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Case Details

AFR Neutral Citation No. - 2024:AHC:148831 न्यायालय संख्या - 75 वाद :- आवेदन अन्तर्ग(cid:21)त धारा 482 सं. - 28390/2024 आवेदक :- मोहम्मद रिरजवान खान और 2 अन्य प्रतितपक्षी:- उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य आवेदक के लिलए अतिधवक्ता :- श्याम सु प्रतितपक्षी के लिलए अतिधवक्ता :- शासकीय अतिधवक्ता ंदर मिमश्रा माननीय न्यायमूर्तित श्रीमती मंजू रानी चौहान 1. आवेदक के लिलए मिवद्वान अतिधवक्ता श्री श्याम सु ंदर मिमश्रा के संतिक्षप्त धारक मिवद्वान अतिधवक्ता श्री राजीव मिद्ववेदी, और राज्य के लिलए मिवद्वान ए.जी.ए. श्री डी.पी. सिंसह को सुना र्गया और अभिEलेख का परिरशीलन मिकया र्गया। 2. दं.प्र.सं. की धारा 482 के अंतर्ग(cid:21)त यह आवेदन, आरोप पत्र मिदनांमिकत 09.10.2022 और संज्ञान आदेश/समन आदेश मिदनांमिकत 23.02.2024 के साथ-साथ मुकदमा अपराध संख्या 171/2024 अन्तर्ग(cid:21)त धारा 354, 452, 504, 323 Eा.दं.सं., थाना- कोतवाली, जिजला-फतेहपुर से उद्भूत अपरातिधक मुकदमा सं. 171/2024 (राज्य बनाम मोहम्मद रिरजवान खान और अन्य), जो जिसमिवल जज (जूमिनयर तिडवीजन)/ एफ.टी.सी/ सी.ए.डब्ल्यू, फतेहपुर की अदालत में लंमिबत है, की सम्पूर्ण(cid:21) काय(cid:21)वाही को रद्द करने के लिलए दायर मिकया र्गया है। 3. आवेदकों के मिवद्वान अतिधवक्ता ने प्रस्तुत मिकया मिक मिदनांक 13.09.2022 की घटना के लिलए, आवेदक मोहम्मद रिरजवान खान, र्गुड्डू उफ(cid:21) मोहम्मद रेहान और मोहम्मद नदीम खान के लिखलाफ प्रतितपक्षी संख्या 2 द्वारा मिदनांक 15.09.2022 को लर्गEर्ग 17:21 बजे Eा.दं.सं. की धारा 354, 452, 323, 504 के तहत एफआईआर दज(cid:21) की र्गई है। मिववेचना के बाद आवेदकों के लिखलाफ मिदनांक 09.10.2022 को आरोप पत्र प्रस्तुत मिकया र्गया, जिजस पर संबंतिधत न्यायालय ने के वल दो व्यमिक्तयों, यानी मोहम्मद रिरजवान खान और र्गुड्डू उफ(cid:21) मोहम्मद रेहान के लिखलाफ मिदनांक 23.02.2024 को संज्ञान लिलया, मिबना यह उल्लेख मिकए मिक आरोपी मोहम्मद नदीम खान को दोषमुक्त क्यों मिकया र्गया और उन्हें समन क्यों नहीं मिकया जा रहा है। इस प्रकार, संबंतिधत अदालत ने मिदनांक 23.02.2024 का संज्ञान/ 2 समन आदेश मिबना न्यातियक मिववेक का प्रयोर्ग मिकये और मिबना कोई कारर्ण बताए पारिरत मिकया है और यह अस्पष्ट, संमिदग्ध और मिनरथ(cid:21)क है। उन्होंने आर्गे दलील दी मिक समन आदेश के अवलोकन से पता चलता है मिक काया(cid:21)लय को आवेदकों, यानी मोहम्मद रिरजवान खान और र्गुड्डू उफ(cid:21) मोहम्मद रेहान को समन करने का मिनदdश देने के अलावा, इसके समथ(cid:21)न में कोई कारर्ण नहीं बताया र्गया है। इसलिलए, उन्होंने दलील दी मिक 23.02.2024 के आक्षेमिपत संज्ञान/समन आदेश को रद्द मिकया जाना चामिहए। 