Judgment · High Court · 2023
Case at a glance
- Decided
- 13 Jan 2023
Judgment
1 ए . एफ . आर . उ्ሴ न्यायालय छ्ቈीसगढ़ , बि(cid:21)लासपुर रिरट याचि(cid:27)का ( दांचि क ) ्ቅं .- 472/2021 लखन लाल पटेल, आत्मज-स्वग2य ्ቦी ओमकार पटेल, आयु लगभग 40 व्ቧ7, व्यवसाय- नगर बिनरी्ቌक-पुलिलस (व्ቔ7मान में नगर बिनरी्ቌक के पद पर थाना कटघोरा में पदस्थ), बिनवासी- ी-9, (cid:21)ालको, कोर(cid:21)ा, जिजला-कोर(cid:21)ा, छ्ቈीसगढ़। बिवरू्ቍ ---- याचि(cid:27)काक्ቔा7
छ्ቈीसगढ़ राज्य ्ቛारा सचि(cid:27)व, गृह बिवभाग, नया रायपुर, मं्ቔालय, जिजला-रायपुर, छ्ቈीसगढ़।
पुलिलस महाबिनरी्ቌक, (cid:21)स््ቔर रेंज, लाल(cid:21)ाग, जगदलपुर, जिजला-(cid:21)स््ቔर, छ्ቈीसगढ़।
वरिर् पुलिलस अधी्ቌक, जगदलपुर, जिजला-(cid:21)स््ቔर, छ्ቈीसगढ़। ---- उ्ቈरदा्ቔागण -------------------------------------------------- याचि(cid:27)काक्ቔा7 की ओर से राज्य/उ्ቈरदा्ቔा(गण) की ओर से : ्ቦी सौम्य राय, पैनल अचिधव्ሹा। -------------------------------------------------- : ्ቦी शशांक ठाकु र, अचिधव्ሹा। एवं रिरट याचि(cid:27)का ( दांचि क ) ्ቅ .-132/2021 ्ቚमोद ्ቦीवास््ቔव, आत्मज-स्वग2य पी. एन. ्ቦीवास््ቔव, आयु लगभग 51 व्ቧ7, व्यवसाय- नौकरी, उप बिनरी्ቌक-पुलिलस, व्ቔ7मान में (cid:27)ौकी ्ቚभारी के रूप में थाना-प्ቔनाभपुर, जिजला-दुग7, छ्ቈीसगढ़ में पदस्थ। बिवरू्ቍ ----याचि(cid:27)काक्ቔा7
1. छ्ቈीसगढ़ राज्य ्ቛारा सचि(cid:27)व, गृह बिवभाग, नया रायपुर, मं्ቔालय, जिजला-रायपुर, छ्ቈीसगढ़।
2. पुलिलस महाबिनरी्ቌक, (cid:21)स््ቔर रेंज, लाल(cid:21)ाग, जगदलपुर, जिजला-(cid:21)स््ቔर, छ्ቈीसगढ़।
3. वरिर् पुलिलस अधी्ቌक, जगदलपुर, जिजला-(cid:21)स््ቔर, छ्ቈीसगढ़। ( गण ) -------------------------------------------------- याचि(cid:27)काक्ቔा7 की ओर से पैनल अचिधव्ሹा। राज्य/उ्ቈरदा्ቔा(गण) की ओर से -------------------------------------------------- : ्ቦी अबिनल एस. पां ेय, अचिधव्ሹा। ्ቦी सौम्य राय, ---- उ्ቈरदा्ቔा : 2 माननीय न्यायमूቔኌ्ቔ ्ቦी संजय के . अ्ቇवाल माननीय न्यायमूቔኌ्ቔ ्ቦी राके श मोहन पां ेय आदेश (cid:21)ो 7 से पारिर्ቔ (13.01.2023) संजय के . अ्ቇवाल . , न्या
1. (cid:27)ू ंबिक दोनों रिरट याचि(cid:27)काओं में ्ቔथ्यों और बिवचिध का ्ቚ् एक समान है, इसलिलए, उन्हें एक साथ सुना गया और इस आदेश ्ቛारा इनका एक साथ अभिभबिनधा7रण बिकया जा रहा है।
