High Court
Case Details
1 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} 2025:CGHC:3257 अ्ቚति(cid:24)वे्ቕ छ्ቈीसगढ़ उ्ሴ न्यायालय , बि*लासपुर दाቄኌ01क अपील ्ቅमाँक -764 /2006 1. रघुवर चन््ቖा बिप(cid:24)ा-पीलालाल चन््ቖा, उ्-लगभग 36 व्ቧ=, बि>वासी-अरसिसया, था>ा-जैजैपुर, सिजला-जांजगीर चाम्पा, छ्ቈीसगढ़ -----अपीलाथE बिवरू्ሾ छ्ቈीसगढ़ राज्य, ्ቛारा था>ा-जैजैपुर, सिजला-जांजगीर चाम्पा, छ्ቈीसगढ़ -----उ्ቈरवादी दाቄኌ01क अपील ्ቅमाँक -796 /2006 1. धरम लोहार बिप(cid:24)ा-दुकालू लोहार, उ्-लगभग 34 व्ቧ=, बि>वासी-*>1भरा, था>ा-जैजैपुर, सिजला-जांजगीर चाम्पा, छ्ቈीसगढ़ 2. रामबिवलास बिप(cid:24)ा-*ंशीलाल ्ቦीवास, उ्-लगभग 25 व्ቧ=, बि>वासी-*>1भरा, था>ा-जैजैपुर, सिजला-जांजगीर चाम्पा, छ्ቈीसगढ़ -----अपीलाथEगण बिवरू्ሾ छ्ቈीसगढ़ राज्य, ्ቛारा था>ा-जैजैपुर, सिजला-जांजगीर चाम्पा, छ्ቈीसगढ़ -----उ्ቈरवादी अपीलाथE रघुवर चन््ቖा की ओर से : ्ቦी पराग कोटेचा, अतिधव्ሹा । अपीलाथE धरम लोहार एवं रामबिवलास की ओर से : ्ቦी बिवजय कु मार साहू, अतिधव्ሹा । शास>/उ्ቈरवादी की ओर से : ्ቦी अरिሷवद दु*े, शासकीय अतिधव्ሹा। POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.01.20 18:25:14 +0530 2 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} मा>>ीय न्यायमूቔኌ(cid:24) ्ቦी संजय कु मार जायसवाल !! पीठ पर बि>ण=य !! 17/01/2025 1. 2. दो>ों अपीलें एक ही बि>ण=य बिद>ाँक-28/09/2006 से सं*ंतिध(cid:24) हो>े के कारण, इ>का बि>राकरण इस सामूबिहक बि>ण=य के माध्यम से बिकया जा रहा है । द01 ्ቚबि्ቅया संबिह(cid:24)ा, 1973 की धारा-374 (2) के (cid:24)ह(cid:24) ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) इस दाቄኌ01क अपील में बिवचारण न्यायालय-अपर स्ቔ न्यायाधीश, स्ሹी, सिजला-बि*लासपुर, छ्ቈीसगढ़ ्ቛारा स्ቔ ्ቚकरण ्ቅमाँक-97/2006 “छ्ቈीसगढ़ राज्य बिवरू्ሾ रघुवर चन््ቖा वगैरह” में पारिर(cid:24) बि>ण=य बिद>ाँक-28/09/2006 को चु>ौ(cid:24)ी दी गई है । सिजसके (cid:24)ह(cid:24) अपीलाथEगण को बि>म्>ा>ुसार दो्ቧसिस्ቍ कर दቄኌ01(cid:24) बिकया गया है । सिजसे आगे सं्ቌेप में “्ቚ्ाधी> बि>ण=य” से सम्*ोतिध(cid:24) बिकया जा रहा हैः- अपीलाथE का >ाम दो्ቧसिसति्ቍ द01ादेश रघुवर चन््ቖा धरम लोहार रामबिवलास 1860 धारा-489 “ख” भार(cid:24)ीय 10-10 व्ቧ= के कठोर द01 संबिह(cid:24)ा, 1860 कारावास एवं 500-500/- धारा-489 सहपबिठ(cid:24) “ख” धारा-34 भार(cid:24)ीय द01 संबिह(cid:24)ा, रूपये का अथ=द01 (cid:24)था अथ=द01 राशिश अदा > कर>े की दशा में 03-03 माह के अति(cid:24)रिर्ሹ कठोर कारावास की सजा से दቄኌ01(cid:24) बिकया गया । 3. अशिभयोज> मामला सं्ቌेप में इस ्ቚकार है बिक ्ቇाम-*>1भरा, था>ा-जैजैपुर, सिजला-जांजगीर चाम्पा बि>वासी ्ቚाथE सं(cid:24)ो्ቧ भार्ቛाज (अ०सा०-1) ्ቛारा था>े में दी गयी लिललिख(cid:24) सूच>ा ्ቚदश= पी-1 बि>म्>ा>ुसार हैः- 3 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} “(cid:24)ा. 27-10-2005 ्ቚति(cid:24) ्ቦीमा> था>ा ्ቚभारी महोदय था>ा जैजैपुर बिव्ቧय-जाली >ोट मैं सं(cid:24)ो्ቧ कु मार स(cid:24)>ामी बिप(cid:24)ा रामदास ्ቇाम *>1भरा पो.