✦ High Court of India

Allahabad High Court

Case Details High Court of India
Court
High Court of India
Length
1,079 words

Acts & Sections

Ashish Kumar Srivastava State of U.P. Versus .....Applicant(s) .....Opposite Party(s) Counsel for Applicant(s) Counsel for Opposite Party(s) : Girish Kumar Singh : G.A. Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्तागण श्री चंदन िसह, जयराम पाण्डेय एवं राजेंद्र िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।

2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 412/2019, अन्तगर्त धारा 420, 406, 120-बी. 504, 506 भा०दं०िव०, थाना कोतवाली लिलतपुर, िजला लिलतपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।

3. संक्षेप में अिभयोजन कथानक इस प्रकार है िक वादी मुकदमा द्वारा अन्तगर्त धारा 156 (3) द.प्र.सं. के अंतगर्त इस आशय से पंजीकृ त कराया िक वे बेरोजगार हैं और नौकरी की तलाश में भटकते रहे, वषर् 2011 में जनपद लिलतपुर में एक कं पनी, िजसका नाम जे.के .वी. लैण्ड डैवलवपसर् एवं इंफ्रास्ट्रक्चसर् िल. के नाम से एक कं पनी खोली, िजसके डायरेक्टर दीपक शुक्ला (वतर्मान), पूवर् डायरेक्टर आशीष कु मार श्रीवास्तव, अितिरक्त डायरेक्टर राजेश कु मार िसह, श्रीमती िप्रयंका िसह, अितिरक्त डायरेक्टर िवक्रान्त ित्रपाठी थे तथा उक्त कं पनी का रिजस्टडर् कायार्लय 16/34 फै न ब्रैक एवेन्यू हैवलाक रोड महात्मा गांधी मागर् हजरतगंज लखनऊ बताया तथा लिलतपुर ब्रांच में कायर् करने हेतु तरह-तरह से बहला फु सला कर अच्छा वेतन देने एवं भिवष्य में अन्य सुिवधाएं देने का लालच देते हुए अपनी कं पनी में एजेन्ट के रूप में नौकरी दी। वादीगण ने जनपद लिलतपुर के व्यिक्तयों के खाते उक्त लोगों की कं पनी में खुलवाये और एफ. डी. आिद भी बनवायी। सभी लोग वादीगण द्वारा खुलवाये गये खाते एवं एफ.डी. आिद की समयाविध पूणर् हो जाने पर धनरािश मय ब्याज सिहत वापस कर दी, िजससे वादीगण सिहत अन्य लोगों के मन में िवश्वास हो गया और वादीगण कई लोगों के खाते खुलवाकर उनका रुपया पैसा जमा कराया एवं एफ.डी. आिद भी जमा करायी, िजसके संबंध में पासबुक एवं प्रमाणपत्र भी जारी िकये गये तथा कु छ लोगों की समयाविध पूणर् हो जाने पर उनकी धनरािश वापस करने के एवज में पोस्टडेटेज चैक भी जारी कर िदये गये। वादीगण द्वारा उक्त लोगों के पास उक्त कं पनी में वषर् 2011 से लाखों करोड़ो रुपये जमा हो गये। उक्त रुपये जमा हो जाने पर उक्त 2 BAIL No. 31268 of 2025 लोगों के मन में बदिनयती आ गयी तथा तीन-चार माह पूवर् उक्त सभी लोग षड्यन्त्र कर उक्त कं पनी के समस्त कागजात लेकर रातों-रात भाग गये। वादीगण कं पनी के ब्रांच ऑिफस इलाइच चौराहा पर गये तो देखा िक वह पर ताला लगा हुआ था और उक्त लोगों से फोन पर सम्पकर् करने पर फोन बंद िमले। बाद में पता चला िक सभी लोग अपनी लिलतपुर ब्रांच आिफस से समस्त कागजात सामान आिद लेकर रातों-रात भाग गये हैं। वादीगण द्वारा उनसे सम्पकर् करने का प्रयास िकया गया, लेिकन कोई सफलता नहीं िमली। कं पनी में जमा कराये रुपये के मािलक (िनवेशक) वादीगण को परेशान कर रहे हैं। रुपयों की अदायगी न होने पर अभद्र व्यवहार करते हैं तथा गाली गलौज एवं मारपीट खा पर अमादा रहते हैं।

