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Case Details

Neutral Citation No. - 2024:AHC:145307 Court No. - 74 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 14091 of 2024 Applicant :- Mohan Yadav And 4 Others Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Mahendra Ram Maurya Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Saurabh Shyam Shamshery,J. 1. Heard Sri Prem Shankar, Advocate holding brief of Sri Mahendra Ram

Legal Reasoning

Maurya, learned counsel for applicants and perused the record. 2. I find merit in the argument of learned counsel for applicants that impugned order passed under Section 204 Cr.P.C. is bereft of an application of mind. In entire complaint as well as in the statements recorded under Sections 200 and 202 Cr.P.C. there was no allegation of criminal breach of trust, still applicants have been summoned under Section 406 IPC also. 3. In order to further appreciate the submission of learned counsel for applicants, impugned summoning order dated 18.03.2024, in its entirety, is reproduced hereinafter: "पतत्रावलली आज वत्रास्तते आदतेशत्रारर ननियत हहै। पररिवत्रादली दत्रारित्रा नदयते गयते पररिवत्राद पत कत्रा अवललोकनि नकयत्रा। पररिवत्रादली ममुखबरि सससिंह निते यह पररिवत्राद नवरुद्ध नवपकलीगण मलोहनि यत्रादव , पपूनिम, रितेशमत्रा दतेवली, शलीलत्रा दतेवली व ससिंदलीप कमु मत्रारि कते नवरुद्ध इस न्यत्रायत्रालय मम प्रस्तमुत नकयत्रा हहै। पररिवत्रादली दत्रारित्रा अपनित्रा बयत्रानि अन्तगरत धत्रारित्रा 200 दसिं०प्र.स. मम यह करनि नकयत्रा गयत्रा हहै नक नदनित्रासिंक 11.06.2023 शत्राम 09:00 बजते शत्राम कलो मतेरिते घरि परि मतेरिली पत्निली नवनिलोदत्रा दतेवली, कक ष्णत्रा यत्रादव ,आनदत्य यत्रादव (नित्रातली) रते। मतेरिते घरि परि 7 व्यनक्ति मलोहनि पमुत उत्तरि पत्राल सससिंह, पपूनिम पत्निली निलीरिज यत्रादव, रितेशमत्रा दतेवली पत्निली स्व० रित्रामवलीरि सससिंह, ससिंदलीप कमु मत्रारि पमुत स्व. रित्रामवलीरि सससिंह, शलीलत्रा दतेवली पत्निली ससिंदलीप कमु मत्रारि व दलो अजत्रात ललोग कत्रालते रिसिंग ककी जलीप सते मतेरिते घरि आयते। मतेरिते घरि कते असिंदरि घमुस आयते औरि मतेरिली पत्निली कते सत्रार गत्रालली गललौज ककी औरि हत्रार मरिलोडत्रा रत्रा। घरि मम रिखते 5 लत्राख रूपयते लते सलयते। पत्निली कते जतेवरि जलो पहनिते रते जलो कत्रानि मम कमु सिं डल औरि गलते मम चतेनि छलीनि सलयते। मतेरिते नित्रातली कक ष्णत्रा औरि आनदत्य जबरिदस्तली पकडकरि कते लते जत्रानिते लगते। पत्निली निते जब शलोरि मचत्रायत्रा तलो पडलोस कते रिवलीश यत्रादव, गलीरिलीश चन्द्र यत्रादव, नववतेक कमु मत्रारि औरि असिंतरित्राम सससिंह आ गयते। तब यह 7 ललोग गत्राडली मम बहैठ करि भत्राग गयते। मम रत्रानिते गयत्रा रत्रा, तलो मतेरिली ररिपलोरर निहहीं सलखली गयली। कपत्रानि सत्राहब कलो रिसजस्रट ली ककी , नकन्तमु कलोई कत्रायरवत्राहली निहहीं हहयली। सत्राकलीगणणों कते बयत्रानि अन्तगरत धत्रारित्रा 202 दसिं.प्र.ससिं. मम पली०डब्लपू०-1 पली०डब्लपू० 2 नववतेक कमु मत्रारि कते असिंनकत नकयते गयते। समुनित्रा तरत्रा पतत्रावलली कत्रा अवललोकनि नकयत्रा। न्यत्रायत्रालय दत्रारित्रा यह दतेखत्रा जत्रानित्रा हहै नक दलौरित्रानि जत्रासिंच कत्रायरवत्राहली पतत्रावलली परि उपलब्ध सत्राक्ष्य कते आधत्रारि परि नवपकलीगण कते नवरुद्ध प्ररम दृष्टयत्रा कत्रायरवत्राहली नकयते जत्रानिते कत्रा आधत्रारि पयत्रारप हहै अरवत्रा निहहीं? पररिवत्रादली कते बयत्रानि अन्तगरत धत्रारित्रा 200 दसिं.प्र.