2. याचि(cid:27)काक्ቔा7(गण) ्ቚमोद ्ቦीवास््ቔव और लखन लाल पटेल दोनों थाना-जिसटी को्ቔवाली, जगदलपुर में दज7 धारा 420,467,468 और 471 भार्ቔीय दं संबिह्ቔा के अं्ቔग7्ቔ अपराध की जां(cid:27) में शाबिमल थे और आरोपी अमृ्ቔ लाल पैकरा के बिवरुध्द न्याचियक मजिजस्ट्र ेट ्ቚथम ्ቦेणी, (cid:21)स््ቔर, जगदलपुर के सम्ቌ अपराध ्ቅ.- 498/2013 में अभिभयोग-प्ቔ ्ቚस््ቔु्ቔ बिकया गया था। ्ቔदनुसार, उ्ሹ न्यायालय ्ቛारा बिव(cid:27)ारण ्ቚारम्भ बिकया गया और अं्ቔ्ቔः न्यायालय के बिनण7य बिदनांक 20.06.2019 ्ቛारा आरोपी अमृ्ቔ लाल पैकरा को संदेह का लाभ ्ቚदान कर उपरो्ሹ अपराधों से दो्ቧमु्ሹ कर बिदया। य्ቕबिप, बिनण7य की कቄኌk का-26 में बिव्ቛान न्याचियक मजिजस्ट्र ेट ्ቚथम ्ቦेणी ्ቛारा दोनों याचि(cid:27)काक्ቔा7गण के बिवरुध्द कु छ ्ቚचि्ቔकू ल बिटप्पभिणयां की गई हैं, जिजसके आधार पर, उनके बिवरुध्द दूबि्ቧ्ቔ जां(cid:27) हे्ቔु एक संयु्ሹ बिवभागीय जां(cid:27) अनुल्ሿक-पी/5 के अं्ቔग7्ቔ ्ቚारम्भ की गई थी, जिजसे इन रिरट याचि(cid:27)काओं के माध्यम से (cid:27)ुनौ्ቔी दी गई है।
3. रिरट याचि(cid:27)काओं का बिवरोध कर्ቔे हुए जवा(cid:21) ्ቚस््ቔु्ቔ बिकया गया है जिजसमें कहा गया है बिक की गई बिटप्पभिणयां बिवचिध के अनुसार हैं।
सं(cid:21)ंचिध्ቔ याचि(cid:27)काक्ቔा7(गण) की ओर से उपቄኌस्थ्ቔ बिव्ቛान अचिधव्ሹा ्ቦी अबिनल एस पां ेय एवं ्ቦी शशांक ठाकु र ने कथन बिकया है बिक बिव्ቛान बिव(cid:27)ारण मजिजस्ट्र ेट ्ቛारा यह कह्ቔे हुए याचि(cid:27)काक्ቔा7गण के बिवरुध्द ्ቚचि्ቔकू ल बिटप्पणी करना उचि(cid:27)्ቔ नहीं था बिक, 3 उन्होंने अपने क्ቔ7व्यों का पालन कर्ቔे समय लापरवाही (cid:21)र्ቔी और ्ቔो और उनके बिवरु्ቍ ्ቚचि्ቔकू ल बिटप्पभिणयां करने से पूव7 सुनवाई का कोई अवसर ्ቚदान नहीं बिकया। उनके ्ቛारा माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय के न्यायदृ्ቖां्ቔ राज्य ( एन . सी . टी . बिद्ቤी ) (cid:21)नाम पंकज (cid:27)ौधरी और अन्य 1 में पारिर्ቔ बिनण7य का अवलं(cid:21) लिलया गया और कथन बिकया गया है बिक आ्ቌेबिप्ቔ बिनण7य की कቄኌk का-42 और 43 में याचि(cid:27)काक्ቔा7गण के बिवरुध्द ्ቚचि्ቔकू ल बिटप्पभिणयां को हटाई जानी (cid:27)ाबिहए क्योंबिक अनुल्ሿक पी-5 के ्ቛारा याचि(cid:27)काक्ቔा7गण के बिवरुध्द बिवभागीय जां(cid:27) शुरू की गई है।