4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। प्राथिमकी अत्यंत िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। वतर्मान घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। आवेदक कं पनी का पूवर् िनदेशक था तथा वतर्मान में वह कं पनी का कमर्चारी अथवा िनदेशक नहीं है एवं वषर् 2017 में कं पनी से इस्तीफा दे चुका था। आवेदक द्वारा िकसी भी व्यिक्त के साथ धोखाधड़ी/छल कािरत नहीं िकया गया है। अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक भारतीय दंड संिहता (IPC) की धारा 406 (आपरािधक िवश्वासघात) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप एक साथ नहीं लग सकते, क्योंिक ये अपराध एक दूसरे के िवरोधी हैं और एक ही तथ्य पर आधािरत नहीं हो सकते, खासकर जब दोनों के आवश्यक तत्व अलग-अलग हों। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 30.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।

5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक ने अन्य सह-अिभयुक्तगण के साथ िमलकर वादी मुकदमा एवं अन्य व्यिक्तयों को लालच देकर जे.के .वी. लैंड डेवलपसर् एं ड इन्फ्रास्ट्रक्चसर् िलिमटेड (ग्रुप ऑफ कम्पनीज) में भोले-भाले व्यिक्तयों के करोड़ों रुपए का िनवेश करवाया, िकन्तु भुगतान अविध पूणर् होने के पश्चात िनवेशकों के िनवेश िकये हुए पैसों का भुगतान न करके उक्त करोड़ों रुपए की धनरािश गबन कर ली गयी तथा रातों-रात कायार्लय को खाली करके भाग गये। आवेदक कं पनी में वषर् 2017 तक कायर्रत था तथा उक्त घटना वषर् 2011 से कािरत की गयी, िजससे यह स्पष्ट है िक प्रश्नगत घटना कािरत िकये जाते समय आवेदक कं पनी में कायर्रत था तथा प्रश्नगत अपराध एवं धोखाधड़ी कािरत करने में आवेदक भी संिलप्त था। पुनः िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह भी कथन िकया गया िक घटना के बाद आवेदक फरार चल रहा था, िजसमें आवेदक के िवरुद्ध गैर जमानतीय अिधपत्र, धारा 82/83 दं०प्र०सं० की आदेिशकाएं भी जारी की गयीं, िकन्तु आवेदक को िगरफ्तार नहीं िकया जा सका और िववेचक द्वारा मफरूरी में आरोपपत्र न्यायालय में दािखल िकया गया। कोतवाली लिलतपुर की आख्या के मुतािबक 3 BAIL No. 31268 of 2025 आवेदक द्वारा िविधक कायर्वाही से फरार रहने के कारण उसके िवरुद्ध मु.अ.सं. 713/2023, धारा 174-ए भा.दं.सं. पंजीकृ त िकया गया। िजससे यह भी स्पष्ट है िक आवेदक द्वारा जान- बूझकर अन्य सह-अिभयुक्तों के साथ िमलकर वतर्मान घटना कािरत की गयी तथा सुिनयोिजत तरीके से िनवेशकों का पैसा गबन िकया गया एवं िविधक कायर्वाही में सहयोग नहीं कर रहा था तथा यह भी पूणर् संभावना है िक यिद आवेदक को जमानत पर अवमुक्त िकया गया, तो वह आगे भी िविधनुसार िवचारण/कायर्वाही में सहयोग प्रदान नहीं करेगा। आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं जघन्य प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाए।

6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवेदक को जमानत पर मुक्त िकए जाने का कोई औिचत्य नहीं है तथा यह जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकये जाने योग्य है।

7. तद्नुसार, वाद के गुण-दोष को प्रभािवत िकये बगैर यह जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। September 12, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.)