आ. सेमरिरया, था>ा जैजैपुर (cid:24)हसील चाम्पा सिजला जांजगीर चाम्पा छ्ቈीसगढ़ का मूल बि>वासी हू ँ । जो बिक मैं गरी*ी के चल(cid:24)े मैं>े दारू बि>काला था (cid:24)ो धरम >े मेरे घर आके एक *ो(cid:24)ल दारू मांगा मैं>े एक *ो(cid:24)ल दे बिदया उस>े मुझे सौ रूपया बिदया मैं>े एक *ो(cid:24)ल का 40 चालीस रूपया काट के 60 साठ रूपया वापस बिकया उसके *ाद ओ चले गये मैं>े सौ का >ोट को कमीज के पाबिकट में रख के *स्(cid:24)ी बिक ओर चला गया वहां गया (cid:24)ो सु>ा बिक *ंधीलाल के घर में >कली >ोट का *ा(cid:24) आवाज आया मैं>े कु छ टाईम वहां रह>े के *ाद खा>ा खा>े के वास्(cid:24)े अप>े घर गया वहां पर जाके अप>े पाबिकट के >ोट को देखा मुझे भी सक हुआ बिक >ोट गल(cid:24) हो सक(cid:24)ा है बिwर मैं>े *स्(cid:24)ी में जाके बिव>ोद को *(cid:24)ाया बिव>ोद *ोला बिक >ोट >कली है बिwर मैं>े (cid:24)ुरं(cid:24) धरम के घर गया धरम घर में >हीं बिमला (cid:24)ो मैं>े सरपंच के घर गया वहां बिदखा सरपंच *ोला >ोट >कली है (cid:24)ुझे कहां बिमला मैं *ोला मुझे धरम >े बिदया है । धरम को पूछ>े से *ोला मुझे ऐ >ोट रघुवर >े बिदया था दारू ला>े के लिलए बिwर सरपंच रघुवर को पूछा रघुवर *ोला ऐ मेरा >हीं सरपंच *ोला इसमें मैं कु छ >हीं कर सक(cid:24)ा (cid:24)ुम था>ा जाओ बिwर मैं घर में आके सो गया समय 8-9 करी* *ंशीलाल को रघुवर ्ቛारा बिदया गया सौ का जाली >ोट >हर लाल के पास है । सं(cid:24)ो्ቧ कु मार बिप(cid:24)ा रामदास जाति(cid:24) स(cid:24)>ामी उ् 25 व्ቧ= सा. *>1भरा था>ा जैजैपुर” 4. लिललिख(cid:24) सूच>ा ्ቚदश= पी-1 के आधार पर ्ቚथम सूच>ा प्ቔ ्ቚदश= पी-2 दज= कर ्ቚाथE सं(cid:24)ो्ቧ (अ०सा०-1) से 100/-रूपये का पहला >ोट ्ቅमांक- 2GV857888 (सिजसे "आኌटकल-ए" से सम्*ोतिध(cid:24) बिकया जा रहा है) जब्(cid:24)ी ्ቚदश= पी-3 के (cid:24)ह(cid:24) (cid:24)था >हर लाल क्ቧ= (अ०सा०-9) से 100/-रूपये का दूसरा >ोट ्ቅमांक-1SW686945 (सिजसे "आኌटकल-*ी" से सम्*ोतिध(cid:24) बिकया जा रहा है) 4 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} जब्(cid:24)ी ्ቚदश= पी-9 के (cid:24)ह(cid:24) जब्(cid:24) बिकया गया । सरपंच जा>की *ाई (अ०सा०-2) ्ቛारा (cid:24)ैयार पंच>ामा अशिभलेख में लिलया गया । साति्ቌयों के *या> लिलये गये । जब्(cid:24) कशिथ(cid:24) जाली >ोट को भार(cid:24)ीय स्टेट *ैंक, शाखा-जैजैपुर को बिदया गया । सिज>के ्ቛारा ्ቚदश= पी-6 में यह सूतिच(cid:24) बिकया गया बिक उसकी जांच स्ቌम ्ቚातिधकारी ्ቛारा ही की जा सक(cid:24)ी है । (cid:24)* वे >ोट जांच हे(cid:24)ु भार(cid:24)ीय रिरजव= *ैंक, बि>ग=म दावा अ>ुबिवभाग, >ागपुर, महारा्ቖ्र को भेजा गया, जहां से जांच रिरपोट= ्ቚदश= पी-16 ्ቚा् बिकया गया । बिववेच>ा पूण= कर अशिभयोगप्ቔ पेश बिकया गया । 