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Allahabad High Court

Case Details

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7468 of 2025 Anguri Devi And 3 Others State of U.P. Versus .....Applicant(s) .....Opposite Party(s) Counsel for Applicant(s) Counsel for Opposite Party(s) : Gyan Singh, Sukhvir Singh : G.A. Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदकगण अंगूरी देवी (सास), राम शरण िसह ( ससुर), पुष्पें्श िसह (जेठ) एवं संजीव (देवर) की ओर से मु०अ०सं० 76/2013 से उ्य ूत स्ऴ वाद सं० 586/2024, अन्तगर्त धारा 498-ए, 304-बी. भा.दं.सं. व धारा 3/4 डी.पी. एक्ट, थाना जसरथपुर, िजला एटा में अि्षम जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्शी राजें्श िसह को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. सं्षेप में अिभयोजन कथानक इस ्ऺकार है िक वादी ने अपनी पु्ऴी का िववाह िदनांक 30.04.2012 को रंजीत यादव के साथ िकया था, िजसमें उसने दस लाख रूपया नकद व दहेज का सारा सामान िदया था। शादी के तुरन्त बाद से ही उसके ससुरालीजन पित रंजीत यादव, ससुर रामसरन िसह, सास अंगूरी देवी, जेठ पुष्पेन््श िसह, जेठानी अनीता, देवर संजीत व चिचया ससुर कु ं वरपाल िसह अितिर्व दहेज में बुलेरो गाड़ी की मांग को लेकर उसकी पु्ऴी को शारीिरक व मानिसक रूप से ्ऺतािडत करते थे और जान से मारने की धमकी देते थे और कहते थे अगर गाडी नहीं दी तो जान से मार देंगे। यह बात उसकी पु्ऴी ने उसे व उसकी पत्नी को बतायी, तो ससुरालीजन को समझाया, िकन्तु वे अपनी बात पर अड़े रहे। तब वादी ने मई के महीने में अपना प्लाट बेचकर तीन लाख रूपये जेठ पुष्पेन््श को दे िदये, िजस पर भी सभी अिभयु्वगण संतु्ि नहीं हुए और कहा िक गाडी सात लाख की आती है, इतने रूपये में क्या होगा, िजस पर वादी ने अपनी गरीबी का वास्ता िदया, िकन्तु िवप्षीगण िफर भी नहीं माने और इन सभी ने कहा िक अगर बीस िदनों में रूपयों की ्िवस्था नहीं होती है तो उसकी पु्ऴी जीिवत नहीं रहेगी। िदनांक 12.06.2013 की शाम वादी की पु्ऴी से फोन पर बातचीत हुयी तो उसने कहा िक पापा उसके ससुराल वाले पित, सास, ससुर, जेठ, जेठानी, देवर एव चिचया ससुर ने कहा िक अपने िपताजी से शेष चार लाख रूपये मंगवा लो नहीं तो उसे जान से मार देंगे, िजस पर वादी ने अगले िदन अपनी पु्ऴी की ससुराल आने को कहा, परन्तु दहेज लोिभयों ने उसी 12/13 जून 2013 की रात वादी की पु्ऴी की िबजली का शाटर् देकर हत्या कर दी। इस बात की जानकारी फोन ्षारा गाँव के िकसी ्िि्व ने दी। उसी 2 NABAIL No. 7468 of 2025 समय वादी, उसकी पु्ऴी पत्नी के चाचा ई्षर दयाल व जयन्त आिद लोग उसकी पु्ऴी की ससुराल गये, तो पु्ऴी सीमा का शव उसके ससुराल के घर पर पड़ा िमला। 4.(क) आवेदक के िव्षान अिधव्वा के अनुसार ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक िदनांक 13-06-2013 की मध्य राि्ऴ 12:00 बजे घिटत हुई, उस िदन मौसम के कारण िबजली लगभग 12:00 बजे आयी। राि्ऴ में मृतका और उसका पित आँगन में सो रहे थे, जैसे ही ्ऺकाश हुआ, मृतका सोने के िलए अपने कमरे में गई और िबजली के कू लर को छू िलया, जो पहले से ही सीधे जुड़ा हुआ था, ्िांसफॉमर्र में खराबी के कारण 440 वोल्टेज के स्थान पर हाई वोल्टेज करंट आ गया, िबजली उच्च वोल्टेज (11,000) आ गयी, िजससे सभी िबजली के सामान जल गए और तार भी जलने लगे तथा 11,000 हाई वोल्टेज से मृतका की मौके पर ही मृत्यु हो गई। (ख) आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ्षारा यह तकर् भी ्ऺस्तुत िकया गया िक ्ऺश्नगत घटना की