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Case Details

Neutral Citation No. - 2024:AHC:120654 Court No. - 74 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 8588 of 2024 Applicant :- Matadeen Opposite Party :- State Of Up And 4 Others Counsel for Applicant :- Shri Ram Pandey Counsel for Opposite Party :- Anuj Pratap Singh,G.A. Hon'ble Saurabh Shyam Shamshery,J.

Legal Reasoning

Applicant is aggrieved that his application filed under Section 156 (3) Cr.P.C. was rejected by learned Trial Court that dispute was essentially in a civil nature.Revision thereof was also dismissed, however, he has challenged only subsequent order i.e. order dated 09.01.2024 passed in Revision Petition and for reference its relevant part is mentioned hereinafter :- "७. ममनने पपुनररीक्षणकररर्ता कने वविदरन अधधिविकर एविवं सहरयक धजिलर शरसककीय अधधिविकर फफौजिदरररी एविवं प्रत्यरर्थीगण कने वविदरन अधधिविकर कने रकरवं कको सपुनर वि पतरविलरी कर अविलकोकन वकयर। ८. पपुनररीक्षणकररर्ता ककी ममूल आपधत्ति यह हहै वक वविदरन अधिरीनस्र न्यरयरलय दररर परररर आदनेश वदनरवंवकर १५.११.२२ वविधधि वविरूद्ध हहै जिको करवबिलने खरररजि हहै। वविदरन अधिरीनस्र न्यरयरलय दररर उपरकोक आदनेश परररर कररने समय अपनने मसस्रष्क कर पमूणर्तारतः उपयकोग नहह वकयर हहै। वनगररनरीकररर्ता कने दररर प्रत्यरर्थीगण १ लगरयर ५ कने वविरूद्ध वदनरवंक २५. ९. २२ ककी घटनर कने सवंबिवंधि मम अगलने वदनरवंक २६ .३. २२ कको ररनर मउररनरीपपुर मने धलधखर प्रररर्तानरपत वदयर एविवं वदनरवंक २९. ९. २२ कको विररष्ठ पपुधलस अधिरीक्षक झरवंसरी कको रधजिस्टरर्ता ररक सने बिरविर ररपकोटर्ता दजिर्ता करविरनने प्रररर्तानरपत प्रस्रपुर वकयर , ककोई करयर्ताविरहरी नहह हकोनने पर वदनरवंक ११. १०. २२ कको ररी. आइ. जिरी पपुधलस झरवंसरी, मपुख्यमवंतरी उ. प्र. शरसन कको भरी प्रररर्तानरपत भनेजिने वकन्रपु ररपकोटर्ता दजिर्ता नहह हहयरी। इस विरद कको वनगररनरीकररर्ता दररर अपनने धिररर १५६ (३) द.प्र.सवं कने प्रररर्तानरपत मने धलखर धजिस पर अधिरीनस्र न्यरयरलय नने ककोई ध्यरन नहह दनेकर करनमूनरी भमूल ककी हहै। वनगररनरीकररर्ता कने दररर प्रस्रपुर धिररर १५६ (३) द.प्र.सवं कने प्रररर्तानरपत पर अधिरीनस्र न्यरयरलय कको सवंबिवंधधिर ररनने पर धसफर्ता यह आख्यर रलबि करनरी ररी वक उक प्रकरण ररनर मउररनरीपपुर मम पमूविर्ता मने दजिर्ता हहै अरविर नहह। इस रथ्य कको दृवष्टिगर नहह करकने अधिरीनस्र न्यरयरलय दररर करनमूनरी भमूल ककी हहै। उक प्रकरण मम वनगररनरीकररर्ता ककी फसल ककी चकोररी हहयरी हहै धजिसने गविरहरन कने दररर दनेखर भरी गयर हहै। ऐसरी सस्रवर मम बिररमदगरी हनेरपु वविविनेचनर हकोनर आविश्यक हहै। ९. पपुनररीक्षणकररर्ता दररर प्रश्नगर प्रकरण मम शनेणरी एक भमूवमधिररी नम्बिररन ४११वम , ४१० / ० . ३९३ हने ० . ७००हने / , सस्रर गरम कपुआगरवंवि रहसरील / ० . ४७८हने , ४११वम मउररनरीपपुर धजिलर झरवंसरी पर ररजिस्वि वनररीक्षक वि लनेखपरल कने दररर पत्रर गढ़ढरी करनने कने , उपररन्र वविपक्षरीगण दररर आररजिरी सवंख्यर ४११ मम लगने वचन्ह वि नसवि पत्रर कको उखररनने उसकने जिपुजि भरग मम खररी वरलरी ककी फसल कको चकोररी करनने वि गरलरी गलफौजि कर जिरन सने मररनने ककी धिमककी दनेनने कर आरकोप लगरयर गयर हहै। वविपक्षरीगण नने अपनरी आपधत्ति मम करन वकयर हहै वक वनगररनरीकररर्ता ककी आररजिरी सवंख्यर ७११ रकबिर ० ककी आररजिरी सवंख्यर ४२० रकबिर ० . ३६८हने . ७००हने वि शरीमररी पपुष्पर दनेविरी . परस परस एक सरर लगने हहए हहै। धजिसककी न्यरयरलय उपधजिलरधधिकरररी मउररनरीपपुर सने बिरद सवंख्यर ३७७ हदबिन्दरी वविपक्षरी सवंख्यर २ वि ३ ककी मरवं एविवं वविपक्षरी सवंख्यर ४ ककी पत्नरी शरीमररी पपुष्परदनेविरी नने / १५ शरीमररी पपुष्णरदनेविरी बिनरम . आर एक्ट कररयरी जिको न्यरयरलय उपधजिलरधधिकरररी दररर वदनरवंक . १० . १८ ककी पपुवष्टि कर दरी। वनगररनरीकररर्ता ककी . आररजिरी प्ररप्त रकबिर आररजिरी नम्बिर ४११ मने ७००विगर्ताफपुट २८०० विगर्तामरीटर २८ वर . वनकरल कर वविपक्षरीगण कको प्ररप्त हको गयरी हहै। धजिसमने वविपक्षरीगण २ लगरयर ५ ० . १७३हने अच्छनेलरल धिररर ४१ एल ३ . ८ . १९ मम उक हदबिन्दरी आख्यर वदनरवंक ६ खनेररी कर रहने हहै। धजिसकने सवंबिवंधि मम अपरील भरी वविचरररधिरीन चल रहरी हहै। पतरविलरी पर न्यरयरलय उपधजिलरधधिकरररी मउररनरीपपुर धजिलर झरवंसरी कने आदनेश वदनरवंवकर ३ . ८ . १९ ककी सत्यप्रवर उपलब्धि हहै धजिसकने पररशरीलन सने वविवदर हहै वक मफौकने पर मरररदरीन उपसस्रर रहने लनेवकन हस्ररक्षर करनने सने मनर वकयर हहै। ररजिस्वि वनररीक्षक ककी सरीमरवंकन आख्यर वदनरवंक ६ . १० . १८ ककी पपुवष्टि ककी जिरररी हहै। धजिससने यह स्पष्टि हकोरर हहै वक हदबिन्दरी हकोनने कने उपररन्र मरररदरीन दररर दबिरयरी गयरी जिमरीन कर वहस्सर वविपक्षरी कने गरटर सवंख्यर मम आ गयर हहै धजिसकको मरररदरीन मरननने कको रहैयरर नहरी हहै और इसरी रवंधजिश कने फलस्विरूप उसकने दररर धिररर १५६ ( ३ ) दवं . प्र . सवं . कर प्रररर्तानरपत प्रस्रपुर वकयर गयर हहै। प्रकरण पमूणर्तारतः धसवविल प्रककवर कर हहै मरत मरमलने कको फफौजिदरररी रवंगर दनेनने कर प्रयरस वकयर जिर रहर हहै जिको वक न्यरयकोवचर नहह हहै। अरतः मरमलने कने समस्र रथ्ययों एविवं पररसस्रवरययों मम आक्षनेवपर आदनेश मम ककोई अविहैधिरवनकरर, अवनयवमररर अरविर अनफौवचत्यरर वविद्यमरन नहह हहै। फलस्विरूप वविदरन मधजिस्टटनेट दररर परररर आक्षनेवपर आदनेश मम हस्रक्षनेप वकए जिरनने ककी आविश्यकरर नहह हहै। वविदरन मधजिस्टटनेट दररर परररर आक्षनेवपर आदनेश वदनरवंवकर १५.११.२२ पपुवष्टि वकए जिरनने यकोग्य हहै। रद्नपुसरर प्रस्रपुर दरसणरक पपुनररीक्षण वनरस्र वकए जिरनने यकोग्य हहै। आदनेश प्रस्रपुर दरसणरक पपुनररीक्षण वनरस्र वकयर जिररर हहै। वविदरन मधजिस्टटनेट दररर परररर आक्षनेवपर आदनेश वदनरवंवकर १५.११.२२ पपुवष्टि वकयर जिररर हहै। पतरविलरी वनयमरनपुसरर दरधखल दफ्रर हको।"