4. मिवद्वान ए.जी.ए. आवेदकों के मिवद्वान अतिधवक्ता द्वारा प्रस्तुत मिकए र्गए तकe की सत्यता पर प्रतितवाद नहीं मिकया और यमिद संज्ञान/समन आदेश को रद्द कर मिदया जाता है तो उन्हें कोई आपलित्त नहीं है। 5. पक्षकारों के मिवद्वान अतिधवक्ता द्वारा प्रस्तुत तकe पर मिवस्तृत और र्गहन मिवमश(cid:21) करने के पश्चात, तथा आवेदन के समस्त अभिEलेखों का सूक्ष्म और समग्र अवलोकन करने के उपरांत, यह माननीय न्यायालय इस मिनष्कष(cid:21) पर पहु ँचती है मिक मिदनांक 23.03.2024 का संज्ञान/समन आदेश अधीनस्थ न्यायालय द्वारा मिबना समुतिचत मिववेकाधीन शमिक्त के प्रयोर्ग और मिबना मिकसी स्पष्ट कारर्ण के पारिरत मिकया र्गया है। उक्त आदेश में यह उल्लेलिखत नहीं मिकया र्गया मिक अभिEयुक्त मोहम्मद नदीम खान को दोषमुक्त मिकए जाने का कारर्ण क्या था, अथवा उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने के लिलए क्यों नहीं बुलाया र्गया। 6. यह मिवतिधक जिसद्धांत दीघ(cid:21)काल से स्थामिपत और सुव्यवस्थिस्थत है मिक मिकसी Eी आदेश, चाहे वह प्रशासमिनक प्रकृ तित का हो या न्यातियक, उसमें तक(cid:21) पूर्ण(cid:21) और मिवतिधक आधारों के रूप में स्पष्ट कारर्णों का उल्लेख अपरिरहाय(cid:21) होता है। यह के वल एक मिवतिधक औपचारिरकता नहीं, बस्थिल्क न्यातियक प्रमिqया का एक बुमिनयादी और अभिEन्न अंर्ग है। कारर्ण मिकसी Eी मिनर्ण(cid:21)य की आधारभिशला होते हैं और मिनर्ण(cid:21)य के पीछे की न्यातियक मंशा और तक(cid:21) शीलता को प्रकट करते हैं। यमिद मिकसी आदेश में कारर्णों का अEाव हो, तो वह आदेश न के वल मिवतिधक दृमिष्ट से दुब(cid:21)ल हो जाता है, अमिपतु न्यातियक प्रमिqया के मूल जिसद्धांतों के साथ Eी अन्याय करता है। 7. अतितरिरक्त रूप से, न्यातियक प्रमिqया में कारर्ण लेखन की अमिनवाय(cid:21)ता का प्रमुख ध्येय यह है मिक यह न्यायाधीश की व्यमिक्तमिनष्ठता को मिनयंमित्रत करते हुए मिनष्पक्ष और वस्तुमिनष्ठ मिनर्ण(cid:21)य प्रदान करता है। यह सुमिनतिश्चत करता है मिक कोई Eी मिनर्ण(cid:21)य पूवा(cid:21)ग्रह या मिनजी दृमिष्टकोर्ण के 3 आधार पर नहीं, बस्थिल्क तथ्यों और प्रमार्णों के मिनरपेक्ष मिवश्लेषर्ण के आधार पर पारिरत मिकया जाए। इसके साथ ही, मिनर्ण(cid:21)य में कारर्ण दज(cid:21) करने की यह प्रमिqया मिनर्ण(cid:21)य की पारदर्शिशता को Eी प्रकट करती है, जिजससे संबद्ध पक्षों को यह समझने में सहायता मिमलती है मिक उनके मामले में न्यायालय द्वारा मिकस प्रकार का मिववेकातिधकार प्रयोर्ग मिकया र्गया है और मिकन आधारों पर मिनर्ण(cid:21)य लिलया र्गया है। 