सूचना ्ऺाप्त होने पर संबंिधत थाना, तहसीलदार व ्षे्ऴािधकारी तुरन्त घटनास्थल पर पहुंचे तथा उच्च वोल्टेज (11,000) िव्युत करंट के कारण हुई समस्त ्षित को देखा। पुिलस ्षारा मृतक के पिरवार के सदस्य और उनके िरश्तेदार की मौजूदगी में पंचायतनामा व जाँच िरपोटर् और स्थल योजना की कायर्वाही शुरू की गई। जांच िरपोटर् पूरी होने के बाद, शव को पोस्टमाटर्म के िलए िदनांक 13-06-2013 को लगभग समय 05:10 अपरा्ह पर भेजा गया। डॉक्टर ्षारा पोस्टमाटर्म िरपोटर् तैयार की गई, िजसमें उन्होंने कहा िक मृतका के मृत्यु का कारण उं गली में करंट लगना है। िकतु अिभयोजन प्ष ्षारा दुराशय के कारण आवेदकगण के पूरे पिरवार के िवरू्ध पंजीकृ त करा िदया गया, िजसके उपरांत ्षे्ऴािधकारी ्षारा जांच शुरू की गई और सूचनाकतार् तथा स्वतं्ऴ गवाहों के बयान दजर् िकए गए तथा पोस्टमाटर्म िरपोटर् के अवलोकनोपरान्त वे इस िनष्कषर् पर पहुंचे िक मृतका की मृत्यु उच्च वोल्टेज करंट (11,000) लगने के कारण हुआ है। उपयु र््व तथ्यों के आधार पर उनके ्षारा संबंिधत न्यायालय के सम्ष अंितम िरपोटर् दािखल की गयी, िजसमें सूचनाकतार् के िवरु्ध धारा 182 भा.द.सं. के तहत ्ऺाथर्नाप्ऴ की िसफािरश की गई तथा अंितम िरपोटर् पर सूचनाकतार् ने संबंिधत न्यायालय में िवरोध यािचका (्ऺोटेस्ट िपटीशन) दायर की, इस िवरोध यािचका पर संबंिधत न्यायालय ने िदनांक 01-10-2015 को आगे की जांच के िनदरॏश िदए। उस आदेश के अनुसरण में आगे की जाँच शुरू की गई और सूचनाकतार् और सभी ्षामीणों का बयान ्षे्ऴािधकारी ्षारा पुनः दजर् िकया गया, िजसमें उन्होंने पुनः पाया िक आवेदक के िवरु्ध कोई इस अपराध में कोई साष्य नहीं पाया गया, क्योंिक उसकी मृत्यु उच्च वोल्टेज करंट (11000) के कारण हुई थी और उन्होंने िदनांक 20-11-2015 को दूसरी अंितम िरपोटर् न्यायालय में दािखल की गयी, िकतु दूसरी अंितम िरपोटर् के िवरु्ध सूचनाकतार् ्षारा संबंिधत न्यायालय में िवरोध यािचका (्ऺोटेस्ट िपटीशन) ्ऺस्तुत िकया िकया, िजस पर संबंिधत मिजस््िेट ने अंितम िरपोटर् को अस्वीकार कर िदया और इसे िदनांक 28-05-2016 को िशकायती मामला माना तथा इसी दौरान, सी.बी.सी.आई.डी. मामले में िदनांक 16-06-2018 को उस आवेदन के अनुसरण में शािमल हुई जो सूचनाकतार् ने मानवािधकार आयोग के सम्ष ्ऺस्तुत िकया था। उसके प्ाात, सी. बी.सी.आई.डी. ने भी पूणर् अिधकार के साथ जांच शुरू की तथा सभी अिभलेिखत साष्यों को स्थानांतिरत िकया और पाया िक उस दुभार्ग्यपूणर् रात को उ्व दुघर्टना 11,000 वोल्ट की उच्च वोल्टेज करंट के कारण हुई थी। अंितम िरपोटर् िदनांिकत 06-05-2018 को ्ऺस्तुत की गई िजसमें सूचनाकतार् के िवरु्ध धारा 182 आईपीसी के अंतगर्त अनुशंसा आवेदन िकया गया, तथा माननीय न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 04-04- 3 NABAIL No. 7468 of 2025 2024 के ्षारा उ्व िनदरॏश, "यिद आवेदक अपने अिधव्वा के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर िडस्चाजर् का आवेदन ्ऺस्तुत करते हैं, तो उसका िनस्तारण िवचारण न्यायालय ्षारा कानून के अनुसार िनणर्त एवं स्प्ि आदेश ्षारा तीन सप्ताह के भीतर कर िदया जाए। िडस्चाजर् आवेदन के िनस्तारण तक आवेदकों के िवरु्ध कोई कठोर कारर्वाई नहीं की जाएगी।" के साथ आदेश पािरत िकया और मामले का िनस्तारण कर िदया। आदेश िदनांक 04-04-2024 के अनुसरण में, आवेदकगण ने अपना िडस्चाजर् ्ऺाथर्नाप्ऴ मुख्य न्याियक मिजस््िेट, एटा के सम्ष ्ऺस्तुत िकया, िजसके तहत संबंिधत न्यायालय ने आवेदकों ्षारा दायर िडस्चाजर् आवेदन िदनांक 18.05.2024 को अस्वीकार कर िदया। िजससे ्षुब्ध होकर आवेदकगण