5. अशिभयोज> की ओर से अप>े प्ቌ समथ=> में कु ल-11 साति्ቌयों का परी्ቌण (cid:24)था 17 दस्(cid:24)ावेज ्ቚदश= तिचन्हांबिक(cid:24) करवाये गये । धारा-313 द01 ्ቚबि्ቅया संबिह(cid:24)ा के (cid:24)ह(cid:24) *या> में अपीलाथEगण >े अप>े बिवपरी(cid:24) साति्ቌयों के कथ>ों को इन्कार कर(cid:24)े हुए स्वयं को बि>द(cid:132)्ቧ हो>ा *(cid:24)ा(cid:24)े हुए कहा है बिक उन्हें जाली >ोट के बिव्ቧय में कोई जा>कारी >हीं है और >ा ही उन्हों>े उसका कोई उपयोग बिकया है । सिज>की ओर से *चाव में कोई साቌኚय ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) >हीं बिकया गया । उभयप्ቌ काे सु>ा जाकर बिवचारण न्यायालय ्ቛारा अपीलाथEगण को इस बि>ण=य की कቄኌ01का-2 के अ>ुसार दो्ቧसिस्ቍ कर दቄኌ01(cid:24) बिकया गया है । सिजसे इस अपील में चु>ौ(cid:24)ी दी गई है । 6. अपीलाथE के बिव्ቛा> अतिधव्ሹा का (cid:24)क= है बिक अपीलाथEगण से बिकसी >ोट की जब्(cid:24)ी >हीं हुई है । मामले में ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) बिकया गया भार(cid:24)ीय रिरजव= *ैंक, शाखा->ागपुर की जांच रिरपोट= ्ቚदश= पी-16 साቌኚय में ्ቇा्ቨ >हीं है । जांच रिरपोट= ्ቚदश= पी-16 में यह स्प्ቖ रूप से उ्ቤेख है बिक उ्ሹ जांच रिरपोट= का उपयोग सिसw= बिववेच>ा में बिकया जा सक(cid:24)ा है सिजसका साति्ቌक महत्व >हीं है और सरकार ्ቛारा अतिधकृ (cid:24) ्ቚेस की रिरपोट= ही पुलिलस ्ቛारा साቌኚय में ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) की जा सक(cid:24)ी है । इस ्ቚकार, कशिथ(cid:24) जब्(cid:24) >ोट 5 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} जाली हो, ऐसा ्ቚमाशिण(cid:24) कर पा>े में अशिभयोज> असwल रहा है । अशिभयोज> की ओर से ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) साቌኚय में इस *ा*(cid:24)् भी कोई (cid:24)थ्य >हीं आये हैं बिक अपीलाथEगण को कशिथ(cid:24) >ोट के जाली हो>े की जा>कारी रही हो और यह जा>कारी रख(cid:24)े हुए उन्हों>े कशिथ(cid:24) >ोट का उपयोग बिकया हो । बिव्ቛा> अतिधव्ሹा ्ቛारा अप>े (cid:24)क= के समथ=> में न्यायदृ्ቖां(cid:24) Umashanker v. State of Chhattisgarh, (2001) 9 SCC 642 का हवाला बिदया है । ऐसी दशा में, बिवचारण न्यायालय ्ቛारा साቌኚय की उतिच(cid:24) रूप से समी्ቌा > कर(cid:24)े हुए अपीलाथEगण को दो्ቧसिस्ቍ कर दቄኌ01(cid:24) बिकया गया है । अपीलाथEगण की दो्ቧसिसति्ቍ संदेह से परे स्प्ቖ, पया=् और बिव्ቫस>ीय साቌኚय पर आधारिर(cid:24) >हीं है । “्ቚ्ाधी> बि>ण=य” ቄኌस्थर रखे जा>े योग्य >हीं है । अ(cid:24)ः अपील स्वीकार कर उन्हें दो्ቧमु्ሹ बिकया जाये । 7. उ्ቈरवादी/शास> प्ቌ की ओर से उपቄኌस्थ(cid:24) बिव्ቛा> अतिधव्ሹा >े इस अपील का बिवरोध कर(cid:24)े हुए (cid:24)क= बिकया है बिक अशिभयोज> साति्ቌयों >े पूण= रूप से अशिभयोज> मामले का समथ=> बिकया है सिज>पर अबिव्ቫास बिकये जा>े का कोई कारण >हीं है । बिवचारण न्यायालय का “्ቚ्ाधी> बि>ण=य” साቌኚय की उतिच(cid:24) समी्ቌा पर आधारिर(cid:24) है । अशिभयोज> >े अपीलाथEगण के बिवरू्ሾ अप>ा मामला संदेह से परे ्ቚमाशिण(cid:24) बिकया है । अपीलाथE प्ቌ ्ቛारा अपील में उठाये गये (cid:24)क= स्वीकार योग्य >हीं है । अ(cid:24)ः अपील खारिरज बिकया जाये । उभयप्ቌ का (cid:24)क= सु>ा गया और अशिभलेख का सूቌኚम(cid:24)ापूव=क परिरशील> बिकया गया । इस मामले में अशिभयोज> की ओर से परिरति्ቌ(cid:24) ्ቚाथE सं(cid:24)ो्ቧ (अ०सा०-1) >े अप>े न्यायालयी> *या> में लिललिख(cid:24) रिरपोट= ्ቚदश= पी-1 की पुबि्ቖ कर(cid:24)े हुए *(cid:24)ाया है बिक 8. 