Ashish Kumar Srivastava State of U.P. Versus .....Applicant(s) .....Opposite Party(s) Counsel for Applicant(s) Counsel for Opposite Party(s) : Girish Kumar Singh : G.A. Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

1. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्तागण श्री चंदन िसह, जयराम पाण्डेय एवं राजेंद्र िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।

2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 412/2019, अन्तगर्त धारा 420, 406, 120-बी. 504, 506 भा०दं०िव०, थाना कोतवाली लिलतपुर, िजला लिलतपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।

3. संक्षेप में अिभयोजन कथानक इस प्रकार है िक वादी मुकदमा द्वारा अन्तगर्त धारा 156 (3) द.प्र.सं. के अंतगर्त इस आशय से पंजीकृ त कराया िक वे बेरोजगार हैं और नौकरी की तलाश में भटकते रहे, वषर् 2011 में जनपद लिलतपुर में एक कं पनी, िजसका नाम जे.के .वी. लैण्ड डैवलवपसर् एवं इंफ्रास्ट्रक्चसर् िल. के नाम से एक कं पनी खोली, िजसके डायरेक्टर दीपक शुक्ला (वतर्मान), पूवर् डायरेक्टर आशीष कु मार श्रीवास्तव, अितिरक्त डायरेक्टर राजेश कु मार िसह, श्रीमती िप्रयंका िसह, अितिरक्त डायरेक्टर िवक्रान्त ित्रपाठी थे तथा उक्त कं पनी का रिजस्टडर् कायार्लय 16/34 फै न ब्रैक एवेन्यू हैवलाक रोड महात्मा गांधी मागर् हजरतगंज लखनऊ बताया तथा लिलतपुर ब्रांच में कायर् करने हेतु तरह-तरह से बहला फु सला कर अच्छा वेतन देने एवं भिवष्य में अन्य सुिवधाएं देने का लालच देते हुए अपनी कं पनी में एजेन्ट के रूप में नौकरी दी। वादीगण ने जनपद लिलतपुर के व्यिक्तयों के खाते उक्त लोगों की कं पनी में खुलवाये और एफ. डी. आिद भी बनवायी। सभी लोग वादीगण द्वारा खुलवाये गये खाते एवं एफ.डी. आिद की समयाविध पूणर् हो जाने पर धनरािश मय ब्याज सिहत वापस कर दी, िजससे वादीगण सिहत अन्य लोगों के मन में िवश्वास हो गया और वादीगण कई लोगों के खाते खुलवाकर उनका रुपया पैसा जमा कराया एवं एफ.डी. आिद भी जमा करायी, िजसके संबंध में पासबुक एवं प्रमाणपत्र भी जारी िकये गये तथा कु छ लोगों की समयाविध पूणर् हो जाने पर उनकी धनरािश वापस करने के एवज में पोस्टडेटेज चैक भी जारी कर िदये गये। वादीगण द्वारा उक्त लोगों के पास उक्त कं पनी में वषर् 2011 से लाखों करोड़ो रुपये जमा हो गये। उक्त रुपये जमा हो जाने पर उक्त 2 BAIL No. 31268 of 2025 लोगों के मन में बदिनयती आ गयी तथा तीन-चार माह पूवर् उक्त सभी लोग षड्यन्त्र कर उक्त कं पनी के समस्त कागजात लेकर रातों-रात भाग गये। वादीगण कं पनी के ब्रांच ऑिफस इलाइच चौराहा पर गये तो देखा िक वह पर ताला लगा हुआ था और उक्त लोगों से फोन पर सम्पकर् करने पर फोन बंद िमले। बाद में पता चला िक सभी लोग अपनी लिलतपुर ब्रांच आिफस से समस्त कागजात सामान आिद लेकर रातों-रात भाग गये हैं। वादीगण द्वारा उनसे सम्पकर् करने का प्रयास िकया गया, लेिकन कोई सफलता नहीं िमली। कं पनी में जमा कराये रुपये के मािलक (िनवेशक) वादीगण को परेशान कर रहे हैं। रुपयों की अदायगी न होने पर अभद्र व्यवहार करते हैं तथा गाली गलौज एवं मारपीट खा पर अमादा रहते हैं।

