Manti Devi v. Prahlad and others) passed under Section
Case Details
Neutral Citation No. - 2024:AHC:151173 Court No. - 74 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 16837 of 2024 Applicant :- Prahlad And 3 Others Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Rajesh Dwivedi Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Saurabh Shyam Shamshery,J. Applicants before this Court are being summoned by impugned order dated 09.04.2024 passed in Complaint Case No.228 of 2024 (Manti Devi Vs. Prahlad and others) passed under Section 204 Cr.P.C. whereas applicant Nos.1, 2 and 3 are summoned under Sections 392, 452, 354, 323, 504, 506 I.P.C. and applicant No.4- Kalawati is summoned under Sections 392, 452, 323, 504, 506 I.P.C., Police Station- Moosanagar, District- Kanpur Dehat.
Legal Reasoning
Learned counsel for applicants submits that present proceedings are malafide and it was a reason that applicants have approached this Court by way of filing an application under Section 482 Cr.P.C. Since applicants' side lodged an FIR on 07.12.2018 and thereafter a complaint case was filed wherein they have been summoned by 25.01.2023. He further submits that son of complainant was absconding and his bail application was rejected on 29.01.2024 and in order to put pressure on applicants' side two occurrence were mentioned. First on 29.01.2024 and thereafter on 31.03.2024. Learned counsel further submits that allegedly on 29.01.2024, an offence was committed under Section 392 I.P.C., however, no prompt FIR or complaint was filed. Later on it was alleged that on 31.03.2024, again an occurrence took place. I have considered above submission and carefully perused the impugned order which is reproduced hereinafter :- "ददिनननांक -09.04.2024 पतनवलली पपेश हहई। तलबली कपे दबन्दिद पर वनददिनली कपे अधधिवकन कको सदनन गयन तथन पतनवलली कन अवलकोकन दकयन गयन। पररवनदिपत कपे कथन सनांकपेप मम इस प्रकनर हहै दक पररवनददिनली कपे दनरन प्रस्तदत पररवनदि इस आशय सपे प्रस्तदत दकयन दक ददिनननांक 29.01.2024 ककी रनदत लगभग ग्यनरह बजपे जब यह अपनपे घर मम सको रहली थली तभली घर ककी दिलीवनर फननांदिकर प्रहलनदि, रनम धखिलनवन, सनांतकोष घर कपे अन्दिर घदस आयपे और कमरपे मम घदसकर लकोहपे कन बकसपे कन तनलन खिकोलकर उसमम रखिन पन्द्रह हजनर रुपयपे, एक सकोनपे ककी जनांजलीर, एक जकोडली कनन ककी झदमककी, दिको सकोनपे ककी अगगूठली, चननांदिली ककी एक जकोडली पनयल लगूटकर भनग जननपे लगपे , तभली खिटपट ककी आवनज सदनकर यह जनग गयली और अदभयदकक्तों कको पकडनपे कन प्रयनस दकयन तको तलीनको उसपे जकोर कन धिक्कन मनरतपे हहयपे भनग गयम। ददिनननांक-31.01.2024 कको सदबह आठ बजपे प्रहलनदि, रनम धखिलनवन, सनांतकोष व कलनवतली घर ककपे अन्दिर घदस आयपे और मनमाँ बहन ककी गनधलयक्तों दिपेकर जनन सपे मनरनपे ककी धिमककी दिली तथन उसपे लनत घगूसक्तों थप्पडक्तों सपे मनरनपलीटन व छपेडछनड ककी। पररवनददिनली मननतली दिपेवली नपे अपनपे बयनन अनां०धिनरन- 200 दिनां०प्र०सनां० मम कथन दकयन दक ददिनननांक 29.01.2024 कको समय लगभग 11 बजपे प्रहलनदि, रनम धखिलनवन, सनांतकोष उसकपे घर मम घदस आयपे, खिटपट ककी आवनज पर उसककी आनांखि खिदलली तको दिपेखिन दक उसकपे बक्सपे कन तनलन टगूटन थन, उसमम रखिन सनमनन एक सकोनपे ककी चपेन, झदमककी एक जकोडली, दिको सकोनपे ककी अनांगगूठली, एक जकोडली चननांदिली ककी पनयल लगूट कर भनगनपे लगपे। जब उसनपे पकडनन चनहन तको उन लकोगक्तों नपे उसपे धिक्कन मनरकर दगरन ददियन। सदबह आठ बजपे रनम धखिलनवन , प्रहलनदि, सनांतकोष व कलनवतली उसकपे घर कपे अन्दिर घदस आयपे व लनत घगूसक्तों थप्पडक्तों सपे मनरन पलीटन तथन उसकपे सनथ सनांतकोष, रनम धखिलनवन, प्रहलनदि नपे छपेडछनड ककी। मनरपलीट ककी आवनज सदनकर आस पनस कपे लकोग आ गयपे धजनकको दिपेखिकर सब लकोग