राज्य की ओर से बिव्ቛान अचिधव्ሹा ्ቦी सौम्य राय का कथन है बिक बिव्ቛान बिव(cid:27)ारण न्यायालय ्ቛारा अभिभलिललिख्ቔ यह बिनष्क्ቧ7 बिक, याचि(cid:27)काक्ቔा7गण ने अपने क्ቔ7व्यों का बिनव7हन करने में लापरवाही (cid:21)र्ቔी, ्ቔथ्य का सही बिनष्क्ቧ7 है, इसलिलए, याचि(cid:27)काक्ቔा7गण को कोई अनु्ቔो्ቧ ्ቚदान नहीं बिकया जा सक्ቔा है।
हमने प्ቌकारों के बिव्ቛान अचिधव्ሹाओं को सुना, उनके ्ቛारा ऊपर ्ቚस््ቔु्ቔ परस्पर बिवरोधी कथनों पर बिव(cid:27)ार बिकया ्ቔथा अभिभलेख का परिरशीलन अत्यं्ቔ सावधानी पूव7क बिकया।
यह बिनብኌववाबिद्ቔ है बिक याचि(cid:27)काक्ቔा7गण समय-समय पर अपराध ्ቅमांक- 498/2013 की जां(cid:27) में शाबिमल थे ्ቔथा अभिभयु्ሹ अमृ्ቔ लाल पैकरा के बिवरू्ቛ (cid:27)ालान ्ቚस््ቔु्ቔ बिकया गया था और बिव्ቛान मजिजस्ट्र ेट ्ቛारा उसे अपराध से दो्ቧमु्ሹ कर्ቔे हुए कቄኌk का-26 में बिटप्पणी की गई थी बिक उन्होंने लापरवाही (cid:21)र्ቔी एवं जां(cid:27) करने में सजग नहीं रहे हैं। कቄኌk का-26 बिनम्नानुसार उ्ቍृ्ቔ बिकया गया है:- “26 घटना बिदनांक को आरोपी बिकस हैजिसय्ቔ से सं्ቇहालय जगदलपुर में पदस्थ था वह सं्ቇहाध्य्ቌ था या नहीं, यह ्ቚमाभिण्ቔ नहीं है। कलेक्टर एवं सीईओ जनपद फरसगांव के जां(cid:27) ्ቚचि्ቔवेदन के आधार पर जे.आर. भग्ቔ ्ቛारा जां(cid:27) कर कलेक्टर के बिनदyश पर ्ቚथम सू(cid:27)ना रिरपोट7 दज7 करायी गयी है िሗक्ቔु कलेक्टर एवं सीईओ की उ्ሹ जां(cid:27) ्ቚचि्ቔवेदन को अनुसंधान अचिधकारी ्ቛारा ज् ही नहीं बिकया गया है, न ही उसे न्यायालय के सम्ቌ ्ቚस््ቔु्ቔ बिकया गया है जो बिक अनुसंधान अचिधकारी की गंभीर लापरवाही है, जिजन 7 मजदूरों 1 (2019) 11 SCC 575 4 के सं(cid:21)ंध में उनके ्ቛारा साफ सफाई करना व्य्ሹ कर्ቔे हुए राभिश आहरिर्ቔ की गयी है वे 7 मजदूर वास््ቔबिवक अቄኌस््ቔत्व में है या नहीं इसके सं(cid:21)ंध में साቌኚय का बिन्ቔां्ቔ अभाव है ्ቔथा अनुसंधान अचिधकारी ्ቛारा ्ቔत्सं(cid:21)ंध में भी कोई जां(cid:27) नहीं की गयी है। पं(cid:27)नामा ्ቚ. ्ቚी. 7 के सा्ቌी (cid:27)ं्ቖहास मरकाम, सं्ቔु राम मरकाम, लቌኚमण िሺसह दीवान ्ቔीनों ने ही इस (cid:21)ा्ቔ की पुबि्ቖ नहीं बिकया है बिक घटना बिदनांक 01/02/2012 से 10/02/2012 के मध्य भोगापाल ቄኌस्थ्ቔ (cid:21)ु्ቍदेव की ्ቚचि्ቔमा की साफ सफाई नहीं करायी गयी थी।"
