Allahabad High Court
Case Details
: Amit Kumar Srivastava : G.A. Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 281/2025, अन्तगर्त धारा 75, 77, 78, 64(2)(एम), 87, 137(2), 351(3) भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 5एल/6 पाक्सो एक्ट, थाना प्रेमनगर, िजला बरेली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अवगत कराया गया िक उन्हें प्राप्त अनुदेश के अनुसार िवपक्षी सं० 4 को नोिटस, िदनांक 17.09.2025 िनष्पािदत/तामील कराया जा चुका है।
4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक पूवर् में िवपक्षी पक्षकार संख्या 4 द्वारा आवेदक के िवरुद्ध मु०अ०सं० 132 वषर् 2024 में अंतगर्त धारा 363, 366, 506 भारतीय दंड संिहता, थाना प्रेमनगर, िजला बरेली में दजर् कराई गई थी, िजसमें आरोप लगाया गया है िक आवेदक द्वारा उसकी पुत्री को िदनांक 24.4.2025 को बहला-फु सलाकर भगा ले जाया गया है। उक्त मामले में पीिड़ता का बयान धारा 161 दंड प्रिक्रया संिहता के अंतगर्त दजर् िकया गया है, िजसमें उसने अिभयोजन पक्ष की उक्त प्रथम सूचना िरपोटर् में आरोिपत कहानी का खंडन करते हुए उसने कहा है िक वह स्वयं िकसी को सूचना िदए िबना अपने घर से चली गई थी तथा धारा 164 दंड प्रिक्रया संिहता के तहत बयान में पीिड़ता ने प्रथम सूचना िरपोटर् में आरोिपत अिभयोजन पक्ष की कहानी का िफर से खंडन िकया है। आगे यह भी कहा गया िक मुख्य िचिकत्सा अिधकारी, बरेली द्वारा आयु प्रमाण पत्र जारी िकया गया, िजसके अनुसार पीिड़ता की आयु 18 वषर् है। इस 2 BAIL No. 33845 of 2025 क्रम में िववेचना अिधकारी द्वारा िववेचना के दौरान आवेदक के िवरूद्ध कोई अपराध नहीं पाया गया और इसिलए उनके द्वारा िदनांक 10.5.2024 को इस मामलें में आवेदक के पक्ष में अंितम िरपोटर् प्रस्तुत की गयी। प्रस्तुत की गई इस अंितम िरपोटर् से व्यिथत होकर िवपक्षी संख्या 4 ने वतर्मान मामले में आवेदक के िखलाफ पुनः प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई है, जो िमथ्या तथ्यों पर आधािरत है, बिल्क ऐसा प्रतीत होता है िक आवेदक को परेशान करने व अनुिचत लाभ पाने के दुराशय से वतर्मान मामले में प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई गई है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक लगभग 19 वषर् का एक युवा लड़का है और बी.ए. का छात्र है। भाग I में आवेदक है और वह राजिष महािवद्यालय, बरेली में अध्ययनरत है तथा पीिड़ता भी लगभग 19 वषर् से अिधक आयु की है तथा बी.कॉम िद्वतीय वषर् की छात्रा है तथा बरेली कॉलेज, बरेली में अध्ययनरत है। उनके बीच िमत्रता िवकिसत हो गई जो िवपक्षी पक्ष संख्या 4 और उसके पिरवार के सदस्यों को िबल्कु ल पसंद नहीं थी और इसिलए िदनांक 24.4.2024 को पीिड़ता के भाई ने पीिड़ता के साथ मारपीट की और इसिलए वह अपना घर छोड़कर चली गई थी। प्रश्नगत मामलें में अंितम िरपोटर् प्रस्तुत िकए जाने से क्षुब्ध होकर िवपक्षी पक्ष संख्या 4 ने पुनः एक झूठी कहानी गढ़़़़ी, िजसके द्वारा उसे वतर्मान मामले में आवेदक को झूठा फं साया गया है, जबिक आवेदक ने पीिड़ता को कभी परेशान नहीं िकया और न ही उसके साथ शारीिरक संबंध बनाने के िलए दबाव डाला। अिभयोजन पक्ष की कहानी की असत्यता इस तथ्य से भी स्पष्ट होती है िक प्रथम सूचना िरपोटर् और पीिड़ता/िवपक्षी संख्या 4 के धारा 180 बी.एन.एस.