ने उ्व आदेश िदनांक 18-05-2024 के िवरु्ध एक बार िफर उच्च न्यायालय के सम्ष ्ऺकीणर् ्ऺाथर्नाप्ऴ संख्या 18186/2024 यािचका दायर की, िजसे माननीय न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 02-09-2024 ्षारा िनस्तािरत िकया, िजसमें आवेदकगण को आदेिशत िकया गया िक "वे आज से तीन सप्ताह की अविध के भीतर मिजस््िेट के सम्ष उपिस्थत/समिपत हों। आवेदकगण की उपिस्थित पर, मिजस््िेट संबंिधत िवचारण न्यायालय को मामला दो सप्ताह में रेफर करेंगे एवं के स के स्ऴ न्यायालय में रेफर होने के चार सप्ताह के भीतर िडस्चाजर् आवेदन ्ऺस्तुत करने की स्वतं्ऴता रहगी। उसके बाद सेशन्स कोटर्, आवेदकों ्षारा ्ऺस्तुत िडस्चाजर् आवेदन को उसके गुण-दोष के आधार पर िनणर्य करेगा। इस सम्पूणर् ्ऺि्वया, आवेदकगण की उपिस्थित, के स का रेफर होना, िडस्चाजर् का ्ऺाथर्नाप्ऴ एवं उसका िनस्तारण होने तक आवेदकगण की िगरफ्तारी या कठोर कारर्वाई नहीं की जाएगी।" तत्प्ाात आवेदकगण ने िजला एवं स्ऴ न्यायाधीश, एटा के सम्ष स्ऴ वाद सं० 586/2024 दािखल िकया, परंतु संबंिधत न्यायालय ने मामले के पहलुओं पर िवचार िकए िबना ही जल्दबाजी में ्ऺाथर्नाप्ऴ अस्वीकार कर िदया। इसके प्ाात आवेदकगण ने िफर से दािण्डक ्ऺकीणर् ्ऺाथर्नाप्ऴ (अंतगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस.) सं० 17469/2025 (अनीता एवं अन्य बनाम राज्य यूपी एवं अन्य) उच्च न्यायालय में दािखल िकया, िजसमें िदनांक ््व (रंजीत) को उपरो्व मामले में तीन महीने की 29.05.2025 ्षारा आदेिशत िकया गया िक मा्ऴ अिभयु अविध तक िगरफ्तार नहीं िकया जाएगा और उसे वीिडयो कॉन््ऻें िसग के माध्यम से न्यायालय में उपिस्थत होने की अनुमित दी जाएगी। तत्प्ाात उच्च न्यायालय ्षारा आदेश पािरत करने के बाद, िव्षान स्ऴ न्यायाधीश, एटा ने सभी आवेदकों के िखलाफ िदनांक 03.09.2025 को गैर जमानतीय अिधप्ऴ जारी िकया। (ग) आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने पुनः तकर् ्ऺस्तुत िकया िक इस मामलें ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक आवेदकगण को उपरो्व धाराओं में ्षेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उन्हें आशंका है िक उन्हें उपरो्व विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उनके िवरू्ध कोई िव्षसनीय साष्य नहीं है। आवेदकगण ्षारा ्ऺाथिमकी में दिशत उपरो्व धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेदकगण ्षारा मृतका से िकसी ्ऺकार के अितिर्व दहेज की माँग नहीं की गयी है, न ही िकसी ्ऺकार की ्वू रतापूवर्क यातना दी गयी है। इस दुभार्ग्यपूणर् दुघर्टना की सूचना िमलने के बाद, मृतका के िपता और उसके पिरवार के सदस्यों को इस दुभार्ग्यपूणर् दुघर्टना के बारे में सूिचत िकया गया। सूचना देने वाला ( मृतका का िपता) घटनास्थल पर आया और पूरे गाँव में जो कु छ भी हुआ, उसे देखा। पोस्टमाटर्म आख्या, जांच और िवचारण न्यायालय में डॉक्टर के साष्य से यह स्प्ि है िक मृत्यु उच्च वोल्टेज िव्युत के कारण हुई थी, यह एक आकिस्मक मामला है। उ्व घटना पूरे गाँव में हुई, िजससे न के वल आवेदकगण के घर को बिल्क पूरे गांव को नुकसान हुआ। मृतका िशि्षका थी और िदनांक 30.04.2012 को िववाह के बाद से अपने माता-िपता के 4 NABAIL No. 7468 of 2025 साथ रह रही थी। मृतका और उसका पित दोनों सरकारी नौकरी में हैं और वे घटना के दो िदन पहले ही गाँव आ गए थे, इसिलए िकसी भी ्ऺकार की ्वू रता और दहेज की माँग की कोई संभावना नहीं है। मृतका की मौत आकिस्मक रूप से हुई है तथा मृतका की मृत्यु कािरत करने में आवेदकगण की कोई भूिमका नहीं है। आवेदकगण