जनन सपे मनरनपे ककी धिमककी दिपेकर भनग गयपे सनकली अनलीतन नपे अपनपे बयनन अ०धिनरन -202 दिनां०प्र०सनां० मम कथन दकयन दक घटनन ददिनननांक-29.01.2024 कको रनत कपे लगभग 11 बजपे मननतली सपे घर अन्दिर घदसकर उनकपे बक्सपे कन तनलन तकोडकर नगदि पन्द्रह हजनर रूपयपे, एक सकोनपे ककी जनांजलीर, एक जकोडली कनन ककी झदमककी, दिको सकोनपे ककी अनांगगूठली व चननांदिली ककी पनयल गननांव कपे हली प्रहलनदि , रनम धखिलनवन, सनांतकोष लगूट धलयपे थपे, मननतली नपे शकोर सदनकर इन लकोगक्तों कको पकडनपे कन प्रयनस दकयन तको मननतली कको धिक्कन दिपेकर उक लकोग भनग गयपे। इसकपे बनदि ददिनननांक - 31.03.2024 कको प्रनततः आठ बजपे प्रहलनदि, कलनवतली, रनम धखिलनवन, सतकोष मननतली कपे घर आकर गनलली गललौज करनपे लगपे तथन पदधलस मम दशकनयत करनपे पर जनन सपे मनरनपे ककी धिमककी दिली। सनकली शपेष ननरनयण नपे अपनपे बयनन अनां० धिनरन 202 दिनां०प्र०सनां० मम कथन दकयन दकतः- ददिनननांक-25.01.2024 कको रनत लगभग 11 बजपे प्रहलनदि, रनम धखिलनवन, सनांतकोष उसकपे घर मम घदसकर उसककी सननपे ककी जनांजलीर , कनन कपे एक जकोडली बनलन, दिको सकोनपे ककी अनांगगूठली व चननांदिली ककी पनयल लगूट लली मननतली नपे उसकको पकडन थन तको तलीनक्तों उसपे धिक्कन दिपेतपे हहयपे भनग गयपे। इसली कनरण ददिनननांक-31.03.2024 कको सदबह आठ बजपे रनम धखिलनवन, कलनवतली, सनांतकोष व प्रहलनदि नपे उनकपे घर मम घदसकर लनत घगूसक्तों थप्पडक्तों सपे मननतली कको मनरनपलीटन तथन उसकपे कपडपे फनड ददियपे थपे। कननगूनली कनयरवनहली करनपे पर जनन सपे मनरनपे ककी धिमककी दिली हहै। इस प्रकनर प्रस्तदत प्रकरण मम पररवनदिपत मम उदल्लिधखित तथ्यक्तों, पररवनददिनली कपे सनक्ष्य तथन अनलीतन व शपेष ननरनयन कपे सनक्ष्य सपे यह पररलदकत हकोतन हहै दक दवपकलीगण प्रहलनदि , कलनवतली, रनम धखिलनवन व सनांतकोष नपे पररवनददिनली कपे घर मम घदसकर रूपयपे व जपेवरक्तों कको लगूटन तथन ददिननक-31.01.2024 कको सदबह आठ बजपे उक सभली नपे पररवनददिनली कपे घर मम घदसकर उसपे गनांदिली-गनांदिली गनधलयनमाँ दिली व जनन सपे मनरनपे ककी धिमककी दिपेकर लनत घगूसक्तों सपे मनरन पलीटन तथन प्रहलनदि, रनम धखिलनवन व सनांतकोष नपे उसकपे सनथ छपेडखिननली ककी। ऐसली सस्थदत रनम धखिलनवन व सनांतकोष अ०धिनरन- मम दवपकलीगणण प्रहलनदि , - भन०दिनां०स० तथन कलनवतली अ०धिनरन 392,452,354,323,504,506 392,452,323,504,506 भन०दिनां०सनां० मम प्रथम दृष्टयन दवचनरण हपेतद तलब दकयपे जननपे यकोग्य हहै। आदिपेश दवपकलीगण प्रहलनदि, रनम धखिलनवन व सतकोष अ०धिनरन-392,452,354,323,504,506 भन०दिनां०सनां० तथन कलनवतली अनां०धिनरन - 392,452,323,504,506 भन०दिनां०सनां० मम दवचनरण हपेतद तलब दकयपे जनतपे हहै। दवपकलीगण कको नकोदटस दनगरत ककी जनयपे। पतनवलली वनस्तपे हनधजरली ददिननक-15.4.24 कको पपेश हको।" The contents of complaint is being completely supported by statement of complainant and witnesses. The victim on oath has reiterated about allegation of outrage of modesty. Learned Magistrate has also assigned reasons that there are sufficient grounds to proceed against applicants under different offence. The argument of learned counsel for applicants in regard to attending circumstances, could not be considered to be a valid ground since there is no reason that complainant would wait for six years to file a complaint. The immediate occurrence of rejection of bail application would also not be relevant material that proceedings initiated at instance of the complainant could be considered to be a counter-blast. In the aforesaid circumstances, I do not find that an argument of attending circumstances, is sufficient to quash impugned order which has been passed after careful consideration of material on record so much as applicants were summoned according to their alleged role in two occurrence occurred within a gap of two days. Accordingly, application is rejected. Order Date :- 17.9.2024 P. Pandey