एस. के तहत दजर् बयान में भी आवेदक के िवरुद्ध बलात्कार का आरोप नहीं लगाया गया है, तथािप काफी िवलंब के बाद बलात्कार का आरोप लगाया गया है, िजससे अिभयोजन पक्ष की पूरी कहानी अत्यिधक संिदग्ध और अिवश्वसनीय हो जाती है। आवेदक ने न तो कभी बलात्कार िकया और न ही उसे शारीिरक संबंध बनाने के िलए मजबूर िकया, जबिक आवेदक पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाए गए हैं। वतर्मान मामलें में पीिड़ता द्वारा धारा 180, 183 भादंसं के तहत दजर् िकए गए बयान स्वयं िवरोधाभासी हैं और ऐसा प्रतीत होता है िक पीिड़ता ने ये बयान िवपक्षी संख्या 4 के दबाव में आवेदक को परेशान करने के उद्देश्य से िदए हैं, इसिलए ये िबल्कु ल भी िवश्वसनीय नहीं हैं। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता द्वारा किथत रूप से अश्लील फोटो/वीिडयों बनाने व प्रसािरत करने का आक्षेप आरोिपत िकया गया िक गया है, िकतु िववेचक द्वारा ऐसा कोई किथत अश्लील फोटो/वीिडयो बरामद नहीं िकया गया है। इन पिरिस्थितयों में, यहाँ यह उल्लेख करना प्रासंिगक है िक पीिड़ता के बयान तोड़-मरोड़ कर िदए गए हैं और िबल्कु ल भी िवश्वसनीय नहीं हैं। मामले में प्राथिमकी दजर् होने में काफी देरी हुई है, िजसका स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है और इसिलए अिभयोजन पक्ष की पूरी कहानी की सत्यता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। किथत पीिड़ता बािलग है तथा अपना अच्छा बुरा समझने में सक्षम है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 3 BAIL No. 33845 of 2025
03.08.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् ंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध सं अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय।
1. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
5. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे ़।
8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 7, 2025 CP.sahani (Dr. Gautam Chowdhary,J.)
: Amit Kumar Srivastava : G.A. Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 281/2025, अन्तगर्त धारा 75, 77, 78, 64(2)(एम), 87, 137(2), 351(3) भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 5एल/6 पाक्सो एक्ट, थाना प्रेमनगर, िजला बरेली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अवगत कराया गया िक उन्हें प्राप्त अनुदेश के अनुसार िवपक्षी सं० 4 को नोिटस, िदनांक 17.09.2025 िनष्पािदत/तामील कराया जा चुका है।
4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक पूवर् में िवपक्षी पक्षकार संख्या 4 द्वारा आवेदक के िवरुद्ध मु०अ०सं० 132 वषर् 2024 में अंतगर्त धारा 363, 366, 506 भारतीय दंड संिहता, थाना प्रेमनगर, िजला बरेली में दजर् कराई गई थी, िजसमें आरोप लगाया गया है िक आवेदक द्वारा उसकी पुत्री को िदनांक 24.4.2025 को बहला-फु सलाकर भगा ले जाया गया है। उक्त मामले में पीिड़ता का बयान धारा 161 दंड प्रिक्रया संिहता के अंतगर्त दजर् िकया गया है, िजसमें उसने अिभयोजन पक्ष की उक्त प्रथम सूचना िरपोटर् में आरोिपत कहानी का खंडन करते हुए उसने कहा है िक वह स्वयं िकसी को सूचना िदए िबना अपने घर से चली गई थी तथा धारा 164 दंड प्रिक्रया संिहता के तहत बयान में पीिड़ता ने प्रथम सूचना िरपोटर् में आरोिपत अिभयोजन पक्ष की कहानी का िफर से खंडन िकया है। आगे यह भी कहा गया िक मुख्य िचिकत्सा अिधकारी, बरेली द्वारा आयु प्रमाण पत्र जारी िकया गया, िजसके अनुसार पीिड़ता की आयु 18 वषर् है। इस 2 BAIL No. 33845 of 2025 क्रम में िववेचना अिधकारी द्वारा िववेचना के दौरान आवेदक के िवरूद्ध कोई अपराध नहीं पाया गया और इसिलए उनके द्वारा िदनांक 10.5.2024 को इस मामलें में आवेदक के पक्ष में अंितम िरपोटर् प्रस्तुत