4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। प्राथिमकी अत्यंत िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। वतर्मान घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। आवेदक कं पनी का पूवर् िनदेशक था तथा वतर्मान में वह कं पनी का कमर्चारी अथवा िनदेशक नहीं है एवं वषर् 2017 में कं पनी से इस्तीफा दे चुका था। आवेदक द्वारा िकसी भी व्यिक्त के साथ धोखाधड़ी/छल कािरत नहीं िकया गया है। अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक भारतीय दंड संिहता (IPC) की धारा 406 (आपरािधक िवश्वासघात) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप एक साथ नहीं लग सकते, क्योंिक ये अपराध एक दूसरे के िवरोधी हैं और एक ही तथ्य पर आधािरत नहीं हो सकते, खासकर जब दोनों के आवश्यक तत्व अलग-अलग हों। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 30.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।

5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक ने अन्य सह-अिभयुक्तगण के साथ िमलकर वादी मुकदमा एवं अन्य व्यिक्तयों को लालच देकर जे.के .वी. लैंड डेवलपसर् एं ड इन्फ्रास्ट्रक्चसर् िलिमटेड (ग्रुप ऑफ कम्पनीज) में भोले-भाले व्यिक्तयों के करोड़ों रुपए का िनवेश करवाया, िकन्तु भुगतान अविध पूणर् होने के पश्चात िनवेशकों के िनवेश िकये हुए पैसों का भुगतान न करके उक्त करोड़ों रुपए की धनरािश गबन कर ली गयी तथा रातों-रात कायार्लय को खाली करके भाग गये। आवेदक कं पनी में वषर् 2017 तक कायर्रत था तथा उक्त घटना वषर् 2011 से कािरत की गयी, िजससे यह स्पष्ट है िक प्रश्नगत घटना कािरत िकये जाते समय आवेदक कं पनी में कायर्रत था तथा प्रश्नगत अपराध एवं धोखाधड़ी कािरत करने में आवेदक भी संिलप्त था। पुनः िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह भी कथन िकया गया िक घटना के बाद आवेदक फरार चल रहा था, िजसमें आवेदक के िवरुद्ध गैर जमानतीय अिधपत्र, धारा 82/83 दं०प्र०सं० की आदेिशकाएं भी जारी की गयीं, िकन्तु आवेदक को िगरफ्तार नहीं िकया जा सका और िववेचक द्वारा मफरूरी में आरोपपत्र न्यायालय में दािखल िकया गया। कोतवाली लिलतपुर की आख्या के मुतािबक 3 BAIL No. 31268 of 2025 आवेदक द्वारा िविधक कायर्वाही से फरार रहने के कारण उसके िवरुद्ध मु.अ.सं. 713/2023, धारा 174-ए भा.दं.सं. पंजीकृ त िकया गया। िजससे यह भी स्पष्ट है िक आवेदक द्वारा जान- बूझकर अन्य सह-अिभयुक्तों के साथ िमलकर वतर्मान घटना कािरत की गयी तथा सुिनयोिजत तरीके से िनवेशकों का पैसा गबन िकया गया एवं िविधक कायर्वाही में सहयोग नहीं कर रहा था तथा यह भी पूणर् संभावना है िक यिद आवेदक को जमानत पर अवमुक्त िकया गया, तो वह आगे भी िविधनुसार िवचारण/कायर्वाही में सहयोग प्रदान नहीं करेगा। आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं जघन्य प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाए।

6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवेदक को जमानत पर मुक्त िकए जाने का कोई औिचत्य नहीं है तथा यह जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकये जाने योग्य है।

7. तद्नुसार, वाद के गुण-दोष को प्रभािवत िकये बगैर यह जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। September 12, 2025 Pawan Kumar (Dr. Gautam Chowdhary,J.)

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