जाने की िस्थित में, के वल कं पनी के िनदेशकों के िवरु्ध आपरािधक कायर्वाही स्वीकायर् नहीं होगी। यह भी माना गया है िक आवेदक को कं पनी के कृ त्य के िलए तब तक उ्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता जब तक िक एफआईआर/चाजर्शीट में आवेदक के िवरु्ध िविश्ि आरोप न हों या आवेदक कं पनी के िदन-्ऺितिदन के ्ऺशासन का ्ऺभारी न हो। इसिलए, आवेदक को कं पनी के कृ त्य के िलए उ्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता (सुनील भारती िम्तल बनाम सीबीआई)। यह ्ऺस्तुत िकया गया है िक जांच के दौरान, जांच अिधकारी ने आवेदक को के वल इस आधार पर आरोिपत िकया है िक आवेदक का नाम पूवर् अितिर्व िनदेशक के मास्टर डेटा में िदनांक 23.03.2016 से 01.03.2019 तक दशार्या गया है, जबिक मुख्य ्ऺबंध िनदेशक रािशद नसीम ने िकसी को बिल का बकरा बनाने के उ्देश्य से आवेदक पर अनुिचत ्ऺभाव और दबाव डाला और आवेदक को कं पनी समूह में अितिर्व िनदेशक बनाने के गुप्त उ्देश्य से कु छ कागजात पर हस्ता्षर करवाए। आवेदक िदनांक 23.03.2016 से 01.03.2019 तक अितिर्व िनदेशक था, तब कं पनी के िदन-्ऺितिदन के कायॏल में उसकी कोई भूिमका या िजम्मेदारी नहीं थी, क्योंिक कं पनी का पंजीकृ त कायार्लय लखनऊ में िस्थत था और आवेदक अपने पिरवार के साथ सीवान में रह रहा था। आवेदक ने िदनांक 01.03.2019 को िनदेशक मंडल से इस्तीफा दे िदया है, िजसकी सूचना कं पनी रिजस््िार को भी दी गई थी और एमसीए साइट पर फॉमर् डीआईआर-12 अपलोड िकया गया था। आवेदक के इस्तीफे पर कं पनी के िनदेशक मंडल ने िदनांक 01.03.2019 को एक ्ऺस्ताव पािरत िकया और आवेदक का इस्तीफा स्वीकार कर िलया। आवेदक न तो कं पनी के िकसी बैंक खाते का हस्ता्षरकतार् था और न ही कं पनी की ओर से िकसी समझौते पर हस्ता्षर करने या लेन- देन करने के िलए अिधकृ त था। आवेदक कं पनी का शेयरधारक भी नहीं था और न ही उसे िनदेशक के रूप में कोई वेतन/पािर्शिमक ्ऺाप्त हुआ है। यह भी ्ऺस्तुत िकया जाता है िक ्ऺलोभन, वादा और बेईमान इरादे जैसे तत्व, जो धोखाधड़ी के अपराध के िलए अिनवायर् हैं, वतर्मान मामले में पूरी तरह से अनुपिस्थत हैं। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 13.10.2021 से कारागार में िनरु्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के िव्षान अिधव्वा के तकॏल का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों 3 BAIL No. 31557 of 2025 एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं उसी धनरािश के दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। 1. 2. 3. 4. 5. आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा ़। करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे 8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। September 16, 2025 CP.sahani (Dr. Gautam Chowdhary,J.)

Legal Reasoning

Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

This is the original judgment text as indexed from the source corpus. Always verify against the official court record before relying on it in a filing — you can do so on eCourts or the Supreme Court of India website. ← Search more judgments