Legal Reasoning

Sri Dhananjay Singh, Advocate, holding brief of Sri Shri Ram Pandey, learned counsel for applicant has not denied that there are litigations pending between parties before Revenue Court and measurement was also conducted and procedure of 'Patthar Gadi' was also conducted, however, later on it was disturbed. It is rightly pointed out by Sri Anuj Pratap Singh, learned counsel opposite party No.2 that there is Revenue Code is complete in itself wherein applicant could have approach thereafter also but it appears the said remedy was not taken. Learned counsel also refers that in one case, appeal is still pending where an inspection report was prepared but the complainant was not ready to sign it. The aforesaid circumstances, it was rightly taken note by Revisional Court that applicant has tried to give cloak of a criminal case to a dispute which is essentially of civil nature. The Court also takes note the observation made by Supreme Court in the case of A.M. Mohan Vs The State represented by SHO and another, 2024 SCC OnLine SC 339 wherein approach of litigants to convert a civil dispute into a criminal dispute was deprecated.

Decision

In the aforesaid circumstances, I do not find that there is any illegality in impugned order and accordingly, prayer made in this application is rejected and application is disposed of. Order Date :- 29.7.2024 P. Pandey

This is the original judgment text as indexed from the source corpus. Always verify against the official court record before relying on it in a filing — you can do so on eCourts or the Supreme Court of India website. ← Search more judgments