(cid:21)हु्ቔ पहले व्ቧ7 1964 में, माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय के संबिवधान पीठ ्ቛारा उ्ቈर ्ቚदेश राज्य (cid:21)नाम मोहम्मद नईम 2 के मामले में यह अभिभबिनधा7रिर्ቔ बिकया गया था बिक उ्ሴ न्यायालय अपनी अं्ቔብኌनबिह्ቔ अचिधकारिर्ቔा का ्ቚयोग कर्ቔे हुए अपने या बिकसी अधीनस्थ न्यायालय ्ቛारा की गई बिटप्पभिणयों को हटा सक्ቔा है यबिद न्यायालय की ्ቚबि्ቅया का दुरुपयोग को रोकने हे्ቔु या अन्यथा, न्याय के उ्ቌेश्यों को ्ቚा् करने हे्ቔु ऐसा करना आवश्यक हो एवं न्यायालय ्ቛारा बिनम्नानुसार म्ቔ व्य्ሹ बिकया गया था:- “9. हम समझ्ቔे हैं बिक बिक (cid:21)म्(cid:21)ई उ्ሴ न्यायालय सही है और उ्ሴ न्यायालय अपनी अं्ቔብኌनबिह्ቔ अचिधकारिर्ቔा का ्ቚयोग कर्ቔे हुए उसके ्ቛारा या बिकसी अधीनस्थ न्यायालय ्ቛारा की गई बिटप्पभिणयों को हटा सक्ቔा है यबिद न्यायालय की ्ቚबि्ቅया का दुरुपयोग को रोकने हे्ቔु या अन्यथा इसके उ्ቌेश्यों को ्ቚा् करने हे्ቔु ऐसा करना आवश्यक हो; ्ቔो यह अचिधकारिर्ቔा असाधारण ्ቚकृ चि्ቔ का है और इसका ्ቚयोग के वल आपवाबिदक मामलों में ही बिकया जाना (cid:27)ाबिहए।"
माननीय न्यायाचिधपचि्ቔ(गण) ्ቛारा, उन व्यबि्ሹयों या ्ቚाचिधकारिरयों के बिवरु्ቍ की गई अपमानजनक बिटप्पभिणयों के हटाये जाने पर बिव(cid:27)ार करने हे्ቔु भी एक जां(cid:27) का मानदं ों(टेस्ट) बिनधा7रिर्ቔ बिकया गया है, जिजनका आ(cid:27)रण बिव(cid:27)ार हे्ቔु न्यायालय के सम्ቌ आ्ቔा है, जिजसका बिनधा7रण उनके ्ቛारा संचि्ቌ् में बिनम्नानुसार बिकया जाना (cid:27)ाबिहए :- (क) क्या वह प्ቌकार(व्यबि्ሹ) जिजसका आ(cid:27)रण ्ቚ्ग्ቔ है, वह न्यायालय के सम्ቌ है या उसके पास स्वयं के बिव्ቧय में सफाई देने या (cid:21)(cid:27)ाव करने का अवसर है? 2 AIR 1964 SC 703 5 (ख) क्या बिटप्पभिणयों को न्यायसंग्ቔ (सही) ठहराने वाले उस आ(cid:27)रण से सं(cid:21)ंचिध्ቔ कोई साቌኚय अभिभलेख पर उपलब्ध है; ्ቔथा (ग) क्या इसके अभिभ्ቐ अंग के रूप में ्ቚकरण के बिनधा7रण हे्ቔु यह आवश्यक है बिक उस आ(cid:27)रण पर ध्यान बिदया जाए। यह भी माना गया है बिक न्याचियक बिनण7य(न्याय दृ्ቖान््ቔ) न्याचियक ्ቚकृ चि्ቔ के होने (cid:27)ाबिहए एवं साधारण्ቔया इसे बिनष्कपट्ቔा, उदार्ቔा एवं आत्मसंयम्ቔा से बिव(cid:27)लिल्ቔ नहीं होना (cid:27)ाबिहए।"