8. यह Eी अत्यंत महत्वपूर्ण(cid:21) है मिक कारर्ण लेखन की यह प्रमिqया 'प्राकृ तितक न्याय' के जिसद्धांत का अंर्ग मानी जाती है। यह न्यातियक मिनष्पक्षता, पारदर्शिशता, और मिनर्ण(cid:21)य की उत्तरदातियत्वता सुमिनतिश्चत करने का आवश्यक साधन है। यमिद मिकसी आदेश या मिनर्ण(cid:21)य में समुतिचत कारर्ण दज(cid:21) नहीं मिकए र्गए हैं, तो संबद्ध पक्षों के लिलए यह समझ पाना कमि}न हो जाता है मिक उनके लिखलाफ मिकस प्रकार के आधारों पर आदेश पारिरत मिकया र्गया है, जिजससे न्याय का उद्देश्य असफल हो सकता है। न्यायपालिलका का यह परम कत(cid:21)व्य है मिक वह प्रत्येक मिनर्ण(cid:21)य में पारदर्शिशता, मिनष्पक्षता और तक(cid:21) शीलता का पालन करे, तामिक मिवतिध के शासन में जनता का मिवश्वास दृढ़ और अक्षुण्र्ण बना रहे। 9. सव(cid:129)च्च न्यायालय द्वारा संत लाल र्गुप्ता और अन्य बनाम मॉडन(cid:21) कोऑपरेमिटव ग्रुप हाउसिंसर्ग सोसाइटी लिलमिमटेड और अन्य1, के मामले में मिनम्नानुसार अवधारिरत मिकया है: "27. यह एक स्थामिपत कानूनी प्रस्ताव है मिक न के वल प्रशासमिनक बस्थिल्क न्यातियक आदेशों को Eी इसमें दज(cid:21) कारर्णों द्वारा समर्शिथत होना चामिहए ... कारर्ण प्रत्येक मिनष्कष(cid:21) का मूल है। यह एक आदेश में स्पष्टता लाता है और इसके मिबना, आदेश बेजान हो जाता है। कारर्ण व्यमिक्तपरकता को वस्तुमिनष्ठता से बदल देते हैं। कारर्णों की अनुपस्थिस्थतित एक आदेश को अप्रतितरोध्य/अस्थायी बना देती है, खासकर जब आदेश को उच्च मंच के समक्ष आर्गे चुनौती दी जा सकती है। कारर्णों की रिरकॉर्डिंडर्ग प्राकृ तितक न्याय का जिसद्धांत है और प्रत्येक न्यातियक आदेश को लिललिखत रूप में दज(cid:21) कारर्णों द्वारा समर्शिथत होना चामिहए। यह मिनर्ण(cid:21)य लेने में पारदर्शिशता और मिनष्पक्षता सुमिनतिश्चत करता है। जिजस व्यमिक्त पर प्रतितकू ल प्रEाव पड़ता है, उसे पता होना चामिहए मिक उसका आवेदन क्यों खारिरज मिकया र्गया है।" (हिंहदी अनुवामिदत) 10. इस प्रकरर्ण में सव(cid:129)च्च न्यायालय द्वारा प्रतितपामिदत मिवतिधक जिसद्धांतों का अनुकरर्ण करते हुए, इस न्यायालय का यह स्पष्ट मत है मिक मिदनांक 23.02.2024 को पारिरत आक्षेमिपत संज्ञान/समन आदेश में मिकसी प्रकार के मिवतिधक तक(cid:21) या