ससिं. कते अवललोकनि सते यह नवनदत हहै नक पररिवत्रादली ममुखबरि सससिंह दत्रारित्रा मतेरिते घरि परि 7 व्यनक्ति मलोहनि पमुत उत्तरि पत्राल सससिंह, पपूनिम पत्निली निलीरिज यत्रादव, रितेशमत्रा दतेवली पत्निली स्व० रित्रामवलीरि सससिंह , ससिंदलीप कमु मत्रारि पमुत स्व० रित्रामवलीरि सससिंह, शलीलत्रा दतेवली पत्निली ससिंदलीप कमु मत्रारि व दलो अजत्रात ललोग कत्रालते रिसिंग ककी जलीप सते मतेरिते घरि आयते। मतेरिते घरि कते असिंदरि घमुस आयते औरि मतेरिली पत्निली कते सत्रार गत्रालली -गललौज ककी औरि हत्रार मरिलोडत्रा रत्रा। घरि मम रिखते 5 लत्राख रूपयते लते सलयते। पत्निली कते जतेवरि जलो पहनिते रते, जलो कत्रानि मम कमु सिं डल औरि गलते मम चतेनि छलीनि सलयते तरत्रा धत्रारित्रा 202 दसिंड प्रनक्रियत्रा ससिंनहतत्रा कते बयत्रानि पली .डब्लपू. - 1 प्रत्राग सससिंह व पली उब्लपू 2 नववतेक कमु मत्रारि सते स्पष्ट हहै नक नवपकलीगण मलोहनि यत्रादव, पपूनिम, रितेशमत्रा दतेवली, शलीलत्रा दतेवली व ससिंदलीप कमु मत्रारि निते पररिवत्रादली कते पररिवत्रारिलीजनिणों कते सत्रार गत्रालली गललौज दतेकरि उनिकते सत्रार मत्रारिपलीर ककी तरत्रा पररिवत्रादली कते पररिवत्रारिलीजनिणों कलो जत्रानि सते मत्रारिनिते ककी धमककी दतेतते हहयते , घरि मम रिखते 5 लत्राख रूपयते लते गयते। पतत्रावलली कते अवललोकनि सते स्पष्ट हहै नक पररिवत्रादली दत्रारित्रा प्रस्तमुत पररिवत्राद पत एवसिं सत्राकलीगण कते सत्राक्ष्य कते आधत्रारि परि नवपकलीगण मलोहनि यत्रादव , पपूनिम, रितेशमत्रा दतेवली , शलीलत्रा दतेवली व ससिंदलीप कमु मत्रारि कते नवरुद्ध प्ररम दृष्टयत्रा मत्रामलत्रा अन्तगरत धत्रारित्रा 323, 504, 506 व 406 भत्रारितलीय दसिंड ससिंनहतत्रा कत्रा मत्रामलत्रा कत्रा बनितत्रा प्रतलीत हलोतत्रा हहै। आदतेश नवपकलीगण मलोहनि यत्रादव, पपूनिम, रितेशमत्रा दतेवली, शलीलत्रा दतेवली व ससिंदलीप कमु मत्रारि कते नवरुद्ध प्ररम दृष्टयत्रा मत्रामलत्रा अन्तगरत धत्रारित्रा - 323, 504, 506 व 406 भत्रारितलीय दसिंड ससिंनहतत्रा कते अपरित्राध कते नवचत्रारिण हतेतमु न्यत्रायत्रालय मम नदनित्रासिंक 15.04.2024 कते सलए तलब नकयत्रा जत्रावते। पररिवत्रानदनिली वत्रासिंनछत पहैरिवली दस कते अन्दरि करिते तरत्रा सलस्र गवत्राहत्रानि भली दत्रासखल करिते। बत्राद पहैरिवली नवपकली कते नवरुद्ध सम्मनि जत्रारिली हलो।" 4. Considering the above and taking note of above referred impugned order, this Court is of the considered opinion that no case can be made out on basis of allegations made in complaint as well as statements for offence of criminal breach of trust. It appears that Magistrate concerned has passed impugned order not only by not applying her judicial mind but by closing her eyes also. Therefore, impugned order in its present form does not legally survive. 5. The application is partly allowed. Impugned summoning order dated 18.03.2024 passed by Judicial Magistrate, Court No. 2, Mainpuri in Complaint Case No. 667 of 2023 (Mukhbar Singh vs. Mohan Yadav and others), under Sections 323, 504, 506, 406 IPC, Police Station Barnahal, District Mainpuri, is hereby set aside. 6. Since this order is passed without issuing notice to Opposite Party No. 2, therefore, matter is remitted back to Trial Court concerned to pass fresh order in accordance with law after taking note of judgments passed by Supreme Court in Lalankumar Singh and others vs. State of Maharashtra, 2022 SCC OnLine SC 1383 and Mohammad Wajid and Another Vs. State of U.P. And Others, 2023 SCC OnLine SC 951 and after hearing complainant only expeditiously, preferably within a period of three months from today, if there is no legal impediment. The Court hopes that on remand, the Magistrate concerned will pass order by applying her judicial mind and with open eyes. 7. A copy of this order be sent to District Judge, Mainpuri and Administrative Judge, Mainpuri. 8. Registrar (Compliance) to take steps. Order Date :- 6.9.2024 AK

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