9. 6 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} "आኌटकल-ए" का >ोट अपीलाथE धरम लोहार >े शरा* खरीद>े के समय उसे बिदया था । उ्ሹ >ोट बिववेचक के रूप में सहायक उपबि>री्ቌक एस०पी० खाखा (अ०सा०-6) >े जब्(cid:24)ी ्ቚदश= पी-3 के (cid:24)ह(cid:24) ्ቚाथE सं(cid:24)ो्ቧ (अ०सा०-1) से जब्(cid:24) कर>ा (cid:24)था दूसरा "आኌटकल-*ी" का >ोट >हर लाल क्ቧ= (अ०सा०-9) से जब्(cid:24)ी ्ቚदश= पी-9 के (cid:24)ह(cid:24) जब्(cid:24) कर>ा *(cid:24)ाया है । बिकन्(cid:24)ु जब्(cid:24)ी गवाह सेवक लाल का परी्ቌण >हीं हुआ है और बिwरू राम (अ०सा०-10) >े इस जब्(cid:24)ी की पुबि्ቖ >हीं की है । स्वयं >हर लाल क्ቧ= (अ०सा०-9) का इस बिव्ቧय में कथ> है बिक *ंशीलाल ्ቦीवास (अ०सा०-7) अथा=(cid:24)् अपीलाथE रामबिवलास के बिप(cid:24)ा के घर के पास ज* अपीलाथE रघुवर से जाली >ोट के *ा*(cid:24)् पूछ(cid:24)ाछ की जा रही थी (cid:24)* वहां ग>पति(cid:24) >े उसे 100/-रूपये का जाली >ोट लाकर बिदया था और *(cid:24)ाया था बिक *ंशीलाल ्ቦीवास (अ०सा०-7) के आं ग> में >ोट wें का हुआ बिमला था । इस ्ቚकार, स्वयं >हर लाल क्ቧ= (अ०सा०-9) को वह >ोट >हीं बिमला था *ቄኌ(cid:156)क ग>पति(cid:24) को बिमला था और ग>पति(cid:24) का परी्ቌण करा>े में अशिभयोज> असwल रहा है । *ंशीलाल ्ቦीवास (अ०सा०-7) जो अपीलाथE रामबिवलास का बिप(cid:24)ा है, वह प्ቌ्ቖोही रहा है । इस ्ቚकार से, आኌटकल-*ी के >ोट को कहां से ्ቚा् बिकया गया, इस *ा*(cid:24)् स्प्ቖ साቌኚय >हीं आया है । 10. ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) साቌኚय से यह स्प्ቖ है बिक स्वयं अपीलाथEगण से बिकसी ्ቚकार के बिकसी >ोट की जब्(cid:24)ी >हीं हुई है । अशिभयोज> मामले के अ>ुसार ्ቚाथE सं(cid:24)ो्ቧ (अ०सा०-1) और बिwरू राम (अ०सा०-10) से शरा* खरीद>े के समय ्ቅमशः अपीलाथE धरम लोहार और अपीलाथE रामबिवलास >े उस >ोट का उपयोग बिकया था । अशिभयोज> मामले के अ>ुसार उन्हें वे >ोट अपीलाथE रघुवर चन््ቖा से ्ቚा् हुआ । उ्ሹ 02 7 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} >ोट के अलावा अन्य कोई >ोट ज् >हीं हुआ है । अपीलाथE धरम लोहार और रामबिवलास, यह जा>(cid:24)े रहे हो बिक वह >ोट जाली >ोट है, इस *ा*(cid:24)् अशिभयोज> की ओर से कोई साቌኚय ्ቚस्(cid:24)ु(cid:24) >हीं है । 11. न्यायदृ्ቖां(cid:24) Umashanker (Supra) में मा>>ीय उ्ሴ(cid:24)म न्यायालय ्ቛारा अशिभबि>धा=रिर(cid:24) बिकया गया है बिक धारा-489 “*ी” भार(cid:24)ीय द01 संबिह(cid:24)ा के अपराध हे(cid:24)ु यह ्ቚमाशिण(cid:24) कर>ा आवश्यक है बिक अशिभयु्ሹ को यह जा>कारी रही हो बिक >ोट जाली है और यह जा>(cid:24)े हुए भी असल के रूप में उसका उपयोग बिकया हो, इस बिव्ቧय में उ्ሹ न्यायदृ्ቖां(cid:24) की कቄኌ01का-6,7,8 उ्ቤेख>ीय है जो बि>म्>ा>ुसार हैः- “6.
Legal Reasoning
