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Allahabad High Court

Case Details

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 13759 of 2025 Kasif State of U.P. Versus .....Applicant(s) .....Opposite Party(s) Counsel for Applicant(s) Counsel for Opposite Party(s) : Vineet Kumar Singh : G.A. Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 16/2025, अंतगर्त धारा 318(4), 316(2), 319(2) बी.एन.एस., थाना पीपीगंज, िजला गोरखपुर में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं राज्य की तरफ से िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक पर आ्षेप है िक आवेदक को प्लॉट संख्या 181 के संबंध में 2 िडसिमल ्षे्ऴफल खरीदने के िलए बयाना रािश के रूप में 2,40,000/- रुपये (गलत तरीके से 24,01,000/- रुपये में िलखा गया) नकद िदए गए थे, िजसके संबंध में िव्वय-िवलेख िनष्पािदत नहीं िकया जा रहा है और आवेदक धन वापस नहीं कर रहा है। उ्व के संबंध में आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक ने किथत रूप से मौजा मंझिरया में िस्थत प्लॉट संख्या 181 ्षे्ऴफल 0.020 हेक्टेयर (5 डेसीमल ) की िब्वी के िलए सूचनाकतार् के साथ एक समझौता िकया था और प्षों के बीच यह सहमित हुई थी िक िब्वी 2,35,000/- रुपये ्ऺित डेसीमल की दर से की जाएगी, िजसमें से आवेदक को बयाना रािश के रूप में 2,40,000/- रुपये ्ऺाप्त हुए हैं और शेष िब्वी मूल्य िब्वी िवलेख के िनष्पादन के समय देय होगा। आवेदक के िव्षान अिधव्वा ्षारा कथन िकया गया िक आवेदक ने िववािदत संपि्त को बेचने के िलए कभी भी सूचनाकतार् से 2,40,000/- रुपये की किथत धनरािश नहीं ली है और न ही उसके साथ िकसी भी समय किथत िब्वी समझौता िकया है और इसके अितिर्व, आवेदक को नकद में दी गई रािश के संबंध में गंभीर असंगतता है तथा सूचनाकतार् ्षारा ्वय िकए जाने वाले भूखंड के ्षे्ऴफल के संबंध में भी गंभीर िवसंगित है, क्योंिक एफआईआर के अनुसार ्षे्ऴफल 2 दशमलव दशार्या गया है और किथत िव्वय समझौते के अनुसार ्वय िकए जाने वाले भूखंड का ्षे्ऴफल 5 दशमलव दशार्या गया है और इस भौितक िवरोधाभास के कारण, सूचनाकतार् ्षारा आरोिपत अपराध पूरी तरह से मनग़ांत और िनराधार है। आवेदक को किथत अपराध के संबंध में पुिलस ्षारा िदनांक 12.01.2025 को िगरफ्तार िकया गया था, िजसके बाद उसकी तलाशी ली गई, लेिकन उसके कब्जे से कोई भी आपि्तजनक साम्षी नहीं िमली। यह िववाद पूणर्तः िसिवल ्ऺकृ ित का है और जानबूझकर उत्पीड़न करने के इरादे से सूचनाकतार् ्षारा आवेदक को वतर्मान वाद में िमथ्या रूप से अिभयु्व बना िदया गया है। 2 BAIL No. 13759 of 2025 (ख) ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक सूचनाकतार् इस तथ्य से अवगत था िक प्षों के बीच िकया गया किथत िव्वय समझौता एक अपंजीकृ त दस्तावेज है, िजसे संपि्त अंतरण अिधिनयम, 1882 की धारा 54 में िकए गए संशोधन के अनुसार ्ऺभावी नहीं िकया जा सकता है। अिधिनयम संख्या 57, 1976 तथा पंजीकरण अिधिनयम, 1908 की धारा 17, जो िदनांक 01.01.1977 से उ्तर ्ऺदेश राज्य पर लागू है, के अनुसार, यह कानून की आवश्यकता है िक िव्वय के िलए िकए गए अनुबंध को पंजीकृ त िकया जाए तािक उसे न्यायालय ्षारा लागू िकया जा सके और इस ्ऺकार िदनांक 11.01.2025 की ्ऺथम सूचना िरपोटर् कानून में पूरी तरह से अनुिचत है। अन्यथा भी, िववािदत संपि्त, िजसकी िब्वी की जानी थी, के बदले आवेदक को नकद में दी गई 2,40,000/- रुपये की रािश की वसूली के िलए, सूचनाकतार् के िलए उिचत तरीका यह था िक वह आपरािधक कानून के उपायों का सहारा लेने के बजाय स्षम िसिवल न्यायालय के सम्ष उस संबंध में एक िसिवल मुकदमा दायर करे, तथािप, सूचनाकतार् ्षारा आवेदक के िखलाफ आज तक 2,40,000/- रुपये की रािश की वसूली के िलए ऐसा कोई वाद दािखल नहीं िकया गया है। (ग) अि्षम उनके ्षारा कथन िकया गया िक ्ऺथम सूचना िरपोटर् और बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दजर् िकए गए सूचनाकतार् के बयान के अवलोकन से ही यह स्प्ि हो जाता है िक किथत अपराध के संबंध में समय, स्थान और ितिथ का कोई िववरण नहीं िदया गया है और इस ्ऺकार, अिभयोजन कथानक िमथ्या पिरलि्षत हो रहा है। सूचनाकतार् ्षारा ्वय की जाने वाली िववािदत संपि्त के संबंध में आवेदक को 2,40,000/- रुपये नकद िदए जाने के तथ्य को ्ऺमािणत करने वाला कोई ्ऺत्य्षदशर् सा्षी नहीं है। चू ँिक सूचनाकतार् ्षारा कोई ितिथ िनिद्ि नहीं की गई है िक आवेदक को 2,40,000/- रुपये की रािश नकद कब दी गई थी, इसिलए यह अनुमान लगाया जा सकता है िक िदनांक 11.01.2025 की ्ऺथम सूचना िरपोटर् आवेदक को झूठा फं साने के अ्ऺत्य्ष उ्देश्य से अत्यिधक िवलम्ब से दजर् की गई है और सूचनाकतार् ्षारा ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् करने में हुई अत्यिधक देरी के संबंध में कोई उिचत स्प्िीकरण नहीं िदया गया है।सूचनाकतार् ्षारा आवेदक से अनुिचत धनरािश की माँग की गयी और जब आवेदक ने सूचनाकतार् की बात मानने में अपनी असमथर्ता िदखाई, तो सूचनाकतार् ्षारा अनुिचत रूप से मांगी गई रािश का भुगतान न करने के कारण उस पर िदनांक 11.01.2025 को ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् की गई। आवेदक ने न तो िव्षासघात िकया है, न ही धोखाधड़ी की है और न ही छ्मवेश ्षारा धोखाधड़ी की है। आवेदक ्षारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को शपथप्ऴ के ्ऺस्तर सं० 30 एवं 31 में स्प्ि िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 12.01.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 3 BAIL No. 13759 of 2025 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके ़। कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे 7. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। September 10, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.)

Legal Reasoning

Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad

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