इसी ्ቚकार, ॉ रघु(cid:21)ीर सरन (cid:21)नाम बि(cid:21)हार राज्य के मामले 3 में, माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय ने अभिभबिनधा7रिर्ቔ बिकया है बिक उ्ሴ न्यायालय के पास अपरिरचि(cid:27)्ቔ के बिवरु्ቍ अधीनस्थ न्यायालय के बिनण7य और आदेश में की गई आपलि्ቈजनक बिटप्पभिणयों को हटाने की अं्ቔብኌनबिह्ቔ शबि्ሹ है, ज(cid:21) बिनण7य व आदेश अंचि्ቔम (फाइनल) हो गया हो ्ቔथा माननीय न्यायालय ्ቛारा बिनम्नानुसार जिस्ቍां्ቔों को ्ቚचि्ቔपादन बिकया गया है:- “7-8. उपयु 7्ሹ बिववे(cid:27)ना से बिनम्नलिललिख्ቔ जिस्ቍां्ቔ उभर कर सामने आ्ቔे हैंः- (1) दांचि क न्यायालय का बिनण7य अंचि्ቔम हो्ቔा है; इसे के वल बिवचिध ्ቛारा बिवबिह्ቔ रीचि्ቔ से अपास््ቔ या संशोचिध्ቔ बिकया जा सक्ቔा है। (2) ्ቚत्येक न्यायाधीश को, पदानु्ቅम में उसका पद (रैंक) जो भी हो, बि(cid:21)ना बिकसी भय या प्ቌपा्ቔ के बिकसी भी मामले में अपने बिव(cid:27)ार व्य्ሹ करने का अ्ቚचि्ቔ(cid:21)ंचिध्ቔ अचिधकार होना (cid:27)ाबिहए। (3) बिकसी न्यायाधीश का यह सह-सापे्ቌ और स्व-बिनधा7रिर्ቔ क्ቔ7व्य है बिक वह बि(cid:21)ना बिकसी आधार के अ्ቚासंबिगक बिटप्पणी या म्ቔ अभिभव्य्ሹ न करे, बिवशे्ቧ रूप से ऐसे साचि्ቌयों या प्ቌकारों के ्ቚकरण में जो उसके सम्ቌ उपቄኌस्थ्ቔ नहीं हैं, जो उनके (cid:27)रिर्ቔ या ्ቚचि्ቔ्ा को ्ቚभाबिव्ቔ कर्ቔे हैं। (4) एक अपीलीय न्यायालय के पास ऐसी बिटप्पभिणयों को न्याचियक रूप से सही करने की अचिधकारिर्ቔा है, िሗक्ቔु यह के वल आपवाबिदक मामलों में ऐसा करेगी जहां ऐसी बिटप्पभिणयों से बिकसी सा्ቌी या उसके सम्ቌ उपቄኌस्थ्ቔ न होने वाले बिकसी प्ቌकार को अ्ቚचि्ቔसंहरणीय ्ቌचि्ቔ कारिर्ቔ होगी।
29. ज(cid:21) बिकसी बिवभिश्ቖ ्ቚकरण में उ्ሴ न्यायालय के सम्ቌ यह ्ቚ् उत्प्ቐ हो्ቔा है बिक क्या ऐसी अपरिरभाबि्ቧ्ቔ शबि्ሹ का आ्ቦय(सहारा) लेना है ्ቔो उसके लिलए अत्यचिधक सावधानी और स्ቔक7 ्ቔा (cid:21)र्ቔना आवश्यक है?इस ्ቚकार ज(cid:21) बिकसी व्यभिथ्ቔ प्ቌकार ्ቛारा अधीनस्थ न्यायालय के आदेश या बिनण7य से बिकसी भी अंश को हटाने के लिलए यह कदम उठाया जा्ቔा है, ्ቔो 3 AIR 1964 SC 1 6 उसे पूरी ्ቔरह से सं्ቔु्ቖ होना (cid:27)ाबिहए बिक भिशकाय्ቔ बिकया गया अंश पूरी ्ቔरह से अ्ቚासंबिगक और अनुचि(cid:27)्ቔ है, बिक अभिभलेखों पर इसे यथाव्ቔ रखने से उस व्यबि्ሹ को गंभीर नुकसान कारिर्ቔ होगा जिजसे व्यबि्ሹ के संदभ7 में यह है और यह बिक, इसके हटाए जाने से बिनण7य या आदेश के कारणों पर कोई ्ቚभाव नहीं पड़ेगा।"