The conviction of the appellant by the trial court as confirmed by the High Court is under Section 489-B and Section 489-C of I.P.C., which read as under : "489-B.Using as genuine, forged or counterfeit currency, notes or banknotes. - Whoever sells to, or buys or receives from, any other person, or otherwise traffics in or uses as genuine, any forged or counterfeit currency-note or banknote, knowing or having reason to believe the same to be forged or counterfeit, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine. 489-C. Possession of forged or counterfeit currency notes or banknotes. - Whoever has in his possession any forged or counterfeit currency-note or banknote, knowing or having reason to believe the same to be forged or counterfeit and intending to use the same as genuine or that it may be used as genuine, shall be punished with imprisonment of either description 8 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both." 7. Section 489-A to 489-E deal with various economic offences in respect of forged or counterfeit currency notes or banknotes. The object of Legislature in enacting these provisions is not only to protect the economy of the country but also to provide adequate protection to currency notes and banknotes. The currency notes are, in spite of growing accustomedness to the credit cards system, still the backbone of the commercial transactions by multitudes in our country. But these provisions are not meant to punish unwary possessors or users. 8. A perusal of the provisions, extracted above, shows that mens rea of offences under Section 489-B and 489-C is, "knowing or having reason to believe the currency notes or bank notes to be forged or counterfeit". Without the aforementioned mens rea selling, buying or receiving from another person or otherwise trafficking in or using as genuine forged or counterfeit currency notes or banknotes, is not enough to constitute offence under Section 489-B of I.P.C. So also possessing or even intending to use any forged or counterfeit currency notes or banknotes is not sufficient to make out a case under Section 489-C in the absence of the mens rea, noted above. No material is brought on record by the prosecution to show that the appellant had the requisite mens rea. The High Court, however, completely missed this aspect. The learned trial Judge on the basis of the evidence of P.W.2, P.W.4 and P.W. 7 that they were able to make out that currency note alleged to have been given to P.W. 4, was fake "presumed" such a mens rea. On the date of the incident the appellant was said to be 18 year old student. On the facts of this case the Presumption drawn by the trial court is not warranted under Section -4 of the Evidence