Allahabad High Court
Case Details
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 23182 of 2025 Rajendra Kumar Singh Alias R.K. Singh State of U.P. Versus .....Applicant(s) .....Opposite Party(s) Counsel for Applicant(s) : Anubhav Singh, Arvind Kumar, Kiran Tiwari, Mahesh Chandra Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 57/2024, अंतगर्त धारा 420, 406, 467, 468, 471, 504, 506, 120-बी. भा.दं.सं., थाना िसकं दरा, िजला आगरा में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान विर्ष अिधव्वा एवं राज्य की तरफ से िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा की तरफ से आज ्ऺित शपथप्ऴ दािखल िकया गया, िजसे प्ऴावली पर रखा जाय। 4. सं्षेप में अिभयोजन कथानक इस ्ऺकार है िक वादी ्षारा धारा 156 (3) दं०्ऺ०सं० के अन्तगर्त ्ऺाथर्नाप्ऴ इन आशय से दािखल िकया गया िक वषर् 2013 में ्ऺतीक िवहार में आवासीय प्लॉट िव्वय िकये जा रहे थे, उ्व आवासीय प्लॉटों को िशल्पक सहकारी आवास सिमित के िनदेशक/संर्षक आर०के ० िसह तथा उनके पु्ऴ ्ऺतीक चौहान ्षारा वादी को आ्षासन िदया गया िक प्लॉट हर तरह से पाक साफ हैं। उसने उनकी बातों पर िव्षास करके अपनी पु्ऴी सुषमा िसह के नाम से एक प्लॉट भूखण्ड संख्या 131 ्ऺतीक िवहार फे स-ि्षतीय मौजा िसकन्दरा, आगरा ्वय िकया। खरीदने के प्ाात् जब वह वषर् 2016 में उ्व प्लॉट पर काम कराने गया तो उसकी जानकारी में आया िक उ्व प्लॉट को िशल्पक सहकारी आवास सिमित के सिचव अरून कु मार िसह ने पूवर् में ही ्शीमती आशा शमार् को िदनांक 07.06.2000 को िव्वय िकया जा चुका है। तत्सम्बन्ध में िशकायत करने पर अिभयु्वगण ्षारा कानूनी कायर्वाही से बचने हेतु अित शी्स ही प्लॉट को खरीदते समय िलये गये 14 लाख रूपये ब्याज सिहत लौटाने अथवा दूसरी कॉलोनी में इतने ही रूपयों में प्लॉट देने का आ्षासन िदया गया, परन्तु न तो रूपये वापस िकये गये, न ही प्लॉट ही िदया गया। जब वादी अिभयु्वगण के घर पर रूपये मांगने गया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गयी एवं रूपये देने से मना िकया गया। 2 BAIL No. 23182 of 2025 5.(क) आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ़ांग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। ्ऺाथिमकी लगभग दस वषर् बाद काफी िवलम्ब से पंजीकृ त करायी गयी है। आवेदक किथत सोसाइटी का िनदेशक है, िजसकी आयु लगभग 70 वषर् है और वह 15 वषर् पूवर् हृदय रोग से पीिड़त था। उसने सूचना देने वाले को कोई वचन नहीं िदया था और न ही िकसी ्िि्व के साथ कोई किथत िव्वय िवलेख िनष्पािदत िकया गया था। सभी िव्वय-िवलेख सिचव अिभयु्व अरुण कु मार िसह और अन्य ्िि्वयों ्षारा िनष्पािदत िकए गए थे। आवेदक ्षारा वादी की पु्ऴी एवं अन्य के िवरू्ध न्यायालय मध्यस्थ/अपर आवास आयु्व/ अपर िनबन्धक, उ०्ऺ० आवास एवं िवकास पिरषद, लखनऊ में वाद संख्या-137 डब्लू/2014 िशल्पक सहकारी आवास सिमित िवरु्ध ्शीमती आशा शमार् आिद ्ऺश्नगत भूखण्ड से सम्बिन्धत िवलेख िदनांिकत 07.06.2000 एवं 21.02.2013 को शून्य घोिषत िकये जाने हेतु संिस्थत िकया गया था, जो आदेश िदनांिकत 22.01.2018 के माध्यम से स्वीकार करते हुए किथत िव्वय िवलेख शून्य घोिषत हो चुका है। िववेचक ने आवेदक के िवरु्ध कोई िव्षसनीय साष्य एकि्ऴत िकए िबना, मा्ऴ आवेदक और सह-अिभयु्वों के इकबािलया बयान के आधार पर, वतर्मान मामले में िमथ्यारोिपत कर िदया, जबिक उ्व घटना के संबंध में कोई स्वतं्ऴ सा्षी नहीं है।आवेदक ्षारा िकसी ्ऺकार के दस्तावेज की कू टरचना/धोखाधड़ी कािरत नहीं की गयी है, न ही वादी अथवा उसकी पु्ऴी को िकसी ्ऺकार की धमकी दी है, बिल्क वादी ्षारा आवेदक को मानिसक रूप से परेशान करने हेतु वतर्मान वाद में अिभयु्व बना िदया गया है। (ख) अि्षम आवेदक के िव्षान अिधव्वा ्षारा कथन िकया गया है िक आवेदक किथत संपि्त का न तो िव्वयकतार् है और न ही उसका गवाह है। वतर्मान वाद दीवानी ्ऺकृ ित का है, िकन्तु जानबूझकर इसे आपरािधक रूप िदया गया है और दोनों प्षों के बीच िसिवल वाद संख्या 97/18 भी लंिबत है। वादी की पु्ऴी और सह-अिभयु्व गोपे्षर गुप्ता ने उपरो्व वाद में शपथ प्ऴ दािखल कर बताया है िक दोनों प्षों के मध्य कोई िववाद नहीं है और ्ऺाप्त िव्वय प्ऴ की किथत धनरािश पर कोई िववाद नहीं है तथा भिवष्य में भी कोई िववाद नहीं होगा। अतः आवेदक पर कोई आपरािधक दाियत्व नहीं बनता। किथत िव्वय िवलेख की कोई भी किथत धनरािश आवेदक या उसकी सोसाइटी के खाते में स्थानांतिरत नहीं की गई है। आवेदक के कब्जे से कु छ भी बरामद नहीं हुआ है और न ही आवेदक के िवरु्ध कोई साष्य अिभलेख में दजर् िकया गया है तथा न्यायालय मध्यस्थ/अपर आवास आयु्व/ अपर िनबन्धक, उ०्ऺ० आवास एवं िवकास पिरषद, लखनऊ ्षारा ्ऺश्नगत िव्वय-िवलेख शून्य घोिषत िकये जा चुके हैं, िजससे आवेदक के िवरु्ध उ्व आरोिपत अपराध बनता पिरलि्षत नहीं हो रहा है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 05.05.2025 से कारागार में 3 BAIL No. 23182 of 2025 िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 6. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत ं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक को िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं जमानत पर न छोड़ा जाय। 7. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 8. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण ़। उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे 9. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। September 9, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
Legal Reasoning
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