की गयी। प्रस्तुत की गई इस अंितम िरपोटर् से व्यिथत होकर िवपक्षी संख्या 4 ने वतर्मान मामले में आवेदक के िखलाफ पुनः प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई है, जो िमथ्या तथ्यों पर आधािरत है, बिल्क ऐसा प्रतीत होता है िक आवेदक को परेशान करने व अनुिचत लाभ पाने के दुराशय से वतर्मान मामले में प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई गई है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक लगभग 19 वषर् का एक युवा लड़का है और बी.ए. का छात्र है। भाग I में आवेदक है और वह राजिष महािवद्यालय, बरेली में अध्ययनरत है तथा पीिड़ता भी लगभग 19 वषर् से अिधक आयु की है तथा बी.कॉम िद्वतीय वषर् की छात्रा है तथा बरेली कॉलेज, बरेली में अध्ययनरत है। उनके बीच िमत्रता िवकिसत हो गई जो िवपक्षी पक्ष संख्या 4 और उसके पिरवार के सदस्यों को िबल्कु ल पसंद नहीं थी और इसिलए िदनांक 24.4.2024 को पीिड़ता के भाई ने पीिड़ता के साथ मारपीट की और इसिलए वह अपना घर छोड़कर चली गई थी। प्रश्नगत मामलें में अंितम िरपोटर् प्रस्तुत िकए जाने से क्षुब्ध होकर िवपक्षी पक्ष संख्या 4 ने पुनः एक झूठी कहानी गढ़़़़ी, िजसके द्वारा उसे वतर्मान मामले में आवेदक को झूठा फं साया गया है, जबिक आवेदक ने पीिड़ता को कभी परेशान नहीं िकया और न ही उसके साथ शारीिरक संबंध बनाने के िलए दबाव डाला। अिभयोजन पक्ष की कहानी की असत्यता इस तथ्य से भी स्पष्ट होती है िक प्रथम सूचना िरपोटर् और पीिड़ता/िवपक्षी संख्या 4 के धारा 180 बी.एन.एस.एस. के तहत दजर् बयान में भी आवेदक के िवरुद्ध बलात्कार का आरोप नहीं लगाया गया है, तथािप काफी िवलंब के बाद बलात्कार का आरोप लगाया गया है, िजससे अिभयोजन पक्ष की पूरी कहानी अत्यिधक संिदग्ध और अिवश्वसनीय हो जाती है। आवेदक ने न तो कभी बलात्कार िकया और न ही उसे शारीिरक संबंध बनाने के िलए मजबूर िकया, जबिक आवेदक पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाए गए हैं। वतर्मान मामलें में पीिड़ता द्वारा धारा 180, 183 भादंसं के तहत दजर् िकए गए बयान स्वयं िवरोधाभासी हैं और ऐसा प्रतीत होता है िक पीिड़ता ने ये बयान िवपक्षी संख्या 4 के दबाव में आवेदक को परेशान करने के उद्देश्य से िदए हैं, इसिलए ये िबल्कु ल भी िवश्वसनीय नहीं हैं। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता द्वारा किथत रूप से अश्लील फोटो/वीिडयों बनाने व प्रसािरत करने का आक्षेप आरोिपत िकया गया िक गया है, िकतु िववेचक द्वारा ऐसा कोई किथत अश्लील फोटो/वीिडयो बरामद नहीं िकया गया है। इन पिरिस्थितयों में, यहाँ यह उल्लेख करना प्रासंिगक है िक पीिड़ता के बयान तोड़-मरोड़ कर िदए गए हैं और िबल्कु ल भी िवश्वसनीय नहीं हैं। मामले में प्राथिमकी दजर् होने में काफी देरी हुई है, िजसका स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है और इसिलए अिभयोजन पक्ष की पूरी कहानी की सत्यता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। किथत पीिड़ता बािलग है तथा अपना अच्छा बुरा समझने में सक्षम है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 3 BAIL No. 33845 of 2025
03.08.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् ंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध सं अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय।
1. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
5. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे ़।
8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 7, 2025 CP.sahani (Dr. Gautam Chowdhary,J.)