Act. Further it is also not shown that any specific question with regard to the currency notes being fake or 9 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} counterfeit was put to the appellant in his examination under Section-313 of Criminal Procedure Code. On these facts, we have no option but to hold that the charges framed under Sections 489-B and 489-C are not proved. We, therefore, set aside the conviction and sentence passed on the appellant under Section 489-B and 489-C of I.P.C. and acquit him of the said charged [see : M. Mammutti v. State of Karnataka, AIR (1979) SC 1705].” 12. इस ्ቚकार से, उ्ሹ न्यायदृ्ቖां(cid:24) को दृबि्ቖग(cid:24) रख(cid:24)े हुए इस *ा*(cid:24)् कोई साቌኚय >हीं है, बिक अपीलाथE धरम लोहार और रामबिवलास को यह जा>कारी रही हो, बिक उ>के ्ቛारा अशिभयोज> मामले में सिजस >ोट का परिरचाल> कर शरा* खरीद>े की *ा(cid:24) कही गयी है, वह >ोट जाली थी । 13. दूसरी ्ቚमुख *ा(cid:24) यह भी है बिक कशिथ(cid:24) जब्(cid:24) >ोट की जांच रिरपोट= ्ቚदश= पी-16 के अ>ुसार भार(cid:24)ीय रिरजव= *ैंक, शाखा->ागपुर की उ्ሹ रिरपोट= सिसw= बिववेच>ा की दृबि्ቖ से है, साቌኚय के लिलये >हीं है । उस जांच रिरपोट= को ्ቚमाशिण(cid:24) करा>े वास्(cid:24)े बिकसी सा्ቌी परी्ቌण >हीं हुआ है । उ्ሹ जांच रिरपोट= धारा-293 द01 ्ቚबि्ቅया संबिह(cid:24)ा के (cid:24)ह(cid:24) साቌኚय में ्ቇा्ቨ हो, ऐसा भी >हीं है । चू ंबिक, स्ቌम ्ቚातिधकारी, भार(cid:24) सरकार की ्ቚेस >ोट की कोई जांच रिरपोट= उ्ሹ आኌटकल के जाली हो>े *ा*(cid:24)् >हीं है । इस ्ቚकार से, संदेह से परे यह भी ्ቚमाशिण(cid:24) कर पा>े में अशिभयोज> असwल रहा है बिक कशिथ(cid:24) जब्(cid:24) >ोट जाली हो । 14. उपरो्ሹ साቌኚय बिववेच>ा के आधार पर यह न्यायालय पा(cid:24)ी है बिक अपीलाथEगण की दो्ቧसिसति्ቍ सिज> साቌኚय पर आधारिर(cid:24) की गयी है वे वैध, पया=्, और बिव्ቫस>ीय >हीं है । इसलिलए अपीलाथEगण के बिवरू्ሾ अशिभयोज> अप>ा मामला संदेह से परे 10 / 10 {Cr. A. No.-764 of 2006 & 796 of 2006} ्ቚमाशिण(cid:24) कर>े में असwल रहा है । ऐसी दशा में, “्ቚ्ाधी> बि>ण=य” ቄኌस्थर रखे जा>े योग्य >हीं पाया जा(cid:24)ा । 15. अ(cid:24)ः अपील स्वीकार की जा(cid:24)ी है । “्ቚ्ाधी> बि>ण=य” अपास्(cid:24) बिकया जा(cid:24)ा है (cid:24)था अपीलाथEगण को संदेह का लाभ दे(cid:24)े हुए आरोबिप(cid:24) अपराध से दो्ቧमु्ሹ बिकया जा(cid:24)ा है । 16. अपीलाथEगण को जमा>(cid:24) पर *(cid:24)ाया गया है । द01 ्ቚबि्ቅया संबिह(cid:24)ा, 1973 की धारा-437 ’क’ के (cid:24)ह(cid:24) उ>का जमा>(cid:24)-मुचलका और 06 माह के लिलए ्ቚभावशील रहेगा (cid:24)त्प्ቐा(cid:24)् अन्य न्यायालय में उपቄኌस्थ(cid:24) हो>े की आवश्यक(cid:24)ा >ा रह>े पर मु्ሹ समझा जायेगा । 17. बि>ण=य की ्ቚति(cid:24) के साथ बिवचारण न्यायालय को मूल अशिभलेख आवश्यक काय=वाही हे(cid:24)ु सूच>ाथ= एवं पाल>ाथ= शी्ቈ(cid:24)ापूव=क ्ቚेबि्ቧ(cid:24) हो । सही/- (संजय कु मार जायसवाल) न्यायाधीश पोम>