की ओर से यह भी आ्षासन िदया गया है िक वे कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार हैं और जब भी आवश्यकता होगी वे ईमानदारी से न्यायालय के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएं गे और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार हैं, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा यह तकर् ्ऺस्तुत िकया गया िक आवेदकगण ्षारा कािरत अपराध गंभीर ्ऺकृ ित का है तथा आवेदकगण ्षारा अितिर्व दहेज हेतु वादी की पु्ऴी को शारीिरक एवं मानिसक रूप से ्ऺतािड़त कर ्वू रता कािरत की तथा वादी की पु्ऴी से शादी के मा्ऴ एक वषर् दो माह के अंदर संिदग्ध पिरिस्थितयों में िव्युत करन्ट लगाकर उसकी हत्या कािरत कर दी गयी। मृतका के शव िवच्छेदन आख्या में मृत्यु का कारण मृत्यु पूवर् िव्युत करंट लगने से जलने के पिरणामस्वरूप पहुंचे आघात के कारण मृत्यु होना अंिकत है, िजससे यह स्प्ि रूप से पिरलि्षत हो रहा है िक आवेदकगण ्षारा ही मृतका की हत्या कािरत की गयी। आवेदकगण को उन्मोचन ्ऺाथर्नाप्ऴ के िनस्तारण तक आवेदकगण को राहत ्ऺदान की गयी थी, िकन्तु आवेदकगण ्षारा दािखल उन्मोचन ्ऺाथर्नाप्ऴ िनरस्त िकया जा चुका है, िजससे आवेदकगण को ्ऺाप्त राहत स्वतः समाप्त हो गयी। आवेदकगण ्षारा दािखल दािण्डक ्ऺकीणर् ्ऺाथर्नाप्ऴ (अंतगर्त धारा 528 बी.एन. एस.एस.) सं०17469/2025 (अनीता एवं अन्य बनाम राज्य यूपी एवं अन्य) में भी आवेदकगण को कोई राहत ्ऺदान नहीं की गयी है। अि्षम िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा न्यायालय को इस तथ्य से अवगत कराया गया िक आवेदकगण िदनांक 01.03.2023 से फरार चल रहे हैं तथा न्यायालय के सम्ष उपिस्थत नहीं हो रहे हैं तथा उनके िवरु्ध गैर जमानतीय अिधप्ऴ भी जारी िकये जा चुके हैं। अतः यह स्प्ि है िक यिद आवेदकगण को अि्षम जमानत ्ऺदान की जाती है, तो आवेदकगण िवचारण एवं न्याियक ्ऺि्वया में सहयोग नहीं करेंगे, इसिलए आवेदकगण को अि्षम जमानत पर मु्व िकये जाने का कोई औिचत्य ्ऺतीत नहीं होता है। अतः आवेदकगण का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाय। 6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अि्षम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की ्ऺकृ ित और गंभीरता, अिभयु्व का पूवर्वृ्त, अिभयु्व के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयु्व के िवरु्ध उपलब्ध संपूणर् साम्षी का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयु्व की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 7. वतर्मान मामले में अि्षम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िस्धांतों को ध्यान में रखते हुए और प्षकारों के िव्षान अिधव्वाओं के कथनों, आरोपों की ्ऺकृ ित, आवेदकगण की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार ्ि्व िकए यह अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदकगण का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ अस्वीकार 5 NABAIL No. 7468 of 2025 िकया जाता है। 8. उपरो्वानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अि्षम जमानत ्ऺाथर्नाप्ऴ िनरस्त िकया जाता है। 9. कायार्लय को िनदरॏिशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक ्ऺितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनि्ात करें। September 12, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.)

Legal Reasoning

Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad

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