कारर्ण का अEाव है। मिकसी Eी न्यातियक आदेश का }ोस कारर्णों और मिवतिधक आधारों पर समर्शिथत होना अमिनवाय(cid:21) है, और 1 (2010) 13 एससीसी 336 4 उक्त आदेश का इन आवश्यकताओं से रमिहत होना इसे मिवतिधक दृमिष्ट से दुब(cid:21)ल और अस्थिस्थर बनाता है। अतः यह आक्षेमिपत संज्ञान/समन आदेश न्यातियक दृमिष्टकोर्ण से बलहीन है और मिवतिधक परिरप्रेक्ष्य में पोषर्णीय नहीं कहा जा सकता। 11. तदनुसार, इस न्यायालय द्वारा यह मिनर्ण(cid:21)य लिलया जाता है मिक मिदनांक 23.02.2024 को संबंतिधत न्यायालय द्वारा पारिरत संज्ञान/समन आदेश को मिनरस्त मिकया जाए, क्योंमिक यह मिवतिधक मानदंडों और न्यातियक मिववेक के अEाव में पारिरत मिकया र्गया है। यह आदेश न्यातियक प्रमिqया के उन मौलिलक जिसद्धांतों का उल्लंघन करता है जिजनके अंतर्ग(cid:21)त मिकसी Eी न्यातियक मिनर्ण(cid:21)य में पया(cid:21)प्त कारर्णों का उल्लेख मिकया जाना आवश्यक है। 12. इसके अतितरिरक्त, यह मिनदdश मिदया जाता है मिक संबंतिधत न्यायालय, इस न्यायालय द्वारा पारिरत आदेश की प्रमाभिर्णत प्रतित प्राप्त होने की तितभिथ से एक माह के Eीतर, समस्त अभिEलेखों और तथ्यों का सम्यक अवलोकन कर, मिवतिध के अनुसार, एक नया, मिवतिधसम्मत, आख्यातियत एवं तक(cid:21) संर्गत आदेश पारिरत करेर्गा। नया आदेश पारिरत करते समय न्यायालय यह सुमिनतिश्चत करेर्गा मिक उस आदेश में पया(cid:21)प्त तक(cid:21) , प्रमाभिर्णक आधार और मिवतिधक मिनष्कष(cid:21) स्पष्ट रूप से उजिल्ललिखत हों, तामिक न्याय की प्रमिqया का सम्यक मिनव(cid:21)हन हो सके । 13. यह Eी सुमिनतिश्चत मिकया जाना चामिहए मिक संबंतिधत न्यायालय अपने मिनर्ण(cid:21)य में उतिचत कारर्णों का उल्लेख करते हुए, पक्षकारों के अतिधकारों और तथ्यों की मिवस्तृत समीक्षा के बाद मिनष्कष(cid:21) पर पहु ँचे। इस प्रकार का आदेश न के वल मिवतिध की दृमिष्ट से उतिचत होर्गा, बस्थिल्क न्यायालय की मिनष्पक्षता, पारदर्शिशता और उत्तरदातियत्व का Eी प्रमार्ण होर्गा, जो मिक न्यातियक प्रमिqया के मूलEूत जिसद्धांतों में से एक है। 14. उपरोक्त मिनदdशों एवं मिटप्पभिर्णयों के आलोक में, प्रस्तुत आवेदन स्वीकृ त मिकया जाता है। 15. काया(cid:21)लय को मिनदdभिशत मिकया जाता है मिक इस आदेश की प्रमाभिर्णत प्रतित एक सप्ताह की अवतिध के Eीतर संबंतिधत न्यायालय को प्रेमिषत की जाए, तामिक मिवतिधक प्रमिqया का सम्यक् अनुपालन सुमिनतिश्चत हो सके । आदेश मिदनांक:- 11.9.2024 जिजतेन्द्र/- (न्यायमूर्तित मंजू रानी चौहान)

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