इसी ्ቚकार, बिनरंजन पटनायक (cid:21)नाम शभिशभू्ቧण कर 4 के मामले में, माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय के न्यायाधीशों ्ቛारा यह अभिभबिनधा7रिर्ቔ बिकया गया है बिक उन व्यबि्ሹयों और ्ቚाचिधकारिरयों के बिवरु्ቍ कठोर या अपमानजनक बिटप्पभिणयां नहीं की जानी (cid:27)ाबिहए, जिजनके आ(cid:27)रण न्यायालय के सम्ቌ बिव(cid:27)ार हे्ቔु आ्ቔा है ज(cid:21) ्ቔक बिक यह ्ቚकरण के बिवबिन्ቐय के लिलए वास््ቔव में आवश्यक न हो और मोहम्मद नईम (पूव(cid:139)्ሹ) के ्ቚकरण में माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय के न्याय दृ्ቖां्ቔ का अवलं(cid:21) ले्ቔे हुए बिनम्नलिललिख्ቔ म्ቔ व्य्ሹ बिकया गयाः-
24. अ्ቔः, यह स्थाबिप्ቔ बिवचिध है बिक उन व्यबि्ሹयों और ्ቚाचिधकारिरयों के बिवरु्ቍ कठोर या अपमानजनक बिटप्पणी नहीं की जानी (cid:27)ाबिहए जिजनके आ(cid:27)रण न्यायालयों के सम्ቌ बिव(cid:27)ार करने हे्ቔु आ्ቔा है ज(cid:21) ्ቔक बिक ्ቚकरण के बिवबिन्ቐय हे्ቔु उस आ(cid:27)रण पर ध्यान देना उसके अभिभ्ቐ अंग के रूप में वास््ቔव में आवश्यक न हो। हमारा मानना है बिक अपीलाथ2 के बिवरू्ቛ की गई ्ቚचि्ቔकू ल बिटप्पभिणयां न ्ቔो उचि(cid:27)्ቔ थीं और न अपेचि्ቌ्ቔ।
आर . के . लቌኚमणन (cid:21)नाम ए . के . ्ቦीबिनवासन 5 के मामले में भी ऐसा ही म्ቔ ्ቚचि्ቔपाबिद्ቔ बिकया गया है, जिजसमें माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय ्ቛारा मोहम्मद नईम (पूव(cid:139)्ሹ) में ्ቚचि्ቔकू ल बिटप्पभिणयों को हटाने के लिलए बिनधा7रिर्ቔ मानदं ों (टेस्ट) का पालन बिकया है।
ए . एम . माथुर (cid:21)नाम ्ቚमोद कु मार गु्ा 6 वाले मामले में, माननीय उ्ሴ्ቔम न्यायालय के न्यायाधीशों ने न्याचियक संयम की आवश्यक्ቔा पर (cid:21)ल बिदया है और यह अभिभबिनधा7रिर्ቔ बिकया है बिक न्याय के सुव्यवቄኌस्थ्ቔ ्ቚशासन हे्ቔु न्याचियक संयम और अनुशासन आवश्यक है ्ቔथा बिनम्नानुसार म्ቔ व्य्ሹ बिकया हैः- 4 5 6
Precedent status how later indexed judgments have treated this case
No known negative treatment found in the Courts & Cases corpus.
This is a result about the indexed corpus, not a finding that the